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Friday, October 23, 2026

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दलित महिला के राशन कार्ड में दर्ज हैं सामान्य जाति के सदस्य

चकिया तहसील क्षेत्र के रोहाखी गांव की कार्डधारक रमावती।

सात यूनिट के सापेक्ष महिला को मात्र तीन यूनिट का मिलता है लाभ

Young Writer, इलिया। चकिया तहसील क्षेत्र में खाद्य आपूर्ति विभाग भ्रष्टाचार व अनियमितताओं की जद में आ गया है। यहां कागजी आंकड़ों में हेर-फेर कर जहां गरीबों के लिए बनी योजनाओं का कोटेदार और कतिपय कर्मचारी-अधिकारी लाभ रहे हैं, वहीं गरीबों को सस्ते दर व निःशुल्क उपलब्ध सेवाओं से वंचित है। ताजा मामला शहाबगंज ब्लाक क्षेत्र के रोहाखी का है जहां अनुसूचित जाति की महिला कार्डधारक रमावती पत्नी छब्बू के पात्र गृहस्थी कार्ड संख्या-219640607847 में दो अज्ञात नाम दर्ज है। इन दो यूनिट का राशन कोटेदार उन्हें नहीं देता, जबकि उनके कार्ड में कुल सात नाम दर्ज हैं। इन्हें मात्र तीन यूनिट के हिसाब से राशन मिलता है। आरोप है कि शेष राशन कोटेदार रख लेता है।

रोहाखी निवासी नीलम का राशन कार्ड जिसमें तीन अतिरिक्त नाम दर्ज हैं।

दिलचस्प बात यह है कि रमावती अनुसूचित जाति की हैं और उनके राशनकार्ड में निखिल पांडेय व संदीप का नाम दर्ज है, जो सामान्य जाति के हैं। यह अपने आप में ही विधि-विरूद्ध व कागजों में हेर-फेर को प्रदर्शित करता है। हालांकि यह नाम कैसे दर्ज हुए और इन दो यूनिट का राशन क्या होता है इसके बारे में रमावती को आज तक पता नहीं है। ऐसे में संदेह की सुई गांव के कोटेदार की तरफ जाना लाजिमी है। उसी गांव की कार्डधारक नीलम भी कुछ ऐसी ही समस्याएं गिना रहीं है जिनके राशन कार्ड संख्या-219640526991 में तीन अज्ञात नाम दर्ज है जिनके बारे में वह नहीं जानती और ना ही उक्त तीनों यूनिट का लाभ उन्हें कोटेदार से मिलता है। फिलहाल वह मात्र एक यूनिट का लाभ प्राप्त कर रही हैं। फिलहाल यह बड़ा झोल है जिसकी यह मात्र एक छोटी नजीर है। ऐसी बहुत से गड़बड़ियां है जो कोटेदारों द्वारा आपूर्ति विभाग के कतिपय कर्मचारियों व अधिकारियों के साथ मिलीभगत करके अस्तित्व में लायी गयी है, जिससे गरीबों के लिए चल रही योजनाओं गरीबों के ही पहुंच से दूर है। फिलहाल इस बाबत चकिया तहसील की आपूर्ति निरीक्षक ममता सिंह ने बताया कि यदि पीड़िता कार्डधारक द्वारा इसकी शिकायत दर्ज करायी जाती है तो उसके राशन कार्ड से उसके परिवार के इतर दर्ज हुए नामों को खारिज करने की कार्यवाही की जाएगी। साथ ही शिकायत पर संबंधित कोटेदार के खिलाफ जांच कर उचित विभागीय कार्यवाही के साथ ही ग्रामीणों की मांग पर रिकवरी जैसी कार्यवाही की जाएगी। फिलहाल इस तरह की कोई भी शिकायत मुझे प्राप्त नहीं है। शिकायत के बाद ही विभाग कोई कदम उठाएगा। उधर‚ इस सम्बन्ध में जिला पूर्ति अधिकारी कार्यालय के लिपिक कुशल ने बताया कि अगर इस तरह के शिकायत की पुष्टि होती है तो संबंधित कोटेदार की प्रतिभू राशि जब्त करने के साथ ही विभागीय कार्यवाही को अमल में लाया जाएगा। साथ ही उक्त राशन कार्ड से नाम काटने की प्रक्रिया फौरी तौर पूर्ण की जाएगी।

