चकिया नगर पंचायत लगातार वसूल रहा गृहकर और जलकर
चकिया। नगर पंचायत चकिया में अतिक्रमण पर एसडीएम के कड़े रुख और ताबड़तोड़ कार्यवाही चर्चाओं का बाजार गर्म है। नगर के वार्ड नंबर 5, निर्भयदास स्थित सरैया ताल की सात बीघा जमीन पर अवैध अतिक्रमणकारियों के खिलाफ एसडीएम की कार्रवाई पर भी नगर के लोगों में दो राय है, कोई इस कार्रवाई को सहीं तो कोई गलत ठहरा है।
बहरहाल, नगर में एक और मुद्दों को लेकर लोगों के बीच खूब चर्चा हो रही है। सवाल यह है कि यदि भूमि सरकारी थी तो उसकी खतौनी किसने जारी की? क्या उन राजस्व कर्मियों के खिलाफ पर कार्यवाही होगी, जिन्होंने उक्त भूमि की खतौनी जारी की। साथ ही नगर पंचायत में तैनात उन तमाम जिम्मेदार लोगों के खिलाफ प्रशासन एक्शन लेगा, जिन्होंने सरकारी जमीन पर नक्शा स्वीकृत कर उसे जारी किया। लोग बताते हैं कि उक्त भूमि पर निवासरत लोगों से गृहकर और जलकर वसूला जा रहा है। इस पूरे प्रकरण पर गौर करेंगे तो राजस्व विभाग और नगर पंचायत को कटघड़े में खड़ा पाएंगे। क्योंकि अगर उक्त भूमि सरकारी थी तो राजस्व विभाग ने किस आधार पर जमीन की खतौनी जारी की और नगर पंचायत ने नक्शा कैसे पास किया? इन सभी मुद्दों पर को अलग भी कर दिया जाये फिर भी यह सवाल खड़ा होता है कि अगर भूमि सरकारी थी तो किसने और कैसे सरकारी भूमि 28 लोगों को विक्रय किया। यह सभी ऐसे प्रश्न है जो नगर का हर एक व्यक्ति जानना चाहता है। एसडीएम प्रेम प्रकाश मीणा ने अवैध अतिक्रमण को लेकर अपना रुख स्पष्ट कर दिया है और उनका कहना है कि हर हाल में उक्त भूमि को अवैध अतिक्रमण से मुक्त कराया जायेगा।
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1420 व 1425 फसली में बदली थी नवैयत
चकिया। वार्ड नम्बर 5 में 1347 फसली बंदोबस्त के जमीन 12 जलमग्न भूमि ताल के नाम से खाता संख्या 183 गाटा संख्या 547 रकबा 1.391 हेक्टेयर व खाता संख्या 190 आराजी नंबर 545, रकबा 0.986 हेक्टेयर बांध अंकित है तथा खतौनी फसली 1420 से 1425 के खाता संख्या 114 पर श्रेणी-1क संक्रमणीय भूमिधरी के रूप में खातेदार पार्वती, लाची, कलावती के नाम दर्ज था, इन्हीं लोगों द्वारा बतौर बैनामा 26 लोगों बेचा गया, जिसके बाबत न्यायालय एसडीएम चकिया के वाद संख्या टी201314182186 आदेश तिथि 6.4.2018 द्वारा उपरोक्त आराजियात संक्रमणीय भूमिधरी से खारिज करके ताल व बांध दर्ज किया गया जो वर्तमान खतौनी 1426-1431 फसली के खाता संख्या-127 आराजी नंबर-547 व 545/2 पर ताल व बांध के रूप मे दर्ज है। जिस पर अवैध तरीके से लगभग 28 लोग काबिज हैं एवं नगर पंचायत को इस जमीन को सार्वजनिक प्रयोजन में लाने में अवरोध उत्पन्न करते रहे हैं।
आखिर किसने जारी की सरकारी भूमि खतौनी?‚ क्या होगी जांच और कार्यवाही?
