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Tuesday, July 7, 2026

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मनोज डब्लू ने तेलंगाना स्टेट से दिखाया चंदौली के नेताओं को विकास का आईना

मनोज डब्लू ने तेलंगाना स्टेट से दिखाया चंदौली के नेताओं विकास का आईना
तेलंगाना स्टेट के संगारेड्डी जिला स्थित राजकीय मेडिकल कालेज का दौरा करते मनोज सिंह डब्लू।

संगारेड्डी जिले के राजकीय मेडिकल कालेज का भ्रमण की विकास के मुद्दे पर चंदौली सांसद व सैयदराजा विधायक पर साधा निशाना

Young Writer, चंदौली। समाजवादी पार्टी के फायर ब्रांड नेता और पूर्व विधायक सैयदराजा मनोज सिंह डब्लू चंदौली मेडिकल कालेज के मुद्दे पर एक बार फिर चंदौली के सांसद व केंद्रीय मंत्री डा.महेंद्रनाथ पांडेय के साथ ही सैयदराजा विधायक सुशील सिंह पर हमलावर नजर आए। सपा नेता तेलंगाना स्टेट के संगारेड्डी के मेडिकल कालेज का दौरा कर वहां से चंदौली के राजनेताओं को आईना दिखाया और उनकी कार्य प्रणाली पर कई गंभीर सवाल खड़े किए।
उन्होंने कहा कि तेलंगाना स्टेट का संगारेड्डी जिला 2016 में सृजित हुआ और आज यहां राजकीय मेडिकल कालेज बनकर आमजन को समर्पित हो चुका है। विकास का यह आईना मात्र संगारेड्डी जिले में ही नहीं बल्कि तेलंगाना स्टेट के 33 जिलों में देखने को मिलेगा, जहां 33 राजकीय मेडिकल कालेज आमजन को समर्पित है और मेडिकल की पढ़ाई में महत्वपूर्ण संसाधन की भूमिका अदा कर रहे हैं। बात डबल इंजन की सरकार वाले यूपी की करें तो चंदौली 1997 में सृजित हुआ, लेकिन चंदौली का विकास आज भी शैशवावस्था में है। चंदौली में मेडिकल कालेज के नाम पर सिर्फ और सिर्फ राजनीति हो रही है और यहां की जनता को छला जा रहा है। राजकीय मेडिकल कालेज के निर्माण के बड़े-बड़े दावे किए गए, लेकिन कुछ दिनों पहले यह जानकारी सामने आई कि मेडिकल कालेज अब राजकीय नहीं रहा है। यह बार अलग है कि जिला प्रशासन व भाजपा सरकार मेडिकल कालेज का बोर्ड लगाकर चंदौली की जनता को आज भी छल रहा है। इसके लिए किसे दोषी कहा जाए समझ नहीं आ रहा? मेडिकल कालेज का निर्माण के बड़े-बड़े दावे करने वाले सांसद डा.महेंद्रनाथ पांडेय या फिर सैयदराजा विधायक। कहा कि केंद्रीय मंत्री व सांसद डा.महेंद्रनाथ पांडेय तेलंगाना स्टेट के प्रभारी है। ऐसे में उन्हें यहां के किसी भी जिले का भ्रमण कर विकास को देखने की जरूरत है।

घोर लापरवाहीः नाली बनाई और मलबे को सड़क पर छोड़ गया ठेकेदार

घोर लापरवाहीः नाली बनाई और मलबे को सड़क पर छोड़ गया ठेकेदार
बिछियां कला गांव स्थित सीसी रोड पर ठेकेदार द्वारा छोड़ा गया मलबा।

हाल चंदौली कलेक्ट्रेट से सटे बिछियां कला गांव स्थित सीसी रोड का

Young Writer, चंदौली। कलेक्ट्रेट से सटे बिछियां कला गांव के ग्रामीणों को आवागमन में भारी दिक्कतें हो रही है। सीसी रोड के साथ ही नाली निर्माण के लिए ठेकेदार द्वारा खोदी गयी गड्ढे का मलबा विगत एक पखवारे से सड़क पर पड़ा है। जिस कारण बारिश होने से चारों ओर मलबा कीचड़ के रूप में फैल जा रहा है। ऐसे में जहां पैदल आवागमन में दिक्कत हो रही है, वहीं आसपास सके घरों में बारिश के पानी के साथ कीचड़ बहकर घुस जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण के वक्त ठेकेदार से मलबा हटाने की बात कही गयी, लेकिन उसने अनसुना कर दिया। ऐसे में ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर पीडब्ल्यूडी विभाग से इसकी शिकायत करते हुए मलबे को हटाने की मांग की है।

