चंदौली। अज़ाखाना-ए-रज़ा में आयोजित मजलिस में मौलाना जाफ़र अली रिज़वी ने इस्लाम के शांति, इंसानियत और भाईचारे के संदेश पर जोर देते हुए कहा कि धर्म में हिंसा, आतंक और नफरत के लिए कोई स्थान नहीं है। उन्होंने कहा कि मुसलमान का आचरण ऐसा होना चाहिए कि उसके पड़ोसी तक को किसी प्रकार की ठेस न पहुंचे। उन्होंने बताया कि इस्लाम प्रेम, करुणा, ईमानदारी और मानव सेवा की शिक्षा देता है तथा आतंक और हिंसा का रास्ता अपनाने वालों का इस्लाम की मूल शिक्षाओं से कोई संबंध नहीं है।
मौलाना ने कहा कि मुहर्रम केवल शोक का महीना नहीं, बल्कि सब्र, त्याग और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने का प्रतीक है। उन्होंने कर्बला की घटना और इमाम हुसैन (अ.) की कुर्बानी को इंसानियत के लिए प्रेरणास्रोत बताया। मजलिस में जनाबे सकीना के मसायब बयान किए गए, जिसे सुनकर अज़ादारों की आंखें नम हो गईं। इस अवसर पर अंजुमन अब्बासिया के नन्हें अज़ादारों सहित विभिन्न अंजुमनों ने नौहाख्वानी और मातम कर शोहदाए कर्बला को खिराज-ए-अकीदत पेश किया। अंत में देश और प्रदेश में अमन, शांति और भाईचारे के लिए विशेष दुआ की गई।