…वाह रेǃ प्रधान जी‚ कागजों पर खोदा तालाब, निकाले 6.67 लाख!
महारथपुर में मनरेगा के तहत सरकारी धन के दुरुपयोग का मामला
इलिया। केंद्र सरकार ने ग्रामीण स्तर पर जाब कार्डधारियों को सौ दिन का काम सुनिश्चित कराने के लिए मनरेगा योजना शुरु किया। मंशा यह थी कि जाब कार्डधारियों को रोजगार के साथ-साथ सड़क व नाला निर्माण सहित पौधरोपण, मिट्टी समतलीकरण, तालाब खुदाई आदि योजनाओं-परियोजनाओं को मूर्त रूप दिया जाए। ग्राम पंचायतों में मनरेगा के तहत कार्य करने की योजना तो बनती है, लेकिन उसमें ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों व सचिव के द्वारा जमकर लूट-खसोट की जा रही है। पहले इस तरह के आरोप अपवाद हुआ करते थे, लेकिन अब ये आम हो गए हैं। इसका जीता जागता नजीर शहाबगंज विकास खण्ड का तियरा ग्राम पंचायत है।
तियरा ग्राम पंचायत के महारथपुर में वित्तीय वर्ष 2021-22 में तालाब खुदाई व सुन्दरीकरण कार्य कागजों पर मुकम्मल कर दिया गया। जबकि जमीनी स्तर पर कोई काम नहीं हुआ है। ग्रामीणों के विरोध के बाद मामला पटल पर आया कि उक्त योजना में बिना काम के ही भुगतान का मामला सामने आया है। आनलाइन सिस्टम में सेंधमारी कर फर्जी मजदूरों के द्वारा फर्जी काम कराने की एंट्री कराकर लाखों रुपए का पेमेंट निकाला गया है। उक्त काम को जून-जुलाई माह में होना दिखाया गया है, जबकि अबकी बार मानसून अप्रैल माह में ही आ गया था। जो कि बोर्ड पर कार्य की प्रारंभिक तिथि 10 जून दिखाया गया है। वर्तमान समय में तालाब लबालब पानी से भरा हुआ था। ऐसी स्थिति में जून माह में तालाब की खुदाई हो पाना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन भी है। इसे अंजाम देने के लिए बाकायदा मनरेगा में काम करने वाले श्रमिकों को फर्जी जॉब कार्ड तैयार किए गए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम पंचायत में विकास कार्य जमीन की बजाय कागजी घोड़ा दौड़ाकर सरकारी धन की बंदरबांट किया गया है। कामकाज में पारदर्शिता के लिए बने सरकारी तंत्र में सेंधमारी कर सरकारी धन का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग किया गया है। तियरा के महारथपुर में तालाब खुदाई वो सुंदरी करण कर श्रमांश 06.67 लाख रुपये खारिज कर कागज में अस्तित्व में आया, लेकिन जमीन पर कोई काम नहीं हुआ। ग्रामीणों को इसकी जानकारी जब हुई जब उक्त काम का बोर्ड लगा दिया गया।
इलिया। महारथपुर में तालाब खुदाई में घोटाला किए करने के लिए फर्जी काम का मांग पत्र तैयार किया गया। ई-मस्टरोल तैयार करके फर्जी व कुछ असली दोनों ही मजदूरों के नाम उसमें शामिल कर दिए। ज्यादातर मस्ट्रोल में सेकेट्री व ग्राम प्रधान के अलावा किसी भी मजदूर के दस्तखत या अंगूठे के निशान नहीं हैं। जबकि नियम के हिसाब से बिना दस्तखत वाले मस्ट्रोल वैध नहीं होते। कई मजदूरों को एक ही वक्त दो-दो जगह काम करना बताया गया है, जो सम्भव नहीं है। वही पंचायत मित्रों द्वारा जॉब कार्ड पर काम तक नहीं चढ़ाया जाता।
