राइस मिलरों की खुली चेतावनी‚ 2021-22 में नहीं चलेंगी मिलें

समस्याएं हल कराने के लिए भारी उद्‍योग मंत्री से मिले राइस मिलर्स
चंदौली। पूर्वांचल राइस मिलर्स एसोसिएशन के बैनर तले राइस मिल संचालकों का एक प्रतिनिधिमंडल केंद्रीय भारी उद्योग मंत्री डा.महेंद्रनाथ पांडेय से मिला। इस दौरान उन्होंने राइस मिल उद्योग को चालने में आ रही कठिनाइयों को उनके समक्ष रखा और उसके निराकरण की पहल किए जाने की गुजाहिश की।
इस दौरान चंदौली के राइस मिलर्स ने बताया कि कई वर्षों से धान मिलिंग के कार्य में धान से चावल की रिकवरी 67 प्रतिशत की जगह 58 से 60 प्रतिशत निकलता है। चावल में टूटन 25 प्रतिशत की जगह 30 प्रतिशत से ज्यादा निकलता है। इसके अलावा मिलिंग चार्ज विगत 30 वर्षों से मात्र 10 रुपये प्रति कुंतल सरकार की ओर से प्रदान किया जाता है। जबकि वर्तमान में मिलिंग खर्च 250 रुपये प्रति कुंतल पड़ता है। क्योंकि विगत कई वर्षों से डीजल का मूल्य, बिजली बिल, मशीनरी पार्टस व मजदूरी में कई गुना वृद्धि हो गयी है। सीएमआर परिवहन में ठेकेदार द्वारा समय से गाड़ी उपलब्ध नहीं कराने से सीएमआर का डिपो में संप्रदान नहीं हो पाता है। इन परिस्थितियों में मिलर्स की ओर से स्वयं ढुलाई का कार्य किया जाता है, जिससे मिलर्स को आर्थिक क्षति हो रही है। वर्तमान में स्थिति इतनी खराब है कि मिल चलाना मुश्किल हो गया। पीसीएफ संस्था द्वारा मिलर्स को धान सूखन के मद में मिलने वाले देयों का भुगतान वर्ष 2013-14 से अब तक नहीं दिया गया है और लाखों रुपये मिलर्स का रोककर रखा है। कहा कि इन समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो 2021-22 में राइस मिल चलाने में असमर्थ है। इस अवसर पर बहादुर गुप्ता, राकेश कुमार, संजय गुप्ता, अनूप कुमार सिंह, अशोक कुमार सिंह, संजीव कुमार सिंह, नन्दलाल, महेंद्र जायसवाल, सुजीत सिंह, रवि उपाध्याय आदि उपस्थित रहे।