27.8 C
Chandauli
Thursday, July 23, 2026

Buy now

Home Blog Page 555

बुआ, बबुआ, बाबा को हटाएं, यूपी में परिवर्तन लाएंः बाबू सिंह कुशवाहा

किसान इंटर कालेज के मैदान पर जनसभा को संबोधित करते बाबू सिंह कुशवाहा।

जिसकी जितनी हिस्सेदारी, उसकी उतनी भागेदारी के नारें को किया बुलंद

Young Writer, इलिया। यूपी विधानसभा-2022 के छवें चरण का मतदान समपन्न होने के साथ ही प्रत्याशियों के पक्ष में मतदान कराने के लिए राजनैतिक पार्टियों ने पूरी ताकत झोंक दी है। इसी क्रम में शुक्रवार को किसान इण्टर कालेज के मैदान पर जन अधिकार पार्टी व भागीदारी संकल्प मोर्चा के संयुक्त तत्वावधान में रैली हुई।

किसान इंटर कालेज के मैदान पर आयोजित जनसभा में उपस्थित भीड़।

इस दौरान मुख्य अतिथि बाबू सिंह कुशवाहा ने पार्टी प्रत्याशी सुबाष सोनकर के चुनाव को सशक्त बनाने और अपने मत के अधिकार से जीत के मुहाने तक ले जाने की बात कही। कहा कि बुआ, बबुआ, बाबा को वोट की चोट देनी होगी, तभी ओबीसी, दलित व मुस्लिम के साथ हुए धोखाधड़ी को बंद किया जा सकता है। बीजेपी के लोग हिन्दू और मुस्लिम के बीच डर दिखाकर वोट ले लेते है और अधिकार देने की जब बारी आती है तो धोखा देने का काम करती है। ओबीसी, दलित और मुस्लिम समुदाय को मिलने वाले आरक्षण को इन्होंने खत्म करने का कार्य किया। नीट की परीक्षा में तीन साल तक आरक्षण खत्म कर 33 हजार छात्रों को डाक्टर बनने से रोका गया। जब यही छात्र विदेश में जाकर डाक्टर बनना चाहते हैं। विदेश गये छात्रों को बदनाम करने की कोशिश किया जाता है। देश में दो तरह की शिक्षा नीति चल रही है। परिषदीय स्कूल और कान्वेंट स्कूल बनाकर अंग्रेजी में शिक्षा दी जा रही है। ऐसे में हिन्दी स्कूल का बच्चा प्रतियोगी परीक्षाओं में इंग्लिश स्कूल के बच्चे के साथ कैसे मुकाबला कर पाएंगे। उन्होंने किसानों को निःशुल्क खाद, बीज के साथ ही सिंचाई मुफ्त दिया जाएगा। सरकार पर कटाक्ष करते हुए कहा कि डबल इंजन की सरकार युवाओं को डबल रोजगार देने का कार्य किया है। वह रोजगार है दिन में खेत में काम करना और रात में खेत की रखवाली करने का कार्य कर रहे है। महिला सुरक्षा की बात करने वाले के शासन में बहन, बेटियों के साथ दुराचार की घटना बढ़ गयी है। गठबंधन की सरकार बनने पर सारी समस्याओं के निस्तारण का कार्य किया जायेगा। भागीदारी संकल्प मोर्चा ने जिसकी जितनी हिस्सेदारी उसकी उतनी भागेदारी को पुरा किया जायेगा। जनक्रांति पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष कमलेश चौहान, भारतीय समाजपार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामधनी बिन्द, मौलाना नोमान नदवी, पंकज विश्वकर्मा, रामकृष्ण प्रजापति, नसीम खान, कलामुद्दीन कादरी, अकरम ने भी अपने विचारों को रखा। संचालन वशिष्ठ मौर्य ने किया।

सैयदराजा में मनोज डब्लू को जीताइए‚ यूपी में सपा की सरकार बनाइए

सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सैयदराजा की जीत को सत्ता से जोड़ा

Young Writer, चंदौली। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने पालीटेक्निक कालेज में जनसभा को संबोधित करते हुए सैयदराजा विधानसभा का कनेक्शन यूपी की सत्ता के साथ साधा। कहा कि जब मनोज सिंह डब्लू जितते हैं तो यूपी में सपा की सरकार बनती है। कहा कि सैयदराजा का कनेक्शन सीधे यूपी के चुनावों से है। ऐसे में समाजवादी पार्टी का एक-एक कार्यकर्ता सैयदराजा में पार्टी की जीत को न केवल सुनिश्चित करें, बल्कि जीत को ऐतिहासिक बनाने में अपनी पूरी ताकत झोंक दें। कहा कि यह चुनाव जनता का चुनाव है और जनता अबकी बार पैसे व पावर के प्रभाव को नकार कर परिवर्तन की ओर चल पड़ी है।
उन्होंने कहा कि सैयदराजा का चुनाव पावर, पैसा व आमजनता के सम्मान व अस्तित्व की चुनाव है, जिसे जनता लड़ रही है। अखिलेश यादव ने अपने संक्षिप्त संबोधन में सैयदराजा की जनता को मनोज सिंह डब्लू को जीताने व सूबे में समाजवादी पार्टी की सरकार बनाने का आह्वान किया। कहा कि भाजपा बदले की भावना से राजनीतिक करती है। जबकि सपा भेदरहित आमजन की सुविधा और सहूलियत के लिए योजनाओं व परियोजनाओं को क्रियान्वित की है। सपा सरकार के ऐतिहासिक कामकाज को सूबे की जनता देखा और उसके अपने जीवन में प्रभाव को भी जाना है। जबकि पांच साल भाजपा के किल्लत व जिल्लत के बीच गुजारा है। जनता दोनों सरकारों के बीच का फर्क जान चुकी है। इसी बीच जनसभा में उमड़ी भीड़ ने जयकारे व नारे के साथ ही सपा प्रमुख अखिलेश यादव के भरोसे को मजबूत किया। इस दौरान जनसभा स्थल पर उत्साह व ऊर्जा का एक अलग ही संचार देखने को मिला। चंदौली की आवाम में उत्साह इस कदर था कि लोग जय-जयकार करते हुए अपने-अपने गांव, मुहल्ले व घरों को लौटे।

