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Saturday, July 25, 2026

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मनोज सिंह डब्लू की सादगी ने छिना कईयों का सुकून

चंदौली स्थित कमलापति त्रिपाठी की प्रतिमा पर माल्यार्पण करते सपा नेता मनोज सिंह डब्लू।

Young Writer, चंदौली। लखनऊ में लम्बी जद्दोजहद के बाद समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव मनोज कुमार सिंह डब्लू शुक्रवार की शाम चंदौली जनपद लौटे। चंदौली की धरा पर पैर रखने के साथ ही उन्होंने सर्वप्रथम मुगलसराय के चकिया तिराहा स्थित स्वतंत्रता संग्राम सेनानी व पूर्व विधायक स्वर्गीय गंजी प्रसाद यादव की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। वहीं चंदौली पहुंचकर पंडित कमलापति त्रिपाठी की प्रतिमा पर माल्यार्पण करने के साथ ही शीश नवाया।

मुगलराय के चकिया तिराहे पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी व पूर्व विधायक स्व. गंजी प्रसाद की प्रतिमा पर माल्यार्पण करते मनोज सिंह डब्लू।

जनपद आगमन के बाद अचानक मनोज सिंह डब्लू द्वारा चंदौली की राजनीति में अपना बड़ा मुकाम और अपने बड़े काम से अमिट नाम छोड़कर जाने वाले दोनों महापुरूषों की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर आशीष प्राप्त करने की घटना से चंदौली की राजनीतिक में चर्चाएं जोर पकड़ती नजर आयी। खासकर समाजवादी पार्टी से सैयदराजा का प्रतिनिधित्व करने की लालसा पाले तमाम दिग्गज नेताओं की पेसानी पर मनोज डब्लू की ये तस्वीरें बल डालने का काम किया है। क्योंकि जिन्हें भी सपा से टिकट चाहिए उसमें अधिकांश आज भी लखनऊ में अपना खूंटा गाड़े हुए हैं, ताकि कुर्सी पर काबिज होने का उनका सपना अंतिम क्षण पर किसी दूसरे नेता के प्रयास से भंग न हो पाए। ऐसे में मनोज सिंह डब्लू की चंदौली वापसी और इन महान नेताओं केे प्रतिमाओं पर माल्यार्पण के कई मतलब व मायने निकाले जा रहे हैं। मनोज सिंह डब्लू के समर्थक जहां इस घटना से आश्वस्त व गदगद नजर आ रहे हैं। वहीं उनकी ही पार्टी के अन्य दिग्गज नेताओं की चिंताएं व टिकट पाने की आशंकाएं बढ़ती नजर आ रही है। हालांकि सभी इस बात को लेकर आश्वस्त हैं कि उन्हें पार्टी टिकट जरूर देगी। लेकिन मनोज सिंह डब्लू की सादगी, उनका शांत व सुकून वाला भाव कई लोगों की चिंताएं बढ़ा रहा है। खैर! समाजवादी पार्टी सैयदराजा विधानसभा से किस पर दांव लगाती है आगे आने वाले चंद दिनों में स्पष्ट हो जाएगा।

मकर संक्रांतिः श्रद्धालुओं ने गंगा में लगायी आस्था की डुबकी

Young Writer, चहनियां। मकर सक्रांति की तिथि व समय से पूर्व बलुआ स्थित पश्चिम वाहिनीं गंगा तट पर शुक्रवार की सुबह सैकड़ो श्रद्धालुओं ने गंगा में आस्था की डुबकी लगायी। भोर से लोग घाट पर पहुचने लगे थे। घाट पर पुलिस फोर्स तैनात रही।
मकर सक्रांति का पर्व हर वर्ष 14 जनवरी को मनाया जाता था। किंतु इस वर्ष तिथियों के उलझन में लोग दो दिन मकर सक्रांति का पर्व मना रहे है। पुरोहितों व पंचांगों के अनुसार इस बार सूर्य देव 14 जनवरी की दोपहर के बाद शुभ मुहूर्त स्नान दान का है, किन्तु कुछ लोग शुक्रवार की सुबह बलुआ स्थित पश्चिम वाहिनीं गंगा तट पर स्नान दान किए। स्नान दान का सिलसिला भोर से ही शुरू हो गया। दूर दराज से शृद्धालु यहाँ आकर आस्था की डुबकी लगाये। चहनियां कस्बा सहित बलुआ, रामगढ़, मोहरगंज, मथेला, पपौरा, मारूफपुर, टाण्डाकला, रमौली, मजिदहा आदि बाजारों व चट्टी चौराहों पर तिलकुट, लाई, चूड़ा, मटर आदि की खरीदारी के लिए भीड़ लगी रही। शनिवार को मकर सक्रांति का स्नान को श्रद्धालु जुटेंगे। घाट पर बलुआ थानाध्यक्ष मिथिलेश तिवारी मय फोर्स डटे रहे।

