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Saturday, September 26, 2026

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परंपराओं को बदलने वाले लेखक थे डा. शिवप्रसाद सिंह

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साहित्यकारों ने पर डा. शिवप्रसाद सिंह को किया याद‚ गोष्ठी में रचनाओं पर डाली रौशनी
Young Writer, इलिया। राष्ट्रीय चेतना प्रकाशन के तत्वावधान में प्रख्यात साहित्यकार डा. शिवप्रसाद सिंह के जयंती अवसर पर शुक्रवार को उनकी स्मृति में संगोष्ठी का आयोजन ललित निबंधकार डा. उमेश प्रसाद सिंह के खखड़ा स्थित आवास पर हुई। उक्त गोष्ठी में उपन्यासकार रामजी प्रसाद ‘भैरव’ ने कहा कि अपनी रचनाओं में डा. शिवप्रसाद सिंह ने परिवेश में हो रहे बदलाव के साक्षी बने। वे परम्पराओं के पीछे चलने वाले नहीं बल्कि परम्पराओं को बदलने वाले लेखक थे।
एल. उमाशंकर सिंह ने बताया कि डा. शिवप्रसाद सिंह की रचनाओं में जीवन की समस्त विद्रूपताओं को उघारने की अद्भुत क्षमता है। साथ ही उनके साहित्य में जीवन के प्रति आस्था के संकेत भी प्रमुखता से मिलते हैं। अध्यक्षता करते हुए डा. उमेश प्रसाद सिंह ने उन्हें ग्रामीण जीवनबोध की महत्ता का प्रकाशक रचनाकार के रूप में स्थापित किया है। कवि व विचारक डा. रामप्रकाश कुशवाहा ने कहा कि गुणवत्ता, प्रतिमान और परिमाण की दृष्टि से शिवप्रसाद सिंह हिन्दी के अतिविशिष्ट और अनन्य साहित्यकार हैं। डा. गौतम ने कहा कि डा. शिवप्रसाद सिंह ने अपने विपुल एवं विवध साहित्य से साहित्य परंपरा में नया शिखर स्थापित किया है। कवि एवं जनसत्ता के पूर्व वरिष्ठ संपादक राजेंद्र राजन ने कहा कि शिवप्रसाद सिंह ने न सिर्फ हिन्दी के एक बड़े लेखक हैं, बल्कि वे आलोचना के सामने एक कड़े सवाल भी हैं। डा. शैलेन्द्र कुमार सिंह ने कहा कि शिवप्रसाद सिंह लोक संस्कृति के माध्यम से अपने समय में सार्थक हस्तक्षेप करते हैं। कार्यक्रम में किसान विकास मंच के संयोजक रामअवध सिंह, चंद्रप्रभा साहित्य मंच के अध्यक्ष बेचई सिंह आदि उपस्थित रहे। धन्यवाद ज्ञापन चेतना मंच के निदेशक डा. विनय कुमार वर्मा ने किया।

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