पिछड़ों के कल्याण से जुड़ा है जातिगत जनगणना

जातिगत आधारित जनगणना को लेकर बैठक में चर्चा करते लोग।


जाति जनगणना की मांग को लेकर हुई बैठक
शहाबगंज। जाति आधारित जनगणना की मांग को लेकर कस्बा स्थित बुद्धा कॉम्प्लेक्स में अधिवक्ता वशिष्ट नारायण सिंह की अध्यक्षता में बैठक की। इस दौरान क्षेत्र के बुद्धिजीवी, जागरूक, सामाजिक न्याय के पक्षकार लोग उपस्थिति हुए। बैठक में बोलते हुए जाति जनगणना संयुक मोर्चा के नेता मनीष शर्मा ने कहा कि जाति की जनगणना बहुत बड़ा सवाल है। आजादी के बाद तमाम विचार धारा की सरकार आयी, लेकिन किसी ने इस पर गम्भीरता से नहीं सोचा। कहा कि यह केवल ओबीसी जनगणना का सवाल नहीं है यह 70 प्रतिशत आबादी को न्याय से वंचित करने का मामला है।
उन्होंने कहा कि बिना जाति जनगणना के ओबीसी बिल बहुत खतरनाक है। जाति आधारित जनगणना सभी तालों की चाभी है।पूर्वांचल बहुजन मोर्चा के संयोजक अनूप श्रमिक ने कहा कि जब जनगणना होगा तभी ओबीसी में मौजूद लोगों के वजूद का रहस्य खुलेगा। ओबीसी में पुरुषों और महिलाओं की साक्षरता दर कितनी है। लिंगानुपात कितना है। शिक्षा कितने लोगों तक पहुंच पायी है।ओबीसी में कौन स्कूल और स्नातक की पढ़ाई पूरा कर पा रहा है यह जाति जनगणना से स्पष्ट हो जाएगा।बैठक की अध्यक्षता कर रहे वशिष्ठ नारायण सिंह ने कहा कि जब तक ओबीसी की जनगणना नहीं होती है तब तक ओबीसी के हित के लिए किसी भी तरह की योजना सरकार नहीं बना पाएगी और न ही इन पिछड़ी जातियों का कभी भला हो पाएगा। इस दौरान निर्णय लिया गया कि जिले भर में बैठक कर जाति आधारित जनगणना कराने के लिए सरकार पर दबाव बनाया जाएगा। बैठक में बदरूद्वजा प्रधान, अजय राय, इंद्रजीत सिंह, महमूद आलम, जफीर अहमद, सतीश चैहान, विकास यादव, देवेंद्र मौर्य, दुर्गा विश्वकर्मा, विनोद सिंह, मिथिलेश, रमेश मौर्य, नीलम पाल, अंजुमन, लालबिहारी शास्त्री आदि उपस्थित थे। संचालन रतीश कुमार ने किया।