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Friday, July 24, 2026

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चकिया से समाजवादी पार्टी का चेहरा बने जितेंद्र कुमार

कवई पहाड़पुर के डा. विनोद कुमार बिन्द को ज्ञानपुर से मिला टिकट

Young Writer, इलिया। समाजवादी पार्टी ने मंगलवार की शाम होते होते चंदौली के दो विधानसभा सीटों पर प्रत्याशियों के नाम पर अंतिम मुहर लगा दी है। हालांकि मुगलसराय विधानसभा को लेकर अभी सस्पेंश बना हुआ है। समाजवादी ने जनपद के अनुसूचित चकिया विधानसभा से पूर्व विधायक जितेंद्र कुमार को अपना उम्मीदवार बनाया है। उनकी उम्मीदवारी से जितेंद्र समर्थकों में खुशी रही। इसके साथ ही सपा ने जनपद के सैयदराजा विधानसभा क्षेत्र के कवई पहाड़पुर निवासी डा. विनोद कुमार बिन्द को ज्ञानपुर विधानसभा से अपना प्रत्याशी बनाया है। इन दोनों प्रत्याशियों के चयन से उनके समर्थक गदगद नजर आए।
विदित हो कि जितेंद्र कुमार बसपा से लम्बे समय तक जुड़े रहे और बसपा के टिकट पर चुनाव जीतकर विधायक बने। इसके बाद मतभेद के कारण उन्होंने बसपा से किनारा कर लिया और समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए। सपा में उनकी ज्वाइनिंग शानदार रही वह अपने समर्थकों के लम्बी चौड़ी फेहरिस्त के साथ सपा प्रमुख अखिलेश यादव की मौजूद में दल शामिल हुए और सपा की प्राथमिकता सदस्यता ली। इसके बाद लखनऊ से लौटे जितेंद्र कुमार चकिया विधानसभा क्षेत्र में पूरी शिद्दत से जुटे रहे। उनके बारे में यह कहा जाता है कि उनका दलितों के साथ ही अल्पसंख्यक समाज में अच्छी पकड़ है। साथ ही अन्य अतिपिछड़ी जातियों को लोग जितेंद्र कुमार को व्यक्तिगत पसंद करते है। उनके टिकट मिलने से देर शाम चकिया क्षेत्र खुशियों से गुल्जार रहा। जगह-जगह सपाइयों व कार्यकर्ताओं ने एक-दूसरे का मुंह मीठा कर खुशी का इजहार किया और पूरी मजबूती के साथ चुनाव लड़ने के संकल्प को दोहराया। उधर, दूसरी ओर धानापुर क्षेत्र के कवई पहाड़पुर में डा. विनोद कुमार बिन्द के पैतृक आवास पर समर्थकों का तांता लगा रहा। सपा ने उन्हें ज्ञानपुर विधानसभा से पार्टी का चेहरा बनाया।

नामांकन स्थल पर चल रही तैयारियों का डीएम ने जायजा

कलेक्ट्रेट में नामांकन स्थल का जायजा लेते जिला निर्वाचन अधिकारी।

Young Writer, चंदौली। विधानसभा सामान्य-2022 के मद्देनजर जिला निर्वाचन अधिकारी संजीव सिंह ने मंगलवार को कलेक्ट्रेट में होने वाले नामांकन स्थल का निरीक्षण किया। इस दौरान मौके पर चल रही तैयारियों का जायजा लिया। साथ ही जिम्मेदार अफसरों व कर्मचारियों से तैयारियों की प्रगति जानी। साथ ही निर्देश दिया कि नामांकन तिथि 10 फरवरी से पूर्व सभी तैयारियां पूरी कर लें, ताकि नामांकन की प्रक्रिया मुकम्मल करने में किसी तरह की बाधा व दिक्कतें न आए।
इस दौरान जिलाधिकारी ने नामांकन स्थल परिसर में बेहतर साफ-सफाई के निर्देश दिए। साथ ही पेयजल, वाशरूम, टायलेट, पर्याप्त बिजली सहित अन्य जरूरी कार्यों को तत्काल दुरुस्त कराते हुए पूर्ण कर लिए जाने के निर्देश दिए।। जिलाधिकारी ने पर्याप्त सीसीटीवी कैमरे लगाने हेतु निर्देशित किया। नामांकन के लिए परिसर में बैरिकेडिंग कराने के लिए निर्देशित किया। सुरक्षा के दृष्टिकोण से प्वाइंटवार पुलिस बल की ड्यूटी लगाने, स्थल की साफ-सफाई के लिए निर्देशित किया। जिलाधिकारी ने कहा पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी रखने की व्यवस्था की जाएगी। सुरक्षा का पुख्ता इंतजाम किया जाएगा। कलेक्ट्रेट के नामांकन स्थलों पर पर्याप्त बैरिकेडिंग कराई जाएगी। सीसीटीवी कैमरे लगाये जाएंगे। कलेक्ट्रेट परिसर में आने वाले प्रत्येक व्यक्ति को कड़ी सुरक्षा के बीच से गुजरना होगा। चेकिग के लिए दो प्वाइंट बनाए जाएंगे। इस दौरान उपजिला निर्वाचन अधिकारी उमेश मिश्रा, तहसीलदार सकलडीहा उपस्थित थे।