रोहाखी निवासी रमावती के राशन कार्ड में दर्ज सामान्य जाति के लोगों का नाम।

गणतंत्र दिवस की परेड की तैयारियों का एसपी ने लिया जायजा

महेंद्र टेक्निकल इंटर कालेज मैदान पर गणतंत्र दिवस परेड की तैयारियों का जायजा लेते एसपी।

Young Writer, चंदौली। पुलिस अधीक्षक अंकुर अग्रवाल ने शुक्रवार को महेंद्र टेक्निकल कालेज के मैदान में चल रही गणतंत्र दिवस परेड की तैयारियों का जायजा लिया गया। साथ ही विधानसभा चुनाव एवं किसी अन्य परिस्थिति में कानून व्यवस्था बिगड़ने की स्थिति बनने पर नियंत्रण के लिए बलवा का ड्रिल रिहर्सल देखा। साथ ही विषम हालात में स्थिति पर नियंत्रण के साथ ही घायलों व पीड़ितों तक मदद पहुंचाने से संबंधित आवश्यक जानकारी भी दी।
इस दौरान उन्होंने किसी प्रकार के दंगा आदि की स्थिति में दंगाइयों पर नियंत्रण के लिए पानी का बौछार करना, घुड़सवार पुलिस की कार्यवाही, आंसू गैस के गोले छोड़ने, केन चार्ज, लाठी चार्ज, रबर बुलेट फायरिंग आदि का सिलसिलेवार अभ्यास पुलिस अफसरों व कर्मचारियों से करवाया और उनकी गतिविधियों को देखा। आगजनी और लोगों के घायल होने की स्थिति में मदद के लिए सांकेतिक रूप से फायरब्रिगेड और एम्बुलेंस भी अभ्यास में शामिल हुई। उक्त कार्यवाही के दौरान पुलिस अधीक्षक सहित अन्य सम्बन्धित द्वारा सभी को ब्रीफ करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। साथ ही यह भी बताया गया कि किस परिस्थिति में क्या निर्णय लेना है और क्या कार्रवाई करना चाहिए। साथ ही जरूरत पड़ने पर एक्शन के लिए अपनाई जाने वाली प्रक्रिया की भी जानकारी दी। जनपद के सभी थानों पर मौजूद शस्त्रों व दंगा नियंत्रण उपकरणों की साफ-सफाई कर उसके उचित रखरखाव एवं उनके उपयोग के सम्बन्ध में सभी पुलिस कर्मियों को पूर्ण जानकारी देने का निर्देश थाना प्रभारियों को दिया।

खाद्यान्न कालाबाजारी में कोटेदार के खिलाफ एफआईआर

कोटेदार के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराते क्षेत्रीय खाद अधिकारी विवेक श्रीवास्वत व पूर्ति निरीक्षक केके मिश्रा।

Young Writer, सकलडीहा। एसडीएम अजय मिश्रा की सूचना पर गुरुवार को पूर्ति विभाग की टीम टांडाकला में कोटेदार के यहां छापेमारी की। इस दौरान गरीबों का 101 बोरी गेहूं बेच दिये जाने व 73 बोरी चावल स्टॉक से ज्यादा पाया गया। पूर्ति विभाग की छापेमारी के दौरान कालाबाजारी की पुष्टि होने पर बलुआ थाने में डीएम और डीएसओ के निर्देश पर मुकदमा दर्ज कराया गया। विभागीय कार्रवाई से कोटेदारों में हड़कम्प मचा है।
कोरोना महामारी के कारण शासन की ओर से विभिन्न योजना के तहत पाथ गृहस्थी और अन्त्योदय कार्ड धारकों को गेहूं, चावल, तेल, चना सहित अन्य सामान की वितरण का निर्देश है। इसके बाद भी कोटेदार अंगूठा लगवाकर कार्डधारकों को खाद्यान वितरण में घालमेल करने से चुक नही रहे है। एसडीएम अजय मिश्रा की सूचना पर क्षेत्रीय खाद निरीक्षक विवेक श्रीवास्तव, पूर्ति निरीक्षक केके मिश्रा, प्रभारी पूर्ति निरीक्षक विक्रांत श्रीवास्तव सहित अन्य टीम ने टांडाकला गांव के कोटेदार के यहां छापेमारी किया। जहां 101 बोरी गेहूं बेच दिया गया था। इसके अलावा स्टॉक से ज्यादा 73 बोरी चावल बरामद किया गया। वितरण में भारी धांधली और काला बाजारी की शिकायत पुष्ट होने पर अधिकारियों ने उच्चाधिकारियों के निर्देश पर कोटेदार के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है। इस बाबत एसडीएम अजय मिश्रा ने बताया कि खाद्यान वितरण में किसी प्रकार की लापरवाही और कालाबाजारी क्षम्य नही किया जायेगा। काला बाजारी की शिकायत पर कोटेदार के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराया गया है।