कोविड टीकाकरणः 15 व 16 को खुलेंगे सभी विद्‍यालय

सकलडीहा इंटर कालेज में विद्‍यार्थियों को कोविड का टीका लगाती स्वास्थ्य कर्मी।

Young Writer, चंदौली। जिलाधिकारी संजीव सिंह ने 15 से 18 वर्ष के युवाओं को कोविड-19 टीकाकरण कराने के लिए 15 व 16 जनवरी को इंटरमीडिएट स्तर के सभी विद्यालयों को खोलने का निर्देश दिए है। साथ ही आईटीआई, पालिटेक्निक विद्यालय के साथ कोचिंग सेंटरों को खोलने के लिए आदेशित किया है, ताकि ओमिक्रान की तीसरी लहर के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए युवाओं के टीकाकरण का लक्ष्य तीव्रता के साथ शत-प्रतिशत पूरा किया जा सके। उन्होंने टीकाकरण अभियान में माध्यमिक शिक्षा विभाग के साथ विद्यालयों को स्वास्थ्य विभाग की टीम के साथ समन्वय स्थापित करने व सहयोगी की भूमिका अदा करने का आह्वान किया है। डीएम ने शासनादेश का हवाला देते हुए चेताया कि यदि आदेश की अवहेलना करते हुए यदि कोई विद्यालय निर्धारित तिथि को बंद मिला तो उसके खिलाफ कठोर कार्यवाही अमल में लायी जाएगी।

जनपद के 88 लोगों की कोविड जांच रिपोर्ट पाजिटिव
चंदौली
। आरटीपीसीआर जांच लैब से प्राप्त जांच रिपोर्ट में 88 व्यक्तियों की रिपोर्ट पॉजटीव प्राप्त हुआ है। जनपद में तेजी से बढ़ते संक्रमण से जहां आमजन दहशत में है, वहीं प्रशासनिक अमले व स्वास्थ्य महकमे की चिंताएं बढ़ती जा रही है। जांच रिपोर्ट के मुताबिक 24 महिला, 56 पुरूष व चार बालक एवं चार बालिका है। ये सभी लोकल ट्रैवलिंग या अपने कार्यस्थल से संक्रमित हुए है। जनपद चन्दौली में दो बरहनी ब्लाक के ग्रामीण क्षेत्र, चार चकिया ब्लाक के ग्रामीण क्षेत्र व तीन नगरीय क्षेत्र, 12 चंदौली ब्लाक के ग्रामीण क्षेत्र व नौ नगरीय क्षेत्र के, एक नौगढ़, 16 नियामताबाद, 30 डीडीयू नगर, 6 सकलडीहा, तीन शहाबगंज के रहने वाले है। इनमें से एक व्यक्ति सोनभद्र व एक प्रयागराज से सम्बंधित है। इनके सम्पर्क में आये अन्य व्यक्तियों की कान्टैक्ट ट्रेसिंग कर अग्रेतर कार्यवाही की जा रहीं है। आज पांच व्यक्तियों के स्वस्थ्य होने की सूचना प्राप्त हुई है। जनपद में कोविड जॉच हेतु आज कुल 1026 नमूने संग्रहित किये गए। इस प्रकार जनपद चंदौली में कोविड के कुल 16615 केस व इनमें एक्टिव केस की संख्या 390 है। अब तक 15868 स्वस्थ्य हो चुके है।

जरूरी नहीं कि मां से शिशु भी हो जाए कोविड-19 पॉजिटिव

सुझावः संक्रमित गर्भवती कोविड अस्पताल में ही कराएं प्रसव

Young Writer, चंदौली। जिला महिला चिकित्सालय डीडीयू (मुगलसराय) की स्त्री रोग विशेषज्ञ डा.महिमा नाथ ने गर्भवती महिलाओं को कोविड-19 के मद्देनजर सतर्क रहने का आह्वान किया है। कहा कि यह जरूरी नहीं कि कोविड पॉजिटिव गर्भवती महिला के शिशु को भी कोविड हो। खासकर जब तक वह पेट में है। ज्यादा सुरक्षित है। हां, प्रसव के बाद प्रोटोकाल का पालन नहीं करने पर कोविड होने की पूरी आशंका रहती है।
उन्होंने बताया कि कोविड संक्रमण बहुत तेजी बढ़ रहा है। यदि आप गर्भवती हैं और कोविड पॉजिटिव हैं या रह चुकी तो कोविड को लेकर कतई न घबराएं। कोविड जैसी संक्रामक बीमारी से बचने के लिए जागरूकता बहुत जरूरी है। इस बीमारी को लेकर महिलाओं को सचेत और सतर्क रहें। सदैव अपने चिकित्सक के संपर्क में रहें और उनके सुझाओं का पालन करें।
उन्होंने स्पष्ट किया है कि गर्भवती माहिलाएं अनावश्यक अस्पताल में न आएं। कोशिश करें चिकित्सक से ऑनलाइन परामर्श लें। गर्भवती महिलाओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता अन्य के मुकाबले कम होती है। इसलिए गर्भवती महिलाएं अपने व बच्चे के भविष्य के लिए साफ-सफाई का खास ध्यान दें। कुछ भी छूने के बाद 40 सेकेंड तक साबुन से हाथ धो लें और मास्क लगाए रखें। डा. महिमा ने बताया कि यदि मां कोविड पॉजिटिव है या रह चुकी है तब भी उसको स्तनपान कराना है। बस साफ-सफाई का ध्यान देते हुए मास्क लगाकर ही स्तनपान कराना है। यह भी ध्यान रखें कि बच्चे के ऊपर किसी प्रकार की छींक या खांसी की ड्रॉपलेट न जाए। जनपद में कोविड अस्पताल संचालित हैं। साथ ही सभी स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को निर्देश है कि संस्थागत प्रसव को प्रोत्साहित करें। कोविड पॉजिटिव महिलाओं को प्रसव के लिए कोविड अस्पताल ले जाने की व्यवस्था है।