घोर लापरवाहीः नाली बनाई और मलबे को सड़क पर छोड़ गया ठेकेदार

विदित हो कि बिछियां कला गांव में नेशनल हाइवे से अंडर पास तक सीसी रोड निर्माण के साथ ही नाली का निर्माण कार्य कराया जा रहा है। ठेकेदार द्वारा एक पखवारा पहले नाली का निर्माण कार्य करने के लिए सड़क किनारे खोदाई की गई और मलबे को सड़क पर छोड़ दिया। नाली का निर्माण हुए 10 दिन बीत गए। बावजूद इसके ठेकेदार द्वारा मलबे को सड़क से हटाया नहीं गया, जिससे बारिश होने पर मलबा सड़क पर कीचड़ के रूप में बहकर फैल गया है। मुख्य मार्ग होने के कारण पूरे दिन जाम की स्थिति बनी रहती है, वहीं आसपास के लोगों को आवागमन में दिक्कत हो रही है। कई लोगों के दरवाजे पर मलबे को निकालकर छोड़ दिया गया है, जिससे ग्रामीणों को अपने ही घर में आने-जाने में दिक्कत हो रही है। स्थिति इतनी खराब है कि बारिश के दौरान मलबा पानी के साथ बहकर घर में घुस रहा है। इससे जहां गंदगी की समस्या उत्पन्न हो गयी है वहीं दुर्गंध से भी ग्रामीणों को परेशानी हो रही है। कई लोग गिरकर चोटिल हो गए है। हम सभी ग्रामीणों की सुनने वाला कोई नहीं है। ठेकेदार की मनमानी व लापरवाही से पीडब्ल्यूडी विभाग के साथ ही यूपी सरकार की छवि खराब हो रही है। अशफाक हैदर, अरविंद पासवान, विकास कुमार, अभिषेक कुमार व शैलेंद्र कुमार गुप्ता ने पीडब्ल्यूडी विभाग से मांग किया कि बिछियां कला गांव में सीसी रोड के ऊपर पड़े मलबे को हटाने का आदेश संबंधित ठेकेदार को दें। साथ ही उसके कड़े दंड से दंडित किया जाए, ताकि उसके इस कृत्य से आमजन को परेशानी न उठानी पड़े।

Chandauli के विकास के प्रति जनप्रतिनिधि व सरकार उदासीन

Chandauli के विकास के प्रति जनप्रतिनिधि व सरकार उदासीन
चंदौली कचहरी में न्यायालय निर्माण के लिए धरना-प्रदर्शन करते अधिवक्ता।

चंदौली न्यायालय निर्माण को लेकर अधिवक्ताओं ने शुरू किया आंदोलन

Young Writer, चंदौली। संयुक्त बार एसोसिएशन के आह्वान पर चंदौली के अधिवक्ता शनिवार को दीवानी न्यायालय भवन निर्माण व मुख्यालय के सर्वांगीण विकास के लिए लामबंद नजर आए। इस दौरान जिला न्यायालय एवं मुख्यालय निर्माण संघर्ष समिति के तत्वावधान में अधिवक्ताओं ने तहसील परिसर में धरना-प्रदर्शन किया। इसके पूर्व जुलूस निकालकर पूरे कचहरी का चक्रमण किया और जिला प्रशासन व जनप्रतिनिधियों के विरोध में जमकर नारेबाजी की।

इस दौरान अध्यक्ष जय प्रकाश सिंह ने सरकार व जनप्रतिनिधियों द्वारा जिले के विकास के प्रति उपेक्षात्मक रवैये पर आक्रोश व्यक्त किया गया। आरोप लगाया कि जनपद का सृजन हुए 26 वर्ष हो गए, किन्तु आज तक जिला स्तरीय कोई भी कार्यालय जनपद चंदौली में नहीं बना। दीवानी न्यायालय भवन हेतु जमीन उपलब्ध होने के बाद भी सरकार द्वारा आज तक निर्माण कार्य प्रारंभ नहीं किया गया, जिससे न्यायिक अधिकारियों, वादकारियों व अधिवक्ताओं को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इन मांगों को लेकर अधिवक्ताओं ने लगातार पत्राचार कर शासन-प्रशासन को अववगत कराया। साथ ही उच्च न्यायालय से मिलकर आवाज उठाते रहे। बावजूद इसके आज तक कोई कार्यवाही नहीं की गई और ना ही समस्याओं के प्रति शासन-प्रशासन की कोई सतर्कता व सक्रियता ही नजर आई। ऐसी स्थिति में मजबूरन अधिवक्ताओं को जनहित के इस अतिमहत्वपूर्ण मुद्दे को लेकर धरना-प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होना पड़ रहा है। अंत में सिविल बार अध्यक्ष चन्द्रभानु सिंह ने शासन-प्रशासन को चेताया कि जनहित में इन मांगों को अविलंब पूरा किया जाए अन्यथा आने वाले समय में धरना-प्रदर्शन को और प्रभावी ढंग से किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी। इस अवसर पर मुरलीधर सिंह, पंचानन पांडेय, अनिल सिंह, झन्मेजय सिंह, योगेश सिंह, शहाबुद्दीन, शमशुद्दीन, सुल्तान अहमद, पंकज तिवारी, भूपेंद्र सिंह आदि ने अपने विचार रखें। संचालन राज बहादुर सिंह, अनिल सिंह व राकेश रत्न तिवारी ने किया।

महेशपुर में विद्‍यालय की दरकार‚ पढ़ने के लिए तीन किलोमीटर दूर जाने को बच्चे मजबूर