भूमि विवाद में खूनी संघर्ष, आधा दर्जन घायल

Young Writer: घायल सुमन।

Young Writer, सकलडीहा। कोतवाली पुलिस की शिथिलता के कारण कस्बा में खूनी संघर्ष का दौर रूक नहीं रहा है। गुरूवार को दूसरे दिन कस्बा के अम्बेडकर बस्ती में जमीनी विवाद को लेकर दो पक्षों में जमकर लाठी डंडा चला। इस दौरान दोनों पक्ष से आधा दर्जन से अधिक लोग लहुलूहान हो गए। घटना के बाद गांव में तनाव व्याप्त है। इसके बाद भी कस्बा प्रभारी थाने पर बैठकर कोरमपूर्ति करने में जुटे रहे। जबकि एक दिन पूर्व अंग्रेजी शराब दुकान के सामने दो पक्ष में मछली की खरीदारी को लेकर चाकूबाजी हो गया था।

मारपीट में घायल बिरेन्द्र राम

कस्बा के अम्बेडकर बस्ती में विरेन्द्र राम और महेन्द्र राम के बीच लम्बे समय से भूमि विवाद चल रहा है। कई बार आपस में मारपीट भी होगयी है। पुलिस मौके पर पहुंचकर सिर्फ कोरमपूर्ति कर लौट आ रही है। जबकि मामला न्यायालय में विचाराधीन है। इसके बाद भी गुरूवार एक बार फिर से दोनों पक्षों के बीच उक्त भूमि पर आने जाने को लेकर विवाद हो गया। देखते देखते दोनों पक्षों के बीच खूनी संघर्ष के रूप में तब्दील होगया। एक पक्ष से 50 वर्षीय विरेन्द्र राम, 25 वर्षीय एम कुमार, 18 वर्षीय करन,20 वर्षीय गोलू व दूसरे पक्ष से 18 वर्षीय सुमन, 27 वर्षीय रवि और 45 वर्षीय महेन्द्र गंभीर रूप से घायल होगये। घटना की सूचना मिलने पर कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंचकर सभी घायलों को इलाज के लिये सीएचसी भर्ती कराया। लेकिन कस्बा प्रभारी मौके पर पहुंचने के बजाय थाने में बैठकर कोरमपूर्ति में जुटे रहे। इस बाबत कोतवाल विनोद मिश्रा ने बताया कि घटना को लेकर दोनों पक्ष की ओर से तहरीर लेकर कार्रवाई की जायेगी।