चकिया के किसानों ले ली मधुमक्खी पालन की ट्रेनिंग

Young Writer, चकिया। जिला कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा विकास खण्ड के फिरोजपुर गांव में मंगलवार को आजीविका संवर्धन के लिए मधुमक्खी पालन एवं मशरूम की खेती के लिए ग्रामीणों को जागरूक करने के लिए एक दिवसीय प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। प्रशिक्षण में कृषि वैज्ञानिक डा. एसपी सिंह ने ग्रामीणों को मधुमक्खी पालन से होने वाले लाभ की जानकारी दी।
इस दौरान कृषि वैज्ञानिक डा. एसपी सिंह बताया कि कोविड-19 की त्रासदी से निपटने के लिए किसानों और युवाओं को मधुमक्खी पालन से जोड़ा जा रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोरोना महामारी में इम्युनिटी बढ़ाने में शहद की भूमिका की बात कही है। बताया कि शहद शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है। नींबू और शहद मोटापे को कम करने में भी कारगर है। दुनिया के खाद्य उत्पादन का लगभग 33 प्रतिशत मधुमक्खियों पर निर्भर करता है। इस प्रकार वह जैव विविधता के संरक्षण, प्रकृति में पारिस्थितिक संतुलन और प्रदूषण को कम करने में भी सहायक है। मधुमक्खियां फूलों के रस को शहद में बदल देती हैं और उन्हें छत्तों में जमा करती हैं। बढती हुई जनसंख्या तथा घटते हुए कृषि के जोत के आकार को देखते हुए वर्तमान में अतिरिक्त कृषि योग्य भूमि उपलब्ध करा पाना असम्भव है। इसलिए कृषकों के पास अधिक आर्थिक आय के लिए सघन, रक्षात्मक व वैज्ञानिक कृषि प्राणाली को अपनाना ही एकमात्र उचित विकल्प बचा है। इसके अलावा प्रशिक्षण में मशरूम की खेती से होने वाले आय सृजक गतिविधियों की जानकारी दी गई। इस दौरान प्रगतिशील किसान अनिल मौर्य, चंद्र प्रकाश नारायण, मनोज मौर्य, मंगल यादव, रामकेश, संतोष, संतलाल, गोकुल, सुभाष सिंह,जय सिंह, कमला यादव,सीताराम, गणपत, संपत, राम अवतार मौजूद रहे।

नई बस्ती में विवाद के बाद दो पक्षों में जमकर चले ईंट-पत्थर

फोटो-07
विवाद के बाद हुई पत्थरबाजी के बाद मौके पर जुटी पुलिस।


Young Writer, मुगलसराय। मुग़लसराय कोतवाली क्षेत्र के नई बस्ती में मामूली विवाद को लेकर दो पक्ष आपस में भिड़ गए। इस दौरान दोनों के बीच जमकर हुई पत्थरबाजी भी हुई जिसमें कुछ लोगों को मामूली चोटें आई हैं। घटना के दौरान मौके पर अफरा-तफरी का माहौल व्याप्त हो गया। मौके पर पहुँची पुलिस ने मामले को शांत करा लिया है और आगे की कार्यवाई में जुट गई है।
घटना के संबंध में बताया जा रहा है कि सोमवार की रात सरस्वती पूजा में मूर्ति विसर्जन के दौरान शराब पीने को लेकर के दो पक्षों में विवाद हो गया। उसी मामले से एक पक्ष के नाराज लोगों ने मंगलवार की सुबह दूसरे पक्ष के लोगों में से किसी एक युवक को घेरकर पिटाई कर दी। जिसके बाद मामले ने तूल पकड़ लिया। दोनों पक्षों से सैकड़ों की संख्या में लोग इकट्ठे हो गए और जीटी रोड पर आमने सामने सर एक दूसरे पर पथराव किया। घटना की सूचना पर मौके पर पुलिस पहुंच गई। जिन्होंने दोनों पक्षों के लोगों को खदेड़ कर मामला शांत कराया। इतना ही नहीं मौके पर शांति व्यवस्था कायम रखने के लिए भारी संख्या में फोर्स की तैनाती की गई। बताते हैं कि मुगलसराय कोतवाली क्षेत्र में शराब पीकर विवाद करने का यह कोई नया मामला नहीं है, बल्कि इसके पूर्व अक्सर इस तरह के विवाद हुए हैं। वहीं मामले में मुग़लसराय कोतवाल ने बताया कि मंगलवार की सुबह हुई घटना में सुसंगत धाराओं में सात लोगों के खिलाफ नामजद मुक़दमा दर्ज किया गया है। नामजद में एक पक्ष से चार व दूसरे पक्ष से तीन लोग शामिल हैं। दोनों पक्ष से तीन-तीन नामजद लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है। मौके पर शांति व्यवस्था कायम रखने के लिए फ़ोर्स तैनात किया गया है। साथ ही आगे की कार्यवाही जारी है।