महेशपुर में विद्‍यालय की दरकार‚ पढ़ने के लिए तीन किलोमीटर दूर जाने को बच्चे मजबूर
महेशपुर में ध्वस्त बिद्यालय को दिखाते प्रधान।

विगत एक वर्ष पूर्व ध्वस्त किया बिद्यालय का नही हुआ निर्माण

Young Writer, चहनियां। क्षेत्र के ग्राम सभा रानेपुर के महेशपुर में बना जर्जर प्राथमिक विद्यालय को पिछले वर्ष दिसम्बर में ध्वस्त करा दिया गया था। जिसका निर्माण अभी तक नही हुआ। ऐसी स्थिति में छात्र-छात्राएं तीन किलोमीटर दूर पढ़ने को मजबूर है।
विदित हो कि महेशपुर गांव में बना प्राथमिक बिद्यालय जर्जर हो चुका था। छत का चप्पड़, ईट व पटिया बच्चों के ऊपर गिर रहा था। जिसे पिछले वर्ष अगस्त 2022 में बिद्यालय के बच्चांे को शिफ्ट कर दिया। इसके बाद दिसम्बर में जिसे ध्वस्त भी कर दिया गया। इस बिद्यालय में करीब सौ बच्चे पढ़ते थे। जिन्हें तीन किलोमीटर दूर भगवानपुर जाना पड़ता है। प्रधान अवधेश कुमार ने बताया कि इस बिद्यालय को दिसम्बर में ही ध्वस्त कर दिया गया। विभाग द्वारा बिना सूचना दिये ही बिद्यालय को तोड़ दिया गया। सात माह बीतने के बाद भी पैसा नही आया। बिद्यालय के बच्चे तीन किलोमीटर दूर पगडंडियों के रास्ते से भगवानपुर में पढ़ने जाते है। इस समस्या से संबंधित महकमे के अधिकारी अवगत हैं। बावजूद इसके निर्माण में देरी किया जा रहा है। जबकि सरकार प्राथमिक विद्यालयों में पठन पाठन के लिए कई तरह से अभियान चला रही है। प्रधान ने चेतावनी दिया कि यदि निर्माण में देरी हुई तो ग्रामीणों संग धरना पर बैठने को मजबूर होंगे।

Crime : आनलाइन गेम के चक्कर में युवक ने पिता से ही मांग ली फिरौती

Crime : आनलाइन गेम के चक्कर में युवक ने पिता से ही मांग ली फिरौती
अपने अपहरण की साजिश रचने वाला युवक अमित यादव।

प्रसहटा के युवक ने अपने ही अपहरण की रची झूठी साजिश

Young Writer, धानापुर‚ चंदौली। आनलाइन गेमिंग के लत में युवक ने अपने ही अपहरण की साजिश रच डाली और पिता से ही फिरौती की रकम मांग ली। मामला धानापुर थाना क्षेत्र के प्रसहटा गांव का है, जहां गांव निवासी अंगद यादव का पुत्र अमित यादव (23 वर्ष) गुरुवार की दोपहर घर से मोबाइल खरीदने धानापुर गया और देर रात तक वापस नहीं लौटा। परिजनों ने उसकी खोजबीन की, लेकिन उसका कोई पता नहीं चल सका। इस पर पिता ने थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई। देर रात पिता के मोबाइल पर काल आया, जिसमें युवक को छोड़ने के नाम पर एक लाख रुपये की फिरौती मांगी गई। फिरौती न देने पर युवक को जान से मार डाले जाने की धमकी दी गई है।
फिरौती मांगने की सूचना पर पुलिस के हाथ पांव फूल गए। पुलिस अधीक्षक अंकुर अग्रवाल ने मामले को गंभीरता से लिया। थानाध्यक्ष प्रशांत सिंह ने कुछ ही घंटे में मामले की तह तक पहुंच गए। युवक के ट्रेस किए गए लोकेशन पर पहुंची पुलिस को वाराणसी के एक कमरे से युवक मिल गया। पूछताछ में युवक ने बताया कि आनलाइन गेम में वह 50 हजार रुपये हार गया था। गेम खेलने के लिए उसे और पैसे की आवश्यकता थी जिसको देखते हुए उसने खुद के ही अपहरण की साजिश रच डाली। वाराणसी में अपने किसी परिचित के जरिए घरवालों को फोन कराकर एक लाख रुपये की मांग की। लेकिन पुलिस ने उसके साजिश से कुछ ही देर में पर्दा उठा दिया।

-Young Writer, Chandauli

Chandauli जिला मुख्यालय व न्यायालय के मुद्दे पर फिर आंदोलित नजर आएंगे अधिवक्ता

आज से आंदोलित नजर आएंगे चंदौली के अधिवक्ताः संयुक्त बार
बार सभागार में प्रेसवार्ता करते संयुक्त बार के पदाधिकारी।