बोर्ड पर अंकित सूचनाएं-

इलिया। मनरेगा के तहत शहाबगंज ब्लाक क्षेत्र के तियरा में वर्क आईडी 3171008024/डब्लूसी958486255823133770 के सापेक्ष महारथपुर में तालाब की खुदाई व सुंदरीकरण का कार्य कराया गया है, जिसकी श्रमांस लागत 06.67 लाख मनरेगा वेबसाइट पर अंकित की गई है। लेकिन उक्त कार्य के संबंध में मौके पर लगे सूचना पट्ट पर पूरी सूचना अंकित नहीं है।
प्रसपा प्रमुख शिवपाल यादव ने इस जवान के परिजनों को बंधाया ढांढस
चंदौली। प्रगतिशील समाजवादी पार्टी नेता कृष्णा यादव काजू मंगलवार को हसनपुर गांव पहुंचकर सैनिक हरिद्वार यादव के परिजनों से मिले। इस दौरान उन्होंने परिजनों को ढांढस बंधाया और दुख व्यक्त किया। साथ ही पार्टी प्रमुख शिवपाल यादव के संदेश को उन तक पहुंचाया। इसके बाद बजरिए मोबाइल परिजनों की शिवपाल यादव से बात कराई।
प्रगतिशील समाजवादी पार्टी प्रमुख शिवपाल यादव ने शोक संतत्प परिजनों को मदद का भरोसा दिया। साथ ही अपनी संवेदनाएं व्यक्त की। कहा कि प्रसपा परिवार के साथ है और भविष्य में भी परिवार की मदद के लिए तत्पर रहेगी। वहीं कृष्ण यादव काजू ने बताया कि पार्टी प्रमुख के निर्देश पर हम सभी हसनपुर प्रधान के घर पहुंचे और संवेदना व्यक्त की। कहा कि इस वक्त परिवार विषम परिस्थितियों से गुजर रहा है। ऐसे में चंदौली प्रगतिशील समाजवादी पार्टी परिवार के साथ खड़ी है। विदित हो कि बीते दिनों हरिद्वार यादव का निधन हो गया था। उनके मौत के कारण अभी तक स्पष्ट जानकारी नहीं हो पायी है। इस बीच उनका शव हसनपुर लाया गया और परिजनों व क्षेत्रीय लोगों की मौजूदगी में बलुआ गंगा घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया।
विद्यालय, खुलते ही बच्चों के चेहरे पर देखने को मिली खुशी
चंदौली कोरोना वायरस का प्रकोप काम होने के बाद शासन के आदेश पर जिले के सभी निजी और सरकारी विद्यालय में कक्षा 6 से कक्षा 8 तक की पढ़ाई मंगलवार से शुरू हो गई। वहीं विद्यालयों में सोशल डिस्टेंसिंग और कोविड गाइड लाइन पालन कराया गया और कक्षाएं शुरू की गई कई महीनों बाद विद्यालय खुलने पर बच्चे खुश नजर आए वही विद्यालय परिसर में भी चहल पहल देखने मिली बच्चों से विद्यालय परिसर गुलजार दिख। विद्यालय में बच्चे चेहरे पर मार्क्स और सोशल डिस्टेंसिंग के तहत पढ़ाई करते नजर आए वही टीचरों ने भी मार्क्स पहन रखा था हालांकि विद्यालयों में अभी भी एक दिन में 50 प्रतिशत बच्चों की उपस्थिति अनिवार्य की गई है। लेकिन बच्चों की उपस्थिति विद्यालय में कम रही ।वहीं कई सरकारी विद्यालय ऐसे रहे जहां बच्चे विद्यालय नहीं पहुचे सरकारी विद्यालय के शिक्षकों को गांव में जाकर बच्चों को उनके घर से बुलाने की नौबत रही। वहीं कक्षाओं के संचालन से पूर्व विद्यालय को सैनिटाइज कराया गया था,क्यों कि कोरोना वायरस से बच्चों को बचाया जा सके।
कैसे मिलेगा निजात, जाम के झाम से कराह रहा चंदौली