अनुदेशक व शिक्षामित्रों ने नियमितीकरण की रखी मांग

Young Writer, चंदौली। सपा प्रमुख अखिलेश यादव की सभा में सपा कार्यकर्ताओं के साथ ही शिक्षामित्रों के साथ अनुदेशक व बीएड-टेट अचयनित अभ्यर्थी नारा व झंडा बुलंद कराते नजर आए। इस दौरान अनुदेशकों ने मयंक कुमार सिंह के नेतृत्व में अखिलेश यादव की सभा में अपनी मौजूदगी बनाए रखी और अपनी मांग को तख्तियों पर लिखकर सपा प्रमुख व पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव तक पहुंचाने का काम किया। उधर, अखिलेश ने भी इनके मांगों को संज्ञान में लेकर इन्हें स्थायी कर्मचारी का दर्जा देने का मजबूत भरोसा दिया।
इस दौरान अखिलेश यादव ने कहा कि शिक्षामित्रों का सम्मान लौटाया जाएगा। साथ ही अनुदेशकों व बीएड टेट अचयनित अभ्यर्थियों के हितों का भी संरक्षण होगा। सपा सरकार में सर्वसमाज के जीवन स्तर में सुधार की योजना होगी और उसके अनुरूप नियम-नियमावली व योजनाओं व परियोजनाओं को गढ़ा और उसे जमीन पर उतारा जाएगा। इस मौके पर अभिनव सिंह‚ विकास यादव‚ अमरनाथ राय‚ प्रिया सिंह‚ हामिदा‚ धर्मेन्द्र यादव आदि उपस्थित रहे।

बसपा की सरकार बनी तो महिलाओं की सुरक्षा का होगा बंदोबस्त

अहिकौरा में आमजन को संबोधित करती सीमा समृद्धि कुशवाहा।

अहिकौरा में आयोजित बसपा के जनसभा में सीमा समृद्धि कुशवाहा को आवाम ने सुना

Young Writer, कमालपुर। निर्भया कांड व हाथरस कांड में पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए दृढ़ता के साथ संघर्षरत बसपा की राष्ट्रीय प्रवक्ता सीमा समृद्धि कुशवाहा शुक्रवार को जनपद दौरे पर थी। इस दौरान उन्होंने सैयदराजा विधानसभा क्षेत्र के अहिकौरा में बसपा की ओर से आयोजित जनसभा को संबोधित किया। साथ ही बसपा उम्मीदवार अमित यादव लाला को अपना मत देकर उनके वादों व इरादों को सशक्त बनाने का आह्वान किया। उन्होंने भाजपा को झूठ बोलने वाली पार्टी करार दिया। वहीं सपा पर परिवारवादी व जातिवादी बताया।

उन्होंने कहा कि बसपा की पांच वर्ष की सरकार में हर वर्ग के गरीबों का जीवन स्तर ऊपर उठा तथा प्रदेश में कानून व्यवस्था का राज कायम किया गया। उन्होंने कहा कि बसपा अपने महापुरुषों के आदर्श पर समाज के हर वर्ग के लोगों का कल्याण करने का काम करती है। बहन मायावती के 5 वर्षों के शासनकाल में जितना विकास हुआ उतना किसी भी सरकार में नहीं हुआ। कहा कि भाजपा समाज को बांट कर हिंदू-मुस्लिम का नारा देकर राजनीति करती है। जबकि समाजवादी पार्टी सरकार बनने पर अपने परिवार तथा अपनी जाति का विकास करती है। जबकि बहुजन समाज पार्टी हर वर्ग के गरीबों का जीवन स्तर ऊंचा उठाने तथा प्रदेश में कानून व्यवस्था का राज कायम हुआ था। उन्होंने कहा कि बसपा सरकार बनने पर हर गांव का विकास होगा। चिलचिलाती धूप में भी लोगों के समर्थन ने हौसला बढ़ा दिया। उन्होंने जनसभा में उपस्थित भीड़ खासकर महिलाओं व युवतियों को राजनीति में बढ़कर भागीदारी करने का संकल्प दिलाते हुए उनका आभार जताया। इस दौरान अमित यादव लाला ने भी महिला सुरक्षा व सशक्तिकरण को लेकर अपने विचारों के साथ ही बातों को मजबूत से रखा। कहा कि बसपा सत्ता में लौटी तो महिला सुरक्षा का पुख्ता प्रबंध होगा। साथ ही महिला सशक्तिकरण की योजनाओं को आगे बढ़ाकर महिलाओं को स्वावलंबी, आत्मनिर्भर बनाकर उनका खोया हुआ सम्मान लौटाने का काम होगा।

