Young Writer, चंदौली। पड़ाव-गोधना सिक्सलेन एवं फोर लेन सड़क परियोजना के तहत डीडीयू नगर में मां काली मंदिर के ध्वस्तीकरण कार्य के दौरान मजदूर बलदेव यादव उर्फ झिंगुरी की मृत्यु हो गई थी। इस मामले में उत्तर प्रदेश मानवाधिकार आयोग लखनऊ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए वाद संख्या 15081/24/19/2026 पंजीकृत कर आवश्यक कार्रवाई प्रारंभ कर दी है।
मानवाधिकार कार्यकर्ता एवं अधिवक्ता डॉ. खालिद वकार आबिद द्वारा आयोग को प्रेषित प्रार्थना-पत्र में आरोप लगाया गया था कि 10 जुलाई की रात पुराने काली मंदिर के ध्वस्तीकरण के दौरान सुरक्षा मानकों की अनदेखी की गई। शिकायत में कहा गया कि घटना के समय पर्याप्त बैरिकेडिंग, आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था तथा एंबुलेंस उपलब्ध नहीं थी और घायल मजदूर को ऑटो से अस्पताल ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। डॉ. खालिद वकार आबिद ने शिकायत में इसे श्रमिक के जीवन के अधिकार, सुरक्षित कार्यस्थल तथा मानवीय गरिमा से जुड़े मानवाधिकारों के संभावित उल्लंघन का गंभीर मामला बताया।
उन्होंने आयोग से स्वतः संज्ञान लेकर निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच कराने, दोषियों के विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई सुनिश्चित करने तथा मृतक के आश्रितों को नौकरी,वैधानिक क्षतिपूर्ति, आर्थिक सहायता, पुनर्वास एवं अन्य श्रम कानूनों के अंतर्गत देय लाभ उपलब्ध कराने की मांग की गई थी। उत्तर प्रदेश मानवाधिकार आयोग द्वारा शिकायत पंजीकृत किए जाने के उपरांत प्रकरण में आवश्यक कार्रवाई प्रारंभ कर दी गई है। आयोग ने संबंधित अधिकारियों से प्रतिवेदन तलब कर मामले की जांच एवं आवश्यक विधिक कार्रवाई की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है। खालिद वकार आबिद ने आयोग द्वारा मामले को संज्ञान में लिए जाने पर कहा कि इस प्रकरण में निष्पक्ष जांच, जवाबदेही तय होना तथा भविष्य में निर्माण एवं ध्वस्तीकरण कार्यों के दौरान श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है।

