चंदौली। रमजान माह के पहले दिन बृहस्पतिवार को रोजेदार इबादत और कुरान की तिलावत के साथ ही पांच वक्त की नमाज अदा करने में मशगूल रहे। वहीं शाम को मगरिब के वक्त मुकर्रर समय पर परिवार के साथ इफ्तार किया। साथ ही मुल्क में अमन-चैन की दुआएं भी की। इसके अलावा एशा नमाज अदा करने के साथ तरावीह की नमाज भी अदा किया। रमजान माह का पहला अशरा शनिवार को सहरी खाने के साथ ही शुरू हो गया।
इसके साथ ही रोजेदार अधिक से अधिक इबादत करने में भी मशगूल हो गए। रमजान माह शुरू होते ही मस्जिदें रोजेदारों से गुलजार हो जाती हैं। मुस्लिम बस्तियों में चहल-पहल बढ़ जाती है। रोजेदार महिलाएं घरों में खुदा की इबादत और कुरआन की तिलावत में जुटी रही। गर्मी में बगैर कुछ खाए-पीए रोजेदार इबादत करने के बाद सूर्यास्त होने के साथ मगरिब के समय घरों में ही खजूर, पानी व अन्य सामानों से इफ्तार किया। साथ ही देश में अमन-चौन बनी रही। इसके लिए दुआएं भी मांगी। मुफ़्ती रिजवान अहमद ने बताया कि सब्र की कसौटी पर रोजेदार खरा उतरा तो उसने आखिरत का इंतजाम कर लिया। एक रोजेदार रोजा रखता है। तो उसके दिल में खुदा से खौफ होता है। जो उसे रोजे के अहकाम और अदब से बांधता है। रोजा अल्लाह का ही रास्ता है। इसलिए रोजा अल्लाह से खौफ और मोहब्बत का सबब तो है। ही अल्लाह का अदब भी है। कहा कि रमजान माह में ज्यादा से ज्यादा इबादत करनी चाहिए। पांच वक्त की नमाज अदा करनी चाहिए। कुरआन की तिलावत में भी अधिक समय देना चाहिए।