सपा की सरकार में चलता था पोस्टिंग और ट्रांसफर का खेल


सदलपुरा में राजनाथ सिंह व शिवराज सिंह चौहान ने सभा को संबोधित किया

Young Writer, सकलडीहा। माटी के लाल व रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को सदलपुरा में भाजपा की जनसभा को सम्बोधित किया। कहा कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नेतृत्व में देश सशक्त हुआ है। आज गुंडे बदमाशों के हौसले पस्त हो गये है। कानून का राज चल रहा है। इस मौके पर सरकार की योजनाओं पर विस्तार से चर्चा करते हुए गवई भाषा में भी लोगो से समर्थन मांगा।
उन्होंने कहा कि जिस तरह से प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश ताकतवर हुआ है। आज भारत बोलता है तो हर देश बातों को गंभीरता से सुनता है। आज हम यूक्रेन में फसे लोगों को सुरक्षित निकालने का पहल कर रहे है। कोरोना काल में हमने कोरोना का टीका बनाया भी और अन्य देश को दिया। हम आपको विश्वास देते है कि भारत माता का मस्तक कभी झूकने नही देंगे। कांग्रेस के लोगों ने देश की जनता की आंखों में धूल झोंकर राजनीत किया। संसद में कांग्रेस के लोगों को बोलने तक नही आता है। आज भारत इतना मजबूत हुआ है कि भारत को कोई आंख दिखाने का जुर्रत तक नही करता है। हम बाउंड्री के इस पार भी मार सकते है और उस पार भी घूसकर मार सकने की क्षमता रखते है। अंत में सकलडीहा से भाजपा उम्मीदवार सूर्यमुनी तिवारी को जीताने का अपील किया। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि आज मोदी ने अपने देश में वैक्सीन लगाकर पूरे देश की सुरक्ष किया है। यूक्रेन और रूस के बीच युद्ध चल रहा है। केंद्र सरकार आपरेशन गंगा के तहत सभी भारतीयों के निकालने की चिंता करते है। अंत में केन्द्र और प्रदेश सरकार की योजनाओं पर विस्तार से बात रखते हुए लौट गये

उत्साहित भीड़ की भेंट चढ़ गयी सैकड़ों कुर्सियां

बेकाबू भीड़ ने अखिलेश यादव की सभा में बेरिकेड्स तोड़ा

Young Writer, चंदौली। सपा प्रमुख व पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की जनसभा में भीड़ के बेकाबू व अनुशासनहीन नजर आयी। इसके पीछे अखिलेश यादव के प्रति दीवानगी के साथ ही उनकी एक झलक पाने की ललक इस कदर थी कि सभा खत्म होते-होते भीड़ के भारी दबाव के कारण बैरिकेडिंग टूट गया और भीड़ डी-घेरे में घुस गए। इस दरम्यान बेकाबू भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। भीड़ को मंच व डी-एरिया से दूर रखने में सुरक्षा बलों के पसीने छूट गए। वहीं सैकड़ों कुर्सियां भीड़ के उत्साह की भेंट चढ़ गयी।

इस दौरान बेकाबू भीड़ के बीच दो महिला अनुदेशक फंस गयी, जिन्हें पत्रकारों के सहयोग से पुलिस कर्मियों ने भीड़ से पृथक करके उनकी जान बचाई। अखिलेश का हेलीकाप्टर शाम 04ः54 बजे उतरते ही सपा कार्यकर्ता उत्साहित उठे। कार्यकर्ताओं के उत्साह का आलम रहा कि बैरिकेटिंग तोड़कर डी एरिया की तरफ बढ़ गए। काफी कार्यकर्ता डी एरिया में भी पहुंच गए। इस दौरान जहां पार्टी का अनुशासन तार-तार नजर आया। वहीं सुरक्षा व्यवस्था को भी संभालने में सुरक्षा बलों के पसीने छूट गए। अखिलेश यादव के जाने के बाद यातायात व्यवस्था इस कदर चरमरा गई कि लोगों को सभास्थल से बाहर निकलने में घंटों लग गए।

दुस्साहसः 400 केवी का ट्रांसफार्मर ही चुरा ले गए चोर

Young Writer, पड़ाव। चोरों ने मुगलसराय कोतवाली पुलिस के इकबाल का खुली चुनौती दी है। पुलिस चौकी के चन्द कदमो की दूरी से मोबाइल 400 केवी का मोबाइल ट्रांसफार्मर हौसला बुलंद चोर चुरा ले गए। बिजली विभाग के कर्मचारियों ने सम्बंधित पुलिस चौकी में ट्रांसफार्मर चोरी की तहरीर दे दिया है। चोरी की इस वारदात से जहां आमजन हतप्रभ है, वहीं लोग पुलिस की सक्रियता व सतर्कता पर सवाल खड़े नजर आए।
विदित हो कि सुजाबाद पुलिस चौकी के पास बिजली विभाग का ग्राहकों के लिए भुगतान कार्यालय है जिसके पास उक्त विभाग द्वारा 400 केवी का मोबाइल ट्रांसफॉर्मर इमरजेंसी के लिए रखा गया था लेकिन गुरुवार की रात मध्य रात्रि में हौसला बुलंद चोरों ने पिकअप के सहारे ट्राली सहित लगभग ट्रांसफार्मर चुरा ले गए, जिसकी अनुमानित 10 लाख रुपये बताई जा रही है। इतना ही नहीं एक मैजिक चालक ने वहां मौजूद केबल तार आदि लादकर वाराणसी की तरफ चला गया और लगभग एक घंटे बाद पिकअप वाला आकर मोबाइल ट्रांसफार्मर के ट्राली को पिकअप में लगाकर स्थानीय चौराहे से होते हुए रामनगर की तरफ चला गया जो सीसी कैमरे में सब रिकॉर्ड है। मजे की बात यह है कि उक्त विभाग का कार्यालय रामनगर थाना अंतर्गत सुजाबाद पुलिस चौकी के पास है लेकिन राजस्व क्षेत्र चंदौली जनपद के मुगलसराय थाना अंतर्गत पुलिस चौकी जलीलपुर में आता है। चोरों ने चोरी करके पुलिस को सीधी चुनौती दे दी थे। वहीं इस संबंध में अवर अभियंता संतोष कुमार ने बताया कि पुलिस चौकी जलीलपुर में तहरीर दे दिया गया है।

