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Friday, March 20, 2026

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Dala Chhath 2024: महापर्व को लेकर सूप दौरी व पूजा सामग्री की खरीदारी हुई तेज

सकलडीहा में सूप दौरी व पूजा सामाग्री की दुकानों पर खरीदारी करती हुई महिलायें।
सकलडीहा में सूप दौरी व पूजा सामाग्री की दुकानों पर खरीदारी करती हुई महिलायें।

Young Writer, सकलडीहा। डाला छठ पर्व को लेकर पूजा सामग्री की खरीदारी तेज हो गया है। रविवार को सकलडीहा कस्बा सहित आसपास के मार्केट में खरीदारी को लेकर सुबह से लेकर शाम तक महिलाओं की भीड़ जुटी रही। वही घाटों पर बेंदी भी परिजनों की ओर से बनाना शुरू हो गया है।

डाला महाछठ पर्व को लेकर कस्बा में फलों की दुकान के साथ पूजा सामाग्री व सूप दौरी की दुकानें जगह जगह सज गया है। गांव से लेकर कस्बा में  छठ पर्व का अनुष्ठान करने वाली महिलाएं विधि विधान से पूजा की तैयारी तेज कर दिया है। कस्बा के प्राचीन शिव सरोवर से लेकर चतुर्भुजपुर कालेश्वर और धरहरा, दुर्गापुर, ताजपुर, हरिहरपुर आदि गांवों के तालाबों पर परिजनों की ओर से बेंदी बनाने की तैयारी भी शुरू हो गया है। कस्बा के दुर्गा मंदिर के पुजारी रामजनम चौबे ने बताया कि छठ पर्व का अनुष्ठान विधि विधान से करने वाली हर महिलाओं की मुराद पूरी होती है। इस बार का डाला छठ का पर्व का अनोखा संयोग है। व्यापारी नेता पवन वर्मा, डा. अभय वर्मा, नंदन सोनी, केके सोनी, दिलीप गुप्ता, नागेन्द्र गुप्त, मुकेश कुमार नंदन ने पंचायत विभाग के अधिकारियों से छठ महापर्व को लेकर घाटों की साफ सफाई की मांग किया है।

Sakaldiha : जामेश्वर महादेव का दर्शन के लिये श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़

Sakaldiha : जामेश्वर महादेव का दर्शन के लिये श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़
जामडीह गांव के जामेश्वर महादेव मंदिर के बाहर उमड़े श्रद्धालु।

पुत्र रत्न की प्राप्ति के लिय श्रद्धालियों ने पोखरे में स्नान कर नये वस्त्र के साथ किया जलाभिषेक

Young Writer, Sakaldiha: सकलडीहा क्षेत्र के जामडीहा गांव में 200 वर्ष प्राचीन जामेश्वर महादेव का मंदिर है। जहां पर एक साथ डबल शिवलिंग स्वयं से अवतरित  है। मान्यता है कि पुत्र रत्न प्राप्ति के लिये यहां पर आने वाली महिलाएं सूर्योदय से पूर्व जलाभिषेक करना शुरू कर देती है। धनतेरस से भाई दूज तक पति-पत्नी सरोसर में स्नान कर डबल शिवलिग पर जलाभिषेक करते है। मन्नत पूरा होने पर महिलायें बच्चें के साथ मुंडन संस्कार के लिये आती है। दिवाली के दूसरे दिन शनिवार को दर्शन पूजन के लिये श्रद्धावानों की भीड़ उमड़ पड़ा था। सुरक्षा को लेकर एसडीएम अनुपम मिश्रा और सीओ राजेश कुमार राय तथा बीडीओ विजय कुमार सिंह के नेतृत्व में भारी पुलिस बल सुबह से लेकर देर रात तक तैनात रहा।

पौने दो सौ वर्ष पूर्व गाजीपुर जनपद के सराय पोस्ता स्टीमर घाट निवासी सुखलाल अग्रहरि चन्दौली स्थित अपने रिश्तेदारी से लौट रहे थे। रास्ते मे पीपल का पेड़ देख विश्राम करने लगे। इसी दौरान उनको नींद आ गई। जिसमें उनको स्वप्न दिखाई दिया कि। यहां जमीन के अंदर शिवलिंग है। अगर तुम यहा मंदिर बनवा देते हो तो तुम्हे पुत्र रत्न की प्राप्ति होगी। सुखलाल अग्रहरि को पुत्र नहीं था। इस पर सुखलाल ने वहां खुदाई शुरू कराई। खुदाई में वहां डबल शिवलिंग अवतरित मिला। इसपर सुखलाल ने यहां मंदिर का निर्माण कराया। तत्पश्चात उनको चार पुत्र हुए। जिनके परिजन आज भी दर्शन करते है। उसी समय से यहा धनतेरस के दिन से भाई दूज तक मंदिर के पास स्थित सरोवर में पति-पत्नी स्नान कर वस्त्र घाट पर ही छोड़ नया वस्त्र धारण कर 200 मीटर दूर बाबा जामेश्वर का जलाभिषेक कर दर्शन पूजन करते है। साथ ही मन्नते मांगते है। मान्यता है कि ऐसा करने से उनको पुत्र रत्न की प्राप्ति होती है।और जो पुत्र होता है। यही पर बैंड बाजे के साथ उसका मुंडन संस्कार के लिये आता है। यहा चन्दौली सहित आसपास के जनपदों के अलावा बिहार राज्य से भी बडी सख्या में महिलाएं और पुरुष स्नान कर दर्शन पूजन करते हैं। घंट-घड़ियाल से पूरा माहौल भक्तिमय बना रहता है।

