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Saturday, October 24, 2026

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दीनदयाल के भावबोध में भारतीय दर्शन की अनुगूंज

हृदय नारायण दीक्षित

Young Writer, साहित्य पटल। लेखकः उत्तर प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष‚ हृदयनारायण दीक्षित की कलम से

भारत की ऋषि परंपरा प्राचीन है। ऋषियों को मंत्र द्रष्टा कहा गया है। ऋषि अनेक हैं। सब संवादरत हैं लेकिन अनुभूति एक है। एकं सद् विप्रा बहुधा वदन्ति। प0 दीनदयाल उपाध्याय आधुनिक काल के तत्वद्रष्टा ऋषि हैं। उन्होंने एकात्म मानव दर्शन का विचार दिया। भारतीय राष्ट्रभाव के संवर्द्धन में पूरा जीवन लगाया। वे राष्ट्रवादी विचार के संवादी थे। दीनदयाल जी सभी संवादों में सिद्ध थे। सम्वाद की कई कोटियां होती हैं – जैसे बुद्धि और बुद्धि के मध्य सम्वाद। वाद और प्रतिवाद का संवाद। लेकिन असली संवाद हृदय से हृदय के मध्य होता है। हृदय बोलता है, हृदय सुनता है। तब मन बुद्धि और प्राण सहचित्त हो जाते हैं।
दीनदयाल जी की राष्ट्र अनुभूति गहन थी। उन्होंने इसी ध्येय के लिए संपूर्ण जीवन राष्ट्रार्पित किया था। उन्होंने हजारों प्रबोधन व बौद्धिक दिए। वे प्रेरित करते थे, प्रभाव डालते थे। सक्रिय करते थे। इस सबका मूल कारण था कथन और कर्म की एका। प्रामाणिक जीवन का आचार व्यवहार अपने आप में बहुत बड़ा संवाद होता है। इसका प्रभाव दीर्घकालिक भी होता है। पंडित जी ध्येयनिष्ठ सृजनशील थे। उनके प्रबोधन से सहस्त्रों कार्यकर्ता सक्रिय हुए और सहस्त्रों कार्यकर्ता राष्ट्रजीवन में यशस्वी भी हुए।
भारत में ऋग्वेद के रचनाकाल से ही प्रश्न व तर्क की महत्ता है। पं0 दीनदयाल उपाध्याय भारतीय दर्शन के उत्कृष्ट विद्वान थे। उन्होंने शंकराचार्य पर एक छोटी सी प्यारी किताब लिखी थी। किताब में उन्होंने शंकराचार्य के दर्षन-ज्ञान की विकास यात्रा को रोचक ढंग से प्रस्तुत किया है। शंकराचार्य ने अल्पजीवन में उन्होंने सम्पूर्ण भारत का भ्रमण किया। 11 उपनिषदों का भाष्य लिखा, गीता और ब्रह्मसूत्र पर विषाल भाष्य सहित ढेर सारा साहित्य लिखा। विष्व इतिहास में ऐसा उदाहरण दूसरा नहीं मिलता। उन्होंने भारत की सांस्कृतिक एकता का तानाबाना बनाया। दीनदयाल जी स्वाभाविक ही शंकराचार्य पर मोहित थे। भारत में अद्वैत दर्षन के साथ शंकराचार्य का नाम जुड़ा हुआ है। अद्वैत दर्शन वैज्ञानिक हैं। उपाध्याय जी ने अद्वैत दर्षन के लिए बादरायण का स्मरण किया है। लिखा है, “शंकर के नाम के साथ अद्वैत तथा वेदान्त का इतना अटूट सम्बन्ध जुड़ गया है कि लोग शंकर को ही वेदांत तत्वज्ञान का जन्मदाता समझने लग गये हैं। वस्तुस्थिति ऐसी नहीं है। सब तत्वज्ञानों के समान वेदांत तत्व आदि का स्रोत वेदमंत्र ही हैं। इसको संसार के समक्ष प्रकट करने वाले महर्षि बादरायण थे।” (शंकराचार्य, लोकहित प्रकाशन लखनऊ, पृष्ठ 21)। ब्रह्मसूत्र बादरायण की रचना है।
उपाध्याय जी ने बताया है “महर्षि बादरायण के काल में वैदिक धर्मावलम्बियों में तीन तत्वज्ञान मुख्यतया प्रचलित थे, कणाद का वैषेषिक दर्षन, गौतम का न्याय दर्षन तथा कपिल का सांख्य दर्षन। इसके अतिरिक्त चार्वाक का लोकायत दर्षन, जैनों का अर्हत् दर्षन तथा बौद्धों का तथागत दर्षन बहुत प्रसिद्ध है।” (वही, पृष्ठ 21) स्पष्ट है कि दीनदयाल जी भारतीय दर्षन के सूक्ष्म तत्वों से सुपरिचित थे।
उपाध्याय जी के दार्षनिक विवरण में भारतीय दर्षन की विकास यात्रा के बीजसूत्र हैं। लिखते हैं “वैदिक दर्षनों में कणाद भौतिकवाद का, कपिल द्वैतवाद का तथा गौतम नीरस तर्क का आश्रय लेकर संसार में द्वैधीभाव, अनास्था और अविष्वास का प्रचार कर रहे थे। कृष्ण तथा महर्षि वेदव्यास के बताये हुए मार्ग को लोग भूलते जाते थे। ऐसे समय में देष की समस्त बुराइयों को दूर कराने तथा वेदों का सारगर्भित अर्थ प्रकट करने के लिए तीन नये दर्षनों की रचना हुई, वे हैं पतंजलि का योग दर्षन, जैमिनि का मीमांसा दर्षन तथा बादरायण का वेदान्त दर्षन।” (वही पृष्ठ 22)
दर्षन और विज्ञान मनुष्य और समाज के समग्र विकास के लिए ही होते हैं। दीनदयाल जी ने इसीलिए पतंजलि के योग दर्षन, जैमिनी के मीमांसा व वादरायण के वेदान्त दर्षन को ‘सारगर्भित अर्थ प्रकट करने वाला बताया है। दीनदयाल जी कहते हैं कि लेकिन “वेदान्त इन सबमें प्रमुख है।” (वही, 22) वेदान्त ही प्रमुख क्यों है? लिखा है “युगो युगों से हिन्दुस्थान के महापुरूषों ने इसी में शान्ति पाई है।” (वही, पृष्ठ 22)
वेदांत के ‘अद्वैत’ में संपूर्ण सृष्टि एक इकाई है। दूसरा कुछ और नहीं-अद्वैत यानी दो नहीं। अद्वैत का यह दर्षन भारत की सनातन परम्परा है। वेदान्त को सूत्रों में बांधने का काम बादरायण ने किया था लेकिन दर्षन को भारत के जन जन तक पहुंचाने का काम शंकराचार्य ने किया। वेदान्त दर्षन भारतीय दर्षन का प्रतिनिधि है। यूरोप के दर्षनषास्त्री बहुत लम्बे समय तक ‘वेदान्त’ को ही भारतीय दर्षन मानते थे। पं0 दीनदयाल उपाध्याय ने बादरायण को स्वाभाविक ही प्रतिष्ठा दी है, उन्होंने लिखा, “श्रुति, स्मृति, उपनिषद् तथा श्रीमद्भगवत् गीता के अर्थ को सुस्पष्ट करने के लिए तथा ऊपर-ऊपर से देखने के कारण इन ग्रन्थों में आपस में विरोध देखने वालों के विरोधाभास को नष्ट करने के निमित्त उन्होंने स्वयं वेदान्त सूत्रों की रचना की।” (शंकराचार्य, पृष्ठ 23) असल में ऋग्वेद से लेकर उपनिषद् तक दर्शन की धारणा ‘एक सत्य’ की ही है। ब्रह्मसूत्रों में सभी ऐसे नामों को एक अर्थ दिया गया है। तब ब्रह्मसूत्र, उपनिषद् और गीता ज्ञान यात्रा की प्रस्थानत्रयी कहे गए थे। उपाध्याय जी ‘प्रस्थानत्रयी’ परम्परा से पूर्णतया अवगत थे। लिखते हैं “उपनिषद् वेदान्त सूत्र तथा गीता अपने धर्म की प्रस्थानत्रयी के नाम से विख्यात है।” (वही पृष्ठ 23)
पं0 दीनदयाल उपाध्याय भारत की सांस्कृतिक एकता में ही राष्ट्रभाव की स्थिरिता देखते थे। राजा और राज्य व्यवस्थांए आती जाती रहती हैं लेकिन सांस्कृतिक प्रवाह अविच्छन्न रहते हैं। शंकराचार्य ने भारत की सांस्कृतिक एकता को पुनर्नवा ऊर्जा दी थी। उन्होंने शंकराचार्य के वाराणसी प्रवास का वर्णन किया है, “भगवती भागीरथी के किनारे दषाष्वमेध घाट पर इन मिटते हुए साम्राज्यों तथा भारत की एकता के प्रष्न पर अवष्य ही विचार किया होगा। वहां यदि उन्होंने निर्णय किया हो तो क्या आष्चर्य कि बिना सांस्कृतिक एकता के, बिना विचारों के एक छत्र साम्राज्य के राजनैतिक एकता टिकाऊ नहीं होती। सांस्कृतिक एकता होते हुए राजनीतिक भिन्नताएं भी राष्ट्र का गला नहीं घोंट सकतीं।”
उपाध्याय जी ने लिखा, “कल कल करती हुई जाह्नवी ने उनका समर्थन किया। पुण्य सलिला की स्वच्छ जलराषि ने उनको स्नान के लिए आमंत्रित किया। शंकराचार्य स्नान करके निकले तो उनकी कान्ति द्विगुणित थी। संसार के समान गंगा का जल सामने से भागता जा रहा था, प्रतिक्षण परिवर्तनषील किन्तु अभिन्न कितना अनित्य किन्तु शांत। काषी की गंगा और हरिद्वार की गंगा एक है। दोनो को कौन अलग कहेगा? वे समान हैं, उनका स्रोत समान है, ध्येय समान है। यही है भेद में अभेद, भिन्नता में अभिन्नता, अनेकत्व में एकत्व, जिसको वे संसार को बताना चाहते थे।” (वही, पृष्ठ 41 व 42)