किल्लत व जिल्लत भरा रहा भाजपा का शासनकालः अखिलेश

चंदौली पालीटेक्निक कालेज में आयोजित सभा को संबोधित करते पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव।

पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने जनसभा में भाजपा सरकार पर साधा निशाना

Young Writer, चंदौली। सपा प्रमुख व सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने शुक्रवार को पालीटेक्निक कालेज के ग्राउंड पर आयोजित चुनावी जनसभा को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि यूपी का चुनाव जनता लड़ रही है। पहले चरण में चुनाव में ही जनता ने सरकार को अपनी वोट के ताकत का ऐहसास करा दिया था। यूपी में ऐतिहासिक बहुमत के साथ सपा सत्ता में लौटने जा रही है। आरोप लगाया कि भाजपा के राष्ट्र व राष्ट्र के लोगों से कोई वास्ता सरोकार नहीं है। भाजपा नेताओं के भाषण में उनकी हताशा साफ झलक रही है। ये लोग झूठ बोलकर जनता को गुमराह कर रहे हैं। उन्होंने चंदौली में साइकिल की लहर को ललकार के साथ सरकार में तब्दील करने में सहयोग देने की बात की।
इस दौरान पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने पालीटेक्निक कालेज के ग्राउंड पर जमा जनता से सीधा संवाद किया। अपनी चुनावी योजनाओं को मजबूती के साथ रखा। साथ ही जनता की मांग को अपने अभिवादन में स्वीकार किया। कहा कि सपा सरकार बनी तो महंगाई से निजात के साथ ही रोजगार के दरवाजे खुलेंगे। युवाओं की हताशा को रोजगार से जोड़कर उसे समृद्ध व सशक्त बनाना जाएगा। आरोप लगाया कि भाजपा की केंद्रीय सरकार एक-एक कर सभी उपक्रमों को बेचने का काम कर रही है। यही वजह है कि देश में तेजी से रोजगार के अवसर सृजित है। कहा कि जनता अब ऐसे लोगों से सत्ता छिनने का काम कर रही है जो देश व देश की सम्पत्ति को संभाल नहीं सकते और पूंजीपतियों के हाथों की कठपुतली बन बैठे हैं। आरोप लगाया कि भाजपा केवल बड़े-बड़े विज्ञापनों में बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन जमीन पर भाजपा की कोई योजना नजर नहीं आ रही है। नौकरी मांगने वालों को सरकार लाठियों से पिटवा रही है और मंच व माइक से गर्मी निकालने की बात कहकर जनता को गुमराह करने का षड्यंत्र सूबे के मुख्यमंत्री व भाजपा के दिग्गज नेता कर रहे हैं। कहा कि भाजपा सरकार ने आम आदमी का सम्मान खत्म कर दिया। भाजपा शासनकाल में जनता ने किल्लत व जिल्लत की जिंदगी जी है, लेकिन अब वह परिवर्तन चाहती है। यही लहर यूपी में पहले चरण से चली और यूपी में बीएड-टेट पास युवाओं की उपेक्षा की जा रही है। भरोसा दिया कि बीएड-टेट के साथ-साथ शिक्षामित्रों को सम्मान दिया जाएगा। इस मौके पर पूर्व सांसद रामकिशुन, कैलाशनाथ यादव, प्रभुनारायण सिंह यादव, मनोज सिंह डब्लू, चंद्रशेखर यादव, जितेंद्र कुमार, मनोज काका, अरविंद यादव, परवेज अहमद जोखू, जिलाध्यक्ष सत्यनरायन यादव, सुनील यादव गुड्डू, मयंक सिंह, अशोक त्रिपाठी छोटू, रुकमणि निषाद, मुसाफिर चौहान आदि उपस्थित रहे। संचालन नफीस अहमद ने किया।