Sakaldiha: गंदगी के अंबार से पटा प्राचीन शिव सरोवर, कार्रवाई की मांग

Sakaldiha: गंदगी के अंबार से पटा प्राचीन शिव सरोवर, कार्रवाई की मांग

एडीओ पंचायत ने ग्राम सभा से कूड़ा करकट फेकने वालों की सूची उपलब्ध कराने का निर्देश

Young Writer, सकलडीहा। कस्बा के टिमिलपुर स्थित प्राचीन शिव सरोवर का बीते वर्ष मुख्यमंत्री पर्यटन संवर्धन योजना के तहत सुंदरीकरण और घाटों का निर्माण कराया गया था। जिसे मंदिर पर सुबह शाम दर्शन करने वाली महिला और भक्तों को दर्शन पूजन करने व धार्मिक कार्य करने में सहूलियत मिले। आरोप है कि सरोवर किनारे बसे लोगों की ओर से कूड़ा करकट सरोवर में गिराये जाने से आये दिन कूड़ा करकट से पट जाता है। जिसे लेकर कस्बावासियों में आक्रोश है। जबकि आगामी दिनों डाला छठ महापर्व है। विभागीय अधिकारियों से कार्रवाई कराने की मांग किया है।

टिमिलपुर स्थित प्राचीन शिव सरोवर पर मां दुर्गा, हनुमान, संतोषी माता, राधा कृष्ण, रामजानकी मंदिर है। यहां पर बारहों महीना धार्मिक कार्यक्रम शारदीय नवरात्र, देव दिवाली,डाला छठ महापूजा, जीयूतिया, तीज,गणेश चर्तुदशी सहित विभिन्न पर्व पर हजारों की संख्या में आसपास गांव की महिला व ग्रामीण दर्शन पूजन के लिये आते है। बीते कई वर्षाे से दुर्गापूजा सेवा समिति की ओर से विभिन्न प्रकार की धार्मिक कार्यक्रम किया जाता है। जिसे लेकर बीते वर्ष तत्कालीन केन्द्रीय मंत्री डा. महेन्द्रनाथ पांडेय व स्थानीय विधायक प्रभुनारायण सिंह यादव के प्रयास से मुख्यमंत्री पर्यटन संवर्धन योजना के तहत सरोवर का लाखो रुपये खर्च करके सुंदरीकरण व घाटों का निर्माण किया गया। जगह जगह हाईमास्ट व पाथवे का निर्माण किया गया। आरोप है कि बार बार सरोवर की साफ सफाई पंचायत व ग्राम सभा की ओर से कराये जाने के बाद भी कूड़ा करकट सरेावर में फेक दिया जाता है। एडीओ पंचायत बजरंगी पांडेय ने बताया कि डाला छठ महापर्व से पूर्व सरोवर की साफ सफाई कराया जायेगा। सरोवर में कूड़ा करकट फेकने वालों को चिन्हित कर मुकदमा दर्ज कराया जायेगा।

चंदौली में मच्छरों का प्रकोप बढ़ा, नाकाफी साबित हो रहे नगर पंचायत सहित जिम्मेदार विभाग के बंदोबस्त

