सकलडीहा में सम्पूर्ण समाधान दिवस में फरियाद सुनते डीएम संजीव सिंह।
Young Writer, सकलडीहा। जिलाधिकारी संजीव कुमार सिंह सम्पूर्ण समाधान दिवस पर समस्याओं के निस्तारण को लेकर गंभीर दिखे। शनिवार को सम्पूर्ण दिवस में राजस्व कार्य में लापरवाही पर धरहरा गांव के एक लेखपाल को निलंबित कर दिया गया। वही कई लेखपाल और कानूनगों सहित अन्य को चेतावनी दी गयी। किसानों की समस्या और चुनाव कार्य में लापरवाही पर अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी। इस मौके पर कुल 90 प्रार्थना पत्र में 12 का मौके पर निस्तारण किया गया। शेष समस्याओं को टीम बनाकर एक सप्ताह में निस्तारण करने का निर्देश दिया गया।
इस दौरान तहसील के राजस्व के सबसे ज्यादा मामले आने पर लेखपाल कानूनगों और तहसील के अधिकारियों को कड़ी फटकार लगायी। धरहरा गांव के ग्राम प्रधान की शिकायत पर लेखपाल को कार्य में लापरवाही पर तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। साथ ही निलंबित लेखपाल को जिला मुख्यालय पर सम्बद्ध करने का निर्देश दिया। वही चुनाव कार्यालय से जुड़े अधिकारियों को चेताया कि समय से कार्य पूरा नहीं होने पर जिम्मेदार के खिलाफ कार्यवाही की जायेगी। वही पुलिस अधिकारियों को चुनाव से पूर्व शस्त्र जमा करने व अवैध शराब पर अंकुश लगाने का निर्देशित किया। अंत में किसानों से जुड़ी समस्याओं को अधिकारियों को भेजकर निस्तारण कराने व धान खरीद के बारे में जानकारी लिया। इस मौके पर पीडी सुशील कुमार, एडीशनल एसपी सुखराम,डीडीओ लक्ष्मण प्रसाद, डीपीआरओ ब्रम्हचारी दूबे, समाज कल्याण नागेन्द्र मौर्य,डीएसओ कुंवर देवेन्द्र प्रताप सिंह, बीएसए सतेन्द्र सिंह, तहसीलदार डा. वंदना मिश्रा, सीओ अनिरूद्ध सिंह, नायब तहसीलदार नीरज चतुर्वेदी, डिप्टी आरएमओ अनुप श्रीवास्तव मौजूद रहे।
चंदौली। जनपद में मौसम बदलते ही ठण्ड ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है। अब लोग शाम सुबह के वक्त ठण्ड से ठिठुरने लगे।जैसे ही तेज़ ठण्ड ने अपनी मजबूत दस्तक देने लगी है। वैसे ही कस्बे में जगह जगह चट्टी चैराहो पर अलाव जलाने की मांग उठने लगी हैं। कस्बे के लोगों ने बढ़ते ठण्ड को देखते हुए बढ़ने नगर पंचायत प्रशासन से चौराहों बस स्टैंड जिलाअस्पताल आदि जगहों पर अलाव जलवाने की मांग की है ।लोगों का कहना है कि ठण्ड के मौसम में आम आदमी के लिए जगह जगह चट्टी चौराहों पर जलने वाला अलाव ही ठण्ड से बचने का एक मात्र साधन होता है जहाँ लोग बस या ट्रेन के लिए आने जाने वालों के लिए सहारा साबित होता है।इस समय कुछ दिनों से ठंड ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है ऐसे में नगर अलाव की मांग उठना लाजिमी है। इस दौरान नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी अनिल सिंह ने बताया कि ठण्ड बढ़ते ही नगर पंचायत अलाव जलवाने को लेकर तैयारी शुरू कर दिया है। जल्द ही नगर में अलाव जलवाए जाएंगे। जिससे लोगो को ठंड से राहत मिल सके।
वायु प्रदूषण से राष्ट्रीय बेचैनी है। राष्ट्रीयराजधानी दिल्लीकी हालत बहुत चिंताजनक है। यही स्थिति कमोवेश सभी महानगरों में है। वायु प्राण हैं। प्राण नहीं तो जीवन नहीं। वैदिक परम्परा में वायु अमर देव हैं। वायु से आयु है। वे वैदिक ऋषियों के प्यारे देवता हैं। वे प्राणशक्ति के संचालक हैं लेकिन दिखाई नहीं पड़ते। वैदिक ऋषि वायु की प्रीति में सराबोर हैं। वायु का रूप नहीं होता। वायु की तीव्र गति आंधी है। आंधी का शोर सुनाई पड़ता है लेकिन वायु का रूप नहीं। कहते हैं, “तीव्र गति अनुभव में आती, रूप नहीं। ऋग्वेद के लगता है कि ऋषि वायु का रूप देखने