इतिहास के घर में

डा. उमेश प्रसाद सिंह।
डा. उमेश प्रसाद सिंह।

Young Writer, साहित्य पटल। ललित निबंधकार डा. उमेश प्रसाद सिंह की कलम से

इतिहास अपने समय में मनुष्य जाति की सामूहिक चेतना का घर है। हमारी चेतना बहुत हद तक ज्ञात और बहुत हद तक अज्ञात रूप में इतिहास में निवास करती है। इतिहास प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप में हमारे चिन्तन और विचार को प्रभावित करता है। यह सच है कि इतिहास मनुष्य जाति की निर्मिति है। मगर यह भी सच है कि मनुष्य जाति के निर्माण में भी इतिहास की महत्वपूर्ण भूमिका है। मनुष्य, इतिहास को बनाता है और इतिहास मनुष्य को बनाता है। इतिहास और आदमी का पारस्परिक अन्तर्सम्बन्ध अत्यन्त संवेदनशील और नाजुक है।
ठीक घर की तरह ही इतिहास हमें सुरक्षा, सुविधा और जीवन के विकास के लिये ऊर्जा प्रदान करता है। उसके प्रति हमारा रागात्मक लगाव स्वाभाविक है। मगर इसके मायने यह कत्तई नहीं है कि घर की संरक्षा के कारण उसके प्रति हमारा राग जड़ और स्थिर होकर हमारे में जड़ता का संचार करने लगे। हम घर बनाते हैं, अपने पुरखों के घर को परिवर्धित और संबर्धित करते हैं। हमारे घर में रहने की सार्थकता, हमें प्राणवान और ऊर्जावान बनाकर हमें गतिशील करने में है।
इतिहास के साथ मानवीय चेतना का रिश्ता स्थिर रिश्ता नहीं है। वह द्वन्द्वात्मक और गतिशील रिश्ता है। इतिहास से मनुष्य जाति की सामूहिक चेतना की निर्मिति और मनुष्य जाति की सामूहिक चेतना से इतिहास की निर्मिति की प्रक्रिया हमेशा चलने वाली निरन्तर गतिशील प्रक्रिया है। जो लोग यह समझते हैं कि इतिहास केवल कुछ बीती हुई घटनाओं का लिखित या अलिखित समुच्चय भर है, वे इतिहास चेतना के मर्म को बूझने से वंचित रह जाते हैं। जो वंचित रह जाते हैं, वे ही अपने भ्रमों के दुराग्रह से इतिहास की सजीवता को नष्ट करने का अपराधी उद्योग करते हैं। इतिहास वह नहीं है, जो आज नहीं है। इतिहास वह है, जो आज भी अपने परिणामों के प्रभाव से हमारे जीवन को आन्दोलित करता है। इतिहास अपने परिणामों के प्रभाव के रूप में हमारे में मौजूद है। उस प्रभाव को अपने समय के सन्दर्भ में ग्रहण करने के विवेक को ही इतिहास चेतना कहा जाता है। इतिहास चेतना के विकास के अभाव में इतिहास की जानकारियों का कोई मतलब नहीं होता। इतिहास चेतना का विकास किये बिना इतिहास की शिक्षा का विस्तार जीवन दृष्टि को समृद्ध करने में कभी अर्थवान नहीं हो सकता।
मनुष्य जाति चाहे जितनी शक्तिशाली और तकनीक में समुन्नत हो जाय, मगर वह इतिहास के तथ्यों को बदलने में कभी समर्थ नहीं हो सकती। इतिहास की गलतियों को ठीक करने का दम्भपूर्ण उद्योग मनुष्य जाति को प्रतिगामिता की ओर ले जाने का केवल एक छलपूर्ण उद्वेलन है। इसके मूल में किसी प्रछन्न स्वार्थ के अलावा किन्हीं दूसरे सार्थक तथ्यों की तलाश सरासर धोखा है। इतिहास के अपराधों के अभियोग वर्तमान की अदालत में सुनवाई के लिये लगाने की उत्प्रेरणा एक उत्तेजक मानसिक वंचना के अलावा और अर्थ नहीं रखती। इतिहास से प्रतिशोध का प्रयत्न जीवन से विमुख होने के प्रयत्न से भिन्न नहीं है।
इतिहास हमें आगाह करता है कि कोई भी अवसर केवल एक बार ही आता है। अवसर दुबारा नहीं आते। दुहराये नहीं जाते। बीते हुये अवसरों के अनुभव आगे आने वाले अवसरोें के लिये हमें सतर्क और सनद्ध कर सकें, हमारे विवेक को जाग्रत और हमारी शक्ति को उर्जस्वित कर सकें तो इतिहास की सार्थकता प्रमाणित होती है। इतिहास में उपस्थित अवसरों के घटित परिणाम हमारे पक्ष में भी होते हैं और विपक्ष में भी। हमारी अभीप्याओं का अक्षत भी बनाये रखते हैं और प्रतिरूप भी होते हैं। हमारी आकांक्षाओं के अनुरूप भी होते हैं और क्षत-विक्षत भी बनाते हैं। इतिहास के बहुत से स्थल हमारे लिये गर्व के भी विषय हैं और बहुत से ग्लानि के भी। इतिहास के प्रति हमारा क्या व्यवहार हो, इसे तय करना हमारा सबसे अधिक उत्तरदायित्व का काम है।
जहाँ तक मैं समझता हूँ इतिहास के साथ हमें अपने रिश्ते को बेहद संयम, धैर्य, सहिष्णुता और विवेक के साथ बरतने का व्यवहार विकसित करना चाहिए। वर्तमान की तरह ही इतिहास की विद्रूपताएँ भी हमें पीड़ा पहुँचाती है, यह बिल्कुल सच है। उस पीड़ा को सहने की शक्ति अपने में हमें विकसित करने के अलावा दूसरे रास्ते और अधिक भयावह परिणाम की ओर ले जाने वाले होंगे।