चन्दौली।सदर तहसील से लगाकर जिला अस्पताल तक मंगलवार को दिनभर भीषण जाम की स्थिति रही। इससे बड़ी संख्या में वाहन व एंबुलेंस फंसे रहे। जाम के कारण सड़क पर लोगों को पैदल चलना मुश्किल हो रहा था। लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा।भीषण जाम में परिवार व बच्चों के साथ यात्रा करने वालों को काफी फजीहत उठानी पड़ी।वही एंबुलेंस में फंसे मरीज के परिजन भी परेशान रहे।
इस दौरान लोगो ने कहा कि सदर तहसील से लेकर जिला अस्पताल तक सर्विस रोड पर आए दिन जाम लगी रहती है इससे राहगीरों और दुकानदारों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है लेकिन जिला प्रशासन इस पर संज्ञान नहीं लेता है जिले के आला अधिकारी और एंबुलेंस भी इसी जाम में घंटों फसे रहते हैं बावजूद इसके जिला प्रशासन की तरफ से कोई कार्यवाही नहीं किया जाता है बबुरी मोड़ से लगाकर सदर ब्लाक तक तहसील होने के कारण सर्विस रोड के किनारे दो पहिया व चार पहिया वाहनों की कतारें लग जाती हैं इससे जाम की समस्या और जटिल हो जाती है सदर तहसील में लगाए गए पुलिसकर्मी भी दिन भर दिन भर बैठकर जाम का नजारा देखते रहते हैं।
जनपद में किसी बड़े अधिकारी व नेता के आने पर व्यवस्था रहती है चुस्त-दुरुस्त
चंदौली जनपद में किसी अधिकारी और नेता का आगमन होता है तो जिला प्रशासन की तरफ से जाम के लिए व्यवस्थाएं चुस्त-दुरुस्त हो जाती हैं और पुलिसकर्मियों की ड्यूटी बढ़ा दी जाती है जिससे जाम की समस्या दिन भर उत्पन्न नहीं होती है और ना ही कोई जाम में फसा नजर आता है लोगों ने नाराजगी जताते हुए बताया कि यदि ऐसी व्यवस्था जिले में आए दिन लागू कर दिया जाए तो जाम की समस्या खत्म हो जाएगी इससे राहगीर और दुकानदारों को कठिनाई का सामना नहीं करना पड़ेगा।
पंचतत्व में विलीन हुए पूर्व मुख्यमंत्री
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और राजस्थान के पूर्व राज्यपाल कल्याण सिंह के अंतिम सफर पर अलीगढ़ में सभी की आंखें नम हो गईं। अंतिम यात्रा में लाखों की संख्या में बाबूजी के समर्थकों का जनसौलाब उमड़ पड़ा। कुछ ही देर में अतरौली के नरौरा घाट पर उनका अंतिम संस्कार कियागा।पूर्व सीएम कल्याण सिंह के अंतिम संस्कार में केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी, अजय भट, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मौजूद हैं।
पूर्व सीएम कल्याण सिंह का अंतिम संस्कार
बुलंदशहर जिले के नरौरा के बंसी घाट पर पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह का अंतिम संस्कार कर दिया गया। बेटे राजवीर सिंह ने मुखाग्नि दी है। पूर्व सीएम को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया ।
बुलंदशहर पहुंची शव यात्रा
यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के पार्थिव शरीर का बसीघाट (नरोरा) पर अंतिम संस्कार किए जाने के लिए पार्थिव शरीर को लेकर आ रही शव यात्रा को जनपद बुलंदशहर की सीमा जरगंवा (रामघाट) में प्रवेश कर चुकी है।