दीनदयाल जी के भावबोध में भारतीय दर्शन की अनुगूंज है। उन्होंने लिखा “गंगा में उठने वाली भंवर और तरंगें सत्य नहीं हैैं, वह तो वायु के परिणाम स्वरूप हैं। वे ऊपर की हैं, नित्य नहीं। शंकराचार्य की ‘अद्वैत’ प्रेरणा व वैदिक प्रतीति से उपाध्याय के चित्त में ‘एकात्म मानवदर्षन का उदय’ हुआ। उपाध्याय जी ‘एकात्म मानवदर्शन’ को लेकर सांस्कृतिक राष्ट्रभाव के लोकजागरण में सक्रिय थे। पं0 दीनदयाल उपाध्याय एकात्म अनुभूति वाले ऋषि द्रष्टा थे। दीनदयाल जी ने बहुत कुछ लिखा, बहुत कुछ कहा। भारत केवल भूगोल नहीं। यूरोपीय तर्ज का नेशन स्टेट नहीं। भारत एक विचार है। ज्ञान विज्ञान और दर्शन की पुण्य धरती। आकाश से धरती पर उतरी वैदिक ऋचा है भारत। एक मधुर गीत। शब्द ब्रह्म हैं। अमर हैं। उनके बोले लिखे शब्द अजर-अमर हैं। उनके शब्द हमारा आत्मरूपांतरण करते हैं। दीनदयाल जी के विचार अमर हैं। उन्हें पढ़ना दीनदयाल जी को सुनना है। अंग्रेजी के कवि शेली ने ‘एडोनिस’ में लिखा है “प्रकृति में पुनर्नवा शक्ति है। दीप्ति आभा बदल जाती है सुगंध में – ह्वेयर स्पलेंडर इज चेंज्ड इन टू फ्रेंगरेंस।” दीनदयाल जी की शब्द दीप्ति में शब्द गंध भी है। भारत इसी संदेश को ग्रहण करते हुए परम वैभवशाली हो सकता है।

विविधताओं से भरा भारतीय लोकतंत्र

हृदय नारायण दीक्षित

Young Writer, साहित्य पटल। लेखकः उत्तर प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष‚ हृदयनारायण दीक्षित की कलम से

विविधता प्रकृति का नियम है। वैसे समूचा ब्रह्मण्ड एक इकाई है। कार्ल सागन जैसे विद्वान ने इसे ‘कासमोस’ कहा है। भारतीय चिंतन दर्शन में सम्पूर्ण प्रकृति को ब्रह्म कहा गया है। यह एक ब्रह्मण्ड ही भिन्न-भिन्न रूपों में हम सबकों दिखाई पड़ता है। नदियाँ, पर्वत, वनस्पतियाँ, वन-उपवन और सभी जीव उसी एक के अलग-अलग रूप हैं। इन्द्र वैदिक काल के प्रतिष्ठित देवता हैं। ऋग्वेद में स्तुति है कि यह इन्द्र ही सभी रूपों में रूप प्रतिरूप प्रकट हो रहा है। विविधता रूपों में है और अनेकता में प्रकट होती है। प्रकृति विविध आयामों मे एक है। विविधता रूप के स्तर पर है और एकता आंतरित स्तर पर है। इसी तरह लोकतंत्र का विस्तार है। यहां सारी विविधताएँ एक साथ प्रेमपूर्ण ढंग से सक्रिय रहती हैं।
आधुनिक विश्व में लोकतंत्र सर्वोत्तम शासन प्रणाली के रूप में जाना जाता है। विश्व के अधिकांश देशों में लोकतंत्रात्मक शासन व्यवस्थाएं विद्यमान है। लोकतंत्र जनता का शासन है। लोकतंत्र एक सारवान जीवन पद्धति भी है। यह भारत के लोगों की जीवनशैली है। अपने भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (Narendra Modi) ने बहुधा ‘सबका साथ-सबका विकास’ का नारा दिया है। सबको साथ लेकर चलना भारत के राष्ट्र जीवन की प्रकृति है। विश्व लोकमंगल इसका ध्येय है भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। यह देश अनेक विविधताओं से भरा-पूरा है। इंद्रधनुष प्रकाश की किरणों के विभाजित होने से बनता है। इसमें सात रंग हैं। लेकिन प्रकाश एक है। प्रकृति में भी करोड़ों जीव हैं लेकिन सब मिलाकर एक प्रकृति है। इसमें विराट विविधता है। यह विविधिता ऊपरी है। लेकिन आंतरिक एकता गहरी है।