धर्म-जाति से ऊपर उठकर करें मतदानः राकेश रौशन

धानापुर के मदरसा मिस्बाहुल उलूम में मुस्लिम छात्र-छात्राओं एवं शिक्षकों को मतदान की शपथ दिलाते स्वीप आईकॉन राकेश यादव रौशन।

मुस्लिम समुदाय ने मदरसा में ली निष्पक्ष भयमुक्त मतदान करने की शपथ

Young Writer, चंदौली। मुख्य निर्वाचन अधिकारी के निर्देश पर स्वीप के तहत जनपद में चलाए जा रहे मतदाता जागरूकता कार्यक्रम के तहत मंगलवार को धानापुर के मदरसा मिस्बाहुल उलूम के मुस्लिम छात्र-छात्राओं एवं शिक्षकों को जिले के स्वीप आईकॉन राकेश यादव रौशन ने मतदान तिथि सात मार्च को अनिवार्य रूप से मतदान करने की शपथ दिलाई।
इस अवसर पर राकेश रौशन ने कहा कि लोकतांत्रिक को मजबूत करने के लिए हमें धर्म जाति से ऊपर उठकर मतदान करने की जरूरत हैं। जाति, धर्म, क्षेत्रवाद, भाषावाद, सम्प्रदायवाद से देश कमजोर है, जिससे अंततः हमारा लोकतंत्र कमजोर होता है। कहा कि लोकतंत्र का महापर्व पांच साल में एक बार आता है, जो अपने जिले में आगामी 07 मार्च को है। कहा कि एक अच्छे व्यक्ति, एक अच्छी सरकार और देश के विकास के लिए आगामी सात मार्च को मतदाता निष्पक्ष, भयमुक्त और प्रलोभन रहित होकर अधिक से अधिक मतदान करें। इसके लिए पूरे जनपद में जगह-जगह स्वीप के कार्यक्रम करके हर वर्ग के मतदाताओं को जागरूक करने और अनिवार्य मतदान करने की शपथ दिलाई जा रही है। कहा कि समाज के दिव्यांग, बुजुर्ग और कोविड पॉजिटिव मतदाताओं को मतदान करने में सहयोग करने की जरूरत है। बताया कि जिलाधिकारी संजीव सिंह की देख-रेख में कोविड प्रोटोकॉल के तहत मतदान को सकुशल सम्पन्न कराने के लिए कृत संकल्पित है। इसके लिए हर स्तर पर अलग-अलग टीमें बनाकर सक्रिय कर दी गई हैं।

एक मुहावरे की हत्या का अभियोग

Young Writer, चुनाव डेस्क। ललित निबंधकार डा. उमेश प्रसाद सिंह की कलम से
गिरगिट एक ऐसा जन्तु है, जो कुछ घरेलू है और बहुत कुछ जंगली भी। जब हमारे घरों के सामने पेड़-पौधे हुआ करते थे, गिरगिट प्रायः दिखा करते थे। वैसे गिरगिट से मेरी निकटता कभी नहीं रही। बस एक कुतुहल ही हुआ करता था, उसे देखकर। मन में कभी गिरगिट के लिए कोई आकर्षण नहीं पैदा हुआ। पैदा होता भी क्यों? न कोई ढंग का रंग, न कोई चाल-ढाल। धूसर रंग, लम्बी पूँछ, बेडौल पेर मुझे अच्छे नहीं लगे कभी। उसका गर्दन उचका-उचका कर अविश्वास भरी नजरों से देखना जैसे कि वह देखने वाले को तौल रहा है? मुझे नागवार ही लगता। फिर भी गिरगिट को बचपन में मैं दूर से प्रायः देखा करता था। तब गिरगिट के रंग बदलने के मुहावरे का अर्थ मैं कत्तई नहीं जानता था। आज भी मुहावरे का पूरा अर्थ मैं जानता हूँ, यह दावा नहीं कर सकता। हाँ, इतना जरूर जानता हूँ कि रंग बदलने के मुहावरे के माध्यम से गिरगिट दुनिया भर के मनुष्यों की स्मृति में जरूर अपनी जगह बनाए हुए है।
गिरगिट अपना रंग बदलता है या उसका रंग अपने आप बदल जाता है, ठीक से नहीं कह सकता शायद वह जिस रंग की छाया में होता है, उसी रंग का दिखने लगता है। मेरा ख्याल है रंग का बड़ा व्यापक अर्थ है। रंग केवल लाल-पीला ही नहीं है। रंग केवल हरा नहीं है। केवल सफेद नहीं है। रंग, रंग-ढंग में भी है। रंग, रंग जमाने में भी है। रंग गाठने में भी है। रंग के और भी बहुत से रंग है। पता नहीं क्यों मुझे लगता है, इस मुहावरे में जो रंग है वह रंग के व्यापक अर्थ में प्रयुक्त है। गिरगिट का रंग बदलना अवसर के अनुकूल अपने हित में अपना व्यवहार

