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Sunday, January 25, 2026

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कुसंगत से बिखर जाता है मानव जीवनः शशिकांत

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Young Writer, कंदवा। क्षेत्र के कम्हरियां में चल रहे श्रीराम कथा के आठवें दिन कथावाचक शशिकान्त महाराज ने भक्तों को कथा सुनाई। कहा कि जब देवताओं ने मां सरस्वती को भेजा तो मां सरस्वती ने पूरे अवध में खोज लिया, पर ऐसा कोई नहीं मिला जिसकी बुद्धि मां सरस्वती घुमा सके। क्योंकि जो अवध की धरा पर जन्मा हो और जिसने जन्म से ही सरयू का जल पिया हो उसकी बुद्धि घुमाना तो सरस्वती मां को भी कठिन लगा।

उन्होंने कहा कि क्षण मात्र का किया गया कुसंग जीवन भर के सत्संग को समाप्त कर सकता है। हम जीवन में सत्संग न करे कोई बात नही पर ये ध्यान दे की जीवन में कुसंग भी न हो क्योंकि सत्संग हमारे जीवन को बनाता है और कुसंग हमारे जीवन को बिगाड़ता है। पात्र से भरे दूध में अगर शक्कर डाला जाय तो उसकी मिठास और बढ़ेगी पर उसी दूध में अगर दो बुंद नीबू का रस मिला दिया जाय तो दूध फट जाएगा। ठीक इसी तरह हमारा जीवन दूध की तरह है। सत्संग- शक्कर है और कुसंग नीबू की रस की तरह है। जीवन रूपी दूध में अगर सत्संग रूपी शक्कर डाला जाय तो जीवन और मधुर हो जाएगा पर अगर उसमे कुसंग रूपी नीबू का एक बुंद पड़ जाए तो बनी बनाई जिंदगी बिखर जाती है। जो भटके को मार्ग दिखा दे वही सत्संग हैं। जो गिरे को उठा दे वो सत्संग है। संचालन आचार्य राममिलन पाठक ने किया। इस दौरान पंडाल में भारी संख्या में भक्तों ने कथा का आनंद लिया।

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