के अभिलाषी हैं। वे उन्हें सोम पीने का निमंत्रण देते हैं “वायवा याहि दर्शतेमे सोमा अरंकृता – दर्शनीय वायु! आओ सोम रस सजाकर रखा गया है।” (वही 1.2.1) प्राण ही जीवन है। प्राण से प्राणी है। वायु हरेक प्राणी व जीव का प्राण हैं लेकिन देवों का प्राण भी वायु ही है “आत्मा देवानां।” (10.10.168.4) बड़ी बात है देवों को भी मनुष्य जैसा बताना। वायु देवों के भी प्राण हैं इसलिए वही विश्व के राजा हैं। (10.168.2) इसके बावजूद हम पटाखा फोड़ते हैं। वायु को प्राण लेवा बनाते हैं। अनुभूति में सृष्टि पांच महाभूतों (तत्वों) से बनी है। पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश ये पांच महाभूत हैं। इनमें ‘वायु’ को प्रत्यक्ष देव कहा गया है। वायु प्रत्यक्ष देव हैं और प्रत्यक्ष ब्रह्म भी। ऋग्वेद (1.90.9) में स्तुति है “नमस्ते वायो, त्वमेव प्रत्यक्ष ब्रहमासि, त्वामेव प्रत्यक्षं ब्रह्म वदिष्यामि। तन्मामवतु – वायु को नमस्कार है, आप प्रत्यक्ष ब्रह्म है, मैं तुमको ही प्रत्यक्ष ब्रह्म कहूंगा। आप हमारी रक्षा करें।” ऋग्वेदका यही मन्त्र यजुर्वेद (36.9) अथर्ववेद (19.9.6) व तैत्तिरीय उपनिषद् (1) में भी जस का तस आया है। ब्रह्म सम्पूर्णता है। आधुनिक ब्रह्माण्ड विज्ञानी भी ब्रह्म में उत्सुक हैं। भारतीय अनुभूति का ब्रह्म अनुभूत है। प्रयोग सिद्ध है और प्रत्यक्ष है। कहते हैं, “वायु ही सभी भुवनों में प्रवेश करता हुआ हरेक रूप रूप में प्रतिरूप होता है। सभी जीवों में प्राण की सत्ता है, प्राण नहीं तो जीवन नहीं। प्राण वस्तुतः वायु है। ऋषि सूर्य आदित्य को देखते हैं। वे भी प्रत्यक्ष देव हैं। प्रश्नोपनिषद में कहते हैं ‘आदित्य ह वै प्राणौ – जो आदित्य है सूर्य है, वही प्राण है। वैदिक पूर्वज वायु को देवता जानते हैं। उसे बहुवचन ‘मरूद्गण’ कहते हैं। वे सम्पूर्ण विश्व के प्रति मधु दृष्टि रखते है। ऋग्वेद के एक मंत्र में वे वायु को भी मधुरस से भरा पूरा पाना चाहते हैं – मधुवाता ऋतायते। वृहदारण्यक उपनिषद् के सुन्दर मंत्र में पृथ्वी और अग्नि के प्रति मधुदृष्टि बताने के बाद वायु के लिए कहते हैं “अयं वायुः सर्वेर्षां भूतानां मध्वस्य – यह वायु सभी भूतों का मधु (सभी भूतों के पुष्पों से प्राप्त रस) है और सभी भूत इस वायु के मधु है – वायोः सर्वाणि भूतानि मधु। सृष्टि निर्माण के सभी घटक एक दूसरे से अन्तर्सम्बंधित है। वे एक दूसरे के मधु हैं। उनके ढेर सारे नाम हैं, वे वायु हैं, प्राण हैं, वही मरूत् भी हैं। मरूत् का सीधा अर्थ है वायु। मरूद्गण समतावादी हैं, धनी, दरिद्र सबको एक समान संरक्षण देते हैं। (वही 20) वशिष्ठ के सूक्तों में इन्हें अति प्राचीन भी बताया गया है “हे मरूतो आपने हमारे पूर्वजों पर भी बड़ी कृपा थी” (वही, 23) वशिष्ठ की ही तरह ऋग्वेद के एक और ऋषि अगस्त्य मैत्रवरूणि भी मरूद्गणों के प्रति अतिरिक्त जिज्ञासु है। पूछतें हैं ‘मरूद्गण किस शुभ तत्व से सिंचन करते हैं? कहां से आते हैं? किस बुद्धि से प्रेरित हैं? किसकी स्तुतियां स्वीकार करते हैं? (1.165.1-2) फिर मरूतों का स्वभाव बताते हैं “वे वर्षणशील मेघों के भीतर गर्जनशील हैं। (1.166.1) वे पर्वतों को भी अपनी शब्द ध्वनि से गुंजित करते हैं, तेज आंधी और पानी का ऐसा काव्य चित्रण अनूठा है। कहते हैं, “वे गतिशील मरूद्गण भूमि पर दूर-दूर तक जल बरसाते हैं। वे सबके मित्र हैं। (1.167.4) यहां मरूद्गण वर्षा के देवता हैं।