क्या करें
• नियमित कोविड प्रोटोकाल अपनाएं
• आंगन या अकेले रोज धूप में बैठें
• बाजार का पका हुआ आहार प्रयोग न करें
• बाहर से आया समान सेनेटाइज करें
• बाहर से लाए सामानों को 3 दिन बाद ही उपयोग में लाएं
• अतिआवश्यक स्थिति में ही घर से बाहर निकलें

क्या न करें
• अनावश्यक अस्पताल न जाएं
• ऑनलाइन परामर्श लेने की कोशिश करें
• संभव हो तो घर पर ही सेंपल दें
• नकारात्मक चर्चा में शामिल न हों

सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस व सीआरपीएफ ने किया कदमताल

कंदवा क्षेत्र में कदमताल करती पुलिस व सीआरपीएफ जवान।

Young Writer, कंदवा/शहाबगंज। आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर जिलाधिकारी तथा पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर प्रशासन द्वारा पुरी तैयारी कर ली गयी है। विधानसभा चुनाव को शांतिपूर्ण तरीके से सकुशल संपन्न को लेकर शुक्रवार को सीआरपीएफ व चौकी प्रभारी रामपुर मनोज पांडेय के नेतृत्व में थाना पुलिस सहित केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के जवानों ने कस्बा क्षेत्र में पैदल मार्च किया इस दौरान पुलिस ने चुनाव के दौरान आमजन से शांति बनाए रखने की अपील किया। साथ माहौल बिगाड़ने वालों पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गयी।
बताते हैं कि विधानसभा चुनाव को सकुशल संपन्न करने के लिए पुलिस-प्रशासन ने तैयारी तेज कर दी है। कंदवा पुलिस के साथ बड़ी संख्या में अतिरिक्त पुलिस बल के जवानों द्वारा घोसवां, बरहनी, परसिया, चिरईगांव, दैथा, मुड्डा, धनाइतपुर, अरंगी अदसड़, ककरैत आदि गांव तक फ्लैग मार्च निकाला। चौकी इंचार्ज मनोज पांडेय, अनिल, कमलाकान्त सहित भारी संख्या में पुलिस तथा सीआरपीएफ के जवान शामिल रहे।

शहाबगंज में थाना पुलिस संग पैदल गश्त करते सीओ चकिया।

शहाबगंज। विधानसभा चुनाव को निष्पक्ष भयमुक्त कराने का संदेश देने के लिए पैदल रुट मार्च किया। सीओ रामवीर सिंह के नेतृत्व में क्षेत्र विशुनपुरा, परासी, भोड़सर अमांव, शहाबगंज ब्लाक मुख्यालय तक गश्त कर आमजन को निर्भिक होकर मतदान करने की अपील किया। प्रभारी निरीक्षक मनोज कुमार ने लाउडस्पीकर के माध्यम से कहा कि यदि कोई आप के साथ कोई जोर जबरदस्ती करे तो आप लोग तुरंत पुलिस को सूचना दें, जिससे ऐसे तत्वों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही की जा सके। अगर कोई व्यक्ति चुनाव में खलल डालता है तो उसके विरुद्ध कड़ी से कड़ी कार्यवाही की जाएगी। इस दौरान थाना प्रभारी निरीक्षक मनोज कुमार, एसआई घनश्याम पांडेय के साथ अन्य पुलिस व पीएससी के जवान मौजूद रहे।