मच्छरों का प्रकोप।


Young Writer, चंदौली। नगर में मच्छरों का प्रकोप काफी बढ़ रहा है, जिससे लोगों को तमाम तरह की संक्रामक बीमारियों का भय सता रहा है। इसके लिए नगर पंचायत की ओर से मच्छरों का प्रकोप कम करने के लिए न तो फॉगिंग कराई जा रही है और न ही दवाओं का छिड़काव किया जा रहा है।
नगर पंचायत क्षेत्र के अंतर्गत 15 वार्डों में लगभग 25 हजार आबादी निवासी करती है। नगर में गंदगी व पानी निकासी के लिए बनीं नालियों को ठीक तरीके से साफ-सफाई नहीं होने से गंदगी रहती है। साफ-सफाई ठीक तरीके से नही होने के कारण नगर में मच्छरों का प्रकोप काफी बढ़ गया है। मच्छरों के प्रकोप को कम करने के लिए नगर पंचायत की ओर से कोई भी आवश्यक कदम नहीं उठाये जा रहे हैं। नगर में न तो फॉगिंग की जा रही है और न ही दवाओं को छिड़काव किया जा रहा है।
मच्छरदानी का करें प्रयोग
चंदौली।
पंडित कमला पति चिकित्सालय में कार्यरत ईएमओ डॉ संजय कुमार ने बताया कि गुड नाईट व मच्छर मारने वाली दवा सुलगाने से लोगों की सेहत पर काफी असर पड़ता है। इससे लोग सांस के रोगों से ग्रसित होते हैं। साथ ही अन्य बीमारियों की चपेट में आ जाते हैं। इससे सबसे ज्यादा नुकसान छोटे बच्चों को होता है। खतरनाक मच्छरों व बीमारियों से बचने के लिए मच्छरदानी का प्रयोग करना अति आवश्यक है।

Dala Chhath 2024: छठ पर्व के मद्देनजर ट्रेनों में बैठने के लिए नहीं मिल रहा सीट

रेलवे : young Writer

यात्रियों को ट्रेन में चढ़ाने के लिए आरपीएफ जीआरपी के छूटा पसीना
Young Writer, DDU Nagar: जोधपुर से आरा पहुंचने के लिए तीन ट्रेन बदलने पड़े। तीन रात जागा लेकिन ट्रेन में बैठने की जगह तो दूर ढंग से खड़े रहने की जगह भी नहीं मिल रही है। यह व्यथा है जयपुर से बक्सर तक की यात्रा कर रहे जयवीर सिंह की। जो सिकंदराबाद दानापुर एक्सप्रेस में सवार थे। कहा कि छठ पर घर पहुंचना आवश्यक है। यह सिर्फ जयवीर सिंह की कहानी नहीं है बल्कि ट्रेन में सवार अन्य यात्रियों की भी यही स्थिति है। डाला छठ के पूर्व डाउन की ट्रेनों में अत्यधिक भीड़ जुटी। भीड़ को संभालने में आरपीएफ जीआरपी और वाणिज्य विभाग के अधिकारियों के भी पसीने छूट रहे हैं।

सूर्याेपासना का पर्व चार दिवसीय डाला छठ को अत्यंत कठिन व्रत माना जाता है। यही कारण है कि महानगरों में रहने वाले लोग किसी हाल में घर पहुंचना चाहते हैं। यात्रियों की भीड़ को देखते हुए रेलवे ने छठ पूजा स्पेशल ट्रेनों को चला रही है लेकिन यात्रियों की भीड़ के आगे सारी कवायद फेल नजर आ रही है। रविवार को पीडीडीयू जंक्शन पर यात्रियों की गहमा गहमी दिखी। स्थिति यह है कि डाला छठ व्रत करने से भी कठिन महानगरों से घर पहुंचना हो गया है। दिल्ली, मुंबई, सिकंदराबाद, सूरत से घर पहुंचने के लिए यात्री कठिन परीक्षा दे रहे हैं। रविवार को दोपहर में ढाई बजे से डाउन हरिद्वार हावड़ा कुंभ एक्सप्रेस एक नंबर प्लेटफार्म पर पहुंची। ट्रेन के पहुंचते ही चढ़ने उतरने वालों की आपा धापी दिखी। स्थिति यह रही कि स्लीपर में गेट पर चढ़ना मुश्किल रहा। कोच संख्या एस-12 में एक महिला लगातार ट्रेन पर चढ़ने के लिए मिन्नत करती रही लेकिन गेट पर बैठे युवक हटने का नाम नहीं ले रहे थे। हो हल्ला के बाद वे हटे और महिला चढ़ी लेकिन अंदर भीड़ देखकर वह स्वयं ही नीचे उतर आई। इसी वक्त प्लेटफार्म संख्या दो पर सिकंदराबाद दानापुर एक्सप्रेस पहुंची। इसमें भी यही स्थिति दिखाई दिया।

Bodh Mahotsav 2024: दुखों को दूर करने का उपाय सुझाता है बौद्ध धर्म: भंते अशोक

घुरहूपुर महाड़ी पर बौद्ध महोत्सव के दौरान मंचासीन अतिथिगण।
घुरहूपुर महाड़ी पर बौद्ध महोत्सव के दौरान मंचासीन अतिथिगण।