प्रकृति में एक यज्ञ चल रहा है। वायु प्राण हैं, अन्न भी प्राण हैं। अन्न का प्राण वर्षा है। वायुदेव/मरूतगण वर्षा लाते हैं। ऋग्वेद में मरूतों की ढेर सारी स्तुतियां हैं। कहते हैं “आपके आगमन पर हम हर्षित होते हैं, स्तुतियां करते हैं।” (5.53.5) लेकिन कभी-कभी वायु नहीं चलती, उमस हो जाती है। प्रार्थना है “हे मरूतो आप दूरस्थ क्षेत्रो में न रूकें, द्युलोक अंतरिक्ष लोक से यहां आयें। (5.53.8) ऋषि कहते हैं “रसा, अनितमा कुभा सिंध आदि नदियां वायु वेग को न रोकें।” (वही 10) वे “नदी के साथ पर्वतों से भी यही अपेक्षा करते हैं।” (5.55.7) वायु प्रवाह का थमना ऋषियों को अच्छा नहीं लगता। हम सबको भी वायु का प्रवाह अच्छा लगता है। वायु रूकी तो उमस बढ़ती है। कहते हैं “हे मरूतो आप रात दिन लगातार चलें, सभी क्षेत्रों में भ्रमण करें।” (5.54.4) वायु प्राण है, वायु जगत् का स्पंदन है। ऋषियों की दृष्टि में वे देवता हैं इसीलिए वायु का प्रदूषण नहीं करना चाहिए। वे जीवन हैं, जीवन दाता भी हैं। वायु से वर्षा है, वायु से वाणी है। गीत-संगीत गंध-सुगंध और मानुष गंध के संचरण का उपकरण भी वायु देव हैं। वायु नमस्कारों के योग्य हैं। भारतीय दृष्टि में वायु प्रकृति की शक्ति है। उन्होंने वायु का अध्ययन एक पदार्थ की तरह किया है। उनका अध्ययन जरूरी है लेकिन दिव्य शक्ति की तरह उनको प्रणाम भी किया जाना चाहिए। ऋग्वेद के ऋषि मरूद्गणों का जन्म, स्वभाव वर्षा लाने का उनका काम ठीक से जाना चाहते हैं लेकिन नमस्कारों के साथ। चरक संहिता आयुर्विज्ञान का आदरणीय महाग्रन्थ है। इसके 28वें अध्याय (श्लोक 3) में आत्रेय ने बताया है “वायुरायुर्बलं वायुर्वायु र्धाता शरीरिणाम- वायु ही आयु है। वायु ही बल है, शरीर को धारण करने वाले भी वायु ही हैं। कहते हैं “यह संसार वायु है, उसे सबका नियन्ता गाते है- वायुर्विश्वमिदं सर्वं प्रभुवायुश्च कीर्तितः।” यहां ‘कीर्ततः’ शब्द ध्याान देने योग्य है। वायु को सर्वशक्तिमान गाने की परम्परा पुरानी है। शरीर और प्राण-वायु का संयोग जीवन है, दोनों का वियोग मृत्यु है। वाग्भट्ट ने ठीक कहा है “वह विश्वकर्मा, विश्वात्मा, विश्वरूप प्रजापति है। वह सृष्टा, धाता, विभु, विष्णु और संहारक मृत्यु है।” चरक संहिता में कहते हैं “वह भगवान (परम ऐश्वर्यशाली) स्वयं अव्यय हैं, प्राणियों की उत्पत्ति व विनाश के कारण हैं, सुख और दुख के भी कारण हैं, सभी छोटे बड़े पदार्थो को लांघने वाले हैं, सर्वत्र उपस्थित हैं।” यहां शरीर के भिन्न अंगों में प्रवाहित 5 वायु का वर्णन है। फिर इनसे जुड़े रोगों का विस्तार से विवेचन है।
भारतीय मनीषा ने वायु को समग्रता में देखा और प्रतीकों में गाया। वायु का प्रदूषण हजारों रोगों की जड़ है। प्राणवायु के लिए ही लोग सुबह-सुबह टहलने निकलते हैं, जहां वायु सघन है, वहां के जीवन में नृत्य है। जंगलों में वायु सघन है। इसीलिए वन उपवन मधुवन हैं। भारत का अधिकांश प्राचीन ज्ञान वनों/अरण्यों में ही पैदा हुआ था। वैदिक साहित्य महा उपवन और सगंधा वन हैं। वैदिक मंत्रों में प्राणवायु की सघनता है। हम सब वैदिक संस्कृति के उत्तराधिकारी हैं, बावजूद इसके हम वायु को प्रदूषित करते हैं। प्रकृति को आहत करते हैं, स्वयं अपने ही जीवन जगत् को क्षति पहुंचाते हैं। वायु प्रदूषण रोकने में ही हमारे जीवन की गति है।
पुलिस लाइन में अवैध शराब संग पकड़ा गया तस्कर व पुलिस।
