कैंसर पीड़ित पिता के ईलाज का भार उठा रहे बेटियां


सकलडीहा।  सरकार व सरकारी दावे खोखले व बेबस हैं। यह आरोप नहीं है बल्कि इन योजनाओं की जमीनी हकीकत है। गरीबों के सहयोग‚ कल्याण के लिए बनी सरकार की योजनाओं पर भले ही करोड़ों–अरबों रुपये खर्च हो जाते हैं‚ लेकिन जब बात गरीब को उनका लाभ मिलने की हो तो समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति के हाथ खाली के खाली रह जाते हैं। जी हांǃ अम्बेडकर नगर गांव में एक गरीब परिवार के समक्ष कुछ ऐसी ही परिस्थिति है। परिवार के पास प्रधानमंत्री आयुष्मान कार्ड है। बावजूद इसके परिवार की दो बेटियां अपने कैंसर पीड़ित परिवार का दवा–ईलाज नहीं करा पा रही है। इस परिवार पर आर्थिक तंगी इस कदर हावी है कि परिवार को अपना पेट पालना भी मुश्किल हो गया है ऐसे में अब पूरा परिवार ईश्वर भरोसे जी रहा है।

बताते हैं कि सकलडीहा कस्बा के अम्बेडकर नगर निवासी 62 वर्षीय श्याम बिहारी को एक पुत्र विकास और दो पुत्री पूनम और दीपा है। श्याम बिहारी मजदूरी करके परिवार का भरण पोषण करते  थे। उन्हें कुछ साल से कैंसर रोग हो गया। इससे पीड़ित होने के कारण परिवार के सामने भरण पोषण को लेकर दिक्कत होने लगी है। ऐसे में बुर्जुग पिता का इलाज करा पाना बेटे और बेटियों के सामने समस्या खड़ी हो गयी है।  फिलहाल जैसे–तैसे पिता के ईलाज की जिम्मा बेबस व लाचार बेटियां अपने कंधे पर संभाले हुए हैं‚ लेकिन अब तक उनकी मदद के लिए न तो सरकारी महकमा आगे आया और ना ही स्थानीय नेता व जनप्रतिनिधियों ने बेबस परिवार के मदद के लिए आगे आए। हालात इतने खराब है कि परिवार के पास वाराणसी स्थित अस्पताल या अन्य दूसरे स्थान पर मौजूद अस्पताल तक जाने का भाड़ा–किराया तक नहीं है। ऐसे में स्थानीय विधायक‚ सांसद व सुविधा सम्पन्न लोग परिवार की मदद के लिए आगे आ जाएं तो गरीब परिवार की बेटियों के आंखों में अपने पिता का समुचित ईलाज न करा पाने की बेबसी दूर होगी। साथ ही परिवार को पेट भरने के लिए भी जद्दोजहद नहीं करनी होगी। एक कच्चे मकान में रह रहा गरीब परिवार की बेटियों ने प्रदेश सरकार और स्थानीय जनप्रतिनिधि सांसद, मंत्री और विधायक से पिता की इलाज के लिये गुहार लगाया है।