अबकी बार क्रय केंद्रों पर बटाईदार नहीं बेच पाएंगे उपज

किसान पंजीयन—-

आधार से लिंक किसानों के खाते में जाएगी भुगतान राशि
चंदौली। यदि आप किसान हैं और अपने धान की उपज सरकारी क्रय केंद्र पर बेचने की इच्छा रखते हैं तो यह खबर अपने के लिए अत्यं महत्वपूर्ण व काम की है। जी हां! सरकार ने धान खरी हेतु किसान पंजीयन के नियम-नियमावली में बड़ा बदलाव किया है। अबकी बार बटाईदार किसान अपना पंजीयन कराकर धान क्रय केंद्र पर नहीं बेच पाएंगे। साथ ही उन किसानों का भी पंजीयन पूर्ण नहीं होगा, जिनके आधार कार्ड से मोबाइल नंबर अब तक नहीं जुड़ पाया है। इसके अतिरिक्त पंजीयन फार्म में बैंक खाते का विवरण देने की आवश्यकता नहीं है। सरकार बैंक खाते के विवरण में त्रुटियों को देखते हुए इसमें बड़ा बदलावा लाया है। अब आधार से जुड़े खाते में सरकार सीधे उपज खरीद का भुगतान करेगी।


…अब क्या करें किसान
जनपद के जिन किसानों के आधार कार्ड से मोबाइल नंबर नहीं जुड़ा है या फिर जो नंबर आधार कार्ड से सम्बद्ध था वह किन्हीं कारणों से उनके अब पास नहीं है या खो गया है तो वे जल्द से जल्द अपने नजदीकी आधार सेंटर पर जाकर अपना मोबाइल नंबर आधार से जुड़वा लें। इसके अलावा आधार कार्ड को अपने बैंक शाखा में जाकर खाता संख्या से जुड़वा भी लें। क्योंकि यदि आपका बैंक शाखा आधार से नहीं जुड़ा है तो धान खरीद के बदले किया जाना वाला भुगतान लंबित हो सकता है। क्योंकि अब आनलाइन पंजीयन में सरकार ने बैंक खाता अंकित करने के कालम को हटा दिया है। सरकारी तर्क है कि कई किसानों ने पंजीयन कराते समय त्रुटिवश गलत खाता अंकित होने के कई मामले सामने आए, जिससे किसानों को उनकी उपज के सापेक्ष भुगतान करने में विलंब के साथ कई कठिनाइयां हुई। इस समस्या को सरकार ने संज्ञान में लिया और इसका हल निकालते हुए इसे आधार से जुड़े खाते में भुगतान का निर्णय लिया। एक सितंबर से शुरू हुए किसान पंजीयन में ये सभी नए बदलाव देखने को मिल रही है। सरकार की ओर से किए गए गुणात्मक सुधार से किसानों की एकाएक फजीहत बढ़ेगी। अब उन्हें अपने आधार कार्ड को दुरूस्त करने के साथ-साथ बैंक खाते को आधार से लिंक कराना होगा। फिलहाल अभी इस नए बदलाव से किसान पूरी तरह से अनजान है, लेकिन इसकी जानकारी होते ही आधार सेवा केंद्रों व बैंकों में भीड़ उमड़ने के पूरे आसार हैं।


इनसेट—-
सरकार ने दलालों पर कसा नकेल
चंदौली। किसान पंजीयन में अब बटाईदार किसान के रूप में पंजीयन की व्यवस्था को पूरी तरह से समाप्त कर दिया गया है। इसके पीछे विभाग का तर्क है कि अक्सर धान खरीद में दलालों की सक्रियता की शिकायतें विभाग को मिलती रही हैं। सरकार की ओर से दी गयी इस सुविधा का दलालों ने जमकर लाभ उठाया और क्रय केंद्रों पर धान की खरीद करके मोटी रकम अर्जित की। कुछ मामले ऐसे भी सामने आए जिसमें भूमिहीन दलालों ने बटाईदार के रूप में अपना पंजीयन कराकर किसानों की उपज बेचने का काम बड़े पैमाने पर किया। लगातार मिल रही शिकायतों व दलालों की सक्रियता को समाप्त करने के लिए अबकी बार विपणन विभाग की ओर से अपनी वेबसाइट पर उपलब्ध आनलाइन पंजीयन फार्म में परिवर्तन करते हुए इन सुधारों को लागू किया है, जो किसानों की सहूलियत के लिए है। लेकिन इसमें जनपद के अधिकांश किसानों को शुरुआती दौर में बड़ी फजीहत का सामना करना पड़ेगा।