कल्याण सिंह के वीर रथ के सामने दंडवत हुए भाजपा नेता
अंतिम यात्रा के दौरान बरौली विधायक ठाकुर दलवीर सिंह के पौत्र युवा भाजपा नेता विजय कुमार सिंह ने साधु आश्रम पर कल्याण सिंह के वीर रथ के सामने सड़क पर दंडवत होकर प्रणाम किया।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम
जनसैलाब को देखते हुए अंतिम संस्कार के लिए घाट पर प्रशासन की ओर से कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है। जिन-जिन जगहों से होकर अंतिम यात्रा को गुजरना है, वहां भी कदम-कदम पर प्रशासन मुस्तैद है।
अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब
कल्याण सिंह के पार्थिव शरीर को अब अंतिम संस्कार के लिए नरौरा घाट ले जाया जा रहा है। इस दौरान उनकी अंतिम यात्रा में भारी संख्या में समर्थकों की भीड़ जुट गई है। सड़कों पर सभी ओर भीड़ दिख रही है।
कल्याण सिंह एक संस्था और आंदोलन थे: शिवराज सिंह
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अलीगढ़ में कहा कि कल्याण सिंह एक व्यक्ति नहीं, एक संस्था और आंदोलन थे। अयोध्या में भगवान राम की जन्मभूमि पर भव्य मंदिर का निर्माण उनका संकल्प था और ये संकल्प उनके बिना पूरा नहीं हो सकता था।
भाजपा को हमेशा खलेगी कल्याण सिंह की कमी: अमित शाह
अतरौली पहुंचे गृह मंत्री अमित शाह ने पत्रकारों से कहा कि जिस दिन राम मंदिर का शिलान्यास हुआ था, उसी दिन मेरी बाबूजी (कल्याण सिंह) से बात हुई थी। उन्होंने कहा था कि मेरे जीवन का लक्ष्य पूरा हो गया। बाबू जी का पूरा जीवन यूपी के विकास व गरीबों के लिए समर्पित रहा। देश को बेहतर गति एवं दिशा दी। प्रदेश का विकास किया। उन्होंने अपने कार्यों की गहरी छाप छोड़ी है। बाबूजी के जाने से भाजपा में जो रिक्तता आई है, उसकी लंबे समय तक भरपाई नहीं हो सकती। बाबूजी लंबे समय से सक्रिय राजनीति में नहीं थे। लेकिन उनको उनके उम्र के साथ-साथ युवाओं का भी साथ मिला। वह हमेशा भाजपा के प्रेरणास्त्रोत रहेंगे।वहीं पूर्व मुख्यमंत्री को श्रद्धांजलि देने पहुंचे गृह मंत्री अमित शाह को देख कल्याण सिंह के बेटे फफक कर रो पड़े। इस दौरान शाह ने उन्हें गले से लगाकर सांत्वना दी।
अफगानिस्तान,के खौफनाक माहौल से निकलकर सूरज पंहुचा घर पिता की नम हुई आँखे गांव में जश्न का माहौल
चंदौली। अफगानिस्तान के खौफनाक माहौल में फंसे चंदौली जिले के अमोघपुर गांव निवासी सूरज चौहान सकुशल घर वापस लौट आए ।भारत सरकार के प्रयास से वायुसेना के विमान पर काबुल से सूरज की भारत वापसी हुई ।घर पर सूरज को पाकर परिजनों सहित पूरे गांव में खुशी का माहौल है । सूरज के घर आने की खुशी में पिता के आंखों में आंसू छलक पड़े है ।वहीं सूरज के पिता ने मुंह मीठा कराकर खुशी का इजहार कराया। सूरज और उनके पिता ने भारत सरकार को धन्यवाद दिया। सूरज ने कहा की अब वह कभी अफगानिस्तान नहीं जाएगा ।
