सुप्रीम कोर्ट का आदेश, अब अनुदेशकों को मिलेगा 17 हजार मानदेय
Young Writer, चंदौली। उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत हजारों अनुदेशकों के लिए बुधवार का दिन ऐतिहासिक रहा। सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए न केवल अनुदेशकों के मानदेय को बढ़ाकर 17,000 करने का आदेश दिया है, बल्कि उन्हें डीम्ड परमानेंट (नियमित) कर्मचारी के रूप में भी मान्यता दी है। इस फैसले से पूरे प्रदेश के अनुदेशकों में खुशी की लहर दौड़ गई है।
वाराणसी मंडल अध्यक्ष विकास यादव ने कहा कि अब अनुदेशकों की नौकरी संविदा की अवधि खत्म होने के आधार पर समाप्त नहीं की जा सकेगी। सुप्रीम कोर्ट की डबल बेंच ने स्पष्ट किया कि चूंकि अनुदेशक पिछले 10 वर्षों से लगातार काम कर रहे हैं और उनके अनुबंध की शर्तों के अनुसार वे कहीं और काम नहीं कर सकते, इसलिए ये पद ऑटोमैटिक तरीके से सृजित माने जाएंगे। कोर्ट ने इन्हें मात्र संविदाकर्मी मानने से इनकार करते हुए नियमित शिक्षक के रूप में स्वीकार किया है। कोर्ट ने अनुदेशकों के आर्थिक हितों की रक्षा करते हुए समय-सारणी निर्धारित की है, जिसमे नया मानदेय 17,000 प्रतिमाह, जो 2017-18 से प्रभावी माना जाएगा। 1 अप्रैल, 2026 से संशोधित मानदेय मिलना शुरू होगा, 2017 से अब तक का पूरा बकाया 6 महीने के भीतर अनिवार्य रूप से भुगतान करना होगा। जिलाध्यक्ष अभिनव सिंह ने इस जीत पर साथियों का मुंह मीठा कराया और इसे विधिक सलाहकार बृजेश त्रिपाठी व वरिष्ठ अधिवक्ताओं की मेहनत का परिणाम बताया।
| विवरण | महत्वपूर्ण जानकारी |
| नया मानदेय | 17,000 रुपये प्रति माह |
| प्रभावी तिथि | वर्ष 2017-18 से (एरियर के लिए) |
| नया मानदेय लागू होने की तिथि | 1 अप्रैल, 2026 से मिलना शुरू होगा |
| बकाया (Arrears) भुगतान | 2017 से अब तक का बकाया 6 महीने के भीतर देना होगा |
| नौकरी की स्थिति | “डीम्ड परमानेंट” (नियमित) कर्मचारी का दर्जा |