जिला मुख्यालय व न्यायालय के मुद्दे पर बुलंद करेंगे जन-जन की आवाज

Young Writer, चंदौली। डिस्ट्रिक्ट डेमोक्रेटिक बार एसोसिएशन व सिविल बार एसोसिएशन ने शुक्रवार को संयुक्त रूप से बार सभागार में प्रेसवार्ता की। इस दौरान अध्यक्ष जय प्रकाश सिंह व चन्द्रभानु सिंह ने जिला न्यायालय निर्माण व मुख्यालय के विकास के मुद्दे पर आगामी आंदोलन की रूपरेखा पर प्रकाश डाला। कहा कि जिला प्रशासन ने एक माह की समयावधि में मुख्यालय व जिला न्यायालय निर्माण के संबंध में कोई कार्यवाही नहीं की। लिहाजा अब उन्हें अधिवक्ताओं के आंदोलन का सामना करना पड़ेगा।
इस दौरान अध्यक्ष चन्द्रभानु सिंह व जय प्रकाश सिंह ने जिला न्यायालय निर्माण व मुख्यालय के विकास में हो रही अतिविलंब के लिए चंदौली के सांसद समेत जनपद के सभी विधायकों व अन्य जनप्रतिनिधियों को सीधे तौर पर जिम्मेदार बताया। कहा कि चंदौली की जनता द्वारा निर्वाचित एक भी जनप्रतिधि ने जनहित में जिला मुख्यालय का विकास व न्यायालय के निर्माण में सहयोग नहीं दिया। इन नेताओं के आपसी राजनीतिक द्वंद्व के कारण चंदौली जिला मुख्यालय का विकास अधर में लटका पड़ा है। आरोप लगाया कि चंदौली जिला मुख्यालय पर आवंटित सरकारी विभागों को षड्यंत्र के तहत यहां-वहां ले जाया जा रहा है।
महामंत्री राज बहादुर सिंह व अनिल सिंह ने कहा कि चंदौली मुख्यालय से रोडवेज को नौबतपुर ले जाया गया, पुलिस लाइन को भोजापुर, जिला स्टेडियम को धरहरा, विकास भवन को मुगलसराय तहसील अंतर्गत झांसी ले जाया गया है। कहा कि इन दफ्तरों के निर्माण व जिला न्यायालय भवन के निर्माण के लिए 15 जुलाई से अधिवक्ता कलमबंद हड़ताल के साथ ही कचहरी का चक्रमण व धरना-प्रदर्शन करेंगे। चेताया कि आंदोलन के बाद भी अगर जनप्रतिनिधि व अधिकारी जिला मुख्यालय के विकास के प्रति सजग व संवेदनशील नहीं हुए तो उनका जोरदार प्रतिकार किया जाएगा। आंदोलन को मुकाम तक पहुंचाने के लिए जिला न्यायालय एवं मुख्यालय निर्माण संघर्ष समिति की गठन किया गया है। इस अवसर पर सीएम त्रिपाठी, महेंद्र चतुर्वेदी, राकेश रत्न तिवारी, अमरेंद्र सिंह, पंचानन पांडेय, संतोष सिंह, आनंद सिंह, अनिल सिंह, विद्या सिंह, शहाबुद्दीन, शमशुद्दीन, पंकज सिंह, चन्द्रभूषण यादव, रामप्रकाश मौर्या, धनंजय सिंह, नवीन सिंह, अजीत सिंह, अरुण मिश्रा, संजय मिश्रा, राजेश मिश्रा आदि अधिवक्ता उपस्थित रहे। पूर्व महामंत्री संचालन झन्मेजय सिंह ने किया।

जमीन आवंटित, फिर भी नहीं हुआ निर्माण
चंदौली। अधिवक्ताओं ने कहा कि जिला आबकारी विभाग के लिए भिखारीपुर, एआरटीओ दफ्तर के लिए कटसिला, एडीआर सेंटर के लिए धूरीकोट, अभियोजन दफ्तर के लिए धूरीकोट, जिला सेवायोजन के लिए धूरीकोट, पुलिस अधीक्षक आवास के लिए जसुरी, अधिकारियों के आवास के लिए जसुरी, ट्रांजिट हास्टल के लिए हिनौता उर्फ जगदीशसराय, फायर स्टेशन के लिए हिनौता उर्फ जगदीशसराय में जमीन आवंटित होने के बाद भी भवन का निर्माण कार्य नहीं कराया गया। यह जिला प्रशासन व जनप्रतिनिधियों की उदासीनता व जनहित के मुद्दे पर उनकी उपेक्षा को प्रदर्शित करता है।