विदित हो की 15 अगस्त को अफगानिस्तान काबुल में तालिबान के कब्जे के बाद अफगानिस्तान गए भारतीय कामगार फस गए थे। उनके बीच में डर और दहशत का माहौल हो गया था । बड़ी संख्या में लोग वहां फंस गए थे ।जिले के पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर तहसील के अमोघपुर गांव निवासी सूरज चौहान भी जनवरी 2021 में काबुल के एक स्टील फैक्ट्री में वेल्डर का काम करने गए थे । तालिबान के हमले के बाद सूरज सहित उत्तर प्रदेश के करीब 18 लोग फैक्ट्री में फंसे हुए थे । अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद सूरज के परिजनों में हड़कंप मच गया था और पूरे परिवार में डर का माहौल था। हालांकि सूरत से व्हाट्सएप पर वीडियो कॉल के माध्यम से संपर्क हो पा रहा था। इस दौरान सूरज के परिजनों ने भारत सरकार से गुहार लगाई थी सूरज को सकुशल अफगानिस्तान से भारत लाया जाए। भारत सरकार लगातार प्रयासरत थी। इस दौरान वायुसेना के विमान से 22 अगस्त रक्षाबंधन के दिन सूरज सहित उसके साथ फंसे 14 लोगों को काबुल से गाजियाबाद के हिंडन एयरबेस लाया गया और फिर ट्रेन से सूरज अपने घर पहुंचा । सूरज को सकुशल देखकर घरवालों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा । लकवा ग्रस्त पिता बुद्धि राम चौहान की आंखें अपने बेटे को सुरक्षित देख भर आई । परिजन सहित पूरे मोहल्ले के लोग काफी खुश है और एक दूसरे को मिठाई खिलाकर खुशी का इजहार कर रहे है ।
मजबूत भरोसे के साथ जनक्रांति यात्रा मीरजापुर के लिए रवाना
जनक्रांति यात्रा को मीरजापुर जनपद के विदा करते चंदौली के सपाई।
चंदौली। जनक्रांति यात्रा जनपद भ्रमण के बाद अब अपने अगले पड़ाव की ओर अग्रसर हो गयी। इस दरम्यान सपा जिलाध्यक्ष सत्य नारायण राजभर ने यात्रा के प्रभारी व जनवादी पार्टी पमुख डा. संजय चैहान को एक मजबूत भरोसे के साथ मीरजापुर जनपद के लिए रवाया किया। कहा कि यात्रा के दौरान उन्होंने सपा के साथियों के साथ मिलकर जो अलख जगाया है उसे बुझने नहीं दिया जाएगा, बल्कि इस लौ को और तेज किया जाएगा, ताकि जनता भाजपा के खिलाफ अपना आक्रमक रूख कायम रखे।
विदित हो कि जनक्रांति यात्रा का आगाज 16 अगस्त को बागी बलिया से हुआ था, जो 21 अगस्त को नौगढ़ क्षेत्र के तिवारीपुर से जिले में दाखिल हुई। उक्त यात्रा नक्सल प्रभावित इलाकों में सपा की गूंज को चहुंओर प्रसारित करके चकिया व पचवनिया के रास्ते मुख्यालय पहुंची और सपा कार्यालय पर संक्षिप्त पड़ाव डालने के बाद सैयदराजा विधानसभा होते हुए सकलडीहा के रास्ते मुगलसराय नगर पहुंची और वहीं पर रात्रि विश्राम किया। इस दौरान जनवादी पार्टी प्रमुख डा. संजय चैहान ने इस यात्रा के उद्देश्य व समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव के विजन को कार्यकर्ताओं के बीच रखा। रात्रि विश्राम के बाद जन क्रांति यात्रा 22 अगस्त को भाजपा को सूबे की सत्ता से हटाने के लिए मुगलसराय स्थित शाहिद अज्ञात पेट्रोल पंप से होकर