सकलडीहा। पिछले दिनों धरांव गांव में पंकज के घर से लाखों रूपये की जेवर सहित नगदी चोरी होगयी थी। घटना को लेकर एसपी के निर्देश पर सीओ के नेतृत्व में टीम गठित किया गया था। मुखबीर की सूचना पर धानापुर पुलिस टीम सीतापोखरी बिरना मार्ग से चार चोरों को गिरफ्तार किया है। पकड़े गये चोरों के पास से 89 हजार नगदी सहित तीन लाख के जेवर और अन्य सामान बरामद किया गया है। बुधवार को सीओ कार्यालय में चोरी की घटना का सीओ राजेश कुमार राय ने खुलासा करते हुए चोरों को जेल भेज दिया।
धरांव गांव निवासी पंकज कुमार सिंगरौली में कोल्ड फिल्ड में काम करते थे। 28 मई को परिवार के साथ शादी में चले गये थे। 16 जून की रात में चोरों ने मौका का फायदा उठाते हुए चहदिवारी फांदकर घर में घुसकर लाखों के जेवर सहित नगदी चुराकर संपत होगये थे। शादी से लौटने पर घर की हालत देख हैरान होगये। थाने में चोरी का मुकदमा दर्ज कराया। एसपी के निर्देश पर सीओ के निर्देशन में चोरी की घटना का खुलासा के लिये टीम गठित किया गया था। मुखबीर की सूचना पर चोरी का आभूषण और रूपये का बटवारा करने के लिये चोर सीतापोखरी बिरना नहर मार्ग से जा रहे थे। इसी बीच पुलिस ने चार चोरों को पुलिस ने दबोच लिया। तलाशी के दौरान चोरों के पास से दो सौ और सौ की करेंसी नोट करीब 89 हजार 770 रूपया बरामद किया। इसके साथ ही सोने की हार मंगलसूत्र सहित अन्य चांदी के कुल कीमत तीन रूपये का बरामद किया गया। पकड़े गये चोर रितेश, सुजीत, दोईज, और बिरेन्द्र सभी धरॉव गांव निवासी को सीओ आफिस से जेल भेज दिया गया। इस बाबत सीओ राजेश कुमार राय ने बताया पिछले दिनों धरॉव गांव में चोरी हुई थी। जिसका आज खुलासा किया गया। गिरफ्तारी टीम में एसओ धानापुर प्रशांत सिंह,एसआई सत्यनारायण शुक्ला,दीनानाथ सिंह, ओमप्रकाश प्रचेता व अभिषेक दूबे रहे।
खुलासा,चोरी गए आभूषण व नकदी संग चोर गिरफ्तार,
ललित निबन्धः जीवन में कर आसा
Young Writer, साहित्य पटल। ललित निबंधकार डा. उमेश प्रसाद सिंह
मनुष्य जीवन की गरिमा का जो श्रृंगार कबीर की कविता में दिखाई पड़ता है, बड़ा आकर्षक है। बड़ा आह्लादक है। बड़ा प्रिय है। मनुष्य के जीवन की महत्ता को और मनुष्य के महत्व को कबीर की कविता बड़ी ही विदग्ध रीति से गौरव प्रदान करती है। कविता के केन्द्र में मनुष्य की मूल्यवत्ता को स्थापित करने के लिये कबीर का उपक्रम हमेशा अविस्मीरणीय बना रहेगा।
कबीर जीवन-प्रवाह की सनातनता के सर्जक कवि हैं। वे परंपरा के मर्म के उद्गाता है। कबीर किसी कालखण्ड के खण्ड-खण्ड रूप के आराधक नहीं है। उनकी आराधना अखण्डकाल के प्रवाह के प्रति है। हमारे जीवन की परम्परा है। प्रवाह है। हमारा जीवन एक अविच्छिन्न परंपरा की अभिव्यक्ति है। एक अजस्र प्रवाह का घटक है।
परंपरा वह नहीं, जो कल थी। आज नहीं है। परंपरा अतीत नहीं है। अतीत में नहीं है। परंपरा हमेशा वर्तमान होती है। वह वर्तमान में होती है। परंपरा में, अतीत वर्तमान में समाहित है और भविष्य वर्तमान में बदल जाने को उत्सुक। हर वर्तमान अनिवार्य रूप से अतीत हो जाने वाला है। हर भविष्य एक दिन वर्तमान होने की तरफ निरंतर खिसकता आ रहा है। हमारे वर्तमान में हमारा अतीत भी मौजूद है और हमारा भविष्य भी सम्मिलित है। इसीलिये कबीर की कविता में वर्तमान, काल की अखण्ड सत्ता के समग्र अस्तित्व का वाचक है। बोधक है। तभी तो कबीर कहते हैं कि अवधू, जो कुछ भी होना है, उसके जीवन में,- जीवन के वर्तमान में ही घटित होने की आशा रखो। उम्मीद रखो। जो अभी है, वही है। जो अभी है, वही आगे भी है। जो अभी है, वही ‘अस्ति’ है। जो है, उसकी आराधना, उसमें आस्था, उसके प्रति अटूट विश्वास ही अस्तिकता है। जो नहीं है, उसमें अनुरक्ति नास्तिकता है। अस्तिकता स्वीकार है। नास्तिकता नकार है।
आस्तिकता अस्तित्व का सम्मान है। नास्तिकता अस्तित्व का तिरस्कार है। अस्तिकता प्रेम है। पूजा है। प्रमोद है। नास्तिकता सन्देह है। प्यास है। धन्धा है। जो कुछ है, उससे भर जाने का भाव धर्म है। जो कुछ नहीं है, उसके अभाव की विकलता अधर्म है। अवधू, ध्यान रखना गौर से देखना जरा, हमारे धर्म में अधर्म कैसे चतुराई से घुस आया है। घुसा पड़ा है। घुसकर धर्म को, सत्य को, आनन्द को, दबोच रखा है।
कितनी निसंगता है कबीर की कविता में। कितना विश्वास है। कितना प्रेम है। कितना प्रमोद है। मन उमग आता है। बार-बार पूछने की उत्कण्ठा होती है- कहाँ पाया आपने? कैसे पाया?