चंदौलीः अटल सेतू पर पैदल व बाइक का परिवहन शुरू

अटल सेतू जाने वाले रास्ते से अवरोधक हटाती यातायात पुलिस।

Young Writer, चंदौली। राजनीतिक अखाड़ा व सुर्खियों में बना नवउद्घाटित अटल बिहार वाजपेयी सेतू पर पैदल व दो पहिया वाहनों का परिवहन शुक्रवार से शुरू हो जाएगा। इसके लिए गुरुवार की शाम को यातायात प्रभारी श्यामजी यादव की मौजूदगी में यातायात पुलिस ने पुल के दोनों तरफ रखे गए बड़े अवरोधकों को हटाकर बाइकों के आने-जाने का रास्ता खोला। इसके बाद साथ ही अब बाइक, साइकिल व पैदल राहगीर अपने वाहनों से नवनिर्मित अटल सेतू से आवागमन की हसरत पूरी कर सकेंगे। इससे उनका आवागमन में समय बचेगा।
विदित हो कि बीते तीन जनवरी को आदर्श आचार संहिता के प्रभावी होने के ठीक पहले केंद्रीय मंत्री डा. महेंद्रनाथ पांडेय द्वारा उद्घाटित किया गया था, लेकिन कुछ काम अवशेष रहने व पुल के बीच वाले हिस्से में हुई ढलाई के ताजा होने की वजह से उक्त पुल को चंदौली की जनता के लिए नहीं खोला गया। ऐसे में लोगों की उत्सुकता बढ़ती गयी, जो धीरे-धीरे आक्रोश में बदलने लगी। जन भावनाओं को देखते हुए पुल पर आवागमन को बहाल किए जाने की मांग हुई तो इसे खोलने के लिए 21 तारीख की तिथि निर्धारित हुई। इसी कड़ी में देर शाम को ही दोनों तरफ रखे गए भारी बोल्डर को यातायाता पुलिस ने हटा दिया। यातायात प्रभारी श्यामजी यादव ने बताया कि पुल पर केवल बाइक, साइकिल व पैदल आवागमन की इजाजत होगी। बड़े वाहनों का आवागमन अभी प्रतिबंधित रहेगा।

सिविल बार: अध्यक्ष व महामंत्री पद पर त्रिकोणीय लड़ाई

वार्षिक चुनाव के मद्देनजर चंदौली कचहरी के मुख्य गेट पर लगी प्रचार सामग्री।

Young Writer, चंदौली। सिविल बार एसोसिएशन का वार्षिक चुनाव शुक्रवार को मतदान, मतगणना के साथ ही मुकम्मल हो जाएगा। इसे लेकर एक तरफ जहां बार के चुनाव अधिकारी मतदान संबंधित तैयारियों में जुटे हुए थे, वहीं दूसरी ओर चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों के समर्थक अपने-अपने पक्ष में माहौल बनाते दिखे। देर शाम प्रचार सामग्री से पूरा का पूरा कचहरी परिसर पट चुका था और शाम को भी अधिवक्ताओं की भीड़ से परिसर गुलजार नजर आया। अबकी बार सिविल बार के अध्यक्ष एवं महामंत्री दोनों पदों पर तीन-तीन उम्मीदवार हैं जिससे त्रिकोणीय संघर्ष शुक्रवार को नजर आएगा।
सिविर बार एसोसिएशन के वार्षिक चुनाव के बाबत वरिष्ठ समिति के चंद्रमौलि उपाध्याय ने बताया कि इस वर्ष वार्षिक चुनाव पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 21 जनवरी को सुबह 10 से शाम साढ़े चार बजे तक मतदान की प्रक्रिया मुकम्मल की जाएगी। इसके बाद शाम 05ः15 से मतगणना का कार्य प्रारंभ होगा, जो कार्य समाप्ति तक अनवरत चलेगा। चुनाव संबंधित सभीगतिविधियां पांच सदस्यीय वरिष्ठ समिति के सदस्यों की निगरानी में होगी। उन्होंने सभी मतदाता अधिवक्ताओं से आग्रह किया है कि मतदान के समय वह अपनी सीओपी कार्ड आवश्यक लेकर आएं, अन्यथा बिना सीओपी कार्ड के मतदान नहीं करने दिया जाएगा। इसके साथ ही वरिष्ठ समिति के सदस्यों ने अधिवक्ता साथियों ने कोविड-19 के बढ़ते संक्रमण के मद्देनजर बचाव सरकार की ओर से जारी कोरोना गाइडलाइन का पालन करें और वार्षिक चुनाव को सकुशल एवं शांतिपूर्ण माहौल में सम्पन्न कराने में अपना योगदान दें। उधर, दूसरी ओर चुनाव के मद्देनजर मतदाताओं को रिझाने के लिए चुनाव लड़ रहे प्रत्याशियों के समर्थक कचहरी परिसर में हैण्ड बिल व पम्फलेट आदि प्रचार सामग्री वितरित करने के साथ ही जगह-जगह बैनर-पोस्टर चस्पा करते दिखे। शाम होते-होते पूरा का पूरा कचहरी परिसर प्रचार सामग्री से पट चुका था।