लोकतंत्र का व्यापक अर्थ सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक लोकतंत्र भी है। कोई देश वास्तविक रूप में तभी लोकतांत्रिक है जब उसके नागरिकों को समान सामाजिक अवसर और प्रतिष्ठा उपलब्ध होती है। सबको अवसर लोकतंत्र का प्राण है। समान आर्थिक अवसर और राजनीति में भी समान भागीदारी लोकतंत्र का मुख्य भाग है। लोकतंत्र में सभी सामाजिक विभिन्नताओं, असमानताओं के बीच सामंजस्य होता है।

भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। यह विविधताओं से परिपूर्ण देश है। यहाँ विभिन्न आर्थिक वर्ग हैं। इनमें समानता जरूरी है। सामाजिक समानता भी आवश्यक है। भारत विविधतापूर्ण राष्ट्र है। विविधता में एकता भारत की विशेषता है। यह भारतीय लोकतंत्र को मजबूत बनाती है। विविधता जीवंत लोकतंत्र का अच्छा उदाहरण है।
लोकतंत्र पूर्ण जीवन पद्धति है। इसमें विविधता में एकता रहती है। डा. अम्बेडकर ने भारत की विविधता के बारे में लिखा है, ‘‘यह सही है कि भारत में लोग आपस में लड़ते-झगड़ते हैं, लेकिन यहाँ अलगाव के साथ एक सांस्कृतिक एकता, सबको एक-सूत्र में बांधे रखती है।’’ यह वक्तव्य महत्व पूर्ण है। यहां के लोकतंत्र में सांस्कृतिक एकता है। भारत को ध्यान से देखते हैं तो चारों दिशाओं में अनेक भाषाएंँ बोली जाती हैं। जलवायु भी सतरंगी है। उत्तर-दक्षिण-पूर्व-पश्चिम अनेक तरह के पर्व-त्यौहार व मान्यताएं भी हैं। यहाँ अनेक विचार हैं और अनेक दर्शन। यहाँ कपिल ऋषि का संाख्य दर्शन है तो बादरायण का अद्वैत ब्रह्म भी है। कर्मयोग है। परमाणुवाद है। यहाँ ईश्वरवाद है तो अनीश्वरवाद भी है और बहुदेव उपासना भी। सहमति और असहमति से भरा-पूरा है भारत का लोकतंत्र। यहाँ सभी स्तर पर विविधता है। विविधता के सूत्र सहमति और असहमति के बावजूद सर्व समावेशी लोेकतंत्र का ताना-बाना बुनते हैं। भारत के राष्ट्र जीवन में लोकतंत्र की उपस्थिति बड़ी गहरी है। ऋग्वेद दुनिया का प्राचीनतम ज्ञान कोष है। इसमें भौतिक लोकतंत्र के साथ आध्यात्मिक लोकतंत्र भी है। सबकी अपनी आस्तिकता है।

ऋग्वेदक के रचना काल से ही यहाँ वैचारिक विविधता दिखाई पड़ती है। यहाँ अनेक पंथिक समुदाय हैं। तमाम भाषाएँ और तमाम रीति-रिवाज हैं। विविधता में एकता भारतीय लोकतंत्र का आधार है। ऋग्वेद में सभा और समितियों का स्पष्ट उल्लेख है। सभा और समितियाँ प्राचीन लोकतंत्रीय संस्थाएँ हैं। वैदिक साहित्य में मोटे तौर पर पाँच बड़े जन-समूह हैं। ऋग्वेद में सरस्वती को ‘‘पंच जाता वर्धयन्ती’’ कहा गया है। इन जन समूहों को पाँचजन्य भी कहा गया है। पाँच बड़े जनमूह मिलकर भारत का लोकतंत्री समाज गढ़ते हैं। सहमति और असहमति मिलती है। प्रश्न और तर्क चला करते हैं। विविध समूह अपनी पहचान रखते हैं और अपने-अपने समूहों की ओर से जन प्र्रतिनिधित्व करते हैं। एकता बनाए रखते हैं।

राज व्यवस्था के स्तर पर भी सब अपने-अपने पक्ष का विचार रखते हैं। वे विचार के आधार पर राजनैतिक समूह भी बनाते हैं। स्वाधीनता आन्दोलन में भी सभी जन व्रिटिश सत्ता से लड़े थे। व्रिटिश सत्ता की विदाई व स्वाधीनता प्राप्ति के समय अपना संविधान गढ़ने की चुनौती थी। संविधान सभा की रचना भी विविधता पूर्ण प्रतिनिधित्व के आाधर पर हुई थी। संविधान निर्माताओं के सामने इस विशाल विविधतापूर्ण देश के लिए आदर्श शासन प्रणाली गढ़ने की चुनौती थी। संविधान निर्माताओं ने संसदीय प्रणाली अपनाई। संसदीय प्रणाली में सभी वर्गों के प्रतिनिधित्व का आदर्श सिद्धांत अपनाया गया है। सरकार को जनप्रतिनिधियों के समक्ष जवाबदेह भी बनाया गया। संविधान के मसौदे पर सभा में लंबी बहस हुई थी। सरकार के स्थायित्व का भी प्रश्न उठा। डा. अम्बेडकर ने कहा कि ‘‘हमने ‘स्थायित्व-स्टेबिलिटी’ के सापेक्ष ‘जवाबदेही-रिस्पांसबिलिटी’ को महत्व दिया है। यहाँ आदर्श जन प्रतिनिधित्व को ध्यान में रखते हुए वंचित जन समूहों को राजनैतिक आरक्षण की व्यवस्था है। संसद और विधान मण्डलों के प्रतिनिधियों को चुनने के लिए सभी व्यस्क नागरिकों को मताधिकार दिया गया था। निर्वाचित जनप्रतिनिधियों से विधायिका बनी। विधायिका का बहुमत समूह सरकार को जवाबदेह बनाता है और सरकार भी चुनता है। जनप्रतिनिधि यहाँ जनता के हितों के लिए अपना पक्ष रखते हैं।
जनप्रतिनिधित्व महत्वपूर्ण धारणा है। वे अपने-अपने जन समूह और राजनैतिक विचार का पक्ष रखते हैं। विधायिका में बहुदलीय प्रतिनिधि होते हैं। वाद-विवाद, संवाद होते हैं। जनप्रतिनिधि संस्थाओं में विरोधी विचार भी प्रकट होते हैं। सत्ता और विपक्ष के बीच मतभेद भी होते हैं। ऐसे मतभेदों से लोकतंत्र मजबूत होते हैं। असली शक्ति जनता के पास होती है। सविधान निर्माताओं ने उद्देशिका में ‘‘हम भारत के लोग’’ की शक्ति का उल्लेख है। जनप्रतिनिधित्व एक कठोर साधना है। इसमें वाक संयम महत्वपूर्ण है। बीते बीस वर्ष से वाक् संयम टूटा है। शब्द अराजकता बढ़ी है। जनप्रतिनिधत्व का सौंदर्य घटा है। आम जन अपने प्रतिनिधि से तमाम अपेक्षाएँ रखते हैं। आम जन ही किसी दल समूह को सत्ता चलाने का जनादेश देते हैं और अल्पमत वाले समूह को सरकार की आलोचना करने का अधिकार देते हैं। यहाँ अल्पमत की उपेक्षा नहीं है। अल्पमत की भी प्रतिष्ठा है। अल्पमत के कर्तव्य भी सुपरिभाषित है। उसे सरकार को सुझाव देना चाहिए। सकारात्मक विरोध उसका कर्तव्य है। लेकिन कुछ समय से सदनों में व्यवधान है। संप्रति सदन में अनुचित आचरण और व्यवहार के लिए निलम्बित सदस्यों को लेकर गतिरोध है। यह शुभ नहीं है। हंगामा सार्थक संवाद का विकल्प नहीं हो सकता।