Chandauli: पुलिस ने 18.32 लाख के 101 स्मार्टफोन को किया बरामद


चंदौली। जनपद पुलिस ने विभिन्न थाना क्षेत्र से गुम हुए 101 स्मार्टफोन बरामद किया है। एसपी के निर्देश पर सर्विलान्स टीम ने आवश्यक कार्यवाही करते हुए मोबाइल फोन को बरामद करने में सफलता प्राप्त की है। शुक्रवार को पुलिस लाइन सभागार में बरामद हुए मोबाइल फोन को उनके स्वामियों के बीच वितरण किया गया।
इस दौरान गुम मोबाइल फोन को पाकर लोगों के चेहरे खुशी से खिल उठे। एएसपी और सीओ अपराध के मार्गदर्शन में पुलिस को मिली सफलता से न केवल पुलिस टीम गदगद नजर आई, बल्कि उन लोगों के चेहरे भी खिल उठे, जो अपना कीमती फोन गुम होने से उदास थे। एसपी अंकुर अग्रवाल ने मोबाइल फोन का उनके स्वामियों के बीच वितरण किया। इस मौके पर लोगों ने पुलिस के कार्य की जमकर सराहना भी की। एसपी ने बताया कि सर्विलांस व स्वाट की तत्परता व प्रयास से प्राप्त हुए 101 स्मार्टफोन की कीमत 18 लाख 32 हजार रुपये आंकी गई है। पुलिस टीम में प्रभारी सर्विलांस श्यामजी यादव, प्रेम प्रकाश यादव, देवेन्द्र सरोज, अजीत कुमार सिंह, मनीष कुमार, गणेश तिवारी, सन्दीप, मनोज, प्रभारी स्वाट टीम शैलेन्द्र प्रताप सिंह, राणा प्रताप सिह, आनन्द कुमार सिंह, अमित कुमार, प्रीतम बिन्द, राजेश कुमार यादव, विजेन्द्र कुमार सिंह शामिल रहे।

प्यास का कुँआ : डा.उमेश प्रसाद

डा. उमेश प्रसाद सिंह।
डा. उमेश प्रसाद सिंह।

Young Writer, साहित्य पटल। ललित निबंधकार डा. उमेश प्रसाद सिंह
प्यास का कुँआ : जो लोग यह सोचते हैं कि सभ्यता और संस्कृति बिल्कुल भिनन चीजें हैं, वे पता नहीं कैसे सोचते हैं। हमारे समय में सोचने के ,न जाने कितने-कितने ढंग निकल आये हैं। एक से एक निराले ढंग। एक से एक नए ढंग। हमारा गुमान है कि इनके रंग बिल्कुल नये है। बिल्कुल नए-नए हैं। रोमांच तो है। रोमांच की उत्तेजना तो है। मंगर नया होना ही सार्थक होना नहीं है। उपयोगी होना नहीं है। सार्थक होना नहीं है। कल्याणकारी होना नहीं है। ग्राह्य होने की संभावना से भरा हुआ होना नहीं है। नहीं, इन बातों पर विचार करने का हमारे पास समय नहीं है। हमारे समय में हमारे पास बहुत कुछ है। बहुत-बहुत कुछ है। अगर कुछ नहीं है तो अवकाश नहीं है। अपने जीवन के बारे में कुछ भी सोचने का कत्तई अवकाश नहीं है। सामाजिक सन्दर्भ में कुछ भी विचार करने का अवकाश नहीं है। अपने अस्तित्व और सामूहिक अस्तित्व के अन्तर्सम्बन्ध के बारे में सोचने का थोड़ा भी अवकाश नहीं है। मनुष्य जीवन में अन्य प्राणिसमुदाय और प्रकृति जगत के बीच हमारी संस्कृति में एक बड़ा ही सुदृढ़ सेतु बहुत लम्बे समय से विद्यमान रहा है। आज हम जिस सभ्यता के अनुवर्ती होकर इतरा रहे हैं, उसने इस सेतु को ही ध्वस्त करके धराशायी बना दिया है।

हमारे समय में आदमियों की अपार भीड़ में आदमी अकेला और असहाय होकर उद्भ्रान्त-सा बाजार के बीच में भागता हुआ दिखाई दे रहा है। आदमी के पास अपनी बस केवल प्यास है। बाकी सब कुछ पानी है। आदमी के पास अपनी बस केवल भूख है, बाकी जो कुछ है, सब भोजन है। केवल प्यास का बचे रह जाना और पानी का गायब हो जाना मनुष्य जाति का कितना भयावह दुर्भाग्य है, कह कहना बड़ा कठिन है। केवल भूख का बचे रह जाना और भोजन का नदारद हो जाना कैसी भीषण विडम्बना है, कौन कह सकता है। प्यासा आदमी, भूखा आदमी, भला किस काम का आदमी है! किसके काम का आदमी है? नहीं किसी के काम का नहीं है। न अपने काम का, न दूसरों के काम का। न किसी प्राणी के काम का, न प्रकृति के काम का। न इतिहास के काम का, न वर्तमान के काम का।