और अपनी वाणी बदल लेने की जैसी व्यापक व्यंजना भाषा में व्यक्त करता है, वह बड़ा अद्भुत है।
गिरगिट बहादुर कत्तई नहीं है। हाँ, स्वाथी जरूर बेहद है। काइयां तो निश्चय ही अव्वल दर्जे का है। डरपोक भी बहुत है। मगर अपने डर को छिपा लेने में भी माहिर है। इतना ही नहीं अपने डर को डकार कर वह अपनी दुबली गरदन हिला-हिला दूसरों के दिल में डर जगाने में भी वह निपुण होता है। हालांकि गिरगिट से कोई भी डरता नहीं।
गिरगिट का अपना कोई घर नहीं होता। मगर वह किसी के भी घर में घुसकर अपने घर की तरह रह लेने का हुनर जनम से ही जानता है। वह जिस घर से निकल कर जाता है, उसकी चौखट पर थूककर जाता है। थुथकार कर जाता है। जाता है तो खूब फूँफकार कर जाता है। अपने फुत्कारने की फेंचकुर के फेन से उसके निकसार को पाटकर जाता है। खैर! छोड़िस इस गिरगिट पुराण को।
मैं जब भी इस मुहावरे के बारे में सोचता हूँ मुझे लगता है, बेचारा गिरगिट अलानाहक ही बलि का बकरा बन गया है। यह मुहावरा गिरगिट का नहीं भ्रष्ट मनुष्य की व्याभिचारी वृत्ति की भर्त्सना की अनूठी व्याजोक्ति है। लोक चेतना में मानवीय मूल्यों के प्रति जो व्यापक निष्ठा है, जो अडिग अनुरक्ति है, वह अद्भुत कल्पनाशीलता के साथ अत्यन्त सूक्ष्म व्यंजनाओं के माध्यम से उन मूल्यों की मर्यादा को कलंकित करने वालों के प्रति कठोर प्रहार करने में हमेशा सक्रिय और सजग रहती है। मुहावरों के माध्यम से, कहावतों के माध्यम से, लोकोक्तियों के माध्यम से लोक चेतना का भास्वर प्रतिरोध गरजता रहता है। ठीक से देखा जाय तो एक मुहावरा हजार-हजार कविता पर भारी पड़ता है। वहाँ कथ्य और अभिव्यंजना में व्यापक और सूक्ष्म का ऐसा समन्वय दिखाई देता है कि काव्य कौशल उसके आगे पानी भरने को विवश हो उठता है।
मेरा ख्याल है, जब यह मुहावरा बना होगा मनुष्य की प्रजाति में राजनेता की किस्म नहीं रही होगी। हमारे लोकतंत्र में मौजूदा राजनीतिक दलों का अस्तित्व न रहा होगा। चुनाव की प्रणाली न रही होगी। झूठ और पाखण्ड का ऐसा प्रचलन न रहा होगा। बाजार में बेशर्मी की ऐसी प्रतिष्ठा न रही होगी। सीना फुलाकर गाल बजाने का ऐसा चलन न रहा होगा। अगर रहा होता तो बेचारे गिरगिट पर यह गाज नहीं गिरी होती। आज गिरगिट जरूर हमारी राजनीति में नेताओं के रंग देखकर लजाता होगा। अपनी औकात पर पछताता होगा। मगर अब उसके पछताये का मतलब ही क्या? अब तो मुहावरा दुनियाँ भर के लोगों की जबान पर चढ़ा बैठा है। अब आदमी का नेता चाहे गिरगिट से भी जितना नीचे गिर जाय, इस मुहावरे को आदमी की जवान से नीचे गिराना संभव नहीं।
पहले कहा जाता था कि आदमी को ऊँचा उठने में बड़ी मेहनत करनी पड़ती है। मगर आज दिखाई दे रहा है कि आदमी को नीचे गिरने में कितना साहस जुटाना पड़ता है, कह पाना मुश्लिक है। उल्टे घड़े की तरह औंध जाना और बेपेदी के लोटे की ढुलक जाना सचमुच हँसी खेल तो नहीं ही है।
जब चुनाव की घोषणा हो जाती है। आयोग की अधिसूचना जारी हो जाती है। नेताओं की प्रजाति की आत्मा में लिप्सा और लोलुपता के विषाणु कुलबुलाने लगते हैं। अपनी सुख सुविधा अपने भोग और ऐश्वर्य के छिन जाने की आशंका का ज्वर कँपकपी पैदा करने लगता है। यह बुखार उन्हें इतना व्यथित करता है कि वे बड़बड़ाने लगते हैं। राजनीतिक दलों में भगदड़ मचने लगती है। इसमें से उसमें और उसमें से इसमें , आने-जाने का सिलसिला शुरू हो जाता है। सत्ता में सिंहासन पर बरसों से कुंडली मारकर बैठा कोई मंत्री कहने लगता है कि वह जहाँ था, आक्सीजन बहुत कम थी। वहाँ उसका दम घुट रहा था। अपने सारे अधिकारों का पूरा-पूरा उपयोग और दुरुपयोग करने के बावजूद उसकी आत्मा की बेचैनी बहुत बढ़ जाती है। वह जनता की ठीक से सेवा करने के लिए दूसरे दल में शामिल हो जाता है। जिस दल की छाती पर चाकी चलाकर दाल दलते उसके हाथ नहीं थकते थे, उसी दल