डेमोक्रेटिक बार एसोसिएशन का वार्षिक चुनाव आरंभ

Young Writer, चंदौली। डिस्ट्रिक्ट डेमोक्रेटिक बार एसोसिएशन के वार्षिक चुनाव की प्रक्रिया शुक्रवार को आरंभ हो गयी है। इस कड़ी में बार सभागार में चुनाव अधिकारी पंचानन पांडेय के समक्ष अध्यक्ष, महामंत्री समेत अन्य प्रमुख पदों के लिए प्रत्याशियों ने नामांकन किया। चुनाव अधिकारी द्वारा नामांकन पत्रों की जांच 16 जनवरी को की जाएगी, 17 को नाम वापसी के लिए तिथि निर्धारित की गयी है। आवश्यकता पड़ने पर 18 जनवरी को मतदान और उसी तिथि को मतगणना के बाद परिणाम जारी किया जाएगा। इसे लेकर शुक्रवार को डिस्ट्रिक्ट डेमोक्रेटिक बार सभागार में अधिवक्ताओं की चहल-पहल देखने को मिली। इस दौरान अध्यक्ष व महामंत्री समेत कुल 20 आवेदन पत्र प्राप्त हुए हैं। यह जानकारी देते हुए महामंत्री झन्मेजय सिंह ने बताया कि आवश्यकता पड़ने पर 18 जनवरी को मतदान, मतगणना व नतीजे सार्वजनिक किए जाएंगे। एकल नामांकन की दशा में निर्विरोध निर्वाचन के बाद विजयी प्रत्याशी के नाम की घोषणा की जाएगी। इस दौरान लालप्यारे श्रीवास्तव, अनिल सिंह, विद्यालय चरण सिंह, मोहम्मद अकरम, संतोष कुमार सिंह, शमशुद्दीन, रमाकांत सिंह, आनंद सिंह, योगेश सिंह, अभिनव आनंद, हिटलर सिंह, पंकज सिंह आदि उपस्थित रहे।

सिविल बारः अध्यक्ष व महामंत्री पद त्रिकोणीय संघर्ष के आसार

सिविल बार सभागार में नामांकन करते अधिवक्ता।

Young Writer, चंदौली। सिविल बार एसोसिएशन के वार्षिक चुनाव में क्रम में शुक्रवार को दूसरे दिन भी सदर कचहरी में नामांकन की सरगर्मी रही। इस दौरान अवकाश होने के बाद भी चंदौली कचहरी में चुनाव को लेकर गहमागहमी रही। इस दौरान अध्यक्ष पद के लिए कुल तीन प्रत्याशी चन्द्र शेखर, चंद्रभानु सिंह व सुभाष चंद्र ने नामांकन किया। इसके अलावा महामंत्री पद पर रामकृत, अरुण कुमार पाण्डेय व संजीव कुमार श्रीवास्तव ने अपना दावा ठोका है। इसके साथ ही अध्यक्ष व महामंत्री पद पर त्रिकोणीय संघर्ष की रूपरेखा भी बुनियाद भी पड़ गयी। 17 जनवरी को नामवापसी के साथ ही अध्यक्ष व महामंत्री पद के चुनाव की तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

सिविल बार सभागार में अध्यक्ष पद के लिए नामांकन करते चंद्रभानु सिंह।

इसके अलावा सिविल बार एसोसिएशन के अन्य पदों पर वरिष्ठ उपाध्यक्ष पर राजेश दीक्षित उपाध्यक्ष 10 वर्ष से ऊपर दो पद के सापेक्ष दो लोगों ने खालिद वकार व रमाशंकर उपाध्याय तथा उपाध्यक्ष 10 वर्ष से नीचे विकास सिंह व संदीप कुमार सिंह ने पर्चा भरा। संयुक्त मंत्री तीन पद पर प्रभाकर उपाध्याय, पिंटू गुप्ता व सूर्यकांत उपाध्याय ने नाम निर्देशन पत्र दाखिल किया। कोषाध्यक्ष के एक पद पर सत्य प्रकाश ने नामांकन किया। सदस्य कार्यकारिणी 15 वर्ष से ऊपर 6 पदों पर अशफाक अहमद, गोकुल प्रसाद, नंदलाल, वंश नारायण सिंह, अभिमन्यु मिश्रा व विनय कुमार सिंह ने पर्चा दाखिल किया तो वहीं कार्यकारिणी के 15 वर्ष से नीचे अरुण कुमार मिश्र, प्रवीण कुमार दूबे, राजेश कुमार पाल, अजय कुमार तिवारी, ने पर्चा दाखिल किया। वरिष्ठ चुनाव समिति के चंद्रमौलि उपाध्याय ने बताया कि नामांकन पत्रों की जांच 17 जनवरी तथा उसी दिन पर्चा वापसी होगी। यदि आवश्यक हुआ तो 21 जनवरी को होगा। वरिष्ठ समिति में कपिलदेव सिंह, विजय साहू, शफीक खान, विनोद कुमार सिंह, शशि शंकर सिंह, जय प्रकाश सिंह‚ राणा प्रताप सिंह‚ अरुण कुमार सिंह‚ ऋषिकेश सिंह‚ दीपक सिंह‚ रोशन व मदन भृगुवंशी उपस्थित रहे।