मगर मैं हजार-हजार बार चाहकर भी नहीं पूछ पाता। पूछने का कोई प्रयोजन भी नहीं है। कबीर का प्रश्नों के उत्तर देने में विश्वास नहीं है। कबीर की कविता तो उत्तरों के उत्स तक पहुँचाने की पक्षधर है। कबीर की कविता अस्तित्व के उत्स की ओर उन्मुख कविता है।
कबीर की कविता में अवधू, साधो, सन्तों ये सब सहानुभूति के सम्बोधन हैं। सम्मान के सम्बोधन हैं। आत्मीयता के-, आत्मीय लगाव के सम्बोधन हैं। जीवन को जान लेने की जिसमें थोड़ी भी ललक है, उन सबके प्रति कबीर को अपार प्यार है। उससे कबीर अपने मन की, अपने अनुभव की, अपनी उपलब्धि की बात सहज भाव से कहते हैं। कहते हैं कि वह भी उनकी संवेदना का साझीदार बन सके। संवेदना का सझीदार होना ही साथी होना होता है। कबीर की कविता साथी होने की कविता है।
Kabir कबीर जीवन के कवि हैं। वे मृत्यु के कवि नहीं हैं। जो मृत्यु के बाद की बात करता है, वह धन्धा करता है। धोखा करता है। वह अपना स्वार्थ साधता है। लाभ कमाता है। चाहे वह गुरु ही क्यों न हो। धन्धा तो धन्धा है। धोखा तो धोखा है। क्या फर्क पड़ता है, चाहे वह गुरु का हो, चाहे वेश्या का। देने का अभिनय और लेने की मंशा। देना कुछ नहीं और लेना सबकुछ। सबकुछ देने का दिखावा और कुछ भी न देने की असलियत। कुछ भी न लेने का नाटक और सबकुछ ले लेने की लिप्सा। धन्धा यही है। व्यापार यही है। चाहे व्यापार देह का हो, चाहे धर्म का, चाहे ज्ञान का। धोखा है। झूठ है। पाखण्ड है। ठगी है।
ठगी तो ठगी है। चाहे राम का नाम लेकर ठगी हो चाहे काम का। चाहे लाभ का, चाहे लोभ का। चाहे विकास का नाम लेकर हो, चाहे सुख का, चाहे स्वर्ग का। कबीर कहते हैं, अवधू, सावधान रहना। जो गुरु कहता है कि मरने के बाद स्वर्ग मिलेगा, मेरी सेवा करो। वह झूठ बोलता है। वह स्वार्थी है। वह साधना की आड़ में स्वार्थ-साधना का धन्धा करता है। लोभ जगाकर, अन्धा बनाकर अपना उल्लू सीधा करता है। आदमी को अन्धा बनाने का, उल्लू बनाने का उद्योग धर्म नहीं, धर्म का व्यापार नहीं, अपराध है। पूरा-पूरा अपराध। यह कैसी व्यवस्था है? कैसा विधान है? कैसा संविधान है? जिसमें अपराध के लिये सम्मान की व्यवस्था है। कितना विस्मय जनक है।
कबीर अपनी कविता में कहते हैं कि मृत्यु और कुछ भी नहीं है केवल जीवन का निषेध है। जीवन का निषेध,-जीवन का नकार ही बस मृत्यु है। जहाँ जीवन नहीं है, मृत्यु है। जब भी, जिस भी अवस्था में जीवन नहीं है, मृत्यु है। जीवन से अपरिचय, जीवन की विस्मृति, जीवन के बोध का अभाव ही मृत्यु है।
जहाँ जीवन है, जीवन से परिचय है, जीवन का बोध है, मृत्यु नहीं है। मृत्यु बोध नहीं है, वह अवधारणा है। झूठ है। मृत्यु के उपरान्त का स्वर्ग अवधारणा की अवधारणा है। झूठ का झूठ है।
जीते जी का स्वर्ग सच है। जीवन का स्वर्ग सच है। जीवन में, जीवन का अनुभव स्वर्ग हैं, आनन्द, बोध है। जीवन असीम है। अजस्र है। अमर है। अविनाशी है। लघुता के बोध का मिट जाना और विराटता के बोध का भर आना ही अमरता है। सीमाओं का असीम में विलीन हो जाना ही, अविनाशी हो जाना है। जीवन अविनाशी है, अमर है। जीवन को जान लेना, पा लेना ही मनुष्य जीवन की महत्तम उपलब्धि है। कबीर की कविता मनुष्य जीवन की महत्तम उपलब्धि का यशगान करने वाली कविता है।
कबीर की कविता अवास्तविक के भ्रम को और भय को निरस्त करने वाली कविता है। मृत्य अवास्तविक है। मृत्यु मात्र भय है। मृत्यु के बाद मिलने वाला स्वर्ग भ्रम है। जो गुरु मृत्यु की बात करता है। मृत्यु के बाद स्वर्ग मिलने की दिलासा देता है, वह झूठ का व्यापार करता है। वह गुरु, गुरु नहीं झूठ्ठा हैै। वह दलाल है। स्वर्ग के लोभ से ऊँची कीमत वसूलने की जुगत में लगा हुआ, दलाल। वास्तव में जीवन को जानने की प्रक्रिया में दलाल की, बिचौलिये की कोई भूमिका ही नहीं है।