Young Writer, चंदौली। क्राइम ब्रांच व बबुरी थाना पुलिस ने उतरौत नहर पुलिया के बाद मध्य रात्रि के बाद ट्रक पर लदे 90 लाख की शराब के साथ एक तस्कर को धर-दबोचा। ट्रक को कब्जे में लेने के बाद जब पुलिस तलाशी ली तो प्लास्टर आफ पेरिस की बोरियों में 15 हजार शराब की बोतलें बरामद हुई। जिसमें इपीरियल ब्लू, मैकडावल व रॉयल प्लेयर ब्रांड की बोतले शामिल हैं। पुलिस ने वाहन के पंजीयन नंबर की आनलाइन पड़ताल की तो चेचिस नंबर भी कूटरचित पाया गया। इस मामले में पुलिस ने वाहन चालक व स्वामी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर आगे की कार्यवाही में जुट गयी है। उक्त मामले का सीओ चकिया रामवीर सिंह ने शनिवार को थाना बबुरी में खुलासा किया। उन्होंने बताया कि अवैध शराब के तस्करी की मुखबिर खास से सूचना मिलने के बाद स्वाट टीम व थाना बबुरी की पुलिस ने उतरौत नहर पुलिया के पास दबिश देकर एक तस्कर को ट्रक समेत दबोच लिया। पुलिस द्वारा पकड़े गए उक्त ट्रक पर लदे प्लास्टर आफ पेरिस की बोरियों में 15000 बोतल अवैध शराब को छुपाकर बिहार प्रांत ले जाया जा रहा था, जिसकी कीमत 90 लाख रुपये बतायी जा रही है। पुलिस ने ट्रक के पंजीयन संख्या एमपी07एचबी4652 को जब पुलिस ने ई-चालान ऐप पर चेक किया तो वाहन पर अंकित चेचिस नंबर व ई-चालान के पर प्रदर्शित चेचिस नंबर में भिन्नता पाई गयी, जिसे कूटरचित तरीके से बदला गया था। इस आधार पर चालक बौधराज, जिला फतेहाबाद हरियाणा व वाहन स्वामी लखन सिंह यादव के विरूद्ध प्राथमिकी दर्ज कर आगे की कार्यवाही में जुट गयी। पकड़े गए शराब तस्कर ने पूछताछ में बताया कि विधानसभा चुनाव के मद्देनजर वाहन स्वामी अवैध अंग्रेजी शराब बिहार तस्करी का कार्य करता है। बिहार सीमा में प्रवेश करते ही मुझे शराब पहुंचाने वाले ठिकाने की जानकारी मोबाइल पर प्राप्त होती। वह अपनी आजीविका के लिए अवैध शराब की तस्करी का कार्य करता है और इसी सिलसिले में वह गत दिनों जनपद मथुरा में पकड़ा गया और जेल भी गया था। पुलिस टीम में स्वाट प्रभारी राजीव सिंह, बबुरी थानाध्यक्ष अतुल कुमार, शैलेंद्र प्रताप सिंह, मोहन प्रसाद, आनंद सिंह, अमित यादव आदि शामिल रहे।
Young Writer, साहित्य पटल। लेखक हृदयनारायण दीक्षित‚ उत्तर प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष की कलम सेसरदार पटेल की जन्मतिथि पर समूचे देश में राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में भी समूचे देश ने विभिन्न आयोजन किये, लेकिन नई दिल्ली से प्रकाशित संडे नवजीवन (31 अक्टूबर, 2021) में एक लेख में उन्हें कमतर बताने की कोशिश की है। अरूण शर्मा के इस लेख में कहा गया है, “सरदार पटेल ने राजे-रजवाड़े को आजादी बाद के भारत में शामिल करने में बड़ी ही अहम भूमिका निभाई, लेकिन अकेले उन्हें ही इसका श्रेय नहीं दिया जा सकता। उनके तेज-तर्रार सेक्रेटरी वी.पी. मेनन और तब के गवर्नर जनरल लॉर्ड माउंटबेटेन को भी इसका श्रेय दिया जाना चाहिए। वी.पी. मेनन ने अपनी संवैधानिक-वैधानिक विशेषज्ञता से एकीकरण की पटकथा लिखी तो माउंटबेटेन ने बड़ी सूझ-बूझ के साथ रजवाड़ों को इसके लिए राजी किया।” मेनन ने अपनी पुस्तक "द स्टोरी ऑफ इन्टीग्रेशन ऑफ इंडियन स्टेट्स" में लिखा है कि उन्होंने सरदार पटेल को दिए वादे को कैसे पूरा किया? और कैसे भारत में राजे-रजवाड़ों को शामिल करने का काम पूरा हो सका।
“लेख के अनुसार लॉर्ड माउंटबेटेन ने मेनन के नाम का प्रस्ताव एक प्रांत के गवर्नर के लिए किया था, लेकिन सरदार पटेल के आग्रह पर उन्हें नवगठित मंत्रालय मिनिस्ट्री ऑफ स्टेट्स में सचिव का पद संभालने की पेशकश की गई। इस विभाग का मंत्री सरदार पटेल को बनाया गया था। मेनन ने लिखा है,” मैंने उन्हें याद दिलाया कि उनसे पहली बार मिलने के बाद ही मैंने तय कर लिया कि सभी महत्वपूर्ण संवैधानिक घटनाक्रमों पर उनसे सलाह-मशविरा करने की हरसंभव कोशिश करूंगा। मैंने यह उल्लेख किया कि यह उनका प्रबल समर्थन ही था। अब जबकि हमें मंत्री और सचिव के रूप में काम करना था, मुझे पूरा यकीन नहीं था कि हम एक साथ कितनी दूर चल पाएंगे।“ इस पर सरदार ने कहा कि यह सवाल ही नहीं उठता। मैंने कहा कि ऐसा लग रहा है कि कांग्रेस नेताओं को सिविल सेवा के लोगों पर उतना भरोसा नहीं है। उन्होंने जवाब दिया कि यह डर निराधार है। कहा कि इसके पहले सिविल सेवा के लोगों के प्रति नेताओं का जो भी रूख रहा हो उन्हें भरोसा है कि आगे हर कोई मिलजुलकर काम करेगा।