जनप्रतिनिधि को जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरने के लिए संयम और अनुशासन में रहना चाहिए। आमजन अपने जन प्रतिनिधि के आचार व्यवहार को ध्यान से देखते हैं। संसदीय लोकतंत्र में आचार और व्यवहार की महत्ता है। विचार अभिव्यक्ति का सौन्दर्य जरूरी है। इससे विविधता की अभिव्यक्ति के साथ राष्ट्रीय एकता भी विकसित होती रहती है। कॉमनवेल्थ पार्लियामेण्ट्री एसोसिएशन लोकतंत्रीय संस्थाओं को मजबूत करने की दिशा में लंबे अरसे से सक्रिय है। इस सक्रियता के कारण कॉमनवेल्थ देशों के साथ भारत के लोगों का संवाद चलता है। लोकतंत्र का कोई विकल्प नहीं है। लोकतंत्र में विविधता के साथ एकता का भी आदर्श गतिशील रहता है।

सबका विकास चाहिए तो सपा की सरकार बनाइएः मनोज सिंह डब्लू

सपा की सदस्यता ग्रहण करने वाले साथियों को गमछा भेंट कर सम्मानित करते Manoj Kumar Singh W


Young Writer, कमालपुर(Chandauli)। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव मनोज कुमार सिंह डब्लू ने कहा कि देश, प्रदेश व समाज को सशक्त, सुदृढ़ व शिक्षित वही लोग बना सकते हैं तो समाजवादी विचारधारा में आस्था रखते हैं। कहा कि यह देश डा. भीम राव अम्बेडकर व डा. राममनोहर लोहिया के आदर्शों पर चलने वाला देश है जिसे आज राजनीतिक स्वार्थ के लिए हाशिए पर लाने का काम किया है। कहा कि सरकार में बैठी भाजपा बड़ी चतुराई से अपनी नाकामियों पर झूठ का पर्दा डालकर उसे उपलब्धियों के रूप में गिनाने का काम कर रही है। उन्हें पूरे दम व दावे के साथ कहा कि सबका विकास चाहिए तो समाजवादी पार्टी की सरकार बनाना जरूरी है। क्योंकि सपा ही सर्वसमाज के हितों को ध्यान में रखकर काम किया है और आगे भी करेगी। मनोज सिंह डब्लू रविवार को चिलबीली में आयोजित सपा के जन चौपाल और कंबल वितरण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

चिलबीली में आयोजित सपा के जन चौपाल में बुजुर्ग से आशीष प्राप्त करते सपा के राष्ट्रीय सचिव Manoj Kumar Singh W

उन्होंने कहा कि भाजपा जब भी चुनाव आता है जन सेवा का दिखावा करती है जनता से झूठ बोलने का काम करती है। कहा कि भाजपा के चुनावी घोषणा पत्रों का पढ़कर कोई भी समझ सकता है तो भाजपा ऐसा कोई काम नहीं करती है जिसे उसने पूरा करने का जनता से वादा किया था। ऐसा वादाखिलाफी करने वाली सरकार को सत्ता से दूर करना बहुत जरूरी हो गया है। क्योंकि पिछले पांच साल के रिकार्ड बताते हैं कि यूपी में महंगाई के साथ-साथ रिकार्ड तोड़ बेरोजगारी व अपराध बढ़ा है। यह कोई हवाहवाई बातें नहीं, देश की सरकारी एजेंसियों के रिकार्ड है जिसे सत्ता में बैठी भाजपा झुठला नहीं सकती। आह्वान किया कि सबका विकास चाहिए‚ अबकी बार समाजवादी पार्टी की सरकार हम सभी को मिलकर बनानी होगी। क्योंकि भाजपा ने सबका विश्वास तोड़ा है।

चिलबीली में आयोजित सपा के जन चौपाल को संबोधित करते सपा के राष्ट्रीय सचिव Manoj Kumar Singh W

Manoj Kuma Sing W ने कहा कि चुनाव बाद सत्ता में लौटते ही पिछले पांच साल से रुके पड़े विकास कार्यों को गति दी जाएगी। जनता की मांग व उनकी आकांक्षाओं को ध्यान में रखकर विकास कार्य होगा। जो सड़कें गड्ढामुक्त नहीं हो सकी उसे बनाने का काम सपा करेगी। गरीबों को पेंशन व आवास जैसी जरूरत को भी पूरा किया जाएगा। कहा कि समाजवादी लोग भरोसा देकर धोखा देने का काम नहीं करते, जिनका झूठ और सच जनता जान चुकी है। इस अवसर पर समाजवादी विचारधारा से प्रभावित होकर 250 लोगों ने सपा की सदस्यता ग्रहण की। इस अवसर पर रामजन्म यादव, जिला पंचायत सदस्य अंजनी सिंह, दया यादव, सुरेश यादव, गणेश गुप्ता, आशा, सरोज, चन्द्रकला, रामश्रृंगार मौर्य, आलोक मौर्य, अरविंद मौर्य, दिवेश मौर्य, गुड्डू विश्वकर्मा, अवधेश राय, घनश्याम बिंद, बजरंगी प्रसाद आदि उपस्थित रहे। अध्यक्षता रामचंद्र व संचालन नन्दकुमार राय ने किया।

चंदौली अचानक दो बेटियो के सर से उठ गया बाप का साया, जाने क्या है पूरा मामला


इलिया। चकिया कोतवाली क्षेत्र के सैदूपुर कस्बा में शनिवार की देर शाम पत्नी से मोबाइल पर हुए विवाद के बाद विमल शर्मा उर्फ बब्लू 28 ने जहरीला पदार्थ खा लिया। हालत बिगड़ने पर परिजनों ने एंबुलेंस द्वारा इलाज हेतु चकिया स्थित जिला संयुक्त चिकित्सालय ले जाते वक्त रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। स्वास्थ्य केंद्र पहुंचने पर चिकित्सकों ने विमल को मृत घोषित कर दिया पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर रात में ही मर्चरी में रखवा दिया। जिसे सुबह पीएम के लिए जिला चिकित्सालय भेजा गया है।   विजय नरायन शर्मा के पांच पुत्रों में विमल चौथे नंबर का था। वह दो वर्ष वर्ष मुंबई में नौकरी करता था। कोरोना के चलते वह एक वर्ष से घर पर आकर ही मजदूरी करके जीवकोपार्जन प्रदान करता रहा है। विमल को पत्नी के अलावा दो पुत्रियां थी। इधर कुछ दिनों से से उसकी पत्नी से पट नहीं रही थी और परिवार में हर रोज कलह होता रहा है। पति पत्नी के बीच रोज-रोज हो रहे विवाद के बीच 2 माह पूर्व पत्नी कैमूर जिला स्थित अपने मायके चली गई। इसके बाद भी मोबाइल फोन से दोनों का विवाद होता रहा है। इसी बीच शनिवार की देर शाम मोबाइल फोन पर पत्नी से बातचीत के दौरान अनबन करने के बाद विमल पहले से घर में लाकर रखें किसी जहरीले पदार्थ को खा लिया। हालत बिगड़ने पर परिवार के लोगों ने एंबुलेंस बुलाकर इलाज हेतु उसे जिला चिकित्सालय ले जा रहे थे इसी बीच रास्ते में ही उसकी मौत हो गई।   प्रभारी निरीक्षक राजेश यादव ने बताया कि परिवारिक कलह में विमल ने किसी जहरीले पदार्थ का सेवन करके जान दिया है। शव को पीएम के लिए भेजा जा रहा है रिपोर्ट आने के बाद स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।