बोले, भगवान बुद्ध का अष्टांगिक मार्ग देता है जीवन को दिशा
Young Writer, Chandauli:
बुद्ध का आष्टांगिक मार्ग देता है जीवन को दिशा उक्त बातें शनिवार को घुरहूपुर में आयोजित बौद्ध महोत्सव के दौरान मुख्य वक्ता श्रीलंका से आए भंते अशोक ने कही। उन्होंने कहा बौद्ध धर्म दुखों का दूर करने का उपाय सुझाता है। बौद्ध धर्म आध्यात्मिक साधना के लिहाज से लचीला धर्म है जो ना तो शरीर को नष्ट करने वाले कठोर तप पर बल देता है और ना ही सांसारिक जीवन को पूरी तरह छोड़ने पर। उन्होंने कहा कि बौद्ध कठोर तपस्या और भोग विलास दोनों के बीच का मार्ग सुझाता है। जिसे साधना का माध्यम मार्ग कहा गया है, जिसमें आगे बढ़ने के लिए बुद्ध ने आष्टांगिक मार्ग का प्रतिपादन किया है।

घुरहूपुर पहाड़ी पर पर बौद्ध महोत्सव में उमड़ी भारी भीड़।
घुरहूपुर पहाड़ी पर पर बौद्ध महोत्सव में उमड़ी भारी भीड़।

उन्होंने आष्टांगिक मार्ग सम्यक दृष्टि, सम्यक संकल्प, सम्यक वाक, सम्यक वाक, सम्यक कर्मांत, सम्यक आजीव, सम्यक व्यायाम, सम्यक स्मृति, सम्यक समाधि के बारे में विस्तार से बताया। कहा कि सम्यक दृष्टि का अर्थ है कि हम जीवन के दुःख और सुख का सही अवलोकन करें। आर्य सत्यों को समझें। सम्यक संकल्प जीवन में संकल्पों का बहुत महत्व है। यदि दुःख से छुटकारा पाना हो तो दृढ़ निश्चय कर लें कि आर्य मार्ग पर चलना है। सम्यक वाक, जीवन में वाणी की पवित्रता और सत्यता होना आवश्यक है। यदि वाणी की पवित्रता और सत्यता नहीं है तो दुःख निर्मित होने में ज्यादा समय नहीं लगता। सम्यक कर्मांत, कर्म चक्र से छूटने के लिए आचरण की शुद्धि होना जरूरी है।

सम्यक आजीव, यदि आपने दूसरों का हक मारकर या अन्य किसी अन्याय पूर्ण उपाय से जीवन के साधन जुटाए हैं तो इसका परिणाम भी भुगतना होगा इसलिए न्याय पूर्ण जीविकोपार्जन आवश्यक है। सम्यक व्यायाम, ऐसा प्रयत्न करें जिससे शुभ की उत्पत्ति और अशुभ का निरोध हो। सम्यक स्मृति, चित्त में एकाग्रता का भाव आता है शारीरिक तथा मानसिक भोग-विलास की वस्तुओं से स्वयं को दूर रखने से। एकाग्रता से विचार और भावनाएँ स्थिर होकर शुद्ध बनी रहती है।सम्यक समाधि रू उपरोक्त सात मार्ग के अभ्यास से चित्त की एकाग्रता द्वारा निर्विकल्प प्रज्ञा की अनुभूति होती है। यह समाधि ही धर्म के समुद्र में लगाई गई छलांग है। उन्होंने बुद्ध के इस मार्ग चलकर निर्वाण को प्राप्त किया जा सकता है। इस अवसर चौधरी राजेन्द्र सिंह, विकास आनंद,रमाशंकर राजभर,ओम चन्द्र प्रकाश मौर्य, गोविन्द, श्रवण कुमार, सुभाष, शिवशंकर, महेंद्र राजभर, राजेन्द्र सिंह,भरत विन्द, अरुण यादव, जयप्रकाश मौर्य, सीपी खरवार सहित आदि लोग उपस्थित रहे। संचालन वशिष्ठ सिंह मौर्य ने किया।

Chandauli:एसपी ने चार निरीक्षकों के कार्य क्षेत्र में किया बदलाव,सदर कोतवाली का प्रभार संभालेंगे राजेश कुमार सिंह


चंदौली। जनपद में कानून व्यवस्था चुस्त दुरुस्त रखने के लिए रविवार को एसपी आदित्य लांग्हे ने चार निरीक्षकों के कार्य क्षेत्र में बदलाव कर दिया। जिसमे सदर कोतवाल गगन राज सिंह को कोतवाली से पुलिस लाइन में भेजा गया। पुलिस लाइन में तैनात राजेश कुमार सिंह को सदर कोतवाली का प्रभारी बना दिया गया। बबुरी थाने के प्रभारी अनिल कुमार पांडेय को पुलिस अधीक्षक वाचक बिंदेश्वर प्रसाद को बबुरी थाने की जिम्मेदारी सौंप दिया।