कबीर का जीवन से परिचय है। वे जीवन को जानते हैं। पहचानते हैं। जीवन उनका बोध है। जीवन को जान लेना ही मृत्य का अतिक्रमण है। मृत्यु के पार होना हैं। जो जीवन में स्थित होता है वह मरता नहीं है। जो जीवन को, बगैर जाने जीता है, वह मर जाता है। जहाँ जीवन है, वहाँ मृत्यु नहीं है। जहाँ मृत्यु है वहाँ जीवन नहीं है। दोनों का साथ-साथ होना संभव नहीं है। बिल्कुल प्रकाश और अन्धकार की तरह। जहाँ प्रकाश है, अँधकार हो ही नहीं सकता। अन्धकार है। अन्धकार होगा, मगर वहाँ होगा जहाँ प्रकाश नहीं है। जीवन प्रकाश है। मृत्यु अन्धकार है। जिसके जीवन में प्रकाश है, जिसने जीवन में प्रकाश पा लिया है, वह नहीं मरेगा। उसे मरना नहीं है। मृत्यु उसके लिये नहीं है। कबीर ने जीवन को पा लिया था। प्रकाश को पा लिया था।
जब तक कबीर पीछे-पीछे चल रहे थे, प्रकाश नहीं था। लोक और वेद के पीछे चलना प्रकाश रहित रास्ते पर चलना है। अँधेरे में चलना है। कबीर भी अँधेरे में चल रहे थे। चल रहे थे दुनियाँ के साथ-साथ। इसीलिये वे दुनियाँ को भी जानते हैं, अँधेरे को भी जानते हैं और मृत्यु को भी जानते हैं। मगर कबीर को आगे से आता हुआ सद्गुरु मिल गया। सद्गुर का रास्ता दुनियां का रास्ता नहीं है। जिस रास्ते दुनियां चलती है, उस रास्ते सद्गुरु कभी नहीं मिलता। सद्गुरु का मार्ग विपरीत दिशा का मार्ग है। दुनियां मृत्यु की तरफ जा रही होती है। सद्गुरु जीवन की तरफ आ रहा होता है। इसीलिये कबीर कहते हैं कि सद्गुरु उन्हें सामने से आता हुआ मिला। एक ही दिशा में चलने वाले यात्री तो आगे-पीछे हो सकते हैं। आमने-सामने नहीं हो सकते। आमने-सामने विपरीत दिशा में जाने वाले पथिक ही हो सकते हैं। कबीर कहते हैं ‘‘आगे तें सतगुरु मिला दीपक दी हाथ।’’ जब कबीर के हाथ में दीपक मिल गया तो उस दीपक के प्रकाश में उन्होंने राह देख ली। राह पहचान ली। उन्होंने जान लिया संसार मृत्यु की तरफ जा रहा है। अंधकार की तरफ जा रहा है। झूठ की तरफ जा रहा है। उन्होंने जीवन को देख लिया प्रकाश में। जान लिया। पहचान लिया। पा लिया। उन्होंने जीवन का अर्थ पा लिया। उन्होंने अस्तित्व का मर्म जान लिया। उन्होंने अमरता का रस पा लिया। रस पी लिया। कबीर की वाणी अमिय रस से सराबोर हो गई। उनके हृइय की गगन गुफा में अजर यानी कि कभी जीर्ण न होने वाला रस झरने लगा। झरकर हमेशा ताजा रहने वाला, कभी बासी न पड़ने वाला रस भरने लगा। उनकी वाणी उसी रस में नहाकर, निखरकर निकलने वाली वाणी है। अमृत वाणी। अमृत पुरूष की अमृत वाणी।
अमृतत्व को उपलब्ध कर लेने वाला प्राण ही मृत्यु का मखौल उड़ा सकता है। बड़े साहस का काम है। कितना विचित्र है कि बड़े साहस का काम भी कबीर के लिये सहज है। हमारी परंपरा में जीवन को जानने वाले न जाने कितने लोग हैं। अमृतत्व को उपलब्ध भी अगणित महाप्राण न जाने कितने हैं। मगर कबीर अकेले हैं, जो कहते हैं – ‘‘हम न मरौं, मरिहैं संसारा।’’
कबीर कहते हैं कि हम नहीं मरेंगे। हम नहीं मरेंगे। हमें मरना नहीं है। इसलिये कि हमको हमेशा जीवित रहने वाला मिल गया है। हम हमेशा जीवित रहने वाले में मिल गये हैं। जीवन हमेशा जीवित रहने वाला है। जीवन में समाहित हो जाना ही न मरना है। व्यक्ति सत्ता का सार्वभौम सत्ता में विलीन हो जाना ही न मरना है। चेतना सार्वभौम है। सबमें है। सबकुछ में है। सर्वकाल में है। जो सबमें था, सबमें है, सबमें होगा, वही जीवन है। जीवन हमश्ेाा से है। हमेशा रहेगा। जीवन में होना हमेशा होना है। जीवन अमृत है। जीवन कभी नहीं मरता।
संसार मर जाता है। कबीर कहते हैं हम नहीं मरेंगे। संसार मर जायेगा। बड़ी अद्भुत बात है। आदमी मर जायेगा तो संसार नहीं मरेगा। संसार जिन्दा रहेगा, जीवित रहेगा। जागृत रहेगा। आदमी नहीं मरेगा तो संसार मर जायेगा। आदमी का न मरना संसार का मर जाना है, क्या?