सिविल बार सभागार में अध्यक्ष पद के लिए नामांकन करते चंद्रभानु सिंह।

हिन्दू होने के अर्थ की तलाश में

Young Writer, साहित्य पटल। ललित निबंधकार डा. उमेश प्रसाद सिंह की कलम से

मैं हिन्दू हूँ। मेरा हिन्दू होना मेरी अस्मिता से बिल्कुल अभिन्न् है। मेरे होने में ही मेरा हिन्दू होना समाहित है। यह मेरा विकल्पों के बीच ऐच्छिक चुनाव नहीं है। यह मेरे जन्म के साथ ही मेरे अस्तित्व के उपादानों में उपस्थित है। मैं बराबर सोंचता रहता हूँ मेरे हिन्दू होने का क्या मतलब है? कुछ विशेष अर्थ, कुछ विशेष ध्वनि कुछ विशेष प्रयोजन, कुछ विशेष संकल्प, कुछ विशेष निर्देश….. आदि आदि के बारे में जब भी विचार करता हूँ, मुझे मेरा, हिन्दू विशेष जैसा कभी भी नहीं मिलता। जब भी मिला है, सिर्फ संज्ञा जैसा मिला है।
विशेषणों के विशेषीकृत गुण अर्जित किये जाते हैं, यत्न से किसी प्रयोजन की पूर्ति के लिये विशेषणों को प्रदर्शित किया जाता है। मगर संज्ञा कोई उपार्जित चीज नहीं है, वह सहज है। वह स्वयं है। संज्ञा का प्रदर्शन संभव नहीं है। संज्ञाओं की कोई नुमाइश् नहीं लगाई जा सकती। नुमाइश तो केवल कुछ खोजी गई, गढ़ी गई, उत्पादित और पुनरुत्पादित चीजों की लगाई जाती है। सम्भ्यता के लिये प्रदर्शन और प्रदर्शनी का कुछ मूल्य और महत्व हो तो हो संस्कृति के संसार में इसका कुछ भी अर्थ नहीं है।
सहज के बारे में ग्लानि या गर्व का वास्तविक अर्थ में कोई और चित्य नहीं दिखता है। स्वयं के बारे में स्वयं के लिये ग्लानि या गर्व का कोई अर्थ नहीं होता। स्वयं के लिये ग्लानि या गर्व का विषय अपने कृत्यों का दूसरों के जीवन पर होने वाले प्रभाव का परिणाम ही निर्धारक हो सकता है। हमारे अस्तित्व की अभिव्यक्ति से हमारे समय की सामाजिक अस्मिता को कितना सुख, समृद्धि और संतोष मिलता है यही हमारे लिये गर्व का कारण हो सकता है। इसके विपरीत ग्लानि का। यह हमारे हिन्दू होने के सन्दर्भ में भी हमें अर्थ प्रदान करता है। हमारा होना हमारे पड़ोस के लिये क्या अर्थ रखता है, हमारे गाँव के लिये क्या अर्थ रखता है, हमारे देश के लिये क्या अर्थ रखता है, दुनियाँ के लिये क्या अर्थ रखता है, इसकी खोज हमारे में पैदा होनी चाहिए। हमारे हिन्दू होने से हमारे समय के सामूहिक जनजीवन में क्या अन्तर्क्रिया घटित होती है और उन क्रियाओं का परिणाम हमारे समय के विकास को कितना प्रभावित करता है, यह जानना हमारे लिये बेहद जरूरी है।
कभी-कभी ऐसी भी स्थितियां आती हैं, जब मुझे सोचना पड़ता है कि मैं हिन्दू हूँ या कि मुझे हिन्दू बनना है। जब भी मैं सोचता हूँ मुझे पीड़ाजनक हँसी आती है। बनना तो हमेशा ही झूठा और नकली होता है। हम बन वही सकते हैं जो हम नहीं हैं। जो हम हैं ही उसके बनने का सवाल कहाँ उठता है। हर बार मुझे लगता है मैं हिन्दू हूँ ही, बनना क्या है। बार-बार ठहर कर यह भी देखता हूँ कि मेरा हिन्दू होना कैसा है? क्या मेरा हिन्दू होना मुस्लिम होने का विलोम तो नहीं है? मैं पाता हूँ बिल्कुल नहीं है। मैं देखता हूँ मेरा हिन्दू होना किसी मुसलमान के सम्मुख कुछ दूसरा, हिन्दुओं की भीड़ में कुछ दूसरा और अपने एकान्त में कुछ दूसरा तो नहीं है? अगर है तो गड़बड़ है। नहीं है तो ठीक है। मैंने जब जब भी देखा है अपना हिन्दू होना अलग-अलग नहीं लगा है।
कभी-कभी ऐसा भी सोचना पड़ता है कि अपने हिन्दू होने को छिपा लेना या उपेक्षित कर देना अपने बौद्धिक होने, लोकतांत्रित होने, धर्म निरपेक्ष होने और साहित्यकार होने के लिये जरूरी है क्या? मैं जब भी सोचता हूँ मुझे ऐसा सोचना पाखण्डपूर्ण लगता है। मैं जो हूँ, उसे छिपाना पाखण्ड है। उसे दिखाना भी पाखण्ड है। क्या छिपाने और दिखाने से अलग कोई स्थिति नहीं है? जरूर है। मुझे लगता है, वह स्थिति इन स्थितियों से अधिक सम्मानजनक समझी जाने योग्य है। हम जो है, ईमानदारी से वह होकर ही दूसरों के लिये उपयोगी और सहिष्णु हो सकते हैं।
किसी भी व्यक्ति के लिये एक साथ एक से अधिक या सभी धर्मों के प्रति समान भाव रखने की परिकल्पना मानवीय स्वभाव और क्षमता के हिसाब से केवल भाषिक प्रवंचना के अलावा और महत्व नहीं रखती। किसी भी व्यक्ति का सभी धर्मों की प्रार्थनाओं और प्रार्थना पद्धतियों का व्यवहार, एक प्रशंसनीय किन्तु अवास्तविक छलना से अधिक नहीं प्रतीत होता। विभिन्न धर्मों के बीच विद्वेष विहीन सहिष्णुता के अलावा मेल-मिलाप के अन्य उदार-प्रत्ययों का वैचारिक प्रदर्शन वस्तुतः मुझे अवास्तविक और पाखण्डपूर्ण ही लगता है। प्रायः धर्मों के आपसी संघर्ष वास्तव में धर्म के नहीं सत्ता के संघर्ष होते हैं। सत्ता के संघर्ष को धर्म के संघर्ष के रूप में प्रचारित और प्रतिष्ठित करना मनुष्य जाति के लिये ऐतिहासिक अपराध से भिन्न नहीं है। धर्म को लेकर राजनीतिक प्रयोजन से संघर्ष की उदारतावादी और संकीर्णतावादी दोनों तरह की अवधारणाएँ वैचारिक अपराधीकरण की प्रवृत्ति की ही प्रवर्तक हैं। मैं हमेशा अनुभव करता हूँ कि अपने धर्म के प्रति अडिग आत्मिक आस्था के साथ दूसरे के धर्म के प्रति विद्वैष विहीन भाव स्थिति की उपलब्धि ही सामाजिक समरसता के लिये युग धर्म का सर्वोत्तम और स्वाभाविक मानक बन सकता है।