सारा देश सरदार पटेल को राष्ट्रभाव की निष्ठा के लिए आदर देता है, लेकिन इस आलेख में किसी को दोषरहित मानना मानव स्वभाव के विपरीत बताया गया, ‘अगर हम किसी को दोषरहित बताते हैं तो ऐसा कहना आधारभूत मानव स्वभाव के विपरीत है। लौह पुरूष वल्लभ भाई पटेल भी इसके अपवाद नहीं थे। आरएसएस और अन्य उग्रवादी समूहों का आकलन करने में उनसे गलती हो गयी।‘ लेखक के अनुसार वह दोषरहित नहीं थे। लेखक ने अफसोस जाहिर किया है, ‘काश सरदार पटेल आरएसएस के पाक-साफ व्यवहार का असली चेहरा देख पाते और उनके साथ पेश आने मे उतने ही कठोर होते।‘ सच यह नहीं है। पटेल भारत के प्रमुख राष्ट्र निर्माता हैं। राष्ट्रीय एकीकरण और सांस्कृतिक राष्ट्रभाव के सूत्रधार हैं। वह महात्मा गांधी के वास्तविक सहयोगी थे। कांग्रेस के अधिकृत इतिहासकार डॉ॰ पट्टाभि सीमा रमैया ने लिखा है, ‘जब गांधी जी की तैयारी चल रही थी, वल्लभ भाई आगामी अग्नि परीक्षा के लिए देशवासियों को प्रेरित करने के लिए अपने नेता से पहले ही चल दिए।
...जब वल्लभ भाई गांधी जी के आगे चल रहे थे तब सरकार को उनमें जॉन दी बैपटिस्ट की छवि दिखाई दी, जो लगभग 1900 साल पहले ईसा मसीह के अग्रगामी बने थे।‘ पटेल की तुलना जर्मनी एकीकरण (1872) के प्रमुख नेता बिसमार्क से भी की जाती है। बिसमार्क ने युद्ध के जरिए जर्मनी का एकीकरण किया था, लेकिन पटेल ने अपनी संगठनात्मक योग्यता, क्षमता, सूझ-बूझ और दृढ़ता से भारत का आधुनिक मानचित्र गढ़ा था। राष्ट्र निर्माण का कार्य दृढ़ता मांगता है। इस कार्य में ढीला-पोली नहीं चलती है। आत्मसम्पर्णकारी समझौते भी नहीं चलते। पटेल ने संविधान निर्माण के समय भी अद्भुत दृढ़ता दिखाई। वह संविधान की अल्पसंख्यक समिति के भी सभापति थे और प्रान्तीय संविधान समिति के भी। संविधान सभा में अल्पसंख्यक समिति की रिपोर्ट पटेल ने ही रखी थी। मजहब आधारित आरक्षण को लेकर संविधान सभा में बहुत तीखी बहस हुई थी। मजहब आधारित आरक्षण को गलत बताया। संविधान सभा (25 व 26 मई, 1949) में उन्होंने मजहबी आरक्षण के समर्थकों को दृढ़तापूर्वक डांटा। ऐसे महान नेता को कमतर करने के प्रयास अनुचित है।
भारत की स्वधीनता अनेक महत्वपूर्ण नेताओं व लाखों लोगों के संघर्ष का परिणाम है। सरदार पटेल इस आंदोलन के प्रमुख स्तम्भ थे। अंग्रेज स्वाधीनता संग्राम और विषम अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के दबाव में भी भारत छोड़ने को विवश हुए। ब्रिटिश संसद ने जुलाई 1947 में, ‘भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम पारित किया था। इस अधिनियम में भारत व पाकिस्तान दो देश थे।‘ देशी राज्यों को अपनी इच्छानुसार भारत या पाकिस्तान में मिलने अथवा स्वतंत्र राज्य बने रहने की छूट थी। अंग्रेजों ने भारत का विभाजन ही नहीं किया, छोटे-छोटे 562 देशी राज्यों को भी अलग हो जाने का अवसर दिया। पटेल ने सभी राज्यों और रजवाड़ों को सूझ-बूझ के साथ भारतीय राष्ट्र राज्य का हिस्सा बनाया। पटेल के कौशल से राष्ट्र का एकीकरण पूरा हुआ। कश्मीर का मामला अटका हुआ था। पाकिस्तानी कबायली फौजों ने हमला किया। माउंटबेटेन कश्मीर में भारतीय फौज भेजने के खिलाफ थी। माउंटबेटेन और पटेल की बहस भी हो गयी। पंडित नेहरू ने 2 दिसम्बर, 1947 के दिन कश्मीर का प्रभार पटेल से छीनकर अपने हाथ में ले लिया। आयंगर कश्मीरी मामलों के सलाहकार बने। सरदार ने 23 दिसम्बर, 1947 मंत्रिमंडल से त्यागपत्र दे दिया। कश्मीर समस्या लम्बी खिंची। वर्तमान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने संविधान अनु॰ 370 का खात्मा किया।