हाँ, ऐसा ही है। संसार मनुष्यों के, प्राणियों के समुच्चय का नाम नहीं है। संसार प्राणियों के पारस्परिक सम्बन्ध का, पारस्परिक व्यवहार का वाचक है। संसार एक अवधारणा है। उधार की आँख है। वह भी अन्धी। बिना कोई मूल्य चुकाये मुफ्त में मिल गया प्रत्यय है। दूसरे के मूँड़ की उतारी गई गठरी है, जिसे दूसरे को ढोना है। भेद का बर्ताव है। अपने-पराये के भेद का, शत्रु-मित्र के भेद का, अच्छे-बुरे के भेद का, ऊँच-नीच के भेद का, स्त्री-पुरूष के भेद का, लाभ-हानि के भेद का, जय-पराजय के भेद का, कुलीन-अकुलीन के भेद का, ज्ञानी-अज्ञानी के भेद का बर्ताव संसार है। द्वैत का दृष्टिकोण ही संसार है। संसार सिर्फ एक दृष्टिकोण है।
अस्तित्व अभेद है। चेतना अभेद है। जीवन अभेद है। अस्तित्व की, चेतना की, जीवन की उपलब्धि होते ही भेद मिट जाता है। संसार मर जाता है। अभेद में स्थित होते ही भेद मर जाता है। भेद का मर जाना ही संसार का मर जाना है।
संसार मर जाता है। जीवन रह जाता है। जीवन में स्थिति रह जाती है।
कबीर जीवन की बात करते हैं। जीवन-स्थिति की बात करते हैं, जो जीवन को जानने की अभीप्सा रखता है उस अवधू से बात करते हैं। वह अवधू से अपने अवबोध की बात करते हैं।
कबीर कहते हैं कि जैसे ही दीपक जल उठा, दीपक के प्रकाश में मैंने प्रेम को पा लिया। जीवन में ही जीवन धन बैठा हुआ था। जीवनधन को पाते हीे सौभाग्य जाग उठा। सुहाग जाग उठा। सुहाग की सिन्दूरी रेखा का अरुणिम आलोक जगमगा उठा। जगममा उठा तो सारा का सारा अँधेरा मिट गया। संसार मिट गया। संसार खो गया। संसार हेरा गया। संसार कुछ नहीं था, सिर्फ अँधेरा था। अँधेरे का प्रतिभास था।
मैं प्रेमी था। प्रिय को ढूँढ रहा था। बेचैन था। अपार विरह था। अथाह पीड़ा थी। दारूण दाह था। आठों पहर का दाझणा सहा नहीं जाता था। अपना होना असहनीय हो उठा। प्रिय के बिना प्रेमी का होना, होना नहीं होता। मैं मृत्यु मांगने लगा।
मैं मृत्यु मांगने लगा, मुझे जीवन मिल गया। प्रिय मिल गया। प्रिय मिल गया तो प्रेमी गायब हो गया, प्रेमी विलीन हो गया प्रिय में। बिना प्रेमी के प्रिय कैसे होगा। प्रेमी नहीं रहा तो प्रिय भी नहीं रहा। प्रेमी और प्रिय दोनों चले गये जाने कहाँ, बस प्रेम रह गया। द्वैत समाहित हो गया अद्वैत में। द्रष्टा समाहित हो गया। देखने वाला दिखने वाले में समाहित हो गया। अब बस दृश्य है।
अब कुछ नहीं है। बस जो कुछ भी है मेरे लाल की लाली हैं। उसी की आभा है। उसी का प्रकाश है। उसी की ध्वनि है। उसी का अर्थ है। सबकुछ में वही है। सबमें वही है।
मैं अपने लाल की, अपने महत्तम की लाली देखने को, महत्ता देखने को उत्सुक था। आकुल था। मैं लाली में समाहित होकर लाल हो गया। महत्तम की महत्ता में समाहित होकर महत्ता बन गया। महत्ता में मृत्यु नहीं है, केवल जीवन है। जीवन में मृत्यु नहीं है, महत्ता है।
लघुता में मृत्यु है। संसार लघुता में है। संसार और कुछ नहीं, सिर्फ लघुता है। लघुता का अर्थ है। लघुता मिट जाने के लिये ही है। संसार मर जाने के लिये ही है। मुमुर्षु की उपासना व्यर्थ है। मुमुर्षु की आराधना अकारथ है।
हमारी आशा का केन्द्र जीवन है। हमारी अभ्यर्थना का आश्रय जीवन है। हमारे प्रकाश का श्रोत जीवन है। हमारे सुहाग की लाली जीवन है। जीवन ही सबकुछ है। अमृत है। पूर्ण है।
जीवन में जीवन की आराधना के लिये कबीर जीवन में अभीप्सा रखने वाले अवधू से कहते हैं- अवधू, जीवत में कर आसा।
जयंतीः रामविलास पासवान ने दलित व गरीबों का किया उत्थान
जगदीशसराय गांव स्थित पासवान बस्ती में धूमधाम से मनी जयंती
Young Writer, चंदौली। पूर्व केंद्र मंत्री स्वर्गीय रामविलास पासवान की जयंती बुधवार को जगदीशसराय गांव स्थित पासवान बस्ती में श्रद्धापूर्वक मनाई गई। इस दौरान बस्ती के लोगों ने उनके तैलचित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धा सुमन अर्पित किया। साथ ही दलितों के उत्थान में उनके द्वारा दिए गए योगदान व किए गए कार्यों को याद किया गया। इसके अलावा उनके दिखाए मार्ग पर चलने का संकल्प भी लिया।