पुराना बिल्कुल बेकाम नहीं होता। निरा व्यर्थ नहीं होता। हर नया पुराने से ही निकलता है। हमारी संस्कृति पुरानी है। उसका मूल्य पुराना होने में ही है। आज की हमारी जड़ विहीन सभ्यता में जो पुराने के प्रति उपेक्षा और अवमानना का भाव विकसित हुआ है, वह हमारी संस्कृति को आहत करने वाला है। उससे हमारी संस्कृति के क्षरण का संकट जन्म ले रहा है। हमारे समय में पुराने आदमी की उपेक्षा, पुराने रिश्तों की उपेक्षा, पुराने परीक्षित विश्वासों की उपेक्षा हमें आगे ले जाने में सहायक नहीं है। जब भी कोई राष्ट्र अपनी संस्कृति को अभिसिंचित करने वाली अपनी पारंपरिक सभ्यता का परित्याग करके दूसरी जातियों की सभ्यता को अंगीकार करने के आकर्षण में उतावला होता है, उसकी संस्कृति का ध्वंस शुरू हो जाता है। भारतीय संस्कृति के केंद्र में त्याग है। यह संस्कृति भोग की विरोधी नहीं है। ऐश्वर्य की विरोधी नहीं है। भोग के गहरे अर्थ और प्रयोजन को हमारी संस्कृति ने अच्छी तरह से जाना है। जानकर उसे जीवन में प्रतिष्ठित किया है। भोग और ऐश्वर्य हमारे जीवन की परिधि है। वह हमारे जीवन में परिधि पर है। हमारी परिधि के विस्तार में भोग है, ऐश्वर्य है। खूब है। प्रकाशित है। पल्लवित है। फलित है। मगर उसका केन्द्र त्याग है। त्यागपूर्वक भोग हमारी संस्कृति का प्राण है। आज पश्चिम की सभ्यता के व्यामोह ने हमें हमारे जीवन के केन्द्र से काट दिया है। अपने केन्द्र से विच्युत होकर हमारे समय में आदमी टहनी से टूटे हुए पत्ते की तरह परिधि में उड़ रहा है। हवा में उधरा रहा है। आदमी का अपदार्थ हो जाना किसी के लिए भी ठीक नहीं है। न आदमी के लिए, न समय के लिए, न समाज के लिए, न राष्ट्र के लिए। मनुष्य से श्रेष्ठ कुछ भी नहीं है। भारतीय संस्कृति इसीलिए श्रेष्ठ संस्कृति है कि उसमें साध्य मनुष्य है। उसमें साध्य मनुष्य का जीवन है। बाकी जो कुछ भी है, वह सब मनुष्य के जीवन के उत्कर्ष के लिए है। मनुष्य के सारे उत्पाद मनुष्य जीवन और समाज की अभ्युन्नति के साधन हैं। भारतीय समाज व्यक्ति में सन्निहित सामूहिक विराट अस्मिता की उपासना का समाज है। हमारी संस्कृति ने ऐसे समाज को निर्मित किया है, जिसमें एक में अनेक और अनेक में एक के समाहित होने की अद्भुत धारणा का प्रकाश है। हमारी संस्कृति एक बचन में समाहित बहुवचन की संस्कृति है। हमारी संस्कृति विराट संस्कृति है। हमारी संस्कृति विराट बोध की संस्कृति है। हमारी संस्कृति प्यास के शमन के लिए पानी के कुँए खोदने की संस्कृति है।

हमारी संस्कृति का आधार व्यक्ति नहीं है। हमारी संस्कृति का आधार धर्म है। धर्म व्यक्ति में समाहित विराट अस्मिता का संधान है। हमारी संस्कृति के मूल में व्यक्ति नहीं है, समूह है। वैयक्तिकता नहीं है, सामूहिकता है। यह अत्यन्त संश्लिष्ट संस्कृति है। भारतीय संस्कृति व्यक्ति की संस्कृति नहीं है। समाज की संस्कृति नहीं है। यह समष्टि की संस्कृति है। यह व्यष्टि में सन्निहित समष्टि और समष्टि में समाहित व्यष्टि की अद्भुत संस्कृति है। यह संस्कृति भेद में अभेद की प्रतिष्ठा की संस्कृति है। यह संस्कृति अर्जन की नहीं, विसर्जन की संस्कृति है। यहाँ व्यक्ति नहीं रह जाता। व्यक्ति मिट जाता है। सबमें समाहित, सबकुछ में समाहित व्यक्ति की विराटता रह जाती है। अस्तित्व की विराटता की उपासना भारतीय संस्कृति की अमूल्य उपस्थापना है। इस संस्कृति के मूल में महत्तम अद्वैत जीवन बोध की मार्मिक अभिव्यंजना है। यह बोध ही ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ की महनीय धारणा को वास्तविक आधार प्रदान करने वाला है। हमारी पारंपरिक सभ्यता इस संस्कृति के मूल्यों को अभिव्यंजित करने वाली सभ्यता है। उसे आचरण में व्यवहृत करके अपनी संस्कृति को पोषण भी प्रदान करती है और उसकी प्राणधारा को जीवन में प्रवाहित करने का माध्यम भी बनती है।
भारतीय सभ्यता के समक्ष जो पश्चिमी सभ्यता है, वह इसके विपरीत विश्वासों की सभ्यता है। इस सभ्यता को बौद्धिक जगत आधुनिक सभ्यता के नाम से अभिहित करता है। जिस सभ्यता को अपनाने के लिए भारतीय बौद्धिक वर्ग जो अपने वर्चस्व का आकांक्षी है, व्यक्ति केन्द्रित सभ्यता है। इस सभ्यता के केन्द्र में मनुष्य नहीं है। मनुष्यजाति नहीं है। केवल व्यक्ति है। व्यक्ति जो अस्तित्व की क्षुद्रतम इकाई है। इसमें क्षुद्रतम इकाई के श्रेष्ठता बोध का अमानवीय दम्भ है। यह दम्भ की पोषक सभ्यता है। यह सभ्यता मनुष्य विरोधी सभ्यता है। यह व्यापक मानवीय बोध का दलन करके व्यक्ति के निजी हित की साधक सभ्यता है। यह व्यक्ति की सामर्थ्य को साधनों के सहारे विकसित करने की उपासक सभ्यता है। यह सभ्यता व्यापारिक सभ्यता है।

