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Saturday, July 25, 2026

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भारतीय संस्कृति में गाय पूज्यनीय

हृदय नारायण दीक्षित

Young Writer, साहित्य पटल। लेखकः उत्तर प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष हृदयनारायण दीक्षित की कलम से

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गाय को आदरणीय बताया है। उनका यह वक्तव्य स्वागत योग्य है। भारतीय संस्कृति में गाय पूज्य है। लेकिन स्वयंभू प्रगतिशील समूह पूर्वजों को गोमांस भक्षी बताते रहे हैं। वे पूरे भारतीय समाज का अपमान करते रहे हैं। लेकिन भारतीय संविधान निर्माता सजग थे। संविधान के नीति निर्देशक तत्वों में गोवंश संवर्धन/रक्षण का संकल्प है। वैदिक श्रुति/अनुश्रुति और लोक स्मृति में गाय माता है पर कथित प्रगतिशील इतिहासविद् गाय को खाद्य पदार्थ बताने/बनाने पर आमादा रहे हैं। वे वैदिक पूर्वजों को गोमांस भक्षी बताते रहे हैं। लोक आस्था का ऐसा अपमान दुस्साहसिक है। इस इतिहास दृष्टि में आर्य बर्बर और असभ्य विदेशी आक्रांता।

गोमांस भक्षण की बात भारतवंशी इतिहास और संस्कृति का अपमान है। बच्चे पूर्वजों को गोमांस भक्षी जानकर क्या पाएंगे? आर्यों को विदेशी, आक्रमणकारी व गोमांस भक्षी सिद्ध करना राष्ट का अपमान है। भारतीय इतिहास के वैदिककाल से ही गाय आदरणीय है। प्रो॰ राधाकृष्ण चौधरी ने बताया है कि ”वैदिक साहित्य, महाकाव्य, पुराण, विदेशी यात्रियों के वर्णन और पुरातत्व में भारतीय इतिहास के आधारभूत सिद्धांतों के अध्ययन की पर्याप्त सामग्री है।“ (प्राचीन भारत का इतिहास, पृ. 8-9) हिन्दुओं का प्राचीन इतिहास समझने के लिए ऋग्वेद सहित 4 वेद, उपनिषद, पुराण और हड़प्पा सभ्यता के तथ्य साक्ष्य हैं। प्राचीन भारत का वास्तविक इतिहास समझने के लिए वेद ही तथ्य है। समूचे वैदिक व उत्तर वैदिक कालीन इतिहास में गाय की महत्ता है।
वैदिक समाज गाय को अघन्या/अबध्य मानता था। ऋग्वेद (1.164.27) में वह अघन्या है (वध न किए जाने योग्य), सौभाग्यदायिनी है। गाय सम्पूर्ण वैदिक साहित्य की श्रद्धा केन्द्र है। अथर्ववेद में वह विराट ब्रह्म है। वह एक सूक्त (9.12) की देवता भी हैं- ”गाय का ऊपरी जबड़ा द्युलोक है, निचला पृथ्वी, जीभ विद्युत है, दाँत मरुद्गण हैं, उदर भाग अंतरिक्ष है, दोनों कंधे मित्र और वरुण हैं आदि।“ इसके पहले ऋग्वेद (8.101.215) में कहते हैं-

”यह रूद्रों की माता, वसुओं की दुहिता, आदित्यों की बहन तथा अमृत की नाभि है। यह अवध्य है।“ थोड़े शब्द बदलकर यही मंत्र अथर्ववेद में भी दुहराया गया है। यजुर्वेद भी गाय की महिमा से भरापूरा है। अथर्ववेद (12.4) में गाय को कष्ट पहुँचाने वालों का दण्ड वर्णित है- ”जो गाय के कान को पीड़ा देते हैं वे मानो देवताओं पर प्रहार करते हैं। जो गौ पर परिचय चिन्ह बनाते हैं, उनका धन नष्ट होता है। जो साज-सज्जा के लिए गौ बाल काटते हैं इस अपराध कर्म से उनकी संतानें मृत्यु को प्राप्त होती हैं। जिस गोपति के सामने कौआ गाय के बाल नोचता है, उसकी संतानें मर जाती हैं आदि।“ फिर गोहत्या के बारे में (अथर्व 12.9) कहा- ”गौघाती लोग इस लोक और परलोक दोनों में दण्डनीय है।“