चंदौली कपड़ा व्यवसाई का दुकान में मिला शव, आस पास के लोगो ने शटर तोड़कर निकाला बाहर मचा हड़कम

शहाबगंज। चकिया कोतवाली क्षेत्र के बसाढ़ी गांव में दुकानदार जयप्रकाश सिंह 22 वर्ष की सोते वक्त मौत हो गई। परिजनों की मौजूदगी में आसपास के लोगों ने शटर का लॉक तोड़कर दुकान खोला तो जयप्रकाश दुकान में सोया हुआ मृत अवस्था में मिला। आनन फानन में इलाज हेतु उसे चकिया स्थित जिला संयुक्त चिकित्सालय पहुंचाया गया जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।   जयप्रकाश इलिया थाना क्षेत्र के सीहर गांव का रहने वाला है। घर से एक किलोमीटर की दूरी पर स्थित बसाढी गांव में उसके कपड़े की दुकान थी। रोज की भांति शनिवार की रात को वह घर से खाना खाकर दुकान में सोने के लिए आया। सुबह देर तक जब दुकान नहीं खुली तो आसपास के लोगों ने आवाज लगाई लेकिन अंदर से कोई सुगबुगाहट मालूम नहीं हुआ। काफी देर तक सटर पीटने के बाद भी कुछ मालूम नहीं हुआ तो घर पर फोन करके दुकान बंद रहने की बात बताई। परिवार के लोगों के आने के बाद ग्रामीणों की मदद से शटर के लाक को तोड़कर देखा गया तो जयप्रकाश मृत अवस्था में दुकान में सोया हुआ पड़ा मिला। आनन फानन में इलाज हेतु उसे चकिया स्थित जिला संयुक्त चिकित्सालय ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। युवक का शव घर आते ही परिजनों में कोहराम मच गया।   जमुना सिंह के दो पुत्रों में जयप्रकाश छोटा पुत्र था। पुलिस विभाग में सब इंस्पेक्टर से रिटायर होने के बाद जमुना सिंह पुत्र जयप्रकाश को पिछले वर्ष कपड़े की दुकान खोलवा रखे थे। वह छोटे पुत्र का बड़े धूमधाम से पिछले वर्ष विवाह भी किए थे। पुत्र के अचानक मौत के बाद परिवार में गमों का पहाड़ टूट पड़ा है।  प्रभारी निरीक्षक राजेश यादव ने बताया कि मृतक जयप्रकाश के शव को विधिक प्रक्रिया के बाद परिजनों को सौंप दिया गया है।

संकल्प से सशक्त कोई अंग नहींः मदन मोहन

दिव्यांग को कंबल प्रदान करती सरिका दुबे।

Young Writer, चंदौली। भारतीय जनता पार्टी के दिव्यांग प्रकोष्ठ द्वारा दिव्यांग सम्मेलन का आयोजन मैक्सवेल मेडिकल इंस्टिट्यूट में कराया गया। इसकी शुरुआत भारत रत्न स्वर्गीय अटल विहारी वाजपेयी एवं भारत रत्न मदन मोहन मालवीय के चित्र पर श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए हुआ।
मुख्य अतिथि मदन मोहन वर्मा जी दिव्यांगों को उनके ताकत का एहसास करवाते हुए कहा कि दिव्यांगता अभिशाप नहीं अवसर है। अवसर है खुद को प्रमाणित करने का अवसर है खुद को साबित करने का। सूरदास नयनों के अंधे पर उनके ज्ञान के दिव्यता की रौशनी हजारों साल बाद भी अलौकिक हो रही है।

कार्यक्रम का उद्घाटन करती सारिका दुबे।

सारिका दुबे ने कहा कि दिव्यांगों के सम्मान एवं उन्नति के लिए भाजपा सरकार सतत प्रयास कर रही है। प्रधानमंत्री ने विकलांग जो असक्षम को संकेत करता था उसकी जगह आप सबको दिव्यांग यानी दिव्य अंग वाला व्यक्ति का दर्जा दिया। सरकार द्वारा दिव्यांगों के विकास के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही जैसे दिव्यांग पेंशन,आवास, कुष्ट पेंशन, कृत्रिम अंग, शादी अनुदान, स्वरोजगार, मोटराइज ट्राइसाइकिल, ट्राइसाइकिल, सुगम भारत अभियान, यूडीआईडी आदि।
कार्यक्रम संयोजक कृष्णानंद पांडेय ने भाजपा सरकार के कार्य व उपलब्धियों को गिनाया। कहा कि जीत तब ज्यादा सुनिश्चित हो जाती है जब आप खुद से कहने लगते है कि मैं जीत के रहूंगा अर्थात संकल्प से बड़ा आपका कोई अंग नहीं कोई सहारा नही।मन के हारे हार है ,मन के जीते जीत। अंत मे कार्यक्रम संयोजक कृष्णानंद पांडेय की ओर से दिव्यांगों एवं असहायों को कंबल वितरण किया गया, जिससे दिव्यांगों में काफी हर्ष था। कार्यक्रम में सुनील केशरी, संतोष पाण्डेय, सालू, कृतिका, रिंकी, रागिनी, प्रियंका, राजकुमार कश्यप, वेदांत उपस्थित रहे।