में अब उसकी दिव्यदृष्टि अमृत के स्रोत का दर्शन करने लगती है। जनता उजबक की तरह उसका मुंह ताकते रह जाती है। जनता कर भी क्या सकती है। जनता को दलों की दस्युता की पालकी ढोनी ही है। वह अपने कंधे सहलाते, उनके भाषण के लवण भाष्कर चूर्ण फाकते अपना हाजमा दुरूस्त करने में जुट जाती है। हमारे जनतन्त्र में अधिकार सबको मिला है। अधिकार को लेकर शिकायत की कोई गुंजाइश नहीं है। नेताओं को बोलने का असीम अधिकार मिला है। जनता को सुनने का अपार अधिकार मिला है। राजा को सुख भोगने का और प्रजा को दुख भोगने का बराबर का अधिकार हमारे लोकतंत्र का अनमोल उपहार है। घोड़े को घास चरने का और घास को हरा होते रहने का अधिकार हमारे लोकतंत्र में बराबरी के अधिकार की प्रतिष्ठा करता है।
ठीक चुनाव का बिगुल बजने के साथ एक राज परिवार के वधू की आत्मा में विद्रो का तूफान उठ खड़ा हो गया। सारे सुखों के उपभोग के बावजूद अधिकार सुख की उत्कंठा ने उसे डँवाडोल कर दिया। वह अपने घर के दल से नाता तोड़कर दूसरे दल के घर में जा बैठी। उसके वक्तव्य और बयान समाचार पत्रों की सुर्खियों में छा गए। टी.वी. के सारे चैनलों में एक साथ गूँजने लगे। जैसे कोई बहुत बड़ी क्रान्ति हो गई है। हमारे समय के समाचार में दलबदल जैसा जघन्य कृत्य महत्व का विषय बन गया है। जिसकी भर्त्सना होनी चाहिए, उसका अभिनन्दन हो रहा है। भर्त्सना का अभिनन्दन लोकतन्त्र का नया मूल्य बन रहा है, क्या? कौन बता सकता है।
गिरगिट की जाति बड़े संकट में घिर गई है। उसकी तो अस्मिता ही डँवाडोल हो उठी है। उनके हिस्से में था ही क्या? महज एक मुहावरे की थाती को छोड़कर गिरगिट की पूरी जाति के पास और है ही क्या!
हमारे लोकतंत्र की मौजूदा स्थिति में गिरगिट हाथ उठा-उठाकर फरियाद कर रहे हैं। भाई हमने आपका क्या बिगाड़ा है। आप हमारे पर हमारी विरासत पर इतने कुपित क्यों हैं? कुठाराघात क्यों कर रहे हैं। रंग बदलने वाले नेताओं पर जनता के न्यायालय में एक मुहावरे की हत्या का अभियोग विचार के लिए दाखिल किया गया है। किसी भी समाचार में इनते बड़े अभियोग की कहीं भी कोई चर्चा नहीं है। एक मुहावरे की हत्या का अभियोग लोकतंत्र की हत्या के अभियोग से अलग नहीं है। देखिए आने वाले समय में इस अभियोग पर विचार हो पता है, या लम्बित पड़ा रह जाता है। हमारे समय में जाने कितने विचारणीय अभियोग लम्बित पड़े रहने का अभिशाप झेल रहे हैं।
मुझे लगता है मेरे चारों तरफ गिरगिट आकर खड़े हो गए हैं जिधर देखता हूँ गिरगिट ही गिरगिट दिख रहे हैं। मैं उनके घेरे में घिर गया हूँ। गिरगिटों में आक्रोश है। वे तरह-तरह के सवाल कर रहे हैं। मैं क्या जवाब दूं।
वे सवाल कर रहे हैं? आदमी सबका हक क्यों छीन रहा है?
आदमी गिरगिट क्यों बन रहा है? जब आदमी, आदमी बनकर संतुष्ट नहीं हो पा रहा है तो क्या गिरगिट बनकर संतुष्ट हो सकेगा? नहीं, नहीं स्वार्थी आदमी जिस भी रंग में रंगेगा, रंग को ही कलंकित करेगा।
गिरगिट मुझसे पूछ रहे हैं, आपके समय में राजनीतिक दल इतने अन्धे क्यों हैं?
आपके समय के दल किस दलदल में फँसे है कि अदना-सी बात नहीं समझ पा रहे?
क्या वे नहीं जानते कि निष्ठा का रंग नहीं बदलता? क्या उनकी समझ में यह बात नहीं आती कि आचरण के व्याकरण की नाक पर रूमाल रख कर भी निष्ठा का तुक बिष्ठा से नहीं मिलाया जा सकता।
वे मुझसे पूछ रहे हैं, क्या आप हमारे एक मुहावरे की हत्या के अभियोग में अपनी गवाही दे सकते हैं। आप हमारा गवाह बन सकते हैं?
मैं क्या करूं? क्या कहूँ? सोच नहीं पा रहा हूँ।
मैं ‘नहीं’ कहकर उन्हें दुखी नहीं करना चाहता। उन्हें निराश नहीं करना चाहता।
मगर ‘हाँ’ कहकर उनका झूठमूठ का उत्साह भी नहीं बढ़ा सकता।
मैं जानता हूँ, मेरी गवाही से कोई फर्क नहीं पड़ता। मुझे सचाई के लिए गवाही देना, सचाई का सबसे बड़ा अपमान मालूम पड़ता है।