दुल्हीपुर, करवत के रास्ते पड़ाव होते हुए कटेसर, रामनगर, मिल्कीपुर पहुंची। वहां सपा जिलाध्यक्ष सत्य नारायण राजभर ने मीरजापुर के लिए यात्रा को विदाई दी। इस अवसर पर महासचिव नफीस अहमद, जिला उपाध्यक्ष परवेज अहमद जोखू, सुधाकर कुशवाहा, सुदामा यादव, जलालुद्दीन अंसारी, वीरेन्द्र यादव, मुश्ताक खान, तनवीर खान, ईशान मिल्की, आस मोहम्मद, टाइगर यादव, रामलखन यादव, रामवृक्ष यादव, सैफ सिद्दीकी, जियाउद्दीन अंसारी आदि शामिल थे।
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अयूब खां गुड्डू ने किया यात्रा का स्वागत
चंदौली। सयुस के पूर्व प्रदेश सचिव अयूब खां गुड्डू ने जनवादी पार्टी प्रमुख डा.संजय सिंह चैहान का जोरदार स्वागत किया। अयूब खां गुड्डू ने कहा क्रांति रथ यात्रा का मुख्य उद्देश्य गरीबों, पिछड़ों, किसानों व दलितों व महिलाओं के साथ ही वंचितों, अतिपिछड़ों, अल्पसंख्यक समाज को सपा के सत्ता में लौटकर आने के बाद उनका हक दिलाना है। भाजपा ने आमजनता को धोखा देकर सरकार तो बना लिया, लेकिन इनके विकास के नाम पर सिर्फ झूठ बोल रही हैं। इस झूठ व छलावे को समझने व समझाने की जरूरत है। इसके बाद सपा कार्यकर्ता विशाल सिंह के घर भोजपुर पहुंचकर डा.संजय सिंह चैहान ने उनके पिता की तैलचित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित किए।
पिछड़ों के कल्याण व प्रगति के लिए जाति आधारित जनगणना जरूरीः मनीष

अम्बेडकर नगर स्थित वाचनालय में जाति आधारित जनगणना को लेकर बैठक करते लोग।
चंदौली में जातिगत जनगणना के महत्व व आवश्यकता पर डाला प्रकाश
चंदौली। नगर के अम्बेडकर नगर वार्ड स्थित अम्बेडकर वाचनालय में जाति आधारित जनगणना को लेकर बैठक हुई। इस दौरान जातिगत जनगणना संयुक्त मोर्चा ने जाति आधारित जनगणना के महत्व एवं उसकी आवश्यकता पर प्रकाश डाला। कहा कि पिछड़ों को उनके जनगणना के सापेक्ष आरक्षण व अन्य सुविधाएं तभी प्रदत्त होंगी, जब सरकार जाति आधारित जनगणना कराए। यही संयुक्त मोर्चा की मांग है और इस मांग को मनवाने के लिए संयुक्त मोर्चा जनजागरूकता व जन समर्थन एकत्रित कर रहा है ताकि सरकार इस मांग पर गंभीरता से विचार करे और जातिगण जनगणना कराने को विवश हो। इस दरम्यान क्षेत्रीय बुद्धिजीवियों, सामाजिक न्याय के पक्षकार व प्रबुद्धजनों ने अपने तर्क व विचारों को मजबूती के साथ रखा।
इस दौरान मनीष शर्मा कहा कि जाति की जनगणना बहुत बड़ा सवाल है।आजादी के बाद तमाम विचार धारा की सरकार आयी लेकिन किसी ने इस पर गम्भीरता से नहीं सोचा।