Chandauli:गंगा में डूब रहे व्यक्ति को बचाने में गहरे पानी के अंदर समा गया युवक,तलाश में जुटी एनडीआरएफ व पुलिस की टीम

चंदौली। बलुआ थाना क्षेत्र अगस्तीपुर गांव के समीप दोस्तो संग गंगा में नहाने गया युवक एक व्यक्ति को डूबता देख उसको बचाने के लिए कूद गया। और खुद गहरे पानी में चला गया। वही गंगा में डूब रहा व्यक्ति बाहर निकल कर मौके से फरार हो गया। साथ ही दोस्त को डूबता देख उसके दोस्त भी मौके से फरार हो गए। सूचना पर पहुची पुलिस गोताखोर की सहायता से युवक की तलाश कर रही है। वही युवक के गहरे पानी मे लापता होने से परिजनों में कोहराम मचा हुआ है।
बताते हैं कि बलुआ थाना क्षेत्र के अगस्तीपुर गांव निवासी राजू गुप्ता 28 वर्ष बलुआ गंगा नदी में दोस्तो के साथ नहाने गया था। इसी दौरान एक व्यक्ति गंगा में डूब रहा था। जिसको देख राजू गंगा में कूद गया। जिससे वो गहरे पानी में चल गया। घटना को देखते ही उसके दोस्त मौके से फरार हो गए। सूचना पर पहुची पुलिस ने स्थानीय गौतखोर के मदद से युवक की तलाश कर रही है। इस बाबत सीओ रघुराज ने बताया कि एक व्यक्ति को बचाने में युवक गहरे पानी में चला गया है। जिसकी तलाश गोताखोर की मदद से की जारी है।एनडीआरएफ टीम को मौके पर बुला लिया गया है।

Diwali 2024: Chandauli में परंपरागत तरीके से धूमधाम के साथ मना दीपावली का पर्व

चंदौली मुख्यालय पर सजी पटाखे की दुकान।
चंदौली मुख्यालय पर सजी पटाखे की दुकान।

Young Writer, Chandauli: प्रकाश पर्व दीपावली की गुरुवार को जनपद में परंपरागत तरीके से हर्षोल्लास पूर्ण वातावरण में धूमधाम के साथ मनाया गया। इस दौरान पूरे दिन बाजार में ग्राहकों की भारी भीड़ देखने को मिली। लोगों ने त्यौहार के मद्देनजर फूल-माला, मिष्ठान व पूजन सामग्री के साथ ही गणेश-लक्ष्मी की मूर्तियों की खरीद करते हुए नजर आए। इसके अलावा युवाओं व किशोरों ने पटाखों की जमकर खरीद की। शाम होते ही पूरा नगर रंग-बिरंगी रोशनी से जमकर हो उठा। लोगों ने घरों के अंदर दीए जलाने के साथ ही पास-पड़ोस स्थित मंदिरों में जाकर मत्था टेका और वहां दीए जलाए। साथ ही परिवार की सुख, समृद्धि की कामना की।

दीपावली पर्व के मद्देनजर चंदौली बाजार में सजी मूर्तियों की दुकानें।
दीपावली पर्व के मद्देनजर चंदौली बाजार में सजी मूर्तियों की दुकानें।

दीपावली त्यौहार को लेकर पूरे जनपद में उत्साह व उमंग देखने को मिला। लोगों ने सुबह से ही अपने-अपने घरों की साफ-सफाई शुरू कर दी। साथ ही घरों को रंग-बिरंगे झालरों व फूल-मालाओं से सजा दिया। दूसरी ओर एक-दूसरे को उपहार व मिठाई देने का सिलसिला पूरे दिन चला।

DDU Nagar

दीपावली के मद्देनजर लोगोें ने घर की साफ-सफाई करने के बाद दीपावली के दिन लोग परिजनों के साथ घी और तेल का दीपक जलाकर घर को रोशन किया। रात के समय पूजा पाठ किया। दीपावली पर सुरन की सब्जी या चोखा खाने का भी प्रचलन है। घर की युवतियों ने घर पर रंगोली बनाकर आनंद उठाया तो बच्चों ने पटाखे फोड़कर खुशी का इजहार किया। वही घरो को झालर की लड़ियों से भी सुंदर ढंग से सजाया गया।

चंदौली पुरानी बाजार में फूल-माला की खरीद करते लोग।
चंदौली पुरानी बाजार में फूल-माला की खरीद करते लोग।

वही फूल माला के दुकानों के साथ-साथ ज्वेलर्स की दुकानों पर भी लोगों की भारी भीड़ लग रही। दूसरी ओर सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर पुलिस फोर्स जगह-जगह तैनात दिखी। वहीं पुलिस की कुछ टीमें निरंतर ग्रामीण व शहरी क्षेत्र में भ्रमणशील नजर आयी।