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ राष्ट्र निर्माण में संलग्न अखिल भारतीय संगठन है। पटेल इस संगठन के अच्छे कार्यों के समर्थक थे। उनमें आग्रही राष्ट्रभाव था। दृढ़ इच्छाशक्ति थी। वह प्रेरक थे और आज भी हैं। उनका स्मरण अनुसरण समूचा भारत कर रहा है। कुछ वर्ष पूर्व आजमगढ़ में हुए सम्मेलन में मुस्लिम पॉलीटिकल कौसिल के प्रमुख तसलीम रहमानी ने आजमगढ़ के एक सम्मेलन में पटेल को सैकड़ों मुस्लिमों के मारे जाने का जिम्मेदार ठहराया था और उन्हें आतंकवादी बताया गया। कथित प्रगतिशील विचारकों और कांग्रेस ने इस अरोप पर मौन साधे रखा, लेकिन यह नया भारत है। गुजरात के केवड़िया में सरदार की दिव्य भव्य मूर्ति है। वह सारे देश को राष्ट्रीय एकता का संदेश दे रही है। राष्ट्रभाव को आहत करने वाले वक्तव्य असहनीय है।
गुस्साए सपाइयों ने मनोज डब्लू व सपा जिलाध्यक्ष की अगुवाई में जिला विपणन कार्यालय पहुंचे‚ अफसरों के टेबल पर फेंका धान
Young Writer, चंदौली। सैयदराजा विधानसभा में धान खरीद केंद्रों को बंद होने से खफा सपा के राष्ट्रीय सचिव मनोज कुमार सिंह डब्लू व सपा जिलाध्यक्ष सत्यनरायन राजभर की अगुवाई में सैकड़ों सपाई शनिवार को जिला विपणन कार्यालय पहुंचे। इसदौरान विपणन अधिकारी अनूप श्रीवास्तव कार्यालय में गैरहाजिर रहे तो गुस्साए सपाइयों ने उनके कार्यालय में धान कीबोरियां खोलकर अनाज को छिट दिया और अपना विरोध दर्ज कराया। साथ ही जिला विपणन अधिकारी से टेलीफोनिक बातचीज कर रनिया में बंद हुए क्रय केंद्रों को खोले जाने को लेकर अपने सवाल को दोहराया। कहा कि यदि चौबीस घंटे में जिला प्रशासन ने निर्णय नहीं लिया तो सोमवार को मंडी समिति के गेट पर किसानों का जत्था लेकर पहुंचने का काम होगा।
इस दौरान सपा के राष्ट्रीय सचिव मनोज सिंह डब्लू ने कहा कि क्रय केंद्र को लेकर जिला प्रशासन की नीति व नियत ठीक नहीं है। यदि किसानों के उपज की खरीद को लेकर प्रशासन की मंशा स्पष्ट होती तो तीन दिनों से क्रय केंद्रों के सवाल पर सरकारी दफ्तरों का चक्कर नहीं काटना पड़ता। जिला प्रशासन राजनीतिक साजिश का हिस्सा बन बैठा है, जिसका खामियाजा सैयदराजा क्षेत्र के किसान भुगत रहे हैं, लेकिन अब ऐसा नहीं होना दिया जाएगा। समाजवादी पार्टी किसानों के साथ अंतिम दम तक संघर्ष करने को तैयार है।
सपा जिलाध्यक्ष सत्य नरायन राजभर ने कहा कि जनपद के जिन हिस्सों में धान की पैदावार अधिक होती है जिसमें मसलन बरहनी, धानापुर, चहनियां, सकलडीहा, चकिया यहां तक की नौगढ़ में धान खरीद सुनिश्चित नहीं हो पा रही है। क्योंकि जिले के अफसर किसानों की समस्या को लेकर संवेदनशील नहीं है। कहा कि यह मात्र खेती-किसानी व भोजन का मसला नहीं है। बल्कि चंदौली के किसान परिवारों के बेटियों की शादी, बेटों की पढ़ाई का खर्च, दवा-ईलाज जैसी बुनियादी जरूरतें धान की खेती पर निर्भर है लिहाजा इस मुद्दे को किसी भी हाल में छोड़ा नहीं जा सकता। चेताया कि यदि जिला प्रशासन धान खरीद की विसंगतियों को दूर नहीं करता है तो निश्चित रूप से समाजवादी पार्टी बड़े आंदोलन का रूख करेगी। कहा कि पहले भी किसानों के धान खरीद के मुद्दे पर सीएम योगी आदित्यनाथ से मिलकर समस्या को रखने का प्रयास किया गया तो जिलाप्रशासन ने सपाइयों संग बर्बरता दिखाई जो अनुचित था। इस अवसर पर पूर्व विधायक चकिया जितेंद्र कुमार, डा. हसाम हाशमी, निरंजन कन्नौजिया, लव बियार आदि उपस्थित रहे।