‘समाजवादी पार्टी‘ ने समाज के प्रति समर्पण व संघर्ष को दिया सम्मान

Young Writer: Manoj Singh W

समाजवादी पार्टी ने मनोज सिंह डब्लू को सैयदराजा से दिया टिकट

Young Writer, चंदौली। सैयदराजा एक बार फिर इतिहास दोहराने जा रहा है। हालांकि इसकी इबारतें अभी लिखी जानी है, लेकिन आवाम में मची कोलाहल ने शब्दों को बैचेन कर दिया है। अब इंतजार है कि तो उस तारीख का, जब ये कोलाहल परिचर्चा से परिणाम में बदल जाए और उसे शब्दों में पिरोकर दर्ज करने की कार्यवाही मुकम्मल हो। जी हां! यह सबकुछ सैयदराजा के राजनीतिक को लेकर लिखी जा रही है, ताकि पढ़ी आए और सनद भी रहे कि किस तरह समाजवाद ने समाज के प्रति समर्पण, संघर्ष को सलाम किया और जनता के एक प्रतिनिधि को जनप्रतिनिधित्व का अवसर दिया।

सैयदराजा विधानसभा के उन मतदाताओं व आम नागरिकों के लिए मंगलवार का दिन उस वक्त मंगलकारी हो उठा, जब सैयदराजा के पूर्व विधायक और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव मनोज सिंह डब्लू का नाम समाजवादी पार्टी के प्रत्याशियों की सूची में दर्ज किया गया। सूची के प्रकाशन व उसे सोशल मीडिया में आते ही सैयदराजा विधानसभा के चप्पे-चप्पे में खुशियों की लहर दौड़ गयी। खासकर गरीब ग्रामीणों के मोहल्ले, दलितों की झुग्गी-झोपड़ियों में निवासरत लोगों के चेहरे की रौनक से जगमग हो उठा था। ऐसा लग रहा था मानो अघोषित रूप से पूरा का पूरा इलाका होली व दीवाली जैसा जश्न बना रहा है। बसंत में फागुन का प्रभाव दिख रहा था। कुछ लोगों ने इस उत्साह को मतदान तिथि तक बनाए रखने के संकल्प भी लिए। इन लोगों को समाजवादी पार्टी व मनोज सिंह डब्लू का समर्थक कहा जाना बिल्कुल भी गलत नहीं होगा। उत्सव मनाना और उत्साहित होना लाजिमी भी था, क्योंकि सैयदराजा विधानसभा से टिकट की घोषणा का इंतजार को लम्बा हुआ। मनोज समर्थकों, परिजनों व समाजवादी पार्टी में आस्था रखने के साथ यह अवसर उन लोगों के पर्व जैसा रहा, जो मनोज सिंह डब्लू को अपना बेटा-भाई और परिवार मानते हैं। फिलहाल सैयदराजा विधानसभा के लोग खुशियां मना रहे हैं। साथ ही मनोज सिंह डब्लू के चुनाव प्रबंधन को संभालने वाले लोग अब ज्यादा गंभीर और जिम्मेदार की भूमिका में नजर आए, जिन्हें अब सैयदराजा के रण को अपने चिर प्रतिद्वंदी को शिकस्त देकर जीत हासिल करना है, जो उनका लक्ष्य है और बेहद चुनौतीपूर्ण भी है।

