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Monday, January 12, 2026

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एक युग का अंतः पंच तत्व में विलीन हुए दलित राजनीति के नायक मराछू पासवान

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1995 में चंदौली ब्लॉक से चुने गए थे कनिष्ठ प्रमुख चंदौली

Young Writer, चंदौली। समाजवादी विचारधारा के ध्वजवाहक व दलित राजनीति के सशक्त हस्ताक्षर शाहपुर निवासी मराछू पासवान ने रविवार को अंतिम सांस ली। उनका निधन दलित समाज के लिए अपूरणीय क्षति है। निधन की सूचना पर शाहपुर में जमा हुए दलित समाज के लोगों ने उनका अंतिम दर्शन किया और भावभीनी विदाई दी। साथ ही उनके आदर्श को आत्मसात करते हुए उनके सपनों के पूरा करने का संकल्प लिया और श्रद्धा सुमन अर्पित किया।

सामान्य दलित परिवार में जन्मे शाहपुर निवासी मराछू पासवान बाबा साहब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर के शिक्षित होने और संगठित होने के विचार से प्रभावित थे। चंदौली ब्लॉक के कनिष्ठ प्रमुख रहे मराछू पासवान अपने समय में दलितों की शिक्षा और उनकी राजनीतिक भागीदारी के लिए लंबा संघर्ष किया। उनका मानना था कि शिक्षित होकर राजनीतिक भागीदारी हासिल करके ही दलितों का सही मायने में उत्थान किया जा सकता है। उन्होंने इस मूल मंत्र को दलितों के साथ हो रहे भेदभाव और अत्याचार को रोकने का उनका यह सशक्त माध्यम माना।

मराछू पासवान के अंतिम यात्रा में शामिल लोग।

इन्हीं विचारों के साथ उन्होंने स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के उपरांत सक्रिय राजनीति में आ गए। आगे चलकर समाजवादी विचारधारा ने उन्हें काफी प्रभावित किया। यही वजह रहा की वे डॉ राम मनोहर लोहिया और मुलायम सिंह यादव के व्यक्तित्व से प्रेरित और प्रभावित हुए और आगे चलकर समाजवादी पार्टी के एक सशक्त कार्यकर्ता के रूप में उन्होंने कार्य किया। वे चंदौली ब्लॉक के कनिष्ठ प्रमुख के रूप में चुने गए और उन्होंने 1995 से 2000 तक अपने इस दायित्व का बखूबी निर्वहन करते हुए आमजन की सेवा की के बाद भी राजनीति के अगले पड़ाव की ओर अग्रसर हुए।

बदलते राजनीतिक परिवेश और परिस्थितियों में भी वह अपने लक्ष्य से नहीं भटके। उन्होंने दलितों को शिक्षित बनने और राजनीति से जुड़कर अपनी समस्याओं को दूर करने के लिए उनका मार्गदर्शन किया। उनकी प्रेरणा से दलित समाज से कई युवा जनपद की राजनीति में आए और सक्रिय रूप से अपनी भूमिका अदा करते हुए दलितों के उत्थान की दिशा में काम किया। इस बाबत समाजवादी पार्टी के सेक्टर प्रभारी दिलीप पासवान ने बताया कि मराछू पासवान का निधन हम सभी के लिए अपूरणीय क्षति है जिसकी भरपाई निकट भविष्य में संभव नहीं है। हम सभी उनके दिखाएं मार्ग पर चलकर दलित एकता और दलितों को शिक्षित बनाने के सपने को पूरा करने का संकल्प लेने की जरूरत है यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। वह सदैव दलित समाज की स्मृतियों में सदैव जिंदा रहेंगे। इस मौके पर वंशराज पासवान, अरविंद पासवान, दशरथ पासवान, अनिल यादव, नीरज पासवान आदि उपस्थित रहे।

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