इन सुधारों से देश में आएगा सुशासन, आप भी पढ़िए

सुशासन दिवस पर जानिए कैसे आएगा सुशासन

Young Writer, इतवार खास। Story Credit केहर सिंह

25 दिसंबर यानी पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेई की जन्म दिवस। जिसे सत्तासीन भारतीय जनता पार्टी सुशासन दिवस के रूप में मनाने का दावा करती है। ‘सुशासन’ शब्द अपने आप में भागीदारी, आम सहमति, उन्मुखता, जवाबदेही, पारदर्शिता, उत्तरदायित्व, प्रभावशीलता एवं कुशलता, न्याय संगतता और समावेशिता एवं कानून का शासन जैसी विशेषताओं को समाहित किए हुए हैं। ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ श्रृंखला के अंतर्गत प्रदेश भर में 20 से 26 दिसंबर तक सुशासन सप्ताह (गुड गवर्नेंस वीक) मनाया जा रहा है। इस दौरान ‘प्रशासन गांव की ओर’ अभियान के अंतर्गत शासन द्वारा लागू की गई विभिन्न योजनाओं को जनता के सामने रखा जा रहा है। ताकि लोगों का शासन के प्रति भरोसा बढ़े और वह ज्यादा से ज्यादा शासकीय सेवाओं का लाभ ले सके।
दूसरी ओर एनसीआरबी, एनएसओ, गृह मंत्रालय और नीति आयोग जैसी संस्थाओं के आंकड़े बता रहे हैं कि अपराध, गरीबी, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, मानवाधिकार उल्लंघन के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। राष्ट्रीय संस्थाओं के आंकड़े सुशासन के दावों पर कई सवाल खड़े कर रहे हैं। लगभग सभी सरकारें प्रयास करती हैं कि वह एक बेहतर शासन का मॉडल स्थापित कर सके। मैं विगत 6 वर्षों से राजस्व लेखपाल के रूप में बतौर एक शासकीय सेवक अपने दायित्वों का ईमानदारी एवं निष्ठा से निर्वहन करता रहा हूं। उम्दा कार्य-व्यवहार के लिए मुझे कई प्रशस्ति पत्र भी मिले हैं। इस दौरान मैंने महसूस किया है कि यदि शासन कुछ नीतिगत बदलाव करें तो एक ऐसा गुड गवर्नेंस मॉडल बिना किसी अतिरिक्त बजटीय या वित्तीय प्रावधान के स्थापित किया जा सकता है। जिसमें भ्रष्टाचार, घोटाला, लचर कानून व्यवस्था, अपराध और अवैध कारोबार, अफसरशाही, बेरोजगारी, महंगाई, गरीबी, खराब शिक्षा व स्वास्थ्य व्यवस्था का स्थाई समाधान होगा। नीतिगत बदलाव संबंधी सुझाव निम्नवत है-

1-अभी हाल ही में शुरू होने वाली जनगणना में सामाजिक व आर्थिक सर्वेक्षण को सम्मिलित करते हुए व्यक्ति वार संपत्तियों (भूमि, भवन, चल-अचल) व्यवसायों और बैंक अकाउंट को आधार से लिंक कर एक वेब पोर्टल विकसित कर व्यवस्थित डेटाबेस के आधार पर प्रत्येक व्यक्ति व परिवार का इनकम परसेंटाइल स्कोर/ रैंक और एसेट्स परसेंटाइल स्कोर व रैंक ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत, जिला और राज्य स्तर पर तैयार किया जाए। इसी स्कोर व रैंक के आधार पर नागरिकों को शासकीय योजनाओं का लाभ दिया जाए। उक्त स्कोर और रैंक आधारित प्रत्येक परिवार का एक डिजिटल पेज किया जाए। जिस पर उस परिवार के समस्त विवरण ऑटो अपडेट होते रहें और परिवार कौन-कौन सी योजनाओं की पात्रता रखता है, यह भी अपडेट होता रहे।

2- पूरी तरह से डिजिटलाइजेशन को स्वीकार्यता प्रदान करते हुए सभी अधिकारियों कर्मचारियों को कार्य के लिए वेब पोर्टल विकसित किया जाए और इन सभी को आईडी और पासवर्ड जारी कर प्रत्येक स्तर पर ई-प्रार्थना पत्र ई-एफआईआर और ई-फाइल को हर स्थिति में लागू किया जाए।

3- शासन के महत्वपूर्ण विभागों यथा पुलिस, राजस्व, पंचायती राज और ग्राम्य विकास के निचले स्तर के कार्मिकों के कार्यक्षेत्र का निर्धारण ग्राम पंचायत स्तर पर किया जाए। इनकी प्रतिदिन संबंधित ग्राम पंचायत में उपस्थिति और रात्रि निवास अनिवार्य किया जाए।

(नोट- वर्तमान में प्रदेश में ग्राम पंचायतों की संख्या लगभग 58000 है। लेखपालों की संख्या 32000, ग्राम पंचायत अधिकारियों की संख्या लगभग 13000 और ग्राम विकास अधिकारियों की संख्या लगभग 13000 है। इस प्रकार यदि तीनों पदों का एकीकरण कर एक नया पद बनाया जाए तो प्रत्येक ग्राम पंचायत स्तर पर एक शासकीय कर्मी की नियमित उपलब्धता बड़ी आसानी से हो सकती है।

4- प्रत्येक ग्राम पंचायत में दो कांस्टेबल (इसमें एक महिला और एक पुरुष) और दो होमगार्ड (जिसमें एक महिला और एक पुरुष) की नियुक्ति अनिवार्य रूप से की जाए। महत्वपूर्ण विभागों यथा राजस्व, पुलिस और विकास के निचले स्तर के कार्मिकों की प्रतिदिन उनके मुख्यालय पर उपस्थिति की बाध्यता को समाप्त करते हुए उनके कार्यक्षेत्र में उपस्थिति को अनिवार्य किया जाए। इनकी समीक्षा सिर्फ ऑनलाइन,वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग या फिर जूम एप आदि के माध्यम से ही हो। बहुत आवश्यक हो तो ही इनको मुख्यालय पर बुलाया जाए।

5- अपराध, अवैध कारोबार और शासकीय कार्मिकों के अनुचित कार्यों की गोपनीय सूचना हेतु एक वेब पोर्टल विकसित किया जाए। शासकीय कार्मिकों के कार्यों की प्रभावी निगरानी एवं उनके कार्यों के मूल्यांकन हेतु एक पारदर्शी ऑनलाइन तंत्र विकसित किया जाए। वेतन वृद्धि लक्ष्य आधारित हो और उत्कृष्ट कार्य करने वाले कार्मिकों को अतिरिक्त वेतन वृद्धि की जाए।

6- शासकीय कार्मिकों को कार्य संपादित करने हेतु बेहतर माहौल मिले इसके लिए उनकी स्थानांतरण नीति, पदोन्नति, पेंशन एवं चिकित्सा व्यय प्रतिपूर्ति की व्यवस्था को और व्यवहारिक व पारदर्शी बनाते हुए पूरी तरह से ऑनलाइन किया जाए।

7- समस्त शासकीय सेवाओं का लाभ लेने हेतु एक एकीकृत नागरिक सेवा पोर्टल विकसित किया जाए। ऑनलाइन शासकीय सेवाओं को प्राप्त करने में सीएमएस व सहज जैसी सेवा प्रदाता कंपनियों की मध्यस्थता को खत्म कर सीधे नागरिकों से ही ऑनलाइन आवेदन स्वीकार किए जाएं। चूंकि वर्तमान व्यवस्था में नागरिकों को हर शासकीय सेवा के लिए कुछ न कुछ शुल्क जरूर देना पड़ता है ,भले ही वह सेवा आधिकारिक रूप से निशुल्क क्यों न हो। उदाहरण के लिए वरासत की पूरी प्रक्रिया निशुल्क है फिर भी बिचौलिए 500 से 1000 तक संबंधित व्यक्ति से वसूलते हैं। इसलिए प्रत्येक ऑनलाइन सेवा के लिए कुछ न कुछ शुल्क आवश्यक निर्धारित किया जाए। इससे नागरिकों पर बिना कोई अतिरिक्त भार के शासन को बड़ी मात्रा में राजस्व प्राप्त हो सकता है। शुल्क से प्राप्त धनराशि का प्रयोग सार्वजनिक संपत्तियों के अनुरक्षण, संवर्धन व आय-अर्जन के नए स्रोत विकसित करने में किया जाए।

