लकी पासवान की मौत से बुझ गया परिवार का चिराग

कर्मनाशा में डूबे दोनों बालकों का हुआ पोस्टमार्टम
चंदौली। हलुआ के पास कर्मनाशा नदी में दो बालकों के डूबने से हुई मौत के बाद गुरुवार को जलालपुर गांव में मातमा छाया रहा। सुल्तान के परिजन जहां मौत से गमजदा थे, वहीं लकी पासवान की मौत से परिवार का चिराग ही बुझ गया। ग्रामीण बताते हैं कि लकी अपने माता-पिता की इकलौती संतान था, जिसकी मौत से उनका सहारा छिन गया। ऐसे में उसके माता-पिता बेसुध थे। उधर, पोस्टमार्टम हाउस पर पासवान समाज के लोग पहुंचे और घटना को पीड़ादायक बताते हुए दुख व्यक्त किया।
ग्रामीणों के मुताबिक 11 वर्षीय लकी अपने साथी सुल्तान के साथ स्नान करते के लिए गांव से निकला और हलुआ गांव के पास कर्मनाशा नदी तट पर पहुंचा। वहां अन्य साथियों के साथ दोनों नदी में स्नान कर रहे थे, तभी वे गहरे पानी में चले गए और डूबने लगे। बच्चों को डूबता देखकर आसपास मौजूद ग्रामीण दौड़ पड़े, लेकिन तब तक वह नदी तट के करीब आते दोनों पानी की धारा में समा चुके थे। इसके बाद ग्रामीण पानी में उतरकर बच्चों की खोजबीन में जुट गए। देखते ही देखते ग्रामीणों की भारी भीड़ जमा हुई। कुछ देर पर लकी को पानी से बाहर निकाला गया और उपचार के लि नजदीकी अस्पताल ले गए, लेकिन चिकित्सक ने उसे मृत घोषित कर दिया। कुछ देर बाद सुल्तान के भी बाहर निकाला गया, लेकिन उसकी भी सांसें थम चुकी थी। गुरुवार को दोनों बालकों के शवों का पोस्टमार्टम हुआ, जहां सयुस महासचिव दिलीप पासवान, बसपा नेता अशोक त्रिपाठी छोटू, अरविंद पासवान, मुलायम यादव आदि मौजू रहे। लकी अपने परिवार का इकलौता सदस्य था, जिसकी मौत से पिता श्यामू व माता गुड़िया के ऊपर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। वे अपने बुढ़ापे का एक माह सहारा छिन जाने से रो-रोकर बेहोश हो जा रहे थे। इस दृश्य को देखकर हर कोई दुखी था।