इस दौरान सपा नेता दिलीप पासवान ने कहा कि स्वर्गीय रामविलास पासवान का जन्म बिहार के खगरिया जिले के साबरमनी गांव में अत्यंत गरीब परिवार में हुआ था। दलित परिवार में पैदा हुए रामविलास पासवान भारतीय राजनीतिक के प्रमुख नेताओं में से एक थे। वह 9 बार लोकसभा सांसद तथा दो बार राज्यसभा सांसद रहे। स्वर्गीय रामविलास पासवान 32 वर्षों में 11 चुनाव लड़ चुके थे और उनमें से नौ जीते। रामविलास पासवान जी एक ऐसे राजनेता थे जिन्होंने 6 प्रधानमंत्रियों के साथ काम करने का अनूठा रिकॉर्ड भी अपने नाम किया। उन्होंने देश के प्रधान रहे बीपी सिंह, एचडी देवगौड़ा, इंद्र कुमार गुजराल, अटल बिहारी बाजपेई, मनमोहन सिंह, नरेंद्र मोदी के साथ केंद्र की सरकार में रहते हुए दलित समाज व देश के गरीब व अशक्त वर्ग के उत्थान के लिए काम किया। उन्होंने खनिज मंत्री, केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री, रेल मंत्री, उपभोक्ता मामले के मंत्री व केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री जैसे महत्वपूर्ण दायित्वों का सफलतापूर्वक निर्वहन किया। अंत में सभी ने स्वर्गीय पासवान को पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। कहा कि दलित समाज के लिए उनके द्वारा दिए गए योगदान को भुलाया नहीं जा सकता। इस अवसरपर वंसराज पासवान, शिवपूजन पासवान, उमेश पासवान, महेंद्र पासवान, लक्ष्मण पासवान, जयप्रकाश पासवान, दिलीप पासवान, अरविंद पासवान, नीरज पासवान, विकास पासवान, अरुण पासवान, राजेश रंजन, शिवा पासवान आदि पासवान मौजूद रहे।
गंगा कटान से छिन रहा किसानों का खेत व मकानः मनोज डब्लू
फोटो-01
गंगा तट पर कटान की समस्या को देखते सपा नेता मनोज सिंह डब्लू।
बोले, गंगा कटान समस्या का समाधान करने में भाजपा के लोग नाकाम
चंदौली। समाजवादी पार्टी के दिग्गज नेता व सैयदराजा के पूर्व विधायक मनोज सिंह डब्लू मंगलवार को गंगा तट पर पहुंचे। इस दौरान झमाझम बारिश के बीच उन्होंने गंगा कटान की भयावता को देखा और स्थानीय किसानों व ग्रामीणों के दर्द को महसूस किया। उन्होंने नौ साल चंदौली बदहाल अभियान को गति देने हुए न केवल भाजपा के सांसद व सैयदराजा विधायक की नाकामियों को गिनाया और नशाना साधा। साथ ही गंगा कटान रोकने के अपने असफल प्रयास पर भी दुख जताया।



इस दौरान उन्होंने कहा कि बारिश का मौसम है और गंगा कटान से तटीय इलाके के किसान परिवार खौफजदा हैं क्योंकि हर बार की तरह इस बार भी कई किसानों के खेत गंगा की धारा में समा जाएंगे, वहीं कुछ का आशियाना भी कटान की भेंट चढ़ जाएगा। जैसा कि विगत कई वर्षों से होता चला आ रहा है। कहा कि जब मैं निर्वाचित होकर विधानसभा पहुंचा तो नया-नया था और मैंने गंगा कटान के मुद्दे को कई बार पुरजोर तरीके से उठाया। लेकिन अनुभव की कमी के कारण समस्या को सही तरीके से रख नहीं सका। मैंने गंगा कटान की बात की, लेकिन कभी भी उसमें जिला, विधानसभा व क्षेत्र का उल्लेख नहीं किया। इस कारण चंदौली में गंगा कटान को रोकने से जुड़ी मांग अधूरी रह गयी। कहा कि वर्तमान में सांसद व सैयदराजा विधायक को जनता के बीच आकर यह बताना चाहिए गंगा कटान को रोकने के लिए क्या प्रयास किए। लेकिन वह ऐसा करने की बजाय जनहित में समस्या को उठाने वालों पर आईटीसेल के जरिए व्यक्तिगत हमला करने का काम कर रहे हैं जो दुखद व दुर्भाग्यपूर्ण है। कहा कि जनहित के मुद्दों पर भाजपा की पोल खोलने से सत्ता पक्ष के कई नेताओं के पेट में दर्द हो रहा है। जनता को जागरूक होता देख उसके पेसानी पर बल पड़ने लगा है। ऐसी में चंदौली जनपद में भाजपा का आईटी सेल सक्रिय हो गया है। यह भी कहा कि गंगा कटान से तटीय इलाके के किसानों व ग्रामीणों को निजात दिला पाना भाजपा के नेताओं की बस की बात नहीं है। भरोसा दिया कि विधायक बनने के बाद गंगा कटान जैसी गंभीर समस्या के निराकरण के लिए प्राथमिकता के साथ काम होगा, ताकि किसी का घर-मकान व खेत-खलिहान कटान की जद में आकर गंगा में समाहित ना हो सके।
