चंदौली। चकिया तियरी स्थित कृषि महाविद्यालय में इफको की ओर से कृषि छात्रों के लिए नैनो उर्वरक विषय पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों को आधुनिक कृषि तकनीकों, नैनो उर्वरकों के वैज्ञानिक उपयोग तथा टिकाऊ खेती के प्रति जागरूक करना था। इस दौरान विशेषज्ञों ने नैनो डीएपी (DAP) के प्रयोग, उसके लाभ और पारंपरिक उर्वरकों की तुलना में उसकी उपयोगिता के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
कार्यक्रम में छात्रों को नैनो डीएपी द्वारा बीज शोधन की वैज्ञानिक विधि का प्रदर्शन किया गया। साथ ही खरीफ की प्रमुख फसल धान में जड़ शोधन की प्रक्रिया भी व्यावहारिक रूप से समझाई गई। इफको के प्रतिनिधि एम सिंह ने कहा कि इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य छात्रों को नैनो उर्वरकों के प्रति जागरूक करना है। उन्होंने बताया कि अधिकांश छात्र कृषि परिवारों से जुड़े हैं। इसलिए वे आधुनिक तकनीकों को अपनाकर मिट्टी की उर्वरता को सुरक्षित रखते हुए कम लागत में अधिक उत्पादन और बेहतर लाभ प्राप्त कर सकते हैं। इन तकनीकों को अपनाने से पौधों की वृद्धि बेहतर होती है उर्वरकों का संतुलित उपयोग होता है तथा खेती की लागत में कमी आती है। इसके अलावा ड्रोन के माध्यम से फसलों पर उर्वरकों एवं अन्य कृषि रसायनों के छिड़काव की आधुनिक तकनीक, उसकी लागत, समय की बचत और श्रम में कमी जैसे लाभों की भी दी उन्होंने यह भी जानकारी दी कि जल्द ही छात्रों के बीच “इफको नैनो तरल से लाभ” विषय पर लेख प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। प्रतियोगिता का उद्देश्य मृदा संरक्षण, उर्वरकों के संतुलित उपयोग तथा कृषि लागत में कमी के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्रों को इफको की ओर से सम्मानित एवं पुरस्कृत किया जाएगा।

