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Thursday, October 15, 2026

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जीवित्पुत्रिकाःव्रती महिलाओं ने मंदिरों पर पूजा-अर्चना कर संतान के सुख-समृद्धि की कि कामना

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चंदौली। जीवित्पुत्रिका व्रत का पारण करने के लिए रविवार को व्रती महिलाओं ने नगर के कालीमाता मंदिर पोखरे व साव के पोखरे पर स्नान कर पूजा-अर्चना किया। और पारंपरिक विधि-विधान के अन्न-जल ग्रहण कर व्रत का पारण किया। इस व्रत का उद्देश्य संतान की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना के लिए व्रती माताओं द्वारा किया जाता हैं।


जीवित्पुत्रिका व्रत एक आस्था त्याग व संकल्प का संगम माना जाता है। जिसे महिलाएं अपने बच्चों के दीर्घायु और मंगल कामना के लिए करती हैं। यह व्रत मां की ममता का संकल्प के साथ संतान की लंबी सांसों की कामना है। जीवित्पुत्रिका व्रत में मां का उपवास पुत्र के जीवन का विश्वास और निर्जला तपस्या संतान की सुख-समृद्धि की अभिलाषा है। ममता की माला में पिरोया यह व्रत संतान के मंगल का संदेश देता है। पुत्रवती महिलाएं निर्जला रहकर जीवित्पुत्रिका व्रत करती हैं। और अपने पुत्र की लंबी उम्र और सुखी जीवन की कामना करते हुए चौबीस घंटे निर्जला उपवास कर व्रत रहती हैं।
इनसेट—-
गुलज़ार रहे बाजार—
चंदौली। जीवित्पुत्रिका पर्व को लेकर पूरे दिन बाज़ार गुलज़ार रहे। लोगों ने फलों व गन्ने की दुकानों पर जमकर खरीदारी की साथी ही पूजा सामग्री दुकानों पर व्रती महिलाओं का भीड़ देखने को मिला। परिजनों के साथ बच्चे भी जीवित्पुत्रिका पर्व त्योहार को लेकर काफी उत्साहित दिखे।

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