Chandauli: जिला उद्यान अधिकारी अल्का श्रीवास्तव को दी विदाई
Young Writer, चंदौली। जिला उद्यान कार्यालय में मंगलवार को विदाई समारोह का आयोजन किया गया। इस दौरान जिला उद्यान अधिकारी अल्का श्रीवास्तव के बलिया स्थानान्तरण पर कार्यालय के कर्मियों व जनपद के अलग-अलग हिस्सों से आए किसानों ने बुके देकर भावभीनी विदाई दी और उन्हें एक अच्छा अधिकारी बताया। कहा कि उन्होंने सरकार की योजनाओं को अधिक से अधिक किसानों तक पहुंचाकर उन्हें लाभान्वित करने का काम किया। साथ ही समय-समय पर योजनाओं की जानकारी देकर किसानों को जागरूक भी किया।
विदित हो कि अल्का श्रीवास्तव ने बतौर जिला उद्यान अधिकारी दो वर्ष का कार्यकाल जनपद में पूरा किया। इस दौरान वे विभागीय योजनाओं को जनपद के किसानों तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयासरत रहीं। इस दरम्यान कार्यालय के कर्मचारियों के प्रति भी उनका स्वभाव सहयोगात्मक रहा और उन्हें विभाग के मुखिया होने के नाते महकमे का कुशल नेतृत्व भी किया। इसके साथ-साथ किसानों की समस्या का कार्यालय स्तर पर समाधान करने के साथ ही योजनाओं को सीधे किसानों तक पहुंचाकर शासन के मंशा के अनुरूप अपने दायित्वों का निर्वहन किया। ऐसे में शासन स्तर से उनका तबादला बलिया जनपद होने की सूचना के बाद मंगलवार को कार्यालय में विदाई समारोह रखा गया। जिसमें कार्यालय के कर्मचारियों के साथ ही किसानों ने बुके आदि प्रदान कर विदाई दी। साथ ही उनके कार्यकाल को सदैव हम सभी याद रखेंगे। इस अवसर पर अनुराग सिंह, शुभेंद्र सिंह, शिवम सिंह लकी, धर्मेंद्र मिश्रा, अंकित यादव, हरिश्चंद्र पटेल व अन्य विभागीय कर्मचारी मौजूद रहे।
Chandauli: आम बीनते समय किशोर का फिसला पैर कुएं में गिरकर मौत,परिजनों में कोहराम
नौगढ़। चकरघट्टा थाना क्षेत्र के मझगावां नई बस्ती गांव में सोमवार को आम बीनते समय पैर फिसलने से एक किशोर कुएं में गिर गया। शोर मचाने पर जुटे आस पास के लोगो ने तत्काल किशोर को कुएं से बाहर निकलकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया जहा चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। किशोर के मौत की खबर सुनते ही परिजनों में कोहराम मच गया।
बताते हैं कि मझगावां गांव निवासी रमेश कुमार का इकलौता पुत्र रुद्र कुमार 13 वर्ष अपने साथियों के साथ सुबह अपने घर से कुछ ही दूरी पर मौजूद पेड़ से गिरे हुए आम को बीनने मे मशगूल था। उसी दौरान उसका पैर फिसल गया। और वो समीपवर्ती कुआं में जा गिर गया। जिसे देख उसके साथियों ने शोर मचाना शुरू कर दिया शोरगुल सुनकर मौके पर जुटे ग्रामीणों ने तत्काल रुद्र को कुएं से बाहर निकालकर 108 एंबुलेंस की सहायता से सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र भर्ती कराया। जहां पर चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। ग्रामीणों ने बताया कि मृतक रूद्र कुमार निवासी रमेश कुमार का एकलौता पुत्र था। एकलौते पुत्र की मौत हो जाने की जानकारी मिलते ही माता गूड्डी देबी दहाड़े मारकर रोते हुए बार बार गश खाकर गिर जा रही है। छोटी बहन रीतिका 7 वर्ष व रिया 4 वर्ष टकटकी लगाए भाई के शव से लिपटकर बेसुध हाल में पड़ी थी। वही सूचना के आधार पर सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पहुंची चकरघट्टा थाना पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए जिला चिकित्सालय भेज दिया। थानाध्यक्ष राजेश कुमार ने बताया कि कुएं मे गिरने से रूद्र कुमार 13 वर्ष की मौत हो जाने की मिली सूचना पर पुलिस अग्रिम कार्यवाही में जूट गई है।
गंगा में स्नान करने गए दो युवक डूबे, एक की मौत
धानापुर। क्षेत्र के नरौली गंगा तट पर कस्बा निवासी दो युवक सोमवार को गंगा में डूब जाए, जिसमें एक की मौत हो गई। वहीं दूसरे युवक को मल्लाहों ने बचा लिया। मौके पर पहुंची पुलिस ने दोनों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले गई, जहां चिकित्सकों ने आफताब को मृत घोषित कर दिया। इसके बाद पुलिस ने शव का पंचनामा कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