हमारे इतिहास में हल्दीघाटी की लड़ाई हमारी विरासत की हारी हुई लड़ाई है। मगर तमाम जीती हुई लड़ाइयों से यह हमारे लिये अधिक कीमती, गौरवपूर्ण और गर्व की लड़ाई है। ऐसा क्यों है? एक हारा हुआ नायक हमारे जातीय गौरव का महानायक क्यों है? हमें सोचना चाहिए। राणा प्रताप हमारे राष्ट्रीय स्वाभिमान के प्रतीक चरित्र क्यों है? एक शासक के रूप में अकबर की महानताओं के सम्मुख उसकी क्षुद्रताओं को उजागर करने में राणा प्रताप कैसे समर्थ हैं? ये सब सवाल हमारी इतिहास चेतना के निर्माण के लिये बेहद जरूरी सवाल हैं।
कोई भी लड़ाई बड़ी या छोटी नहीं होती। हमेशा लड़ाई का मकसद लड़ाई की महत्ता का निर्धारण करता है। किसी भी लड़ाई में हार या जीत बड़ी चीज नहीं होती। बड़ा केवल संकल्प होता है। जो मनुष्य की गरिमा की रक्षा के लिये लड़ते हैं, इतिहास उनका को जाता है। उनका इतिहास भविष्यत की मनुष्य जाति की इतिहास चेतना के निर्माण का उत्प्रेरक बन जाता है। महाराणा की लड़ाई, शिवाजी की लड़ाई, टीपू सुल्तान की लड़ाई, लक्ष्मीबाई की लड़ाई राजनीतिक लड़ाई नहीं है। वह मनुष्य की जन्मगत स्वतंत्रता, सहज स्वाभिमान और अपनी ऐतिहासिक विरासत की सुरक्षा की लड़ाई है। मनुष्य की महत्ता को बचाये रखने के लिये लड़ी गई कोई छोटी-सी, छोटी लड़ाई भी सहज ही महत्तम बन जाती है।
इन लड़ाइयों की स्मृति का अटल प्रतिरोध हमें उच्चतर मानवीय मूल्यों की विरासत के प्रति हमारे में सम्मान का भाव जगाकर सार्थक इतिहास चेतना का विकास करता है।
कौन-सी लड़ाई, कौन-सा प्रतिरोध, कौन-अभियान आदमी को बड़ा बनाता है, यही सबसे महत्वपूर्ण बात है। जिससे उसके पास्परिक सम्बन्धों का दायरा बढ़ता है, सहिष्णुता और सहकारिता विकसित होती है, आन्तरिक सम्मान समृद्ध होता है, स्वाभिमान उन्नत होता है, मनुष्य जीवन के लिये वह सब मूल्यवान है, महत्वपूर्ण है। वही हमारी ऐतिहासिक सम्पदा है। मनुष्य जाति का जो भी आचरण और व्यवहार एक दूसरे के प्रति क्रूर, अहिष्णु और प्रतिशोधी बनाता है, मनुष्य की कीमत घटाने वाला है, आदमी को छोटा बनाने वाला है। वह सब न हमारे अपने काम का हैं, न अपनों के काम का है। न इतिहास के काम का है, न वर्तमान के काम का, न भविष्य के काम का।
जो इतिहास हमें उन्नत बनाने में सहायक नहीं है, वह इतिहास नहीं, इतिहास का उच्छृष्ट है। इतिहास में इतिहास का उच्छृष्ट भी, इतिहास के स्वरूप में समाहित पड़ा है। इतिहास के सत्व से इतिहास के उच्छृष्ट को अलगाने के लिये, इतिहास चेतना का विकास मनुष्य जाति के विकास के लिए सबसे अधिक मूल्यवान चीज है।
घर में रहते हुये घर के प्रभाव को अपने अनुकूल बनाने का उद्योग हमेशा से, हमेशा के लिये मनुष्य जाति के जीवित और जागृत होने का सहज प्रमाण है। इतिहास मनुष्य की सामूहिक चेतना का आवास है। अपने पुराने घर में हमें कहाँ नई खिड़की खोलने की जरूरत है और कौन-सी पुरानी खिड़की बन्द कर देना हमारी जरूरत के अनुकूल है, इसका विवेक हमें अपने में विकसित करना है।
मनुष्य जाति की जीवन यात्रा के लिये इतिहास उसकी स्मृति में संचित पूँजी है। इतिहास पंथ नहीं है, पाथेय है। पाथेय और पूँजी उपयोग के लिये है। इस उपयोग की प्रविधि का संधान ही इतिहास चेतना का मूल कर्तव्य है।
जो जातियाँ अपने इतिहास का उपयोग अपनी अभ्युन्नति और अपनी समृद्धि के लिये करने की शक्ति और विवेक हासिल कर लेती हैं, वे जीवित जाति कहलाती हैं। वे हमेशा जीवित और जागृत रही है। शक्तिशाली और समृद्धिशील होती है। इसके विपरीत जो जातियाँ इतिहास के उपयोग के काम आ जाती हैं, किसी तरह के अधैर्य, उत्तेजना और अविवेक के कारण इतिहास के उपयोग में खप जाती हैं, वे मिट जाती हैं।
मिटने का रास्ता इतिहास के काम का भी रास्ता नहीं है। अन्ततः मिटने के रास्ते पर जाना इतिहास में सम्मिलित होने से वंचित रह जाना होता है।
इतिहास के घर में रहकर इतिहास को समृद्ध बनाने के विवेक से वंचित रह जाना मनुष्य जाति क सबसे बड़ा दुर्भाग्य है।

