…ये देखिए! एक कबाड़ी कैसे दे रहा काशी को स्वच्छ व सुंदर बनाने का संदेश

चंदौली। काशी स्वच्छ रहे, सुंदर दिखे यह सबकी लालसा है। इसी सोच को साकार करने के लिए सरकार ने स्वच्छ काशी, सुन्दर काशी का स्लोगन जारी किया। सरकार की सोच थी कि लोग इस स्लोगन को आत्मसात करें और को स्वच्छ व सुंदर बनाने में अपना योगदान दें। इस सोच को एक बिहारी ने आत्मसात किया और दूसरों में भी इसकी प्रेरणा जागृण करने की अद्भुत पहल की। वह भले ही बिहार प्रांत के कैमूर का निवासी है, लेकिन काशी को लेकर उसके लगाव को उसके वाहन पर लिखीं चंद लाइनों से समझा जा सकता है।
बात हो रही है भुट्टन कबाड़ी की। जैसा कि चंदौली के इलिया मोड़ स्थित मां शीतला मंदिर के पास खड़े एक नीले रंग के वाहन पर लिखा था। महोदय ने अपनी गाड़ी के दोनों साइड पर कुछ जुमले लिखवा रखे हैं। जिसमें स्वच्छ काशी, सुंदर काशी के स्लोगन को प्रमुखता से दिखाया गया है। उन्होंने अपने इस अभिनव प्रयोग से यह संदेश देने का काम किया कि स्वच्छता व सुंदरता की बात कहीं से किसी भी माध्यम से की जा सकती है। एक सभ्य समाज की सुंदरता का आधार स्वच्छता पर टिकी है। अब वह चरित्र, सद्भाव व संसार की सुंदरता की बात हो या भौतिक रूप से गंदगी व कूड़े के समुचित निस्तारण व अच्छी आदतों से जुड़ी स्वच्छता है। स्वच्छता का सभी प्रारूप समाज व मानव के लिए लाभकारी, सुखदायी व विकृतियों से बचाने वाला है। लिहाजा स्वच्छता को हर इंसान को अपनाना चाहिए। चूंकि काशी अतिप्राचीन धार्मिक नगरी है, जिससे देश के करोड़ों आस्थावानों की आस्था जुड़ी है। यही वजह है कि भुट्टन कबाड़ी ने अपने सामान ढोने वाले वाहन को स्वच्छ काशी, सुंदर काशी का संदेश समाज तक पहुंचाने का साधन बनाया। इसके अलावा उन्होंने अपने जन्म भूमि यानि कैमूर की सुंदरता व उसकी स्वच्छता के स्लोगन पर लिखें है, जिससे यह पता चलता है कि अमुक भुट्टन कबाड़ी भले ही कबाड़ का व्यापार करते हों, लेकिन उन्हें स्वच्छता कितना पसंद है? यह उन लोगों के लिए प्रेरणादायी संदेश है जो समाज में किसी न किसी तरह से समाज को स्वच्छ बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं। इतना ही नहीं उन्होंने अपनी धार्मिक आस्था के साथ-साथ शहीद भगत सिंह के चित्र को जगह दी है।

चंदौली इलिया मोड़ के पास खड़े वाहन पर लिखे स्लोगन।