बताया जाता है कि कस्बा स्थित धाना शहीद मोहल्ला निवासी समीर 15 वर्ष पुत्र जाकिर और आफताब 16 वर्ष पुत्र नसीम दोनों दोस्त हैं जो गंगा में स्नान करने नरौली गए। स्नान के दौरान वह गहराई में चले गए और डूबने लगे, जिसे देखकर पास में मछली मार रहे मल्लाहों ने बचाने का प्रयास किया, लेकिन तब तक दोनो डूब गए थे। ढूढने के कुछ देर बाद बेहोशी हालत में समीर को बाहर मल्लाहों ने निकाल लिया और आफताब को ढूढने लगे। सूचना के बाद मौके पर पहुंचे थानाध्यक्ष ने तत्काल आफताब को सामुदायिक स्वस्थ केंद्र पहुंचाया। लगभग एक घंटे बाद आफताब को भी ढूंढ लिया गया, जिसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया जहां डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया। घटना की जानकारी होते ही परिजनों में कोहराम मच गया बदहवास अवस्था में गंगा के किनारे रोते बिलखते परिजन पहुंचे।
किसानों को कोल्ड स्टोरेज व कृषि महाविद्यालय की दरकारः मनोज डब्लू
आरोप, राजनीतिक स्वार्थ के लिए बर्बाद कर दिए जनता 6.66 करोड़ रुपये
चंदौली। सैयदराजा के पूर्व विधायक मनोज सिंह डब्लू नौ साल चंदौली बदहाल अभियान की कड़ी में सोमवार को माधोपुर स्थित इंडो-इजराइल पद्धति पर तैयार किए जा रहे सब्जी अनुसंधान केंद्र पहुंचे। इस दौरान उन्होंने वहां का जायजा लिया और एक बार फिर सैयदराजा के विधायक समेत सांसद व भाजपा के जनप्रतिनिधियों पर निशाना साधा। कहा कि यदि चंदौली जिले के बड़े दुर्भाग्य की बात है कि कृषि प्रधान जनपद में आज तक कृषि की पढ़ाई को कोई बंदोबस्त नहीं हो सका है। यह स्थानीय जनप्रतिनिधियों की नाकामी और सरकार के किसान विरोधी होने का प्रमाण है।



उन्होंने कहा कि इंडो-इजराइल सब्जी अनुसंधान केंद्र की स्थापना मात्र छलावा है। क्योंकि भाजपा के सांसद व विधायक को माधोपुर में बन रहे राजकीय मेडिकल कालेज को यहां से ले जाना था। ऐसे में आक्रोशित जनता को भ्रमिक करने के लिए यह षड्यंत्र किया गया। स्थिति यह है कि इस अनुसंधान केंद्र के लाभ से जनपद व यहां के किसान वंचित है। 6.66 करोड़ की लागत से अनुसंधान को स्थापित किया गया। यह जानकर आश्चर्य होगा कि जिस भूमि पर इंडो-इजराइज सब्जी अनुसंधान केंद्र को स्थापित किया है वह उसर की जमीन है। आरोप लगाया कि अपने राजनीति स्वार्थ को साधने के लिए जनता के 6.66 करोड़ रुपये भाजपा के नेताओं ने बर्बाद कर दिया। कहा कि इसी पैसे से यदि सरकार व सरकार के नुमाइंदे जनपद चंदौली में एक कोल्ड स्टोरेज की स्थापना कर देते तो स्थानीय किसानों के लिए यह एक बड़ी मदद होती। किसान यहां शिमला मिर्च, हरी सब्जियां आदि की बेहतर पैदावार करने की दक्षता व क्षमता रखते हैं, लेकिन कोल्ड स्टोरेज होने के अभाव में वह बड़े पैमाने पर इन सब्जियों की खेती करने की हिम्मत नहीं जुटा पाते। यदि ऐसा होता तो आज जनपद में सब्जियों के दाम जो आसमान छू रहे हैं। महंगाई ने मध्यम व गरीब वर्ग के रसोईघर का बजट बिगाड़ रखा है। यदि कोल्ड स्टोरेज की स्थापना का सपना पूरा हो गया होता तो जनपद में महंगाई इस कदर आमजन को परेशान नहीं करती। साथ ही बीएससी एग्रीकल्चर व एमएससी एग्रीकल्चर की पढ़ाई के महाविद्यालय की स्थापना आवश्यक है, ताकि युवा पढ़-लिखकर खेती-किसानी में आधुनिक संसाधनों व उन्नतशील बीजों का प्रयोग कर बेहतर पैदावार से अच्छी आय अर्जित कर जनपद का नाम रौशन करने के साथ ही अपनी आर्थिक स्थिति को बेहतर और सुदृढ़ बना सके।
Chandauli:अल्पसंख्यक हितों के लिए योजनाएं संचालित कर रही सरकार:दानिश आजाद
चंदौली। अल्पसंख्यक कल्याण एवं वक्फ राज्यमंत्री दानिश आजाद अंसारी शनिवार को जनपद दौरे पर रहे। उन्होंने मुख्यालय स्थित पीडब्लूडी गेस्ट हाउस में विभागीय योजनाओं व कार्यों की समीक्षा किया। साथ ही मदरसा आधुनिक शिक्षकों व कार्यकर्ताओं से संवाद स्थापित किया।