चंदौली मार्केट में मिठाई की दुकान पर लगी खरीदारों की भी
चंदौली मार्केट में मिठाई की दुकान पर लगी खरीदारों की भी

वैभव और धन-ऐश्वर्य की देवी माता लक्ष्मी गणेश पूजे गए
डीडीयू नगर।
चौदह वर्ष के वनवास के बाद भगवान राम, लक्ष्मण, सीता के अयोध्या वापसी की खुशी में लोगों ने हर्षोल्लास के साथ दीपावली का पर्व मनाया और रोशनी से जिले का हर एक कोना नहला दिया। दीपावली पर दीये और विद्युत झालरों से घर और गलियों को पूरी तरह सजाया गया। शुभ मुहूर्त में लोगों ने वैभव और धन-ऐश्वर्य की देवी माता लक्ष्मी और प्रथम पूज्य गणेश की पूजा अर्चना की और मिष्ठान का भोग लगाया। इसके बाद लोगों ने खूब आतिशबाजी की।
कार्तिक अमावस्या का मान दो दिन होने के कारण कुछ स्थानों पर शुक्रवार को भी दीपोत्सव मनाया जाएगा। हालांकि जिले में बृहस्पतिवार को ही दीपोत्सव मनाया जा रहा है। पांच दिवसीय दीपोत्सव की शुरुआत धनतेरस को हो गई थी।

चंदौली पुरानी बाजार में पूजन सामग्री की खरीद करते लोग।
चंदौली पुरानी बाजार में पूजन सामग्री की खरीद करते लोग।

दीपावली पर घरों को सजाने का क्रम भी पिछले लंबे समय से चल रहा था। दीपावली की सुबह से ही शाम के पूजन अर्चन की तैयारी शुरू हो गई। घरों की साफ सफाई के बाद फूल-माला और रंगोली से घरों को सजाया। शाम वक्त शुभ मुहुर्त में माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित की और पुरोहितों को बुलाकर विधि विधान से पूजन अर्चन किया। देव विग्रहों को लावा, लाई, चुरा, खील-बतासे और मिठाइयों का भोग लगाया। फूल-माला, धूप-दीप से शृंगार किया और इसके बाद भव्य आरती उतारी। घरों में घरौंदा बनाकर कुल्हिया, चुकिया, ग्वालिन, खिलौनों को लाई, खील बतासों से भरा और पूरे घर को दीप से जलाया। पूजन अर्चन के बाद घर की छतों, दरवाजों पर दीप मालाएं सजाई। दीप मालिका के साथ घरों की छतों पर लगाए गए विद्युत झालरों को शाम को जलाया गया। इससे पूरा इलाका रोशनी से नहा उठा। दीपक की लौ और विद्युत झालरों की लड़ियों की टिमटिमाती रोशनी से आसमान के तारे भी शरमाते नजर आए। पूजन अर्चन के बाद प्रसाद के रूप में मिठाइयों का स्वाद चखा।यही नहीं एक दूसरे के घरों में भी प्रसाद और मिठाइयों बांटी गई और एक दूसरे को दीपावली की शुभकामनाएं दी। इसके बाद घर के युवा, बुजुर्ग, महिलाएं सभी घर की छतों और दरवाजों पर एकत्र हो गए और आतिशबाजी का दौर शुरू हुआ। शाम छह बजे से शुरू हुआ आतिशबाजी का दौर रात दो बजे तक चलता रहा। आसमान रंग बिरंगी फूलझड़ियों से रोशन रहा, वहीं लोगों ने राकेट, अनार, चरखी, बिजली बम, आलू बम सहित अन्य पटाखों को छूडाकर आनंद उठाया। दुकानों में भी दिन भर दुकानदारी के बाद देर शाम पुरोहितों को बुलाकर पूजन अर्चन कराया गया। नया 

जलेबी का जलवा : एक व्यंग्य रचना

Young Writer, साहित्य पटल। ललित निबंधकार Dr. Umesh Prasad Singh (डा. उमेश प्रसाद सिंह )