8- ऑनलाइन भू-नक्शा पर स्केलिंग की जाए। ऑनलाइन भू मैप को सेटेलाइट मैप से ओवरलैप पर एक कॉन्बिनेशन मैप तैयार किया जाए। ऑनलाइन भू नक्शा में गाटे की विभाजन की व्यवस्था दी जाए

9- ग्राम पंचायत स्तर पर फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन का गठन किया जाए। न्यूनतम समर्थन मूल्य पर फसल खरीद और डीएपी, यूरिया आदि खातों के वितरण का दायित्व इन्हीं फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशंस को दे दिया जाए। एफपीओ से प्रत्येक किसान को जोड़ा जाए और प्रत्येक किसान का केसीसी अनिवार्य रूप से बनाया जाए और केसीसी में खाद बीज के लिए धनराशि अनिवार्य रूप से आरक्षित रखी जाए एवं एफपीओ से खाद बीज प्राप्त होने के बाद वो धनराशि एफपीओ को स्थानांतरित की जाए या बैंक द्वारा केसीसी धारक किसानों को खाद बीज की धनराशि के बराबर राशि का मोबाइल रिचार्ज वाउचर की तर्ज पर बाउचर कूपन दिया जाए।

10- युवाओं को खेती की तरफ आकर्षित करने और किसानों की आय में निश्चितता एवं वृद्धि के लिए जीरो बजट खेती, मल्टी लेयर फार्मिंग, समेकित खेती, जैविक खेती व प्राकृतिक खेती के सफल मॉडल्स अभियान चलाकर ग्राम पंचायत वार निशुल्क स्थापित किया जाए । मनरेगा से भी मिट्टी के कार्य कराने के स्थान पर मजदूरों को आधुनिक खेती के उपरोक्त सफल मॉडल्स स्थापित कराकर स्वावलंबी बनाया जाए। एफपीओ के माध्यम से इन्हें बेहतर बाजार उपलब्ध कराया जाए।

11- स्वावलंबन से समृद्धि के सिद्धांत पर प्रत्येक ग्रामीण परिवार में मॉडल न्यूट्रीशनल किचन गार्डन स्थापित किया जाए। जिसमें परिवार के उपयोग लायक सब्जी, सलाद, फल, मसाले, दलहन, तिलहन, अनाज आदि अवश्य हो।

12- एलपीजी सिलेंडर के स्थान पर पोर्टेबल बायो गैस सिलेंडर को बढ़ावा दिया जाए।

13- किसानों को जैविक खाद जैविक कीटनाशक, और जैविक बीज तैयार कराना सिखाया जाए । साथ ही साथ प्रोत्साहन राशि भी दी जाए।

14- ऐसी आवश्यक वस्तुएं, जो लोगों को बाजार से खरीदनी पड़ती हैं, उसके लिए मिनी कॉपरेटिव बनाकर या स्वयं सहायता समूह के माध्यम से ग्राम पंचायत स्तर पर थोक में खरीद की जाए। आवश्यक वस्तुओं और दवाइयों के मूल्य निर्धारण की पारदर्शी व्यवस्था की जाए। इन पर टैक्स की दर भी व्यवहारिक हो, इसके लिए भी एक बोर्ड गठित किया जा सकता है।

15- इस तरह की व्यवस्था हो कि कोई भी पद अति विषम परिस्थितियों में भी 1 वर्ष से ज्यादा समय तक रिक्त न रहे । भर्ती बोर्डों द्वारा प्रत्येक पटल के रिक्त पदों को भरने के लिए प्रतिवर्ष परीक्षाएं कराई जाए। आने वाले 1 वर्ष में जो पद रिक्त होने हैं, उनके लिए भर्ती प्रक्रिया 1 वर्ष पहले ही शुरू कर दी जाए। इससे नियमित तौर पर युवाओं को रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे।

16- निजी क्षेत्र में भी भर्ती के लिए एक पारदर्शी भर्ती प्रणाली लागू की जाए। अकुशल कामगारों, अर्ध कुशल कामगारों और कुशल कामगारों के लिए एक आदर्श परीक्षा पैटर्न तैयार किया जाए।

17- यदि संभव हो तो आरक्षण आर्थिक आधार पर ही दिया जाए अन्यथा ओबीसी एससी और एसटी में भी सामाजिक रूप से पिछड़ेपन के आरक्षण के साथ-साथ आर्थिक रूप से पिछड़ेपन के लिए भी आरक्षण की व्यवस्था की जाए।

18- नकल कराना, पेपर आउट कराना आदि संज्ञय अपराध घोषित हो और ऐसे मामलों में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के अंतर्गत कठोरतम कार्रवाई की जाए।

19- कौशल विकास कार्यक्रम को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए ।प्रशिक्षणार्थियों का पारदर्शी ऑनलाइन मूल्यांकन किया जाए, प्रशिक्षणार्थी एवं प्रशिक्षक की अटेंडेंस की व्यवस्था अत्यंत पारदर्शी एवं ऑनलाइन हो। पारदर्शी मूल्यांकन के बाद ही प्रशिक्षणार्थियों को प्रमाण पत्र दिया जाए और संबंधित ट्रेड में स्वरोजगार की स्थापना के इच्छुक शिक्षार्थी को बिना किसी औपचारिकता के अनुदानित ऋण दिया जाए।

20- शिक्षकों को बेहतर प्रशिक्षण देकर नवाचार के माध्यम से पढ़ाई करवाई जाए ताकि बच्चों की रुचि इस ओर बढ़े। सभी स्कूलों में अध्यापक और विद्यार्थी की ऑनलाइन अटेंडेंस की व्यवस्था आने व जाने के समय अवश्य हो। प्रत्येक छात्र का प्रभावी एवं पारदर्शी ऑनलाइन मूल्यांकन किया जाए।

21- सभी शासकीय कर्मियों के बच्चों को शासकीय स्कूलों में पढ़ाना शुरू किया जाए। छात्र प्रतिदिन पढ़ने आए, यह जिम्मेदारी अभिभावक की हो और छात्र प्रतिदिन विद्यालय में कुछ ना कुछ सीखे, यह जिम्मेदारी शिक्षक की हो। विशेष परिस्थिति को छोड़कर यदि अभिभावक अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन नहीं करता है तो उसे सरकारी योजनाओं के लाभ एवं अनुदानों से वंचित रखा जाए और यदि शिक्षक अपने दायित्व का निर्वहन नहीं करता है तो वेतन वृद्धि रोक दी जाए।

22- प्रत्येक ग्राम पंचायत में उप स्वास्थ्य केंद्र की स्थापना का लक्ष्य शासन द्वारा निर्धारित है। इन स्वास्थ्य केंद्रों में जरूरी स्टाफ यथा बेसिक हेल्थ वर्कर, एएनएम आदि अनिवार्य रूप से उपस्थित रहे। केंद्र पर टेलीमेडिसिन के कांसेप्ट पर विशेषज्ञ डॉक्टर की सलाह भी फोन या वीडियो कॉल पर उपलब्ध हो। स्वास्थ्य कार्मिकों के कामों के मूल्यांकन की पारदर्शी ऑनलाइन व्यवस्था हो। अच्छा काम करने वाले कार्मिकों को आर्थिक प्रोत्साहन दिया जाए।

