संविदा लाइनमैन की मौत मामले में मानवाधिकार आयोग की सख़्ती, 10 लाख रुपये मुआवजे की कार्रवाई 6 लाख का हुआ भुगतान
Young Writer, चंदौली। जनपद चंदौली के थाना कंदवा क्षेत्र के अदसड़ गांव के समीप बीते 14 फरवरी को ड्यूटी के दौरान हाईटेंशन करंट की चपेट में आने से 23 वर्षीय संविदा लाइनमैन सरदूम बिंद की हुई मौत के मामले में उत्तर प्रदेश मानवाधिकार आयोग ने गंभीर रुख अपनाया है। अधिवक्ता एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता डॉ. खालिद वकार आबिद द्वारा मामले में उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच, मृतक के परिजनों को उचित मुआवजा तथा जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध विभागीय एवं दंडात्मक कार्रवाई की मांग को लेकर आयोग में शिकायत दर्ज कराई गई थी।
खालिद वकार आबिद के लिखित शिकायत पर आयोग ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए 16 फरवरी 2026 को वाद संख्या 2831/24/19/2026 के रूप में पंजीकृत कर कार्रवाई शुरू की थी। आयोग के निर्देश पर प्रबन्ध निदेशक, पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड, वाराणसी से मामले में रिपोर्ट मांगी गई। प्रबन्ध निदेशक, पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड, वाराणसी के रिपोर्ट के अनुसार मृतक के परिजनों की ओर से विधिक दावेदार प्रमाण-पत्र हेतु हलफनामा, वारिस प्रमाण-पत्र एवं मृत्यु प्रमाण-पत्र सहित आवश्यक अभिलेख 16 मार्च 2026 को कार्यालय में प्रस्तुत किए गए इसके बाद अधीक्षण अभियंता, विद्युत वितरण मंडल, चंदौली के कार्यालय ज्ञापन 25 मार्च 2026 के माध्यम से पीड़ित पक्ष के लिए 10 लाख रुपये की अनुग्रह धनराशि स्वीकृत की गई। आयोग को रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि कार्यदायी संस्था मेसर्स ग्रिड पावर सिस्टम द्वारा तत्कालिक रूप से मृतक के परिजनों को 6 लाख रुपये का भुगतान किया जा चुका है। शेष क्षतिपूर्ति के भुगतान की कार्रवाई बीमा कंपनी के माध्यम से प्राथमिकता के आधार पर की जा रही है। विभाग की ओर से आयोग को यह भी बताया गया कि क्षतिपूर्ति का पूर्ण भुगतान होने के बाद आयोग को इसकी सूचना दी जाएगी।
मामले की अगली कार्रवाई को लेकर मानवाधिकार आयोग ने प्रबन्ध निदेशक, पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड, वाराणसी को पुनः निर्देशित किया है कि मृतक के आश्रितों को क्षतिपूर्ति की पूरी धनराशि प्राप्त हुई है अथवा नहीं, इसकी प्रगति आख्या 06 अक्टूबर 2026 तक आयोग के समक्ष प्रस्तुत की जाए।
और मामले की अगली सुनवाई 07 अक्टूबर 2026 को दोपहर 12:30 बजे आयोग के समक्ष अग्रिम कार्रवाई एवं आदेश के लिए प्रस्तुत होगी। इस मामले में मानवाधिकार कार्यकर्ता डॉ. खालिद वकार आबिद की शिकायत के बाद आयोग द्वारा लगातार की जा रही कार्रवाई से मृतक के परिजनों को न्याय एवं पूर्ण क्षतिपूर्ति मिलने की उम्मीद बढ़ी है।