आमजन तक खुशी पहुंचाना ही मेरी प्राथमिकताः अंजनी सिंह

सैयदराजा में आयोजित नेत्र परीक्षण शिविर में सपा नेता अंजनी सिंह।

Young Writer, सैयदराजा। समाजवादी चिंतक व जिला पंचायत सदस्य अंजनी सिंह के नेतृत्व में गुरुवार को सैयदराजा नगर के गांधीनगर वार्ड में निःशुल्क मोतियाबिंद ऑपरेशन नेत्र परीक्षण शिविर का आयोजन किया गया। इस दौरान रामपुर, चिरईगांव, चंदौली, सैयदराजा सहित कई गांव के सैकड़ों मरीज पहुंचकर लाभान्वित हुए। ग्रामीणों ने विशेषज्ञ चिकित्सकों से अपना नेत्र परीक्षण कराया एवं स्वास्थ्य लाभ लिया।
इस अवसर पर आयोजक अंजनी सिंह ने कहा कि ज्यादा से ज्यादा लोगों को खुशी पहुंचाना, लोगों के दुखों को दूर करने की पहल करने के साथ ही उनके मुश्किल वक्त में उनका सहयोगी बनन अच्छा लगता है। यही मेरे जीवन का असली मकसद है। मेरा प्रयास रहता है कि सबके सुख दुःख में काम आ सकूं। आनंद नेत्रालय के कुशल नेत्र परीक्षकों द्वारा शिविर में जांच किया गया, जिसमें हसीना बेगम, सोबरा बेगम, मुश्ताक इन्नर सहित कुल दो दर्जन मरीजों को ऑपरेशन के लिए हॉस्पिटल भेजा गया। कैंप में नासिर अहमद, मुन्ना कन्नौजिया, वसीर अहमद, शमशेर अंसारी, कमरू अंसारी, फैयाज अहमद, उबैद इदरीसी, सदानंद खरवार, सुंदर बिंद, बबलू यादव आदि उपस्थित रहे।

ड्रीम-11 व एमपीएल पर प्रतिबंध लगाए सरकारः प्रभात

कलेक्ट्रेट में प्रशासनिक अधिकारी को ज्ञापन सौंपते राष्ट्रीय विद्यार्थी मंच के जिलाध्यक्ष।

राष्ट्रीय विद्यार्थी मंच ने आनलाइन सट्टेबाजी को युवाओं के लिए बताया नुकसानदायक

Young Writer, चंदौली। राष्ट्रीय विद्यार्थी मंच धानापुर का एक प्रतिनिधि मंडल गुरुवार को कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रशासनिक अफसर को ज्ञापन सौंपा। राष्ट्रीय विद्यार्थी मंच के जिलाध्यक्ष प्रभात सिंह ने आनलाइन सट्टे को युवाओं के लिए बड़ा खतरा बताया और इस पर रोक लगाए जाने की आवश्यकता जताई। बताया कि कम पैसे लगा कर ज्यादा पैसे पाने के लालच में युवा पीढ़ी बहुत तेजी से इस दलदल में धंसते जा रहे हैं। आज के आधुनिकरण युग में जुए का नाम बदलकर ऑनलाइन गेम विज्ञापन और सट्टेबाजी कर दिया गया है। ड्रीम–11 व एमपीएल जैसी कम्पतिनयों का यह कृत्य पूरी तरह से गैरकानूनी है, जिस पर तत्काल प्रतिबंध लगना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जिस प्रकार परीक्षा में घुस का नाम सुविधासुल्क कर दिया गया है ठीक उसी प्रकार सट्टेबाजी (जुए) का नाम ड्रीम 11 जैसे सोशल नेटवर्किंग का प्रयोग किया जा रहा है। युवाओं को उन्हीं के पैसों से लालच देकर जुए का किंग बनाया जा रहा है। प्रवक्ता शैलेश चंद्र यादव ने कहा कि विगत दिनों में उड़ीसा व कर्नाटका जैसे राज्यों ने इन सब चीजों पर प्रतिबंध लगाया है और भारत सरकार भी देश के भविष्य के लिए ठोस कदम उठाते हुए ड्रीम-11, एमपीएल जैसे तमाम ऑनलाइन सट्टेबाजी के साधनों को बंद करे। कहा की हम सभी भारत के जाने माने क्रिकेटर कितनो युवाओं के प्रेरणा स्रोत भारत के पूर्व कप्तान विराट कोहली से निवेदन किया जाएगा, ताकी वह भी इन सब चीजों का प्रचार-प्रसार ना करें। इस मौके पर सुधाकर यादव, सूरज यादव, गोपाल प्रजापति उपस्थित रहे।