जीवन कोई व्यापार की चीज है, क्या? जीवन कोई घाटा और मुनाफा से बढ़ने और घटने वाली चीज है, क्या? नहीं, नहीं ऐसा नहीं है। ऐसी समझ तो बड़ी घटिया समझ है। यह समझ मनुष्य जीवन की गरिमा के लिए साधनों पर आधारित और अवलम्बित नहीं होती। सभ्यता का आधाार तो मनुष्य का जीवन है। सभ्यता का निमित्त तो मनुष्य जाति के जीवन को सजाना है। उसे सँवारना है। मनुष्य के जीवन का उत्कर्ष मनुष्यजाति के जीवन के उत्कर्ष से पृथक और भिन्न कभी नहीं हो सकता। मनुष्य की महत्ता हमेशा ही मनुष्य जाति के लिए उसके प्रदेयों पर ही निर्भर करती है।

आधुनिक सभ्यता साधनों को अधिक महत्व देकर मनुष्य की आत्मशक्ति को कमजोर बनाती है। उसे साधनों पर अवलम्बित रखकर पराश्रिता के भावबोध को प्रछन्न रूप से विकसित करती है। इस तरह से यह मनुष्य में पौरुष और साहस का ह्रास करती है। वैयक्तिक स्वतंत्रता के आग्रह को उकसाकर सामाजिक पारस्परिकता के मूल्य को ध्वस्त करती है। पारस्परिक सद्भाव से वंचित होकर इस सभ्यता में आदमी धीरे-धीरे अकेला और असहाय होने को अभिशप्त हो जाता है। सामूहिक संवेदना के उच्छिन्न होने से प्रतिरोध की शक्ति क्षय हो जाती है।

आधुनिक सभ्यता के केन्द्र में समाज नहीं है, व्यक्ति है। सामूहिकता नहीं है, वैयक्तिकता है। सार्वजनिकता नहीं है, निजता है। विराटता नहीं है, क्षुद्रता है। उदात्तता नहीं है, संकीर्णता है। समर्पण नहीं है, स्वामित्व है। त्याग नहीं है, भोग है। विसर्जन नहीं है, अर्जन है। अधिकार का, ऐश्वर्य का, भोग का निजीकरण है। प्रकृति को पराधीन बनाने का अपार उद्योग है। महान अस्तित्व की तमाम इकाईयों और घटकों पर स्वामित्व स्थापित करने की उद्दआम वांछा है। आधुनिक सभ्यता का कोई केन्द्र नहीं है। यह सभ्यता परिधि की सभ्यता है। अल्पजीवी सभ्यता है। प्रभुत्व की लोलुप सभ्यता है। यह सभ्यता प्रदर्शन की सभ्यता है। यह सभ्यता परदा की सभ्यता है। यह सभ्यता दोगली सभ्यता है। इसके दो-दो गाल हैं। यह गाल बजाने की सभ्यता है। यह आँख दिखाने की सभ्यता है। बहुत कुछ को छिपाना और बहुत कुछ को दिखाना इस सभ्यता का दोहरा मूल्य है। दूसरों को छोटा साबित करने के लिए प्रदर्शन और अपने को श्रेष्ठ सिद्ध करने के लिए अपनी तुच्छता का छिपाव इस सभ्यता की क्रूरता को उद्घाटित करता है। व्यक्ति की श्रेष्ठता का दम्भ आधुनिक सभ्यता का वह ओछा चरित्र है जो सामूहिक मनुष्यता के उदार ऐश्वर्य को पददलित करता है। यह वैश्विक सामुदायिक मनुष्य और व्यापक मनुष्यता के उदात्त मूल्य को विखण्डित करके उसका दलन करता है और व्यक्तियों के छोटे-छोटे समूह की उच्चता को प्रतिष्ठित करता है। शासक और शासित के अमानवीय विभाजन को गरिमामण्डित करता है।

भारतीय सभ्यता उदात्त जीवनबोध की सभ्यता है। यह सभ्यता पानी का कुँआ खोदने की विश्वासी सभ्यता है। हम प्यास बुझाने के लिए पानी का संधान करने का विश्वास न जाने कबसे बनाए रखे हुए हैं। पानी के लिए हम कुँआ बनाते रहे हैं। हमारे कुँए पीढ़ियों की प्यास बुझाने के लिए सक्षम होते आए हैं। आज जिस सभ्यता को हम सिर पर लादे दौड़ रहे हैं, वह पानी की नहीं प्यास की सभ्यता है। इस सभ्यता में आँखों में पानी नहीं है, प्यास है। यह सभ्यता प्यास का कुँआ खोदने की अन्धी सभ्यता है। यह सभ्यता सुख की ताजगी की उपासक सभ्यता नहीं है। यह सुख का भण्डारण करने वाली सभ्यता है। यह नहीं जानती कि भण्डारण करने से चीजें बासी हो जाती है। यह सभ्यता बासी सुख के उपभोग की अभागी सभ्यता है। जीवन प्यास के उन्माद में नहीं है। जीवन परितोष की पुलक में समाहित है। हमारी परंपरा की आराधना परितोष के पुलक की आराधना है।