परदेश को उठे पाँव

डा. उमेश प्रसाद सिंह।

Young Writer, साहित्य पटल। ललित निबंधकार डा. उमेश प्रसाद सिंह की कलम से

संकट है। चहुँओर संकट है।
चिड़िया के लिये चारा नहीं है। पंछी के लिये पानी नहीं है। पंथी के लिये छाँह नहीं है। आस्था के लिये कहीं कोई आश्वासन नहीं है।
जवानों के लिये रोजगार नहीं है। वृद्धों के लिये कोई सहारे क संबल नहीं है। दुध-मुँहों के लिये दुलार नहीं है। कहीं कोई हास-हुलास नहीं है।
खेतों के गिरे हुये, बचे हुये अन्न आग के हवाले कर दिये गये हैं। तालाबों, पोखरों के मुँह न जाने कबके सूखे हैं। छाँहों के सारे ठाँव राजाज्ञा की निगरानी में नजरबन्द हैं। आस्था के वृक्ष जंगलराज के ठेकेदारों के हाथ में जा चुके हैं।
चिड़िया कहाँ रहें? कैसे रहें? न रहें तो कहाँ जायँ? जायँ तो कैसे जाय? बड़ा संकट है। संकट है कि- ‘‘का खाईं, का पीहीं, का ले परदेश जाईं?’’
देश में रहना न हो सकेगा तो परदेश जाना ही पड़ेगा। हमारे समय में पूरे के पूरे गाँव ही परदेश जाने को पाँव उठाये खड़े हैं।
हमारे गाँव बड़े-बड़े शहरों के परदेश रोज-रोज जाने का मंसूबा बाँधते हैं। जाते हैं, जाकर अपनी पहचान खो देते हैं। गाँव शहर में जाकर खो जाते हैं। खप जाते हैं।
हमारे गाँव के जवान बड़े-बड़े शहरों की छोटी-छोटी फैक्टरियों के मजदूर बनकर अपना मुँह छिपाने को बेबस हैं। वृद्ध ए0टी0एम0 के मुँह जोहने को विवश हैं। जो अभी नहीं जा पाये हैं, वे भी जाने को पाँव उठाये खड़े हैं। न जायें तो क्या खायें? क्या पीयें? जायें तो, क्या लेकर परदेश जायें?
खेत गिरवी हैं। गहने ब्याज के बन्दीगृह में कैद हैं। काम पाने के लिये एजेण्टों की चिरौरी-मिनती चालू है। एजेण्ट पत्थर दिल है।
चिड़ियाँ परदेश जाना चाहती है। जवानी परदेश जाना चाहती है। कुल मिलाकर पास में एक चना है। चना दाल दलने के लिये चाकी में डाल दिया गया है। चाकी में एक चने की बिसात ही क्या। दाल चाकी के किल्ले में फंस गई है। अटक गई है।
चिड़िया बढ़ई के यहाँ गुहार लगाती है। बढ़ई किल्ला फाड़ दे तो दाल निकल आये। मगर नहीं, बिगड़ैल बढ़ई नहीं सुनता।
हमारे समय में फरियाद डालने के लिये भी जुगाड़ की जरूरत है। सिफारिश का जोर चाहिये। फिर फरियाद सुनने के लिये घूस चाहिये। काम पाने के लिय, काम की पगार पाने के लिये पगड़ी चढाने का बूता चाहिए। पगड़ी चढ़ाने के लिये सिर्फ एक चना है। चना चक्की के किल्ले में फँसा है। क्या लेकर परदेश जाय।
परदेश जाना लाजिमी है। मगर क्या लेकर? लेकर जाने को कुछ नहीं है। जो है, चक्की में है। जो है, चक्की के किल्ले में फंसा है।
परदेश में कौन, किसका सगा-सम्बन्ध्ी है, कोई नहीं। जिसके बाप में कोई कूबत नहीं है, उसे हर किसी को बाप बनाना है। कोई बाप बने न बने, दीगर बात है। मगर बनाना है। हमारे समय की जवानी लावारिस जवानी है। हमारे समय के बाप बिना कूबत के बाप हैं। अपने बापों की विवशता से कुपोषित जवानी पत्थरों के आगे बाप-बाप चिल्ला रही है। पत्थर सुन नहीं रहे हैं। फिर? बुरा हाल है।
जहाँ भूख है, भोजन नहीं है। जहाँ प्यास है, पानी नहीं है। जहाँ भोजन है, भूख नहीं है। जहाँ पानी है, प्यास नहीं है। जहाँ हाथ है, काम नहीं है। जहाँ काम है, हाथ नहीं है। जहाँ आँख है, सपने नहीं है। जहाँ सपने हैं, आँख नहीं है। बड़ा विपर्यय है। मगर है। हमारे समय में बहुत कुछ नहीं है मगर विपर्यय हर कहीं है।
विपर्यय में ही जीना है। रोज-रोज उधर जाती सीवन को रोज-रोज सीना है। फिर भी विकास की घुट्टी हमें पीना है। हम विकास के पथ पर अग्रसर है। हमारे गाँवों में उजाड़ का निरन्तर विकास हो रहा है। गलियों और चौपालों में सन्नाटे का बराबर विकास बढ़ रहा है। आपस में अपरिचय का, असंवाद का विकास बढ़ रहा है। चौड़ी-चौड़ी सड़कों के विस्तार में दुर्घटनाओं में बेशुमार विकास हो रहा है। दुर्घटनाओं में घायलों और मृतकों के लिए ट्रामा सेण्टरों का विकास बढ़ रहा है। किसिम-किसिम के स्कूलों में हर साल बढ़ती फीसों का विकास बढ़ रहा है। अलगाव और असुरक्षा का विकास तो बाढ़ की तरह उफन रहा है। भला कौन कह सकता है कि विकास नहीं बढ़ रहा है।