आजकल जलेबी का बड़ा जलवा है।
‘‘कहाँ जलवा है?
धत्तेरे की। यह भी कोई सवाल है। कहाँ थे महाराज?….
कुम्भकर्ण की नींद में निमग्न थे क्या? दिन में आकाश के तारे तोड़ रहे थे क्या? मंगल पर प्लाट बुक कराने चले गए थे क्या? क्या राजा बलि से मंत्रणा करने पाताल पधार गए थे?
आप कुछ कहें चाहे न कहें। आप धरती पर जीवित, जाग्रत अवस्था में जरूर नहीं रहे होंगे। रहे होते तो ऐसा सवाल कदापि नहीं करते। भला कहाँ नहीं है जलेबी। हर कहीं जलेबी छाई हुई है।
अखबार में जलेबी। टी.वी.में जलेबी। सोशल मीडिया में जलेबी। देश में जलेबी। देश,देश में जलेबी। हिन्दुस्तान में जलेबी। पाकिस्तान में जलेबी। हरियाणा, पंजाब में जलेबी। केरल, तमिलनाडु में जलेबी। असम में लद्दाख में जलेबी। कनाडा में जलेबी। नेपाल, भूटान में जलेबी। बिना खरचे के हर कहीं जलेबी के चरचे। आँख मूदो तो जलेबी। आँख खोलो तो जलेबी।
पहले जलेबी केवल जलेबी की दुकान पर थी। केवल सुबह-शाम में थी। इधर हर दुकान पर जलेबी है। चाय कीदुकान पर जलेबी। पान की दुकान पर जलेबी। यहाँ तक कि सब्जी की दुकान पर भी जलेबी लोगों की जबान पर चढ़ी बैठी है।
जबान पर जलेबी तो है। मगर मिठास नहीं है। उसका रस हवा हो गया है।

हुआ यह कि राहुल गाँधी (Rahul Gandhi) हरियाणा विधानसभा चुनाव (Hariyana Vidhansabha Election) में अपने अभियान पर थे। वे खून पसीना बहाकर कांग्रेस को हरियाणा में सत्तासीन करने के संकल्प में लथपथ थे। वे चाहे जैसे भी हो सत्ता हथियाने का हठयोग आँख मूदकर साधने की साधना में तल्लीन थे। सत्ता हथियाने के लिए सभी राजनीतिक दल कुछ भी करने के लिए उतारू रहते हैं। कुछ भी करने पर आमादा आदमी के लिए कुछ भी कह देना कठिन नहीं होता। कुछ भी कह देने को आतुर रहने में कुछ का कुछ हो जाना हमेशा संभावित बना रहता है।

चुनाव प्रचार के दौरान राहुल गाँधी को उनके किसी प्रेमी भक्त ने गोहाना की प्रसिद्ध मातुराम की जलेबियाँ खिलाईं। देसी घी की कुरकुरी चसक चीनी की चासनी में डूबी जलेबी राहुल गाँधी को भा गई। जलेबी उन्हें बड़ी मीठी लगी। उनका मुँह मीठा हो गया। मुँह मीठा हो गया तो हो गया। कोई बात नहीं। मगर राहुल जी का मन भी मीठा हो गया। राहुल जी जलेबी की चासनी में चिपक गए चींटे की तरह। उनका मन उड़ने लगा हवा में। उन्हें महसूस हुआ कि यह मीठी जलेबी उन्हें सत्ता तक पहुंचाने की सीढ़ी बन सकती है। सो उन्होंने जलेबी को उछाल दिया नारा की तरह हवा में। मंच पर उन्होंने अपने भाषण के दौरान जलेबी का पैकेट लहरा-लहरा कर जनता के दिल को जलेबी के लिए ललचाकर वाहवाही लूटने का खेल खेला। उन्होंने हवा बाँधने के लिए जनता को दिन में सपने दिखा दिया। जलेबी की फैक्ट्री लगाने की परियोजना का मसौदा पेश कर डाला। उसके दुनियाँ भर में निर्यात करके विश्वव्यापी बनाने की मौलिक कल्पना उद्घाटित कर दी। राहुल गाँधी अपनी मौलिक उद्भावना पर बेहद गदगद हो उठे। राहुल को पता ही नहीं चला कि उनकी जबान फिसल गई है। पता चल भी कहाँ पाता है। पता रहे तो फिसले भी कैसे! अब फिसल गई तो फिसल गई। जलेबी जबान से उछलकर हवा में उड़ चली। जबान समहकर देखती रह गई। जलेबी आकाश चढ़ गई।

जलेबी हवा में उड़ी तो उड़ती चली गई। देश के कोने-कोने में ही नहीं। वह दुनियाँ के कोने-कोने में छा गई। पता नहीं करामात जलेबी की है या राहुल की जबान की। जलेबी उछाली गई। राहुल की जबान पकड़ी गई। राहुल की जबान पकड़ने के लिए जिनको अपने हाथ काम लायक समझ में आए सबने बढ़ाए। भाजपा के लोगों का वश चले तो राहुल की जीभ को वे मुँह में हाथ डालकर खींच लें। मगर चूँकि ऐसा नहीं हो सकता। इसलिए नहीं होता। फिर भी भाजपा नेता चुटकी में राख मलकर हमेशा तैयार रहते हैं कि जीभ जरा भी मुँह से बाहर निकले तो खींच लें। इधर राहुल हैं कि मानते ही नहीं। बार-बार खेल में हार कर पिनपिना जाने वाले लड़ाके जिद्दी लड़के की पिनक में जीभ बाहर निकाल कर जीतने वाले को पिड़काते रहते हैं।.