जिला विपणन अधिकारी के खिलाफ चंदौली के अधिवक्ता लामबंद


अधिवक्ताओं ने चक्काजाम कर विरोध में लगाए नारे, एफआईआर दर्ज करने की मांग
Young Writer, चंदौली। जिला विपणन अधिकारी अनूप श्रीवास्तव द्वारा अधिवक्ता संजय सिंह के खिलाफ दर्ज मुकदमे का जिन्न एक बार फिर बोलत से बाहर निकाला आया। इस प्रकरण से गुस्साए अधिवक्ताओं का आक्रोश मंगलवार को पटल पर आया तो कचहरी से निकल अधिवक्ता सर्विस रोड पर बैठ गए। इस दौरान अधिवक्ताओं ने जिला विपणन अधिकारी व चंदौली कोतवाली पुलिस के रवैये के खिलाफ नाराजगी जाहिर की। साथ ही अधिवक्ता संजय सिंह के खिलाफ दर्ज मुकदमे को वापस लेने के साथ ही जिला विपणन अधिकारी के खिलाफ मामला दर्ज करने की मांग पर अड़ गए। इस दौरान पुलिस के आला अफसरों ने अधिवक्ताओं को समझाने का काफी प्रयास किया, लेकिन वे जिला विपणन अधिकारी और चंदौली कोतवाली पुलिस के खिलाफ नारेबाजी करते हुए चंदौल कचहरी के सामने सर्विस रोड पर बैठे रहे।
दरअसल गत दिनों नवीन मंडी समिति माधोपुर में धान खरीद को लेकर किसानों व क्रय केंद्र पर तैनात कर्मचारियों में तनातनी हुई। किसान जहां खरीद में हीलाहवाली व लापरवाही का आरोप लगा रहे थे, वहीं कर्मचारियों ने किसानों पर अभद्रता का आरोप मढ़ दिया और एक दिनी हड़ताल पर रहे। ऐसे में जिला विपणन अधिकारी ने चंदौली कोतवाली पहुंचकर दो नामजद किसानों के खिलाफ मामला दर्ज कराया, जिसमें अधिवक्ता संजय सिंह का नाम भी शामिल था। उक्त मामले में अधिवक्ता ने बैठक कर मामले जिला विपणन अधिकारी के खिलाफ मोर्चा खोलने का निर्णय लिया तो मामला बिगड़ता देख पुलिस ने किसी तरह मामले को संभाल दिया और भरोसा दिया कि अधिवक्ता संजय सिंह के खिलाफ दर्ज एफआईआर को खत्म करने की कानूनी प्रक्रिया जल्द पूरी कर ली जाएगी। लेकिन जब एक माह से अधिक समय तक ऐसा नहीं हुआ तो अधिवक्ताओं का गुस्सा एकाएक पटल पर आया और नाराज अधिवक्ता चंदौली कचहरी के सामने सर्विस रोड पर बैठ गए। अधिवक्ताओं के चक्काजाम के कारण स्थानीय लोगों को भारी दिक्कतें हुई सर्विस रोड की दोनों लेन पर आवागमन पूरी तरह से ठप हो गया और मौके पर भारी भीड़ जमा हो गयी। स्थिति तनावपूर्ण देख मौके पर पुलिस अधिकारी व पुलिस कर्मी भी पहुंच गए। फिलहाल समाचार लिखे जाने तक अधिवक्ता सर्विस रोड को जाम के विरोध में नारेबाजी कर रहे है। इस दौरान डिस्ट्रिक्ट डेमोक्रेटिक बार एसोसिएशन अध्यक्ष संतोष कुमार सिंह, महामंत्री शमशुद्दीन, पूर्व महामंत्री झन्मेजय सिंह, उज्ज्वल सिंह, राहिल, वीरेंद्र कुमार सिंह, अजय मौर्या आदि उपस्थित रहे।

चंदौली कलेक्ट्रेट में मुकम्मल होगी नामांकन की प्रक्रिया

Young Writer, चंदौली। विधानसभा चुनाव-2022 के मद्देनजर 10 फरवरी से कलेक्ट्रेट में नामांकन की प्रक्रिया पूर्ण की जाएगी। इसके लिए जिला प्रशासन ने तैयारी शुरू कर दी गई है। सोमवार को कर्मी पूरे दिन भीड़ को रोकने के लिए बैरिकेटिंग आदि का कार्य करने में जुटे रहे। वहीं परिसर में इंटरनेट, सीसीटीवी कैमरे आदि व्यवस्थाएं की जा रही है।
जनपद में विधानसभा का चुनाव अंतिम चरण में सात मार्च को निर्धारित है। इसके लिए 10 फरवरी को अधिसूचना जारी की जाएगी। साथ ही नामांकन का कार्य आरम्भ हो जाएगा।

