चंदौली। अज़ाखाना-ए-रज़ा में आयोजित दूसरे मुहर्रम की मजलिस में मौलाना जाफ़र रिज़वी ने अज़ादारों को संबोधित करते हुए कहा कि इमाम हुसैन का ज़िक्र और मजलिसों का उद्देश्य दुनिया के सामने इस्लाम की सही तस्वीर पेश करना है। उन्होंने कहा कि इस्लाम का मूल संदेश इंसानियत, उदारता और एकता है। लेकिन समय के साथ मुसलमान विभिन्न फ़िरक़ों में बंटते चले गए। जिससे इस्लामी शिक्षाएं पीछे छूट गईं। उन्होंने कहा कि क़ुरआन में फ़िरक़ापरस्ती की निंदा की गई है और इसे बड़ा गुनाह बताया गया है।
मौलाना ने करबला की घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि इमाम हुसैन ने सत्ता के लिए नहीं, बल्कि इस्लाम के सिद्धांतों और मानवता की रक्षा के लिए अपनी कुर्बानी दी। उन्होंने बताया कि मक्का से निकलते समय हजारों लोग उनके साथ थे, लेकिन सच्चे मकसद के लिए जान देने का संकल्प रखने वाले केवल 72 साथी ही करबला तक पहुंचे।मजलिस में मायल चंदौलवी, वकार सुल्तानपुरी और शहंशाह मिर्जापुरी समेत कई शायरों और पेशख्वानों ने अपने कलाम पेश किए। दुल्हीपुर से आई अंजुमन यादगारे हुसैनी ने पारंपरिक मातम पेश कर इमाम हुसैन को खिराज-ए-अकीदत अर्पित किया। अज़ाखाना के प्रबंधक डॉ. सैयद गजन्फर इमाम ने बताया कि मुहर्रम की पांचवीं तारीख को अलम और ताबूत का जुलूस निकाला जाएगा। जिसमें सभी धर्मों के लोग शामिल होंगे।

