जश्न ए सावन,मुशायरे में शायरों ने दिया एकता-भाईचारे का संदेश


चंदौली। साहित्यिक व अदबी तंज़ीम अहल-ए-अदब मुग़लसराय के तत्वावधान में इस्लामपुर में जश्न ए सावन मुशायरे का आयोजन किया गया। इस दौरान कवियों व शायरों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से एकता भाईचारे का सन्देश दिया। मुशायरे की सदारत नए ग़ज़ल के प्रतिनिधि के शायर ज़िआ अहसानी साहब ने की और मंच के संचालन की ज़िम्मेदारी ज़मज़म रामनगरी निभाई।
इस अवसर पर संस्था ने कोविड-19 महामारी में जिन डाक्टरों और समजसेवियो ने अपनी जान की परवाह किये बगैर मानवता की रक्षा एवं सुरक्षा की उन्हें कोरोना योद्धा के सम्मान से सम्मानित किया गया। जिनमंे डा. ओज़ैर अहमद, डा. नसीम अहमद, डा. कुरील, डा. अनीस खान, डा. तनवीर अहमद, आबिद अली, सौरभ कुमार तबरेज़ अहमद, दिलनवाज़ साहब सम्मानित किया गया। बलवंत सिंह को चंदौली साहित्य अवार्ड से अलंकृत किया गया। मुशायरे में लखनऊ से आए ज़ुबैर अंसारी ने मेरे खुदा मेरे हाथों में वो हुनर दे दे…, हिमांचल प्रदेश से आए अभिषेक तिवारी ने इश्क़ मोहब्बत प्यार इबादत…., हर्षित मिश्रा ने अपनी आँखे देकर एक नमाज़ी को…., जमजम रामनगरी ने वो बेवफा है मगर उससे दिल लगाना है…,  दिल्ली से आए सावन शुक्ल ने ये नाम मौसमों की तरह खुशगवार है…,  अबू शहमा मुग़लसरावी ने जहां न क़द्र हो उर्दू ज़बान की शहमा…, जिया अहसानी ने रंगो आहंगो तर्ज़ ए अदा देख कर…., लखनऊ से आए निगार अंजुम ने परिंदे पुराना शजर ढूंढ़ते है… रचनाओं की प्रस्तुति कर खूब वाहवाही लूटी। इसके अलावा रामजी नैन, सरफ़राज़ नवाज़, दानिश इक़बाल, इब्राहिम आबिश, नसीर चंदौलवी, ज़ाहिद अल्फ़ाज़, ओवैस चंदौलव ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत की। अंत में अबु शहमा मुग़लसरावी ने तमाम शायरों व आगंतुकों का शुक्रिया अदा किया।