जिला विपणन कार्यालय में धान की फसल को छिंटने सपा नेता मनोज कुमार सिंह डब्लू (Manoj Kumar Singh W)
चंदौली कोट पर गोलीकांड के पूर्व मारपीट का सीसीटीवी फुटेज।
Young Writer, चंदौली। मुख्यालय स्थित चंदौली कोट पर बीते शुक्रवार को गोली कांड से जुड़ा एक और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। यह वीडियो भी उसी अहाते का है जहां शुक्रवार को गोलियां चली थी। यह वीडियो गोलीकांड के पहले की बतायी जा रही है जिसमें कुछ लोग लाठी, टांगी व पत्थर चलाते हुए नजर आ रहे हैं। यह वीडियो पुलिसिया जांच का विषय है, लेकिन वीडियो शनिवार को चंदौली नगर के लगभग अधिकांशतः मोबाइल फोन में देखा गया, जिसको लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म रहा। चंदौली नगर क्षेत्र में चली रही चर्चाओं को आधार माना जाएगा तो यह वीडियो गोलीकांड के ठीक पहले की है। वीडियो में सिर पर सफेद गमछा बांधे एक अधेड़ डंडे से दोनों लोगों ताबड़तोड़ पहार कर रहा होता। इस बीच वहां मौजूद एक युवक टांगी लेकर उन दोनों को हमला करता है और दो पक्षों में गुत्थम-गुत्थी चलती है। इसी बीच एक और युवक डंडे से लैस होकर उक्त दोनों व्यक्तियों पर हमलावर हो जाता है। चंद सेकेंड के इस वीडियो में यह स्पष्ट दिखाई दे रहा है कि एक पक्ष के दो लोग डंडे व एक युवक टांची से दूसरे पक्ष के दो लोगों पर हमला करते हैं और उन्हें लहूलुहान करते हैं। यह वीडियो भी उसी अहाते का जहां शुक्रवार को ताबड़तोड़ कई राउंड फायरिंग होने से नगर में दहशत कायम हो गयी थी। मारपीट व गोलीकांड की दोनों वीडियों अलग-अलग पक्ष की ओर से वायरल की गयी है। फिलहाल इस घटना को लेकर तनाव की स्थिति कायम है और चंदौली कोट पर पुलिस का पहरा बिठा दिया गया है, ताकि फिर इसे इस प्रकरण में कोई अप्रिय घटना न घटित हो जाय। पुलिस के मुताबिक एक पक्ष के लोग फरार चल रहे है। पुलिस मामले में पीड़ित पक्ष की तहरीर पर मुकदमा कायम कर उचित विधिक कार्यवाही कर रही है। उधर, इस मामले में सीओ सदर अनिल राय ने पहले ही स्पष्ट कह चुके हैं कि घटना की जांच में यदि फायरिंग व अन्य आरोपों की पुष्टि होती है तो उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्यवाही की जाएगी। साथ ही असलहों के लाइसेंस निरस्तीकरण के साथ ही कड़ी कानूनी कार्यवाही की जाएगी। एएसपी चिरंजीवी मुखर्जी ने बताया कि वायरल वीडियो में फायरिंग करने वाले की पहचान कर ली गयी है। दूसरे पक्ष के तुंगनाथ सिंह की तहरीर पर मुकदमा कायम करने की प्रक्रिया प्रचलित है। इस प्रकरण में सभी दोषियों के विरूद्ध कड़ी से कड़ी कार्यवाही की जाएगी।
चंदौली। स्वास्थ्य विभाग की जेडी डा. मनीषा सिंह ने एमसीएच विंग में स्थापित कोविड अस्पताल का निरीक्षण किया। इस दौरान तीसरी लहर को लेकर की गई तैयारियां देखी। उन्होंने बेड, आक्सीजन, वेलटिनेटर आदि स्वास्थ्य सुविधाओं का अवलोकन किया। साथ ही मार्कड्रिल के माध्यम से मरीजों का इलाज करने की व्यवस्था देखी।कोरोना की संभावित तीसरी लहर को लेकर स्वास्थ्य विभाग तैयारियों में जुटा हुआ है। विभाग की ओर से जिला अस्पताल के एमसीएच विंग में कोविड मरीजों के लिए बकाएदे 100 बेड की व्यवस्था की गई है। इसमें बाइपैप मशीन, आक्सीजन कंसंटे्रटर वेलटीनेटर आदि की व्यवस्था है। इसका जायजा लेने के लिए ज्वाइंट डायरेक्टर स्वास्थ्य विभाग डा. मनीषा सिंह एमसीएच विंग पहुंची। उन्होंने बेड की व्यवस्था के साथ ही आक्सीजन, वेलटिनेटर व अन्य स्वास्थ्य सुविधाएं देखी। वहीं डीएसएल लैब व अग्निशमन यंत्रों का निरीक्षण किया। वहीं मार्कड्रिल कर कोविड संक्रमित मरीजों को बेड तक पहुंचाने, आक्सीजन लगाने, उनका तत्काल इलाज शुरू करते हुए अन्य स्वास्थ्य सुविधा देखी गई। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य कर्मियों को मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने का निर्देश दिया। इस मौके पर सीएमओ डा. वीपी द्विवेदी, नोडल अधिकारी डा. संजय पटेल आदि मौजूद रहे।