उपरोक्त 1 लगायत 22 बिंदुओं के माध्यम से नीतिगत बदलाव के संबंध में संक्षिप्त रूप में अपने विचार प्रस्तुत किए। उपरोक्त प्रत्येक सुझाव महत्वपूर्ण है और व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव की पर्याप्त क्षमता रखता है। इसलिए प्रत्येक सुझाव से होने वाले लाभों का विवरण प्रस्तुत करेंगे तो लेख बहुत लंबा हो जाएगा। संक्षेप में, मैं यही कहूंगा कि यदि उपरोक्त सुझाव को अमल में लाया गया तो भ्रष्टाचार, अपराध, अवैध कारोबार, अफसरशाही, बेरोजगारी, महंगाई, गरीबी, खराब शिक्षा व खराब स्वास्थ्य व्यवस्थाओं का स्थाई समाधान होगा। साथ ही साथ हर स्तर पर लीकेज खत्म होने से शासन को प्रति वर्ष कई हजार करोड़ के राज्य की बचत होगी और नागरिकों का आर्थिक शोषण बंद होने से नागरिकों की बचत में भी वृद्धि होगी। किसी भी सुझाव के संबंध में किसी भी प्रकार की शंका समाधान के लिए मेरे ईमेल keharsinghlekhpal@gmail.com पर मेल किया जा सकता है। विस्तृत जानकारी एवं प्रस्तुतीकरण के लिए भी मुझसे संपर्क किया जा सकता है।

लेखकः-
पेशे से सरकारी सेवक हैं, जो राजस्व विभाग में बतौर लेखपाल अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
केहर सिंह, लेखपाल
संयोजक
लेखपाल अगेंस्ट करप्शन

ट्रैक्टर ट्राली और कार में जबरजस्त टक्कर से कार में लगी आग,दो की जिंदा जल कर मौत

कप्तानगंज आज़मगढ़ नेशनल हाईवे 233 पर एक दर्दनाक हादसा हो गया जब गन्ना लदे ट्रैक्टर ट्राली में पीछे से कार घुसने से कार में आग लग गई और उसमें सवार लोग धू-धू कर जल गए। बताया जा रहा है कि उस पर एक महिला व एक पुरुष सवार थे। पुलिस दोनों की शिनाख्त की। कंधरापुर थानाध्यक्ष ने बताया कि कप्तानगंज थाने के खरकौली निवासिनी 25 वर्षीया दिव्या उपाध्याय पुत्री देवेंद्र उपाध्याय कार पर सवार थी जबकि उस कार का चालक कंधरापुर थाना क्षेत्र के कंधरापुर का निवासी 23 वर्षीय असलम सिद्दीकी था। कंधरापुर थाना से मंदुरी रोड पर दाना पानी ढाबा के सामने शुक्रवार की देर रात दोनों वाहन एक ही दिशा से जिला मुख्यालय की तरफ आ रहे थे। बताया जा रहा है कि बलेनो की स्पीड करीब 80 से 90 किलोमीटर प्रति घंटा रही होगी। ओवरटेक करने के बाद ही वह कार आगे जाकर ट्रैक्टर ट्राली में जा भिड़ी। धमाके के साथ उसमें आग लग गयी। ट्रैक्टर ट्राली में भी आग लग गई। उसके 10 मिनट बाद ही पुलिस आ गई। फिर फायर ब्रिगेड की गाड़ी भी आई। किसी प्रकार से आग पर काबू पाया गया। कार सवार लोगों को जिला अस्पताल भेजा गया। पुलिस कार को खींचकर थाने पर ले आई जबकि ट्रैक्टर-ट्राली को रोड के किनारे लगाया गया। परिजनों का रो रो कर बुरा हाल है।

पांच जनवरी को लोक समर्पित होगा रेलवे ओवरब्रिज

केंद्रीय मंत्री डा. महेंद्रनाथ पांडेय ने आरओबी के निर्माण कार्य को देखा

Young Writer, चंदौली। केंद्रीय भारी उद्योग मंत्री व सांसद डा. महेंद्रनाथ पांडेय शनिवार को जनपद दौरे पर रहे। इस दौरान उन्होंने चंदौली में नवनिर्मित बहुप्रतिष्ठित रेलवे ओवरब्रिज के निर्माण कार्य को देखा और अभियंताओं से बातचीत कर निर्माण कार्य का जायजा लिया। साथ ही पांच जनवरी को पुल को लोक समर्पित करने की तिथि भी निर्धारित की। इसके साथ ही उन्होंने भाजपा सरकार के कामकाज को एक-एक गिनाया। उक्त रेलवे ओवरब्रिज 33.47 करोड़ की लागत से बनकर तैयार हो रहा है, जिससे चंदौलीकी जनता को आवागमन में सहूलियत होगी।

इस दौरान उन्होंने कहा कि विधानसभा-2022 में भाजपा चुनाव जीत कर सत्ता में बनी रहेगी और ऐसे ही जनकल्याण के कामकाज को आगे बढ़ाने का काम किया। सरकार ने कानून व्यवस्था को सुदृढ़ करने के साथ ही विकास व कल्याण की दिशा में प्रभावी कार्य किए हैं। चंदौली में ओवरब्रिज निर्माण मेरी प्राथमिकता में रहा है मेरा प्रयास था कि चंदौली की जनता सुरक्षित ढंग से आवागमन करे। इसे देखते हुए चंदौली में 33.47 करोड़ की लागत से पुल बनकर लगभग तैयार है जिसका उद्घाटन नए वर्ष में पांच तारीख को निर्धारित की गयी है, जिस पर लोगों का आवागमन 15 जनवरी को बहाल कर दिया जाएगा। बड़े व वाणिज्यिक वाहनों को पुल से गुजरने की अनुमति 25 जनवरी के बाद मिलेगी। कहा कि उन्होंने ओवैसी के बयान को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया। कहा कि कुछ नेता प्रदेश का माहौल खराब करना चाहते हैं। ऐसे लोगों के मंसूबों को यूपी पुलिस व प्रशासन नाकाम करने का काम करेगी। अराजकता व अशांति फैलाने वालों के खिलाफ पूरी सख्ती बरती जाएगी, ताकि सांप्रदायिक सौहार्द कायम रहे।

उन्होंने अपने विकास व कामकाज को आधार बताते हुए विधानसभा चुनाव-2022 के बाद भी सत्ता में बने रहने का मजबूत दावा किया। कहा कि जनसेवा का कार्य योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में आगे भी अनवरत चलता रहेगा। उतराखंड में आयोजित धर्म संसद में मुस्लिमों के कल्त जैसे बयान पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ऐसे बयान और उसे देने वाले व्यक्ति व संगठन का किसी भी हाल में समर्थन नहीं करता हूं। सरकार ऐसे समाज विरोधी लोगों के खिलाफ पूरी तरह से सख्ती बरतेगी। इस अवसर पर जिलाध्यक्ष अभिमन्यु सिंह, प्रमोद चौबे, हरिवंश उपाध्याय, शिवराज सिंह‚ सुजीत जायसवाल, छत्रबली सिंह, राणा प्रताप सिंह‚ शशिशंकर सिंह‚ डा.केएन पांडेय दिलीप सोनकर, साधना सिंह, किरन शर