…उत्सव उत्सव शोर मचा है

Young Writer, चुनाव डेस्क। ललित निबंधकार डा. उमेश प्रसाद सिंह की कलम से

‘‘बड़ा शोर है।’’
‘‘कहाँ शोर है? किधर शोर है?
‘‘चारों तरफ भाई! हर कहीं शोर भरा है। बेमतलब के शोर में हर जगह डूबी हुई है। जिसके बोलने का कोई मतलब नहीं है, वह भी बोल रहा है। क्यों बोल रहा है? अब भला कौन पूछे? पूछने का फायदा भी क्या। भोजपुरी में एक कहावत है,- ‘आन्हर कुक्कुर बतासै भौंकै।’ वैसे कुत्ते तो सारे ही भौंकते हैं। पालतू भी और गली के आवारा भी। जो दूध-बिस्कुट का नाश्ता करते हैं, वे भी और जो हर दरवाजे से दुरदुराए जाते हैं, वे भी। वे भौंकते हैं, इसलिए कि भौंकना उनका स्वभाव है। प्रायः कुत्ते किसी आहट पर भौंकते हैं। मगर जो कुत्ते अन्धे हो जाते हैं, जिन्हें कुछ भी दिखाई नहीं देता, वे हवा के हिलने से ही भौंकते रहते हैं। कुत्ते का भौंकना बेमतलब के बोलने को व्यंजित करने का मुहावरा है। तो क्या, हमारे समय में जो कुछ बोला जा रहा है, बेमतलब का है? अब इतनी बड़ी बात भला मैं कैसे कह सकता हूँ। कहना चाहूँ भी तो किस मुँह से कह सकता हूँ।
हमारे समय में इतने बड़-बड़े लोग हैं। इतिहास की गरिमा का बोझ अपने कन्धे पर उठाए हुए हैं। फिर भी उनके पाँव तनिक भी पिराते नहीं। भारतीय संस्कृति को दुनिया में सर्वश्रेष्ठ साबित करने का भार अपने सिर पर लादे हुए हैं? फिर भी कभी थककर सुस्ताते नहीं। समाजवादी की डुगडुगी दिन-रात बजाते हैं?, बिना खाये-पिये, बिना सोये-बैठे। लोकतंत्र की हिफाजत में एक पाँव पर खड़े बिना आँख झपकाये। वे लोग बोलते रहते हैं, हमेशा बिना रुके, बिना थके। बोलना उनका शौक नहीं है। उनकी मजबूरी है। उनको बोलना पड़ता है। इतना-इतना बोलने पर भी बोलने का कोई मतलब नहीं निकलता। बड़े-बड़े लोग, बड़ी-बड़ी बातें बोलते रहते हैं। छोटे-छोटे काम बिना टस-मस हुए अपनी जगह अड़े रहते हैं। समस्याएं बहरी बनकर भैंस की तरह सुख से पगुराती रहती हैं। हमारे समय में भाषा की सारी व्यंजनाएं व्यर्थ होकर अपना सिर पीट रही हैं। ऐसा समय पहले शायद ही कभी रहा हो, जब भाषा जीवन से इस कदर बहिष्कत होकर केवल गाल बजाने को विवश रही हो। खैर, छोड़िए यह पँवारा तो बड़ा लम्बा है।
इधर जब से चुनाव की घोषणा हुई है, सरकार के सारे ढोल-नगाड़े बज उठे हैं। सब के सब उत्सव, उत्सव चिल्ला रहे हैं। लोकतन्त्र का उत्सव आ गया है। उत्सव लोक में तो कहीं नहीं है, तंत्र जरूर उत्सवमय हो उठा है। तन्त्र में हास-हुलास की चमक निश्चय ही दमक उठी है। तन्त्र उत्सव के आयोजन में व्यस्त में व्यस्त है। लोक अपनी परेशानियों में त्रस्त है। उसे रोजी-रोजगार की चिन्ता है। सिर के ऊपर छाजन की चिन्ता है। शिक्षा के निरन्तर व्यर्थ होते जाने स्वरूप की चिन्ता है। शादी-ब्याह के लिए अनियंत्रित होते जा रहे खर्च के जुगाड़ की चिन्ता है। बाजार के लगातार बढ़ते जा रहे वर्चस्व के उत्पीड़न की चिन्ता है। बराबर विखण्डित होती जा रही अपनी सामाजिक संरचना की चिन्ता है। झूठे आश्वासनों के मजबूत होते जा रहे छल के विस्तार की चिन्ता है। निरन्तर टूटकर बिखरते जा रहे जीवन विश्वासों के विलोप की चिन्ता है। लोक अनगिनत चिन्ताओं में असहाय घिरा है और तन्त्र चिल्ला रहा है, उत्सव उत्सव।
तन्त्र लोक पर उत्सव थोप रहा है। तन्त्र का उत्सव लोक के लिए प्रताड़ना के एक और आयोजन जैसा ही बनता जा रहा है। यह कुछ वैसा ही है जैसे बिना बच्चा पैदा हुए ही सोहर गाने के लिए कहना। लोकतंत्र में मतदान का यह उत्सव भारतीय समाज में जनखों की बस्ती में सोहर गाने जैसा ही मुहावरा बन कर रह गया है।