चंदौली कलेक्ट्रेट में नामांकन के मदृेनजर चल रही तैयारियां।

नामांकन की प्रक्रिया 17 फरवरी तक होगी। इसके बाद 18 फरवरी को स्क्रूटनी, 21 फरवरी को नाम वापसी की तिथियां निर्धारित की गई है। वहीं मतदान 7 मार्च और मतगणना 10 मार्च को होगी। इसको लेकर जिला प्रशासन तैयारियों में जुटा हुआ है। नामांकन के लिए कलक्ट्रेट में व्यवस्था की जाएगी। वहीं नामांकन की प्रक्रिया कोविड-19 प्रोटोकाल कर पालन कराते हुए पूर्ण करायी जाएगी। वहीं सीसीटीवी कैमरे की निगरानी में नामांकन होगा। इसके लिए विधानसभावार अलग-अलग कक्ष बनाए जाएंगे। साथ ही प्रत्याशियों व प्रस्तावकों को जाने के लिए अलग-अलग रास्ते भी बनाए जाएंगे। नामांकन कक्ष में सिर्फ प्रत्याशी के अलावा प्रस्तावक ही जा पाएंगे। समथकों की भीड़ को मेन गेट पर ही रोक दिया जाएगा। इसके लिए मुख्य रास्ते पर ही बैरिकेटिंग की जाएगी। इसपर बकाएदे पुलिस बल तैनात की जाएगी। वहीं कलक्ट्रेट गेट पर लगे बैरिकेटिंग के पास प्रत्याशियों व प्रस्तावकों को जांच पड़ताल के बाद मेडल डिटेक्टर के बीच से जाना होगा। प्रत्याशी व प्रस्तावकों को कोविड-19 के दृष्टिगत प्रोटोकाल का पालन करना होगा। नामांकन के दौरान निर्वाचन आयोग के आदेशानुसार आदर्श आचार संहिता का पालन कराया जाएगा।

शिक्षकों से धन उगाही करने वाला परिचारक निलंबित

शहाबगंज बीआरसी भवन।

शिक्षक संगठनों की शिकायत पर बीएसए ने किया निलंबित

Young Writer, इलिया। आगणन प्रपत्र जमा करते समय शिक्षकों से 150 रुपये की धनराशि लेना बीआरसी शहाबगंज पर तैनात परिचारक विनोद कुमार को महंगा पड़ा। शिक्षक संगठनों की ओर से खंड शिक्षा अधिकारी को बीते 25 जनवरी को दिए गए शिकायती प्रार्थना-पत्र को बेसिक शिक्षा विभाग ने संज्ञान में लिया और प्रकरण की जांच की। जांचोंपरांत इस कृत्य में लिप्त विनोद कुमार को कई मामलों में प्रथम दृष्टया दोषी पाते हुए निलंबित कर दिया है। उक्त आशय का पत्र जारी करते हुए जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी सत्येंद्र कुमार सिंह ने विनोद कुमार को निलंबन अवधि तक जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय से सम्बद्ध कर दिया है।

बीआरसी शहाबगंज पर तैनात विनोद कुमार द्वारा शिक्षकों से आयकर आगणन प्रपत्र के साथ 150 3पये की राशि ली गयी, जिसका कोई भी विभागीय प्रावधान नहीं है। इसके अलावा शिक्षकों के प्रति उनका कार्य व्यवहार अच्छा नहीं पाया गया। वहीं कर्मचारी आचरण सेवा नियमों का भी वह उल्लंघन करते हुए पाए गए। इसके साथ ही विभागीय आदेशों व निर्देशों की अवहेलना के भी दोषी पाए गए। शिक्षक संगठनों की ओर से दिए गए शिकायती प्रार्थना-पत्र देकर यह पूछा गया कि बीआरसी शहाबगंज के कार्यालय सहायकों द्वारा आयकर आगणन प्रपत्र के साथ 150 रुपये लिए जा रहे हैं। शिक्षक संगठन यह जानना चाहते हैं कि उक्त धनराशि किस कार्य के लिए ली जा रही है। इस प्रकरण की जांच में इसकी पुष्टि होते ही तत्काल प्रभाव से बीएसए ने परिचारक विनोद कुमार को निलंबित कर बीएसए कार्यालय से सम्बद्ध कर दिया। निलंबन के दौरान इन्हें जीवन निर्वाह भत्ते की धनराशि आधा वेतन दिया जाएगा। उक्त प्रकरण की जांच का जिम्मा खंड शिक्षा अधिकारी डीडीयू नगर नागेंद्र सरोज को सौंपते हुए जांच अधिकारी नामित किया है, जो पूरे प्रकरण की जांच कर रिपोर्ट बीएसए को सौपेंगे।

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