मैं जब-जब परीक्षण करता हूँ मेरा हिन्दू होना किसी के लिये भी चाहे वह हिन्दू हो, मुसलमान हो, सिक्ख-ईसाई हो, असुविधाजनक साबित नहीं होता। हिन्दू होने की वजह से आज तक मुझे किसी का मुसलमान होना या अन्य कुछ भी होना असुविधाजनक नहीं लगा है। मैं हमेशा ही अनुभव करता हूँ कि जिसका होना और किसी के लिये कठिनाई और दुख पैदा करने वाला नहीं है, अभिनन्दनीय है। हिन्दू होने से हिन्दू बना बिल्कुल भिन्न है। मुसलमान होने से मुसलमान बनना बिल्कुल अलग है। किसी को पीड़ा पहुँचाने के लिये कुछ भी बनना निन्दनीय है। यह सच है कि हिन्दू और मुसलमान एक-दूसरे के समानार्थक नहीं है। मगर एक-दूसरे के विलोम भी नहीं है। फिर भी पता नहीं कैसे हमारे देश में हिन्दू और मुसलमान को एक-दूसरे के विलोम की तरह समझे जाने की समझ अब भी बनी हुई है। हमारा सबसे बड़ा दुर्भाग्य यही है।
मुझे लगता है, इस स्थिति के लिये उदारतावादी और संकीर्णतावादी दोनों ही तरह के विचार समान रूप से अपराधी की भूमिका में खड़े हैं। भिन्नताओं से आँख मूँदकर संस्कार की प्राकृतिक शक्ति की अनदेखी करके एक में मिलाने की उदार सोच भी सच्ची और ईमानदार नहीं है। बनावटी है। असंभावित है। भिन्नताओं को जड़ीभूत और परिहार्य मानकर विद्वेशपूर्ण अलगाव की अनिवार्यता को अंगीकार करने की संकीर्ण सोच भी अयथार्थ और अनर्थकारी हैं यह मनुष्य उदात्तता का तिरस्कार करती है। उसे क्षुद्र बनाने षड़यंत्र रचती है।
मैं अनुभव करता हूँ कि हिन्दू होकर भी हिन्दू न होने से हम मुसलमान के निकट नहीं हो सकते। हम जो हैं, वह होकर ही, उसके होने की सच्चाई को स्वीकार करके ही एक-दूसरे के प्रति हार्दिक, सहिष्णु और मैत्रीपूर्ण हो सकते हैं। मुझे लगता है, भारतीय हिन्दू और भारतीय मुसलमान होने से पारस्परिक द्वेष दूर हो सकता है। द्वेष मिटने से मैत्री का विकास सहज संभव है। मैं अपने हिन्दू होने के अर्थ की तलाश में भिन्नताओं के साथ सुखद साहचर्य की संभावनाओं की उत्सुक प्रतीक्षा में डूब जाता हूँ।
संभावनाओं की प्रतीक्षा में डूबकर देखता हूँ बहुत से सवाल सिर उठाये डूबते-उतराते दिखाई देते हैं। अपनी आत्मचेतना में कई-कई सवाल और संदेह टकराने लगते हैं। मेरा मन मुझसे पूछने लगता है, क्या मेरा हिन्दू होना मेरे पर ही निर्भर होगा या अपने हिन्दू होने को ढाँचागत अवधारणाओं से प्रमाणित कराना होना? मेरे सामने तमाम तरह के हिन्दू अपनी विविधता और बहुलता की पहचानों के साथ खड़े हो जाते हैं। एक हिन्दू वह भी है, जो आचार-व्यवहार की कर्मकाण्डी प्रथाओं का पोषक हिन्दू है। एक हिन्दू वह भी है, जो बाह्य आचार-व्यवहारों में विश्वास न रखने के बावजूद अपनी आस्था में हिन्दू है। एक हिन्दू वह भी है, जो आत्मचेतना के उत्कर्ष की असीम संभावनाओं के मार्ग का अन्वेषी है। एक वह भी है, जिसे लिये नियामक सिद्धान्त अपर्याप्त हैं। एक वह भी है, जिसके लिये नियामक सूत्रों की अनिवार्यता बेहद अर्थपूर्ण है। आत्मिक धरातल के भिन्न-भिनन स्तरों पर अधिष्ठित और व्यवहार के अनेकानेक धरातलों पर स्थित विचार बदुल समूहों में समन्वित हिन्दू जाति की विविध वर्णी व्यापकता मेरे हिन्दू होने के बोध को उल्लसित करती है। विचारों की भिन्नता के बावजूद जीवन बोध के अनुभवों के लिये उन्मुक्त अवकाश की उपलब्धता हिन्दू जाति का अक्षुण्ण गौरव है। हिन्दू होना मनुष्य जाति के अभ्युदय के लिये सीमाओं के अतिक्रमण का वह अदम्य अभियान है, जो कभी रुकने वाला नहीं है। इस अभियान का आमंत्रण मुझे हमेशा उत्प्रेरित करता है।
आत्मिक धरातल पर उपासना के भिन्न-भिन्न मार्गों से होकर एक ही जगह पहुँचने के रामकृष्ण परमहंस के प्रयोग मेरे हिन्दू होने के अर्थ को विस्तार देते हैं। विवेकानन्द की आत्मदर्प से उन्मुक्त उद्घोषणाएँ स्वाभिमान को जागृत करती हैं। उनकी दरिद्रनारायण की व्यापक करुणा धर्म को नयी प्रासंगिकता प्रदान करती है। फिर भी आत्मगत उपलब्धियों की सामाजिक अभिव्यक्ति कैसे हो, यह चुनौती हमेशा ही नयी बनकर नये-नये रूप में ललकारती रहती है।
मेरे लिये हिन्दू होने का अर्थ केवल उदात्त मूल्यों के उत्कृष्ट रूपों का यशगान नहीं है, बल्कि सिद्धान्तों की श्रेष्ठा के व्यावहारिक जीवन में रूपान्तरण की प्रक्रिया का संधान भी है। अपने अनुभव और विश्वास की पूँजी को व्यापक सामूहिक उत्कर्ष के लिये सार्वजनिक बना सकने की विधियों का अनुसंधान मुझे अपने हिन्दू होने के अर्थ की तलाश में प्रवृत्त करता है। व्यापक और वृहत्तर पारिवारिकता की पृष्टभूमि की प्रतिष्ठा मेरी खोज की उत्प्रेरणा है।