हमें कहने के लिए कहा जाता है कि दुनिया के बीच हमारा लोकतंत्र सबसे बड़ा है। हम दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र हैं। इसका हमें गर्व होना चाहिए। सच बात है। जरूर होना चाहिए। किताबों की भाषा में यह ठीक है। मगर सचाई ऐसी क्यों नहीं है जो कुछ किताबों में लिखा गया है, वह हमारे जीवन में क्यों नहीं है। कैसी दारुण विडम्बना का दौर है कि हमारे समय में किताबें झूठी होती जा रही है। संविधान में जो कुछ लिखा है, वैसा हमारे जीवन में क्यों नहीं है? ये सवाल पूछने की हमारी व्यवस्था में इताजत क्यों नहीं है। दुनिया का सबसे बड़ा लोकतन्त्र होना हमारी उपलब्धि नहीं है। यह केवल जनसंख्या की दृष्टि से प्रचारित एक आंकड़ा है। हमारे समय में संविधान जनता के लिए नहीं रह गया है। जनता संविधान के बारे में कुछ जानती भी नहीं है। जनता के लिए संविधान केवल मजाक करने का माध्यम भर रह गया है। जैसे हमारे न्यायालयों में जो आदमी कभी गीता को देखा भी नहीं है, उसके बारे में कुछ भी नहीं जानता है, उसे गीता पर हाथ रखकर शपथ खाने को कहा जाता है। गीता पर हाथ रखकर शपथ खा लेने से झूठ, सच नहीं हो जाता। संविधान का नाम लेकर कुछ भी करने से जनता का हित कभी नहीं सध सकता है। वास्तव में हमारे समय में संविधान केवल सरकार और राजनीतिक दलों के काम की चीज बनकर रह गया है। असल में हमारे समय में हमारा संविधान केवल कुछ जानकार और शक्तिशाली लोगों की मनमानी और मनचाही व्यवस्था का विषयम बनकर रह गया है। लोकतंत्र में मतदान का उत्सव संविधान की आड़ में सत्ता हथियाने का राजपुरुषों के लिए सुनहरा अवसर भर है।
सच कहा जाय तो लोकतंत्र का यह उत्सव राजनीतिक दलों का दंगल है। नाना तरह के दाव-पेंच के प्रदर्शन का अखाड़ा। जनता इसमें बस दर्शक है। जो कुश्ती जीतेगा, सत्ता उसके हाथ आयेगी। थोड़े समय के मनोरंजन के बाद जनता खाली हाथ, हाथ मलते रह जाएगी।
इस उत्सव में राजनीतिक दलों के दिग्गजों की सेना जिसमें सुर-असुर आपसी भेद को भुलाकर एक साथ जनता रुपी समुद्र को मतदान के मंदराचल से मथेंगे। जनता मथी जायेगी जैसे दही मथी जाती है। दही को मथने से मक्खन निकल आता है। जनता को मथने से जनप्रतिनिधि निकल आएंगे। जनप्रतिनिधि जनता से ही निकलेंगे। वे जनता के ही होंगे मगर जनता से अलग होंगे। हमारे जनप्रतिनिधि बाजार में मक्खन का मूल्य प्राप्त कर लेंगे। वे जहां भी बिकेंगे मक्खन के भाव बिकेंगे। जनता छाछा की तरह जहाँ है, रहेगी। रह जाएगी। आगे जब उत्सव का अवसर फिर मथे जाने के लिए। मक्खन निकल जाने के बाद छाछ की कोई कीमत रह जाती है क्या? उत्सव का शोर मक्शन बननने की उमंग का शोर है।
जनता में भयानक उदासी है। अवसाद है। पछतावा है। अपने ही विश्वासों के बार-बार टूटने की अथाह व्यथा है। वह अपने सपनों के टूटे हुए खण्डहर के मलबे पर बैठी कुछ बिसूर रही है। उसकी आँखों में आश्वासन का छल है। भहराकर गिरे हुए भरोसे का वितान है। अपनत्व के उछाह की दुरदराई हुई दुत्कार है। पाखण्ड के मेले में फटी हुई जेब में कुछ टटोलते सकताए हुए हाथ हैं। ऐसे में उत्सव कौन मनाएगा। कैसे मनाएगा। नहीं भाई, नहीं यह उत्सव नहीं है। यह सिर्फ उत्सव का विज्ञापन है।
यह उत्सव जनता का नहीं है। जनता के घर में नहीं है। यह लोकतंत्र के बाजार का उत्सव है। लोकतंत्र के व्यापारियों का उत्सव है। लोकतंत्र के अधिकारियों का उत्सव है। यह उत्सव अखबारों का उत्सव है। यह उत्सव टी.वी. के समाचार चौनलों का उत्सव है। यह उत्सव उनके लिए उत्सव है, जो कुछ भी बेचने और खरीदने की हैसियत रखते हैं। जनता के लिए तो उत्सव के दिन तभी आएंगे जब तंत्र लोक में समाहित हो सकेगा। जनता को इंतजार करना है। वह इंतजार करेगी। शोर को सहना है, सहेगी। शोर में बहना है, बहेगी। शोर की आँधी में जनता को तिनके की तरह उड़ना है, उड़ेगी। बाढ़ में बूड़ना है, बूड़ेगी। जनता इस महान उत्सव में जो महाभोज होगा उस बारात के लिए कनात-सी तन जाएगी।