शहाबगंज के तियरा गांव के पास हुए हादसा‚ एक घायल का जिला अस्पताल में चल रहा इलाज Young Writer, शहाबगंज। क्षेत्र के तियरा गांव के पास चकिया-चंदौली मार्ग पर शुक्रवार की शाम मोटरसाइकिल से घर वापस जाते समय खड़ी ट्रैक्टर टाली में जोरदार टक्कर हो गयी। इस दुर्घटना में दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गयी। वहीं एक बाइक सवार गंभीर रुप से घायल हो गया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने घायल को एम्बुलेंस द्वारा इलाज के लिए जिलाचिकित्सालय भेजा। क्षेत्र के लटांव गांव की वर्तमान प्रधान रविता उपाध्याय के पति पवन फौजी उर्फ दीपक उपाध्याय पुत्र जनार्दन उपाध्याय 35 वर्ष छूट्टी लेकर बृहस्पतिवार को घर आये थे। शुक्रवार की शाम मोटरसाइकिल से अपने साथी प्रवीण उपाध्याय उर्फ टाइगर 34 वर्ष के साथ शहाबगंज बाजार आये थे। आवश्यक खरीदारी करने के बाद घर वापस जाते समय गांव के ही रंजीत उर्फ लड्डू 30 वर्ष भी अपने बाइक से उन लोगों के साथ जा रहे थे। दोनों बाइक सवार जैसे ही तियरा गांव के पास पहुंचे थे। उसी समय सामने से आ रही बोलरों गाड़ी को बचाने के चक्कर में सड़क के किनारे खड़ी ट्रैक्टर ट्राली में भीड़ गये।जिससे घटना स्थल पर ही पवन और टाइगर की मौत हो गयी। वहीं रंजीत उर्फ लड्डू भी गंभीर रूप से घायल हो गया। वहीं घटना की सूचना पाकर थाना प्रभारी मनोज कुमार ने शव को कब्जे में ले लिया। वहीं घायल को इलाज के लिए जिला चिकित्सालय भेज दिया। घटनास्थल पर अपर पुलिस अधिक्षक सुखराम भारती, सीओ रामवीर सिंह भी मौके पर पहुंच कर मौका मुआयना किया। घटनास्थल पर ग्रामीणों की भारी भीड़ जुट गयी। घटना की सूचना मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया।
Young Writer, इलिया। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र इलिया पर चिकित्सकीय सेवाएं बेपटरी है, जिस कारण स्थानीय लोगों को दवा-ईलाज के लिए घंटों इंतजार करने के साथ ही तमाम तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। शिकायत के बाद अस्पताल की सुविधाएं दुरूस्त नहीं हो पा रही है। ानी अबादी वाले इलाकों में बने स्वास्थ्य केंद्रों पर शुक्रवार को भी लोगों को प्राथमिक उपचार नहीं मिल पा रहा है। विभाग की लापरवाही के चलते इलाके में झोलाछाप मरीजों की जेब पर डाका डाल रहे हैं। जबकि करोड़ों की लागत से तैयार केंद्रों में बुनियादी सुविधाएं और कर्मचारियों की लापरवाही के कारण मरीजों को निजी क्लीनिक व अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है। इलिया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में तैनात कर्मचारियों की लापरवाही देखने को मिली है, जहां अस्पताल के न तो खुलने का समय तय है और न ही चिकित्सकों के आने और जाने का। मरीज सुबह से ही चिकित्सालय परिसर में आकर डॉक्टर के आने का इंतजार करते हैं पर समय से कभी डॉक्टर अस्पताल नही आते हैं। बता दें कि सर्दी और गर्मी में पीएचसी खुलने का समय अलग-अलग है। गर्मी में पीएचसी खुलने का समय 8 बजे से 2 बजे तक है। जबकि अक्टबूर से मार्च के बीच इसका समय 10 से 4 कर दिया जाता है।