इस दौरान उन्होंने ने कहा कि केंद्र व राज्य सरकार सबका साथ, सबका विश्वास एवं सबका विकास के मूलमंत्र के तहत अल्पसंख्यक हितों के लिए योजनाएं संचालित की जा रही है। अल्पसंख्यक बाहुल्य क्षेत्र में प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम से लाभांवित करने का काम किया जा रहा है। वहीं प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना, नि:शुल्क राशन वितरण, प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री आवास योजना में अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को भी लाभांवित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मदरसों का आधुनिकरण किया जा रहा है। ताकि अल्पसंख्यक बच्चे दीनी तालीम के साथ ही आधुनिक शिक्षा प्राप्त कर सकें। इस मौके पर इस मौके पर जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी सुधांशु शेखर शर्मा सहित अन्य विभागीय अधिकारी व कर्मचारियों के साथ ही आधुनिक शिक्षक गुफरान खान इमरान सिद्दीकी, अब्दुल सलाम, लईक अहमद, इकबाल अहमद, इरशाद, तनवीर, रिजवान, नेहाल आदि उपस्थित रहे।
गड्ढामुक्त सड़क के सरकारी दावे की पोल खोल रहे गड्ढेः मनोज डब्लू
पदयात्रा कर एक्सईएन पीडब्ल्यूडी से जवाब-तलब करेंगे मनोज सिंह डब्लू
Young Writer, चंदौली। समाजवादी पार्टी के फायर ब्रांड नेता मनोज सिंह डब्लू का नौ साल चंदौली बदहाल अभियान शनिवार को भी जारी रहा। इस दौरान उन्होंने पांचवे दिन मुगलसराय से भूपौली होते हुए चहनियां तक गई सड़क का जायजा लिया। साथ ही सड़क की बदहाली पर आक्रोश व्यक्त किया। कहा कि यह कोई गांव की सड़क नहीं बल्कि मिनीमहानगर मुगलसराय को भूपौली व चहनियां से जोड़ने वाली प्रमुख सड़क है, जो गाजीपुर जाने वालों का समय भी बचाती है। अब सवाल यह है कि गड्ढामुक्त सड़क का दावा करने वाली सरकार में ये सड़क बदहाल क्यों है?
उन्होंने कहा कि मुगलसराय-चहनियां मार्ग की बदहाली पर विभार्गीय एक्सईएन सवाल करने के लिए वह छह जुलाई को चहनियां से मुगलसराय तक पैदयात्रा करेंगे। इसे लेकर उन्होंने अपने वीडियो संदेश में रास्ते के अगल-बगल के गांवों के प्रधानों, पूर्व प्रधानों, भावी प्रधानों के साथ ही जिला पंचायत सदस्यों, पूर्व सदस्यों, क्षेत्र पंचायत सदस्य, बीडीसी का चुनाव लड़ चुके प्रत्याशियों, सकलडीहा विधायक को भी पदयात्रा में शामिल होकर मुगलसराय कूच करने का आह्वान किया, ताकि वहां पीडब्ल्यूडी कार्यालय पहुंचकर सड़क की बदहाली से जुड़ा सवाल किया जा सके। उन्होंने कहा कि सड़क आमजनता के जीवन की लाइफ-लाइन मानी जाती है।
सड़क यदि अच्छी हो तो वह न केवल समय बचाती है, बल्कि यात्री को सुरक्षित गंतव्य तक पहुंचाती है, लेकिन जब यही सड़क निगरानी व मरम्मत के अभाव में क्षतिग्रस्त हो जाती है तो यह न केवल परेशानी व दुश्वारियों का सबब बन जाती है, बल्कि लोगों के लिए खतरनाक व जानलेवा भी हो जाती है। कुछ ऐसा ही हाल मुगलसराय-भूपौली मार्ग का है जो लम्बे समय से क्षतिग्रस्त हाल में पड़ी है। इस कारण कई लोग हादसों में हताहत हो चुके हैं। बावजूद इसके भाजपा सरकार अपने दावों के अनुरूप सड़क का निर्माण कराने में विफल रही है। दूसरी ओर नौ साल बेमिसाल के नारे के साथ गांवों में जाकर झूठ व भ्रम को फैलाने का काम भाजपा नेताओं द्वारा किया जा रहा है।
कहा कि जनहित से जुड़े इस मुद्दे पर जनता की लड़ाई, जनता के सहयोग से लड़ी जाएगी। छह जून को सुबह छह बजे पदयात्रा शुरू होगी और मुगलसराय पीडब्ल्यूडी दफ्तर पहुंचकर एक्सईएन से जवाब-तलब होगा। कहा कि सपा सरकार में गांवों को शहरों से जोड़ने के लिए सड़कों को बेहतर बनाने की दिशा में प्रभावी तरीके से काम हुआ था, ताकि गांव के किसानों को शहरों की मंडी से जोड़ा जा सके। इसके पीछे मंशा यह थी कि किसान अपनी उपज को कम समय में सीधे मंडी तक पहुंचाकर अपनी उपज के बदले अच्छा आय अर्जन कर सके।