चंदौलीः मछली बेचने को लेकर विवाद, मनबढ़ युवक ने दुकानदार को चाकू मारकर किया लहूलुहान


Young Writer, चंदौली। सकलडीहा कोतवाली क्षेत्र के इटावा गांव में बुधवार को मछली के विवाद को लेकर एक युवक ने दूसरे युवक पर चाकू से वार कर दिया‚ जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना के बाद मौके पर जुटे आस पास के लोगों ने तत्काल युवक को जिला अस्पताल पहुंचाया‚ जहां उसका इलाज चल रहा है। उक्त मामले में पीड़ित पक्ष की ओर से पुलिस से शिकायत की गयी है।
बताते हैं कि चंदौली जनपद के सकलडीहा कोतवाली क्षेत्र अंतर्गत इटावा गांव का रहने वाले रमेश सोनकर की मछली की दुकान है। दुकान पर रमेश सोनकर का 17 वर्षीय पुत्र सोनू सोनकर मछली बेच रहा था। इसी बीच पास के ही एक अन्य मछली के दुकान वालों ने आकर मछली बेचने के किसी बात को लेकर विवाद हो गया। सामने वाले युवकों ने सोनू सोनकर को चाकू वार कर दिया। इससे वो लहूलुहान हो कर सड़क पर गिर गया ।मौके पर जुटे आस पास के लोगो ने तत्काल इसकी सूचना परिजनों दी मौके पर पहुचे परिजनों ने तत्काल आनन फ़ानन में युवक को जिला अस्पताल में भर्ती कराया जहा उसका इलाज चल रहा है।

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