देखते-देखते जलेबी की मिठास न जाने कहाँ विलीन हो गई। कण्ठों में कड़वाहट भर गई। जलेबी की जलेबी बनने लगी। जलेबी का उत्स खोजा जाने लगा। गोत्र खोजा जाने लगा। जलेबी की खेती होने लगी। जलेबी का व्यापार होने लगा। जलेबी से मुनाफा कमाया जाने लगा। जलेबी से घाटा खाने का धन्धा भी चला। जलेबी जलेबी हो गया सब कुछ।
जलेबी खूब चली। इतनी चली, इतनी चली कि क्या कहना। शोधार्थी अन्वेषकों को जलेबी ने खूब दौड़ाया। इसका उत्स तलाशने में बुद्धिजीवियों को पर्सिया जो अब ईरान है तक की यात्रा करनी पड़ी। अरब तक जाना पड़ा। इतिहास तक नहीं छूटा। दसवीं शताब्दी तक पीछे लौटकर जलेबी की उपस्थिति का परीक्षण हुआ। भारतीय बोध के लोगों ने आयुर्वेद के प्रसिद्ध ग्रंथ ‘भाव प्रकाश’ में जलेबी की उपयोगिता के प्रमाण ढूढ निकाले। क्या, क्या नहीं हुआ जलेबी को लेकर जलेबी के पीछे। जो हो सकता था। सब हुआ। हाँ, जलेबी को लेकर वेद तक जाने की उड़ान किसी ने नहीं भरी।

कांग्रेस की सारी उम्मीदें जलेबी की चासनी में डूब गई। भाजपा (BJP) के मुँह में जलेबी की मिठास मुस्करा रही है। हरियाणा में जो हुआ सो हुआ। मैं सोचता हूँ जलेबी का क्या हुआ? कुछ नहीं। जलेबी जहाँ थी, वहीं है। जलेबी जैसे थी, वैसे है। राहुल गाँधी की जबान से जलेबी के फिसलने के बाद कितने-कितने लोगों की जबान जलेबी पर फिसलती रही। मगर जलेबी न उठी न गिरी। न बढ़ी, न चढ़ी। आखिर जलेबी बस जलेबी है। जलेबी को भला राजनीति से क्या लेना, देना। किसी का राजनीति से कुछ लेना देना हो न हो दीगर बात है। मगर राजनीति का तो हर किसी से, हर कुछ से लेना-देना है। जलेबी से राजनीति ने खूब लिया। खूब-खूब लिया। जितना ले सकती है, पूरा लिया। फिर दिया क्या? कुछ नहीं। जलेबी हलवाई की दुकान में थाल में सजी बैठी है, ग्राहक के इंतजार में ठंडी होती हुई। राजनीति के लिए यह कत्तई जरूरी नहीं कि वह जिससे कुछ ले उसे दे भी। वह किसी का सब कुछ लेकर कुछ भी न देने को स्वतंत्र है। किसी से कुछ भी न लेकर बहुत कुछ देने को भी समर्थ है। राजनीति का हाथ भला कौन पकड़ सकता है! नहीं। कोई नहीं। उसके हाथ में सबके हाथ बँधे हैं।

राजनीति जलेबी का जायका जानती है। वह सत्ता के सिंहासन पर बैठकर जलेबी को जीमती है। जब मन हो रबड़ी में डुबाकर। जब मन हो दही में लपेटकर। जनता का क्या? वह तो बस तजलेबी बनाती रह जाती है। वह तो जलेबी बनती रह जाती है। खैर! जो हुआ सो हुआ। सरकार गई। फिर सरकार बनी। कोई दल जीता। कोई हारा। मगर जलेबी जीत गई। क्या कमाल है जलेबी का। जलेबी को उछालने वाला हार गया। जलेबी जीत गई। जलेबी को उछालने वाला हवा हो गया। जलेबी हवा में हो गई। जलेबी की हवा चल पड़ी। जलेबी की हवा बँध गई। बड़ी-बड़ी दुकानों की मँहगी से मँहगी मिठाइयों को लंघी मारकर जलेबी सबसे आगे निकल गई। धन्य है, जलेबी। धन्य है जलेबी का जलवा। जलेबी की जय हो।

सम्पर्क – डा.उमेश प्रसाद सिंह
ग्राम व पोस्ट-खखड़ा
जनपद-चंदौली।
पिनकोड-232118
मोबाइल नंबर-9305850728
ईमेल-drumeshsingh123@gmail.com

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