नहीं बढ़ रहा है, तो पारस्परिक विश्वास नहीं बढ़ रहा है। कर्तव्यबोध नहीं बढ़ रहा है। देश प्रेम नहीं बढ़ रहा है। जीवन की सुरक्षा नहीं बढ़ रही है। आश्वस्ति के आश्रय नहीं बढ़ रहे हैं। मगर इनके बढ़ने, न बढ़ने से हमारा विकास प्रभावित होने वाला नहीं है। लूट का, दलन का, दमन का विकास तो जंगल-जंगल गूँज रहा है। नदी-नदी, पहाड़-पहाड़ गरज रहा है।
बहुत लोग हैं, जिनका कहने-सुनने से विश्वास उठता जा रहा है। कहने को बहुत कुछ है, मगर किससे? जिनसे कहना है, उन्हें सुनने में कोई रूचि नहीं है। जिन्हें सुनना है, वे कान में तेल डाले बोलने के व्यापार में लगे हैं। जो कुछ सुन सकते हैं, उनसे कुछ भी कहना व्यर्थ है। फिर? फिर क्या, जो है सो है।
चिड़िया चाहे, जितनी चिल्लाये कोई सुनने वाला नहीं है। वह जितनी चिरौरी करे कोई पसीजने वाला नहीं है। सुनने वाला कोई नहीं है। चिड़िया की फरियाद कोई नहीं सुनेगा, न बढ़ई, न लाठी, न भाड़, न समुद्दर, न हाथी, न साँप, न रानी। हमारे पुरानी लोककथा की चिड़िया हमारे समय की चिड़िया नहीं है। हमारे समय की चिड़िया, कहानी की चिड़िया से अधिक अभागी है। कहानी के समय से हमारे समय में अभाग का विकास बहुत आगे बढ़ चुका है।
परदेश जाना चाहो जाओ। कैसे जाना है, तुम जानो। जाना चाहो खाली हाथ चले जाओ। रहना चाहो, खाली पेट रहो। जैसे भी रहना हो, रहो मगर चुप रहो। बस बोलो मत। बोलने से कानून व्यवस्था प्रभावित होती है। कानून-व्यवस्था में बाधा डालना अपराध है। अपराध के लिये सजा है। बोलोगे, तो सजा मिलेगी। और कुछ मिले, न मिले सजा जरूर मिलेगी। हमारे समय में सजा सुलभ है। न्याय दुर्लभ है। जो दुर्लभ है, उसे छोड़ो। जो सुलभ है उसे लो।
वोट दे दो। आश्वासन ले लो। आश्वासन को खाओ। आश्वासन को पीओ। आश्वासन को ले परदेश जाओ। परदेश में खो जाओ। परदेश में खप जाओ।
पता नहीं कैसा समय है। अपने ही देश में जाने कितने-कितने परदेश उगे आ रहे हैं। पनपते जा रहे हैं।
अपना देश, परदेश क्यों बनता जा रहा है। सारे जाने-पहचाने अपने, पराये जैसे क्यों बनते जा रहे हैं। अपना गाँव अपने गाँव जैसा क्यों नहीं है? अपने बाप, बाप जैसे क्यों नहीं हैं? अपनी सरकार अपनी सरकार जैसी क्यों नहीं है?
बहुत से सवाल हैं, गाँव-गाँव, गली-गली बौड़िया रहे हैं। सवाल बवण्डर की तरह उठ रहे हैं। धूल-गर्द फैला रहे हैं। आँखों में भरे आ रहे हैं। आँखें किरकिरा रही हैं। कुछ सूझ नहीं रहा है। सब पहचाने, अनपहचाने से बनते जा रहे हैं।
केवल चिड़िया नहीं, केवल जवान नहीं, केवल जवानी नहीं केवल बुढ़ापा नहीं, पूरा का पूरा गाँव, पूरे के पूरे गाँव परदेश जाने को पाँव उठाये हुये हैं।
हर कोई, हर किसी से पूछ रहा है- ‘का खाईं, का पीहीं, का ले परदेश जाईं?’’
कोई जवाब नहीं है। कहीं कोई जवाब नहीं है। कहीं से कोई जवाब नहीं उठ रहा है।
सवाल उठ रहे हैं। एक नहीं, दो नहीं। हजार-हजार, लाख-लाख, करोड़-करोड़ सवाल उठ रहे हैं। हमारे समय में आदमी सवाल में बदलता जा रहा है।
हमारे समय में भोजन, सवाल में बदलता जा रहा है। वस्त्र, सवाल में बदलता जा रहा है। दवा, सवाल में बदलती जा रही है। शिक्षा, सवाल में बदलती जा रही है।
हमारे समय में हर आदमी अपने ही घर में प्रवासी बनता जा रहा है। घर-घर में एक परदेश घुसने के लिये पाँव उठाये खड़ा है। हर घर, परदेश जाने को पाँव उठाये है।

Chandauli
light rain
27.8 ° C
27.8 °
27.8 °
77 %
2.7kmh
83 %
Thu
34 °
Fri
31 °
Sat
35 °
Sun
37 °
Mon
37 °

You cannot copy content of this page

Verified by MonsterInsights