सुख में डूब जाने की उद्दाम अतृप्ति आधुनिक सभ्यता का आदर्श है। सुख में डूब कर मर जाने की दुर्दान्त नियति को स्वीकार करके सुख को बचा लेने का उद्योग आधुनिक सभ्यता का अपनाउद्योग है। सुख को बलिदान करके मनुष्य जीवन की गरिमा को बनाए और बचाए रखने का आदर्श भारतीय सभ्यता के आदर्श की गरिमा है। हमारी सभ्यता मनुष्य जीवन के गौरव के निरन्तर उत्कर्ष की आराधना की सभ्यता है।

-Young Writer

Chandauli वृद्धाश्रम में धूमधाम से मना नाबार्ड का स्थापना दिवस

नाबार्ड के स्थापना दिवस कार्यक्रम में मौजूद स्थापना दिवस।
नाबार्ड के स्थापना दिवस कार्यक्रम में मौजूद स्थापना दिवस।

Young Writer, चंदौली। नाबार्ड का 42वां स्थापना दिवस गुरुवार को चंदौली स्थित वृद्धाश्रम में धूमधाम के साथ मनाया गया। इस दौरान डीडीएम नाबार्ड तनुज कुमार सेन ने आश्रम में मौजूद वृद्धजनों में फल, मिठाईयां, बिस्कुट, केक, मट्ठा बांटकर खुशियां साझा की। इसके साथ ही उनका हाल-चाल भी जाना। इसके अलावा उनसे संवाद स्थापित कर अपनी संवेदना व्यक्त की और उनके सुख-दुख को बांटा। साथ ही वृद्धजनों से दीर्घायु होने का आशीर्वाद प्राप्त किया।
इस दौरान उन्होंने नाबार्ड की स्थापना के बारे में संक्षिप्त बातें रखी और नाबार्ड की स्थापना की खुशियां वृद्धजनों के बीच साझा की। कहा कि वृद्धाश्रम में रहने वाले वृद्धजन को हमारे साथ व स्नेह की जरूरत है, वहीं हम भी उनके आशीर्वाद के आकांक्षी है। खुशियों के ऐसे अवसर को हमें ऐसे ही स्थान पर सृजन करना चाहिए, ताकि इसकी महत्ता और अधिक बढ़ जाए। इस कार्य में वृद्धा आश्रम केन्द्र संचालक आकाश कुमार, केएन राय, रामचन्द्र तथा अन्य समाजसेवी उपस्थित रहे।

Digital: मोबाइल ऐप से टीकाकरण और गोल्डेन कार्ड बनाएगी आशा कार्यकत्री

मोबाइल ऐप से टीकाकरण और गोल्डेन कार्ड बनाएगी आशा कार्यकत्री

Young Writer, सकलडीहा‚ चंदौली। प्रसव से पूर्व और प्रसव के बाद महिलाओं की विभिन्न प्रकार की जांच व बच्चों का टीकाकरण ऑनलाइन होगा। इसके लिये आशा कार्यकत्री मोबाइल ऐप के माध्यम से हर जच्चा और बच्चा का डाटा फिडिंग व निगरानी रखेंगी। इस पहल से बच्चों का समय से टीकाकरण और महिलाओं का समय से प्रसव की सुविधा प्राप्त होगा। इसके साथ ही आशा कार्यत्रियों द्वारा गोल्डेन कार्ड भी बनाया जायेगा। गुरूवार को दो दर्जन से अधिक आशा व संजनी को मोबाइल वितरण किया गया। मोबाइल मिलने से रजिस्टर लेकर घूमने से आशाओं को निजात मिल जोयगा।

सकलडीहा सीएचसी पर 286 आशा कार्यकत्री कार्यरत है। प्रत्येक आशा कार्यकत्री मिशन इन्द्रधनुश कार्यक्रम के तहत गर्भवती महिलाओं व छह वर्ष तक के बच्चों का पंजीकरण,एचआरपी हाई रिक्स प्रेगनेंसी, बच्चों का टीकाकरण, प्रसव और संस्थागत प्रसव सहित अन्य कार्य ई कवज पोर्टल पर दर्ज करेंगी। इससे जच्चा बच्चा को समय से टीकाकरण सहित प्रसव की सुविधा आसानी से प्राप्त होगा। इसके साथ ही आशा कार्यकत्री प्रधानमंत्री आयुष्मान योजना के तहत लाभार्थियों का गोल्डेन कार्ड भी बनायेगी। इस बाबत सीएचसी अधीक्षक डा. संजय यादव ने बताया कि मोबाइल ऐप के माध्यम से आशा कार्यकत्री जच्चा बच्चा का समय से टीकाकरण सहित अन्य सुविधा का लाभ दिलाने में सहयेाग करेंगी। इस मौके पर एचईओ रजनीकांत राय,शाहिद आलम अंसारी सहित अन्य आशा मौजदू रहे।

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