अमिलाई गांव में छाया मातम, मजदूरों के शव को बलुआ घाट पर किया गया अंतिम संस्कार

चहनियां। बलुआ थाना क्षेत्र के प्रभुपुर गांव में घटना के बाद दूसरे दिन गांव में मातम छाया हुआ है। घटना को लेकर मृतकों के परिजनो व बच्चों का रो रो बुरा हाल है। परिजनों को ढांढस बंधाने के लिए उनके घर पर ग्रामीणों की भीड़ लगी हुई है। तीनो मजदूरों के शव का अंतिम संस्कार बलुआ घाट पर किया गया। जहां घाट पर हजारो की संख्या में ग्रामीण व आसपास के लोग अंतिम संस्कार में मौजूद रहे। ग्रामीणों ने मृतक के परिजनों को जिला प्रशासन से नौकरी दिलाने की मांग की है।

विधित हो की प्रभुपुर गांव निवासी संदीप यादव नये घर के निर्माण के लिए नींव खुदवा करा रहे थे। जिसके लिए एक सप्ताह पूर्व से नींव खुदाई कार्य चल रहा था। पूरब दिशा की नींव पूरी तरह खोद कर मजदूर शनिवार को उत्तर दिशा की नींव खोद रहे थे। नींव में कुछ ईंट होने पर संदीप यादव ने मजदूरों से नींव को और गहरी करके सारी ईंट बाहर निकालने के लिए कहा। जिसपर मजदूर दोपहर बाद करीब दो बजे नींव को गहरा करके ईंट निकालने लगे कि बगल में चन्द्रभान दुबे के मकान से लगायत करीब पांच वर्ष पूर्व निर्मित 70 फीट लम्बी 10 फीट ऊंची चहारदिवारी अचानक दक्षिण दिशा में पलट गयी। जिससे ईंट निकाल रहे तीन मजदूर राजेश कुमार 28 वर्ष सन्दीप राम 28 वर्ष चन्द्रभूषण राम 32 वर्ष चहारदिवारी की ईंट से पूरी तरह दब गये। दीवार गिरने की भयंकर आवाज से किसी अनहोनी की आशंका से दौड़कर मौके पर पहुंचे ग्रामीण स्थिति देखकर सन्न रह गये। उन्हांेने तत्काल पुलिस को सूचना देते हुए दबे मजदूरों को निकालने का प्रयास करने लगे। इतने में पुलिस फोर्स के साथ पहुंचे मोहरगंज चौकी प्रभारी शिवमणि त्रिपाठी ने ग्रामीणों के साथ मिलकर मजदूरों को बाहर निकाला लेकिन घटना में तीनो मजदूर दम तोड़ चुके थे। घटना की सूचना पाकर मृत मजदूरों के गांव अमिलाई से पहुंचे परिजन और ग्रामीणों का करूण क्रंदन लोगों को बेहाल कर रहा था। मामले की गंभीरता देखकर नींव खुदवा रहा संदीप यादव सहित उसके सभी परिवार जन घर छोड़कर फरार हो गये थे । घटना की जानकारी होने पर जिलाधिकारी ईशा दुहन व पुलिस अधीक्षक अंकुर अग्रवाल सहित अन्य अधिकारी मौके पर पहुंच गये। ग्रामीणों ने डीएम ईशा दुहन को घटना से अवगत कराया। डीएम के निर्देश पर खूदी नींव के पूरब तरफ स्थित भोला तिवारी के मकान में रह रहे लोगों को तत्काल बाहर निकाला गया और उन्हें अन्य जगह रहने के सुझाव दिया गया। क्योंकि खुदी नींव के कारण पुरा मकान खतरे की जद में आ चुका था। घटना के दूसरे दिन अमिलाई गांव में मातम छाया हुआ है । शव का पोस्टमार्टम होने के बाद बलुआ घाट पर तीनो मजदूरों का अंतिम संस्कार हुआ । ग्रामीणों ने मृतक के परिजनों को नौकरी दिलाने की मांग की ।