‘अनिरूद्ध सिंह’ ने उठाया आवाजापुर की बेटी की शादी का जिम्मा

छात्रा हिना को पढ़ाई के लिए आर्थिक मदद प्रदान करते सीओ अनिरूद्ध सिंह साथ में सामाजिक कार्यकर्ता दुर्गेश सिंह।

फरवरी में प्रस्तावित शादी का सारा दायित्व खुद उठाएंगे सीओ सकलडीहा

Young Writer, चंदौली। जनपद में एक ऐसे पुलिस अफसर हैं जो जनता के सेवक होने के साथ-साथ उनके सुख-दुख भागी भी हैं। जी हां! बात हो रही है सकलडीहा क्षेत्राधिकारी अनिरूद्ध सिंह की। जो बेहतर पुलिसिंग व लॉ एण्ड आर्डर को संभालने के साथ ही आमजन में अपनी लोकप्रियता के जाने जाते हैं। उनका अभिनय भी उनके व्यक्तित्व को निखरता है, लेकिन उनकी एक और पहचान चंदौली सहित उन तमाम जनपदों में स्थापित है जो उन्होंने लीक से हटकर किए गए कामकाज से अर्जित हुई है। सकलडीहा सर्किल की कमान संभालते ही उन्होंने पुलिसिंग को दुरूस्त करने के साथ-साथ समाज को बहुत कुछ देने का काम किया। जिसमें विद्यार्थियों को शिक्षा और समाज के अंतिम पायदान पर खड़ी जनता के लिए सहयोग शामिल है।