भारतीय समाज में देवोपासना रही है। अधिकांश देवता प्रकृति की शक्तियाँ हैं। वे दिव्य हैं। देवता मनुष्य की श्रद्धा है। मनुष्य अपना प्रिय खाद्य ही देवताओं को अर्पित करता है। गोदुग्ध वैदिक समाज का प्रिय पेय है। एक मंत्र में ऋषि अग्नि देव को दूध देना चाहते हैं लेकिन उनके पास ‘अघन्या गाय‘ है नहीं। (ऋ 8.102.19) ऋषि इन्द्र से कहते है- ”अघन्या अपना दूध तुम्हें देती है। (9.1.9) इन्द्र ‘अघन्या रक्षक‘ (8.69.2) है। तब वह और उनके अनुयायी आर्य अघन्या भक्षक कैसे होंगे? अघन्या अश्विनी देवों को भी दूध देती है। (1.164.27) गाएँ ऋग्वैदिक समाज में ही ऋषित्व की श्रेणी में पहुँच गई थी। वे सोम की स्तुति करती हैं। अथर्ववेद में तो खैर वे देवता हैं ही। अथर्ववेद में सुंदर घर की प्रशंसा में कहा गया है कि हमारे घर में सब तरफ गाएँ घूमें।“ वेदों में घी, अग्नि का अन्न है। घी अग्निदेव का प्रिय है खाद्य है। वैदिक समाज जौ खाता था। अग्नि को भी जौ खिलाता था। वे इन्द्र को धाना खिलाते थे। धाना अन्न से बना खाद्य था। (ऋ 4.24.7) ऋषि इन्द्र से कहते हैं- ”प्रतिदिन पधारो, धाना खाओ।“ (ऋ 3.53.7) खेती के देवता पूषन थे। वे ‘करम्भ‘ प्रेमी है।
मार्क्सवादी विचारण डर. रामविलास शर्मा ने बताया, करम्भ भुना हुआ अनाज था। करम्भ इन्द्र पूषत सबका प्रिय है। एक प्रिय खाद्य अपूप था। समवता पुआ था। घी के साथ मिलाकर तैयार ‘अपूप‘ अन्य देवों के साथ मरुतगण भी खाते हैं। (ऋ 3.52.7) मैक्डनल और कीथ ने एक और वैदिक व्यंजन ‘पुरोडास‘ को ‘यज्ञ की रोटी‘ बताया है। ऋषि इन्द्र से कहते हैं- ”प्रार्थना सुनो, पुरोडास खाओ।“ (ऋ 4.32.16) जो इन्द्र को पुरोडास खिलाता है, उसे इन्द्र पापों से बचाते हैं (ऋ 8.31.2) वैदिक समाज का जौ, धाना, करम्भ, अपूप, पुराडास, दूध और घी प्रेम चारों वेदों में व्याप्त है। गोमांस का कहीं जिक्र ही नहीं। गाएँ श्रद्धा हैं। अन्न खाद्य है। एक देवता बृहस्पति हैं। उन्होंने गायों को आकाश तक चरने भेजा (ऋ 2.24.14) मैक्डनल ने लिखा, “वह बादलों में जाकर गायों को पुकारते हैं।“ (ऋ 10.68.12) गायों को आकाश में चरते देखना भारत के मन की दिव्य उड़ान है। यह बात सही हे कि गाएँ आकाश में विचरण नहीं करती। लेकिन ऋषि की भाव विह्वलता उन्हें आकाश तक ले जाती है। गंगा भी पृथ्वी के निवासियों को आशीष देती है। श्रद्धालुओं ने आकाश गंगा को नमन किया।