े कहा कि यह केवल ओबीसी जनगणना का सवाल नहीं है यह 70 प्रतिशत आबादी को न्याय से वंचित करने का मामला है। बिना जाति जनगणना के ओबीसी बिल बहुत खतरनाक है। प्रेमप्रकाश सिंह यादव ने कहा कि जाति आधारित जनगणना सभी तालों की चाभी है। जब जनगणना होगा, तभी पिछड़ी जातियों को उचित प्रतिनिधि व लाभ मिलने का रास्ता खुलेगा। ओबीसी में पुरुषों और महिलाओं की साक्षरता दर कितनी है? लिंगानुपात कितना है? शिक्षा कितने लोगों तक पहुंच पायी ? ओबीसी में कौन स्कूल और स्नातक की पढ़ाई पूरा कर पा रहा है यह जाति जनगणना से स्पष्ट हो जाएगा। अध्यक्षता करते हुए बदरू-दोजा अंसारी ने कहा कि जब तक ओबीसी की जनगणना नहीं होती है तब तक ओबीसी के हित के लिए किसी भी तरह की योजना सरकार नहीं बना पाएगी और न ही इन पिछड़ी जातियों का कभी भला हो पाएगा। बैठक में अनूप श्रमिक, जफीर प्रधान, रतीश कुमार, अवीनाश लखन, गुडलक भारती, सुनील भारती, अर्चना देवी, फूलचंद, सूबेदार, मदन राम भारती, अजय भारती, मिथिलेश कुमार, अभिषेक कुमार, जयप्रकाश, रतन लाल, जालंधर, बांके लाल, सुजीत कुमार, सोहन आदि उपस्थित रहे।
अफगानिस्तान से सकुशल लौटे सूरज चौहान
अमोघपुर में सूरज चौहान की सलामती जानते भाजपा नेता राणा प्रताप सिंह।
चंदौली। अफगानिस्तान में तख्ता पलट के बाद फंसे भारतीयों की सकुशल वतन वापसी शुरू हो गयी है। इसी क्रम में चन्दौली जनपद के अमोघपुर निवासी के सूरज चौहान सोमवार को घर वापस लौट आए। उन्हें अपने बीच पाकर पूरा परिवार खुशी से झूम उठा। यह दिन परिवार के लिए किसी होली–दीवाली से कम नहीं था। इस दौरान सूरज की हाल जानने के लिए ग्रामीणों का तांता लगा रह।
विदित हो कि इन दिनों अफगानिस्तान में तख्ता पलट से अराजकता व सत्ता का संकट पैदा हो गया है। ऐसे बिगड़े हालात के बीच फंसे सूरज चौहान की सकुशल घर वापसी हो गई है. सोमवार की सुबह लगभग तीन बजे सूरज घर पहुँचे. सूरज के घर मे पहुँचते ही जश्न का महौल है. घर कर के लोग एक-दूसरे मिठाई खिलाकर अपनी खुशी का इजहार किया। सूरज के घर आस-पास के लोग पहुँच कर सूरज के सकुशल वापसी की बधाई और शुभकामनाएं दीं। सूरज ने बताया कि काबुल में जहां वो फंसे हुए थे। वहां भारत के कुल 17 लोग फंसे थे‚ जिसमें कुल 14 लोग यूपी के रहने वाले थे। सूरज के साथ यूपी के सभी लोगों की घर वापसी हो गई है. वहीं अगर अफगानिस्तान की बात की जाए तो सूरज उस मंजर को याद नहीं करना चाहते. उनका कहना है कि जो मंजर अफगानिस्तान का था जो हमने भयावह स्थिति देखी है. आजतक नहीं देखी थी. दुआ करता हूँ कि ऐसी स्थिति में कभी कोई न फंसे। सूरज ने बताया कि भारतीय एम्बेसी के वापस जाने के बाद उनलोगों को और भी डर लगने लगा. उन्हें यह लगने लगा कि अब शायद वतन वापसी नहीं होगी।

वहीं दूसरी तरफ भारत सरकार पर भरोसा था. सुरज भरोसे को सरकार ने टूटने नहीं दिया और उनकी सकुशल घर वापसी कराई. सूरज और उनके परिजनों ने सरकार का आभार व्यक्त किया। अफगानिस्तान से वापसी के बाद सूरज ने बताया कि अब कभी भी वो अफगानिस्तान नहीं जाना चाहेंगे. जब उनसे अफगानिस्तान के कारण के बारे में बात की गई तो सूरज ने बताया की लॉक डाउन के कारण उनकी नौकरी चली गई. परिवार का भरण पोषण करने के लिए सूरज को नौकरी की जरूरत थी। जिसके लिए सूरज अफगानिस्तान गए थे। उन्होंने बताया कि अगर हमें यहीं रोजगार मिल जाता तो वो विदेश नहीं जाते।