क्षेत्राधिकारी अनिरूद्ध सिंह।

हाल ही में उन्होंने सामाजिक कार्यकर्ता दुर्गेश सिंह की पहल पर आवाजापुर की एक गरीब बेटी की शादी का जिम्मा स्वयं उठा लिया। गरीब बेटी के हाथ पीले कराने में सहयोग को उन्होंने अपना सामाजिक दायित्व करार दिया। कहा कि यह जिम्मेदारी हर उस शख्स की है जो समाज से जुड़ा है और तमाम संसाधनों व सुविधाओं से लैस है। ऐसे में गरीबों तक सहयोग व संसाधन पहुंचाकर हम सभी को अपने नैतिक दायित्व की पूर्ति करनी ही होगी। क्योंकि इस समाज ने हमें शिक्षा व संस्कार इस जिम्मेदारी के साथ दिया है ताकि समय आने हम सभी समाज के उस ऋण की अदायगी कर सकें। यही हम सभी के शिक्षित व संस्कारवान होने की पहचान है।

सकलडीहा सीओ अनिरूद्ध सिंह साथ में सामाजिक कार्यकर्ता दुर्गेश सिंह।

सीओ सकलडीहा के इस पहल की सामाजिक कार्यकर्ता दुर्गेश सिंह ने जमकर सराहना की। कहा कि आजावापुर गांव के गरीब विनोद यादव की बेटी की शादी का सारा दायित्व अनिरूद्ध सिंह स्वयं उठाने की पहल की है। विनोद यादव अत्यंत गरीब है जिनकी चार बेटियां है और दूसरे नंबर की बेटी की शादी फरवरी माह में प्रस्तावित है। कहा कि विनोद यादव का परिवार बड़ा है और वह दूसरों के खेत को पटवन पर लेकर छोटी-मोटी खेती से अपने परिवार की आजीविक बमुश्किल चला पा रहे हैं। ऐसे में बेटी के शादी का खर्च उठाने में असमर्थ थे और उन्होंने अपनी इस विवशता को मेरे समक्ष रखा तो गांव वाले भी उनकी मदद के लिए आगे आए। अब तो सीओ सकलडीहा अनिरूद्ध सिंह अकेले ही इस जिम्मेदारी को उठाने की बात कहकर समाजसेवा का एक शानदार संदेश समाज को दिया है। बताया कि अभी हाल में उन्होंने रेवसा खुर्द की गरीब बेटी हिना को पढ़ाई-लिखाई के लिए तीन हजार की आर्थिक मदद देकर उसका हौसला बढ़ाया था। कहा कि वह बेफिक्र को शिक्षा अर्जित करे, क्योंकि आर्थिक बाधाएं उसकी पढ़ाई में आड़े नहीं आएगी। फिलहाल सकलडीहा सर्किल के साथ ही पूरा चंदौली जनपद उनके इस प्रयास से काफी प्रभावित है और उनके प्रयासों की सराहना कर रहा है।

मुहतोड़ महगाई ने गरीबों के मुह से छीना निवाला:सुजीत

चन्दौली।नगर के एक लान में समाजवादी लोहिया वाहिनी की बैठक गुरुवार को जिला अध्यक्ष सुजीत कन्नौजिया के नेतृत्व में सम्पन्न हुई जिसमे संगठन मजबूत बनाने के लिए बल दिया गया।
इस दौरान जिलाध्यक्ष ने दर्जनों युवाओं संगठन में जोड़ा और उनको माला पहना कर मनोनयन पत्र दिया। उन्होंने कहा कि सभी कार्यकर्ता अपने अपने बूथों को मजबूत कर और समाजवादी सरकार बनाये जिससे गरीबो किसानों पिछड़ों को न्याय मिले कहा कि भाजपा की सरकार पांच साल में बस गरीबो किसानों को ठगने का काम किया है इसके मुहतोड़ महगाई से गरीबो के मुह से निवाला छीन लिया है। ये वो सरकार है जो किसानों पर लाठियां बरसा कर उनका हक छीन रही है। जिससे जड़ से उखाड़ कर फेकने की जरूरत है।
इस दौरान आशीष यादव,सोनू यादव,निरंजन विश्कर्मा, पंजक, शशिकांत उपाध्याय, धीरज कुमार, अनुज कुमार, अजय मौर्य, राजनाथ यादव, आदि उपस्थित रहे।

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