ऋग्वेद से लेकर महाभारत और वर्तमानकाल तक गाय भारतीय संस्कृति और परम्परा में पूज्य है। तुलसीदास ने श्रीराम जन्म के कारणों में से एक कारण गोसंवर्द्धन बताया- ”विप्र धेनु सुर संतहित लीन्ह मनुज अवतार।” गीता में कृष्ण ने अर्जुन को अपने तमाम रूपों में से एक गाय रूप भी बताया। कृष्ण गोपाल थे। कौटिल्य ने भी ‘गोसंरक्षण‘ को जरूरी बताया। प्राचीन भारत गोपूजक था। गाय प्रतिष्ठाा थी, गाय समृद्धि थी, गाय ऐश्वर्य थी। चौथी सदी के चीनी यात्री फाहियान व 7वीं सदी ह्नेनसांग के निष्कर्ष हैं कि भारत में मांसाहारी नहीं हैं। गोहत्या के विरूद्ध भारत में अनेक आंदोलन हुए। गांधीजी ने गोहत्या बंदी को स्वराज का एक अंग बताया। गाय भारतीय अर्थव्यवस्था की माँ है, समाज व्यवस्था और सांस्कृतिक व्यवस्था का श्रद्धा केन्द्र। प्रधानमंत्री ने उचित ही गाय को सम्मानीय बताया है।

चंदौली, अलीनगर व मुगलसराय के प्रभारियों का हुआ तबादला

Chandauli Police

Young Writer, चंदौली। विधानसभा चुनाव-2022 का चुनाव का शंखनाद कभी भी हो सकता है, लिहाजा पुलिस-प्रशासन भी इसकी तैयारियों में जुटा है। इस क्रम में एसपी अंकुर अग्रवाल का तबादला अभियान अनवरत जारी है। उन्होंने जिले के पांच निरीक्षकों के साथ ही एक दर्जन उपनिरीक्षकों के कार्य क्षेत्र में बदलाव किया है। उन्होंने चंदौली कोतवाली के साथ ही मुगलसराय के प्रभारी निरीक्षकों को बदल दिया। साथ ही चकरघट्टा इंचार्ज को चुनाव सेल में बुला लिया है।

उन्होंने मुगलसराय कोतवाल संजीव कुमार मिश्र को चंदौली का प्रभारी निरीक्षक बनाया गया है। वहीं जन शिकायत प्रकोष्ठ का जिम्मा संभाल रहे बृजेश चन्द्र तिवारी अब मुगलसराय कोतवाली की कमान संभालेंगे। इसी प्रकार अलीनगर प्रभारी संतोष कुमार सिंह को अलीनगर से हटाकर यूपी-112 डायल की जिम्मेदारी दी गयी है। चंदौली कोतवाल अनिल पांडेय अब जन शिकायत प्रकोष्ठ का दायित्व संभालेंगे। चकरघट्टी थाना इंचार्ज दीनदयाल पांडेय की नवीन तैनाती चुनाव सेल में की गयी है। वहीं चौकी प्रभारी अलख नारायन सिंह को चकरघट्टा थाने की कमान एसपी अंकुर अग्रवाल द्वारा सौंपी गयी है। इसके अतिरिक्त एसपी ने चौकी प्रभारी भूपौली देवेंद्र कुमार साहू को औद्योगिक नगर चौकी, दिनेश चन्द पांडेय को मुगलसराय थाने से भूपौली चौकी का प्रभारी बनाया है। वहीं गंगाधर मौर्य को मुगलसराय थाना से ताराजीवनपुर चौकी, प्रेम नारायन सिंह सिंह चंधासी चौकी से पुलिस चौकी लौंदा ट्रांसफर किया गया है। दिनेश चन्द्र पटेल को थाना बबुरी से शिवाला रेलवे कालोनी चौकी, सत्यप्रकाश को थाना अलीनगर से शिवाला पुलिस चौकी, सुनील मिश्र को थाना-सैयदराजा से चौकी प्रभारी जफरपुरवा बनाया गया है। वहीं अरविंद कुमार थाना अलीनगर से थाना चंदौली भेजे गए हैं। एसपी ने सभी पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे जल्द से जल्द नवीन तैनाती स्थल पर पहुंचकर अपना कार्य भार संभालें।

भैंस चराने को लेकर विवाद में जमकर चला लाठी-डंडा

शाहपुर में हुई मारपीट की घटना में घायल संग परिजन।

Young Writer, बबुरी। थाना क्षेत्र के शाहपुर गांव में मंगलवार की शाम मामूली बात को लेकर उपजे विवाद पर दो पक्षों में जमकर मारपीट हो गई। जिसमें दोनों पक्षों के लगभग आधा दर्जन लोग घायल हो गए। सूचना पर गाव मे भारी संख्या में पुलिस बल पहुंच गयी। गांव में दहशत का माहौल कायम हो गया।

शाहपुर में विवाद के बाद हुई मारपीट की घटना के बाद शाहपुर में जमा भारी पुलिस फोर्स।

जानकारी के अनुसार क्षेत्र के शाहपुर गांव के पासवान बस्ती निवासी केवल पासवान 50 वर्ष मंगलवार की शाम भैंस चराने के लिए निकले थे। ग्रामीणों के अनुसार नहर के पास चरते-चरते भैंस गाव निवासी भरत यादव के खेत में चली गयी। जिसपर भरत यादव का लड़का मोहन यादव 18 वर्ष घर से निकल आया और दोनो में बहस होने लगी। इसके बाद मौके पर विवाद इस कदर बढ़ा कि मारपीट होने लगी। शोर-गुल सुनकर दोनो पक्षों के परिजन भी लाठी डंडे से लैस होकर घटना स्थल पर पहुंच गए। स्थिति बिगड़ी तो दोनों तरफ तरफ से जमकर लाठी-डंडा चला। घटना में एक पक्ष के सरवन पासवान 40 वर्ष, राधेश्याम 30वर्ष, ईश्वर 18वर्ष, लक्ष्मी 50 वर्ष बुरी तरह घायल हो गए। वहीं दूसरे पक्ष की भी दुर्गा यादव 40 वर्ष आंशिक रूप से घायल हो गयी। इसी बीच घटना की सूचना लोगों ने बबुरी पुलिस को दी। जिसपर मौके पर भारी दल बल के साथ थानाध्यक्ष अतुल कुमार पहंुच गए। भारी संख्या में पुलिस को देखकर गांव में दहशत का माहौल कायम हो गया। पुलिस को आक्रामक देखकर गाव के लोगो मे अफरा तफरी मच गई।

शाहपुर में विवाद के बाद हुए मारपीट में घायल अधेड़।

पुलिस की कार्यप्रणाली से नाखुश दिखे ग्रामीण
बबुरी। शाहपुर गांव में जहां दर्जनों लोगों द्वारा लाठी डंडे से मारपीट किए जाने पर ग्रामीणों में दहशत फैली हुई है, वहीं ग्रामीण पुलिस की कार्यप्रणाली से नाखुश दिखे। ग्रामीणों ने बताया कि पुलिस घायलों के घर पहुंचकर गाली गलौज करते हुए धमकाती रही। किसी को भी घर से बाहर दिखने पर मारने पीटने की धमकी देती रही। वहीं दूसरी तरफ मारपीट करने वाले दबंगो पर पुलिस कार्यवाही करने से बच रही है। पासवान बस्ती के ग्रामीणों ने बताया कि मारपीट करने के लिए गाव से बाहर के लोग भी बुलाए गये थे। दर्जनो लोग बस्ती के आदमी औरतो को लाठी डंडे से दौड़ा दौड़ा कर पीट रहे थे और पुलिस पहुंची भी तो घायलों के परिजनों को ही घमका रही है। घटना की जानकारी होने पर कवरेज के लिए पहुंचे पत्रकारों को पुलिस गांव में जाने रोकती रही। वहीं गांव में पहुंच चुके पत्रकारों को फोटो खींचने पर भी पुलिस ने रोकने का प्रयास करती नजर आयी।

शाहपुर में विवाद के बाद हुए मारपीट में घायल युवक।

जुआ खेलने से मना करने पर दबगों ने पीटा, मौत

रमेश राम। फाइल फोटो।

पीड़ित परिवार की तहरीर पर तीन के खिलाफ मुकदमा दर्ज

Young Writer, चंदौली। अलीनगर थाना क्षेत्र के नियामताबाद गांव में जुआ खेलने से मना करने पर दबंगों ने रविवार को एक व्यक्ति की बेरहमी से पिटाई कर दी जिसकी सोमवार की देर रात उपचार के लिए घायल व्यक्ति की अस्पताल ले जाते समय रास्ते में मौत हो गई। घटना के बाद परिजनों में कोहराम मच गया। पुलिस ने तीन आरोपितों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करके गिरफ्तारी के लिए दबिश दे रही है।
बताते चलें कि नियामताबाद गांव निवासी रमेश राम(40) वर्ष को गांव के ही तीन लोगों ने जुआ खेलने के लिए किसी जगह पर बुलाए और साथ में जुआ खेलने का दबाव बनाने लगे। रमेश ने जुआ खेलने से इंकार कर दिया। इस पर तीनों ने रमेश राम की बुरी तरह पिटाई कर दी। किसी तरह जान बचाकर रमेश अपने घर भाग गया।परिजनों के अनुसार तीनों आरोपितों ने रमेश के घर पहुंच कर उसे पीटा, जिससे उसकी हालत गंभीर हो गई। घायलावस्था में घायल रमेश की पत्नी प्रेमा देवी उसे लेकर बबुरी स्थित अपने मायके चली गई, जहां से परिजनों के साथ सोमवार की शाम अलीनगर थाने पहुंच कर तीन लोगों के खिलाफ तहरीर दी। पुलिस ने रमेश को मेडिकल जांच के लिए पीपी सेंटर भेजा। चिकित्सकों ने हालत गंभीर देख चिकित्सकों ने जिला अस्पताल रेफर कर दिया, जहां जाते समय देर शाम रास्ते में ही रमेश की मौत हो गई। अलीनगर थाना प्रभारी ने बताया कि परिजनों की तहरीर पर आरोपित प्रभु राम, पप्पू व फग्गी को गिरफ्तार करके सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्जकर पुलिस अग्रिम कार्रवाई में जुट गई।

सहारा व पल्स में फंसे हैं गरीबों के करोड़ो रुपयेः देवेंद्र

 बोले, सरकार हस्तक्षेप कर गरीबों का पैसा दिलाए

वापसचंदौली। कांग्रेसियों ने आमजन की सहारा व पल्स जैसी कम्पनियों में फंसे करोड़ों रुपये वापस दिलाने की मांग को लेकर मंगलवार को कलेक्ट्रेट पहुंचा। इस दौरान प्रशासनिक अधिकारियों से मुलाकात कर सहारा व पल्स कम्पनियों द्वारा करोड़ों लोगों का पैसा आरडी व एफडी समेत अन्य योजनाओं में मुनाफे का लालच देकर जमा कराया गया। जिनकी मियाद पूरी होने के बाद भी लोगों को उनकी ही कमाई का पैसा नहीं मिल पा रहा है।ऐसे में किसी गरीब की बेटी की शादी धनाभाव के कारण नहीं हो पा रही है तो कई धन की कमी के कारण अन्य जरूरी कामकाज को पूरा नहीं कर पा रहा है। स्थिति यह है कि लोग चार-पांच साल से इन कम्पनियों की शाखाओं का चक्कर लगा रहे हैं। मांग किया कि जिन लोगों के पैसे सहारा व पल्स जैसी कम्पनियों में फंसे हैं उनके सरकार वापस दिलाने की पहल करे, ताकि उन्हें बड़े आर्थिक नुकसान से बचाया जा सके।इस दौरान प्रदेश महासचिव देवेंद्र प्रताप सिंह मुन्ना ने कहा कि सहारा ग्रुप ने अपनी दो कम्पनियों के जरिए 2.25 करोड़ निवेशकों का 24 हजार करोड़ जुटाया। इसके बाद इन पैसों का कैसे और कहां इस्तेमाल किया गया इसका कोई रिकार्ड नहीं है। जब सेबी ने जांच शुरू किया तो पता चला कि कई निवेशक फर्जी थे। बाकी कम्पनी का दूर-दूर तक पता नहीं है। इस कारण गरीब व सामान्य स्तर के लोगों ने बेहतर भविष्य व बेटियों की शादी आदि के लिए पांच सालों से उनका पैसा फंसा हुआ है। ये लोग सहारा व पल्स कम्पनियों में जमा पैसे के लिए चक्कर काट रहे है, लेकिन उनका पैसा नहीं मिल पा रहा है। जिलाध्यक्ष धर्मेन्द्र तिवारी ने कहा कि इससे न केवल आम जनता परेशान है, बल्कि सहारा कम्पनी में काम करने वाले 12 कर्मचारी भी प्रभावित हैं। पिछली सरकारों ने ऐसे लोगों की कोई सुध नहीं ली, जिनके पैसे सहारा जैसी कम्पनियों में फंसे है। मांग किया कि सहारा व पल्स कम्पनियों में निवेश करने वाले प्रदेश के गरीब व मध्यवर्गीय लोगों को सूचीबद्ध कर तत्काल उनका पैसा वापस कराया जाय। इस कार्य में सरकार हस्तक्षेप करते हुए इन कम्पनियों को कम्पनियों को निर्देशित करे। इस अवसर पर छब्बू पटेल, टीआर दिनकर, अरुण द्विवेदी, गीता सिंह, रीना देवी, जय प्रकाश पटेल, शशिनाथ उपाध्याय, अशोक यादव आदि उपस्थित रहे। 
ट्रेन की चपेट में आने से युवक की

कैमूर इलेवन को हरा धानापुर पहुची सेमीफाइनल में


धानापुर- अमर वीर इंटर कॉलेज के मैदान पर अमर शहीद धानापुर स्पोर्टिंग क्लब अंतरप्रांतीय फुटबाल प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है।मंगलवार का मैच धानापुर(चंदौली) बनाम कैमूर इलेवन के बीच 90 मिनट का खेल हुआ। पहले हाफ के खेल में दोनो में किसी भी टीम ने गोल नही किया लेकिन दूसरे हाफ के अंतिम समय मे धानापुर की टीम से ओसामा ने गोल दाग कर अपनी टीम को सेमीफाइनल का रास्ता साफ कर दिया। ।इस दौरान मुख्य रूप से देवेंद्र प्रताप सिंह,अंसार अहमद,गोविंद उपाध्याय, शाहआलम खान, अरशद खान गुड्डू,अशोक सिंह, रुस्तम खान,सहरे आलम खान, राजन खान, रमेश द्विवेदी,मनीष सिंह सहित अन्य खेल प्रेमी उपस्थित रहे। निर्णायक मजहर खान रहे।कमेंट्री संयुक्त रूप से इमरान खान ,कामरान खान एवं आतिफ खान ने किया।

आशा संगिनियों ने सरकार से मांगा राज्य कर्मचारी का दर्जा

Chandauli कलेक्ट्रेट पर प्रशासनिक अफसर को ज्ञापन सौंपती आशा संगनी।

पैदल मार्च निकालकर पहुंची कलेक्ट्रेट, सौंपा घायल

Young Writer, चंदौली। जनपद की सभी आशा संगिनी ने राज्य कर्मचारी का दर्जा दिए जाने की मांग को लेकर मंगलवार को मुख्यालय पर जुलूस निकाला। इस दौरान आशाओं को न्यूनतम 21000 वेतनमान दिए जाने की आवश्यकता जताई। साथ ही आशाओं को 50 लाख का जीवन बीमा व 10 लाख का स्वास्थ्य बीमा किए जाने को जायज बताया। शाहजहांपुर की आशा पूनम पांडेय सहित सभी आशाओं पर दर्ज फर्जी मुकदमे वापस लिए जाने की भी मांग की।
इसके अलावा चंदौली ब्लॉक के परासी कला की आशा एमपी यादव के साथ अभद्र व्यवहार करने वाले बीसीपीएम को बर्खास्त कर एफआईआर दर्ज किए जाने की मांग की। इन्हीं महत्वपूर्ण मांगों को लेकर उत्तर प्रदेश आशा वर्कर्स यूनियन के प्रदेश व्यापी आह्वान पर बिछिया स्थित धरनास्थल से जिलाधिकारी कार्यालय तक मार्च कर ज्ञापन सौंपा। जिला संयोजिका माला यादव ने कहा कि प्रदेश मे आशाकर्मी भयानक गुलामी जैसी परिस्थितियों में कार्य कर रही हैं। उनके द्वारा किए गए कामं का न तो उन्हे कोई उचित पारिश्रमिक मिलता है न ही कोई पारितोषित ही दिया जा रहा है। आशाओं व संगीनियों के बकाया कोरोना भत्ता, टीकाकरण, कोविड सर्वे सहित सभी कार्य जो लिए गए हैं उनका अतिशीघ्र भुगतान किया जाय। सभी डिस्पेंसरियों में आशाओं/संगीनियो के लिए कॉमन रूम की व्यवस्था की जाय जहाँ आशाएं विश्राम कर सकें। अंत में सही 15 सूत्री ज्ञापन सौंपा है। इस मौके पर माला यादव,सुमन सिंह,नीतू पाल, एमपी यादव सहित दर्जनों आशाएं शामिल रही।

अटल बिहारी वाजपेयी सेतू पर आवागमन को अड़े मनोज डब्लू

चंदौली स्थित अटल बिहारी सेतू पर आवागमन के मुद्दे पर प्रशासन से जवाब तलब करते मनोज सिंह डब्लू।

Young Writer, चंदौली। बहुप्रतीष्ठित पंडित अटल बिहारी वाजपेयी सेतू इन दिनों राजनीतिक अखाड़े में तब्दील होता नजर आ रहा है। सोमवार को भाजपाइयों ने बड़े धूमधाम से पुल उद्घाटन कर उसे लोक समर्पित तक कर जमकर श्रेय लिया तो लोगों को लगा कि अब आवागमन में चंदौली के लोगों को सहूलियत होगी, लेकिन सोमवार को चहल-पहल से गुल्जार सेतू पर मंगलवार को पाबंदियों का पहरा बैठा दिया गया, जिससे लोगों के पुल के ऊपर से गुजरने की ख्वाहिश अधूरी रह गयी।

इसी बीच जब इस बात की जानकारी सपा के राष्ट्रीय सचिव मनोज कुमार सिंह डब्लू (Manoj Singh W) को हुई तो वे सीधे पंडित अटल बिहारी वाजपेयी सेतू के पास पहुंचे, जहां उन्हें सुरक्षा में तैनात पुलिस कर्मियों ने रोका लिया, जिससे वह भड़क उठे। उन्होंने पुलिस-प्रशासन से सीधा सवाल किया कि जब सत्ता पक्ष के विधायक की गाड़ी पुल से गुजर सकती है तो आम जनता भी इस पुल से होकर गुजरेंगे। यदि ऐसा नहीं होगा है तो इस पुल को मुकम्मल घोषित कर इसका उद्घाटन करते वाले भाजपा के नेता व जनप्रतिनिधि यहां की जनता से माफी मांगे या फिर उक्त पुल से मुझे व चंदौली की आम जनता को इससे गुजरने दिया जाए। कहा कि जब तक ऐसा नहीं होता मैं और मेरे समर्थन यही डंटे रहेंगे। इस पुल का निर्माण करने वाले सक्षम अधिकारी आएं और यह बताएं कि जब उद्घाटन हो गया तो इस पुल को आम जनता के लिए क्यों नहीं खोला जा रहा है। यदि पुल अधूरा है तो इसके लिए चंदौली की जनता और मुझसे माफी मांगें।

डा.महेंद्रनाथ के स्वास्थ्य लाभ के लिए समर्थकों ने किया हवन-पूजन

चंदौली मां काली माता मंदिर प्रांगण में हवन–पूजन करते भाजपाई।

Young Writer, चंदौली। स्थानीय सांसद व केंद्रीय भारी उद्योग मंत्री डा. महेंद्रनाथ पांडेय इन दिनों स्वस्थ चल रहे हैं जिनके स्वास्थ्य लाभ के लिए मंगलवार को जनपद में जगह-जगह विविध कार्यक्रम आयोजित कर उनके दीर्घायु होने की मंगल कामना की गयी। इसी क्र में मुख्यालय स्थित काली माता मंदिर प्रांगण में जिला पंचायत सदस्य दिलीप कुमार सोनकर की अगुवाई में हवन-पूजन कार्यक्रम आयोजित हुआ। भाजपाईयों ने पूरे विधि-विधान के साथ पूजन-अर्चन किया। साथ ही यज्ञ में आहुति देकर केंद्रीय मंत्री के जल्द स्वस्थ होने की कामना की।

डा. महेंद्रनाथ पांडेय के स्वास्थ्य लाभ के लिए हवन–पूजन करते भाजपाई।

इस दौरान दिलीप कुमार सोनकर ने कहा कि डा.महेंद्रनाथ पांडेय ने सभी समाज व जातियों के लोगों को राजनीति में उचित भागीदारी दिलाने में व्यक्तिगत प्रयास व पहल किया। भाजपा का एक-एक कार्यकर्ता उनसे जुड़ा है, क्योंकि उनका स्नेह, साथ व सहयोग हमेशा पार्टी कार्यकर्ताओं के प्रति बना रहा है और उम्मीद है आगे भी वह सेहतमंद हो नौजवान भाजपा कार्यकर्ताओं को राजनीतिक मार्गदर्शन देने का काम करेंगे। कहा कि डा. महेंद्रनाथ पांडेय ने चंदौली के विकास को गति देने का काम किया है। उन्होंने जनकल्याण की दिशा में कई ऐसे कार्य किए‚ जिसे चंदौली की जनता सदैव याद रखेगी। आज हम सभी के राजनीतिक मार्गदर्शक अस्वस्थ चल रहे हैं जिनकी सलामती की दुआएं चंदौली के लाखों द्वारा की जा रही है। इस दौरान डा.शशिकांत मिश्रा, पंकज मिश्रा, विजय मौर्या, मंडल उपाध्यक्ष राकेश तिवारी, पंकज ओझा, बब्बल सोनकर उपस्थित थे।

…सरकार बताए! कैसे माइनस में चली जा रही टोकन बुकिंग प्रणाली?

Young Writer, चंदौली। ऐसा लग रहा है कि प्रदेश सरकार की योजनाएं इन दिनों माइनस में चल रही है। हाल फिलहाल आनलाइन टोकन प्रणाली इसका ज्वलंत उदाहरण है, जो इस वक्त चंदौली जनपद सहित प्रदेश के किसानों के गले की हड्डी बन गयी है। स्थिति इतनी खराब है कि कड़ाके की इस ठंड में किसानों के लाखों रुपये मूल्य की उपज क्रय केंद्रों पर लावारिस हाल में पिछले एक पखवारे से पड़ी। क्योंकि किसानों को उसे बेचने के लिए टोकन नहीं मिल पा रहा है। ऐसा नहीं है कि किसान टोकन के लिए प्रयास नहीं कर रहे हैं, लेकिन उनके काफी जद्दोहद के बाद भी किसान अपनी उपज बेचने के लिए टोकन हासिल करने में नाकाम है। क्योंकि आनलाइन टोकन के लिए किया गया सरकारी बंदोबस्त नाकाफी, लचर और किसानों की संख्या के अनुरूप नहीं है।

इस वक्त सुबह 09ः30 बजे किसान, उनके परिवार के लोग मोबाइल, कम्प्यूटर व लैपटाप पर इस उम्मीद के साथ डंट जाते हैं कि आज उन्हें हर हाल में टोकन मिल ही जाएगा, लेकिन जैसे ही घड़ी की सुई 10 पर पहुंचती है सरकारी वेबसाइट अचानक से धड़ाम हो जाती है। जब तक किसान व उनके परिवार के लोग पुनः वेबसाइट पर पहुंचते है खरीद के लिए उपलब्ध सारे टोकन खत्म हो चुके होते हैं। किसानों द्वारा कई क्रय केंद्रों का आनलाइन अवलोकन कियाजाता है, लेकिन उन्हें तय मात्रा में धान बेचने के लिए कहीं भी टोकन प्राप्त नहीं होता। दिलचस्प यह है कि किसी केंद्र पर खरीद के लिए उपलब्ध मात्रा शून्य होती है तो किसी तिथि पर यह माइनस में चली आती है। मंगलवार की बात करें तो खाद्य विभाग सकलडीहा के क्रय केंद्र पर धान बेचने के लिए टोकन बुक करना चाहा तो उसने पाया कि चार जनवरी को टोकन के लिए उपलब्ध मात्रा -194 थी। उक्त किसान का आरोप है कि आनलाइन टोकन बुक करने में विभाग और साइबर शातिर झोल कर रहे हैं। यदि ऐसी ही स्थिति कायम रही तो किसानों की उपज क्रय केंद्र पर रखे-रखे बर्बाद हो जाएगी। ऐसा नहीं है कि यह नयी बात है। यह सबकुछ पिछले एक सप्ताह से अधिक समय से हो रहा है। बावजूद इसके जिले के अफसर, सरकार में बैठे लोग, जिम्मेदार मंत्री व मुख्यमंत्री कान में तेल डाले बैठे है। एक तरफ जहां जनपद में किसान परेशान है, वहीं भाजपा के लोग मंच सजाकर अपने चुनावी रंग को चटख करने में लगे है। धान कीखरीद नहीं होने से किसान परेशान हैं, वहीं सत्ता पक्ष के लोग उपलब्धियां गिनाकर खुद ही अपनी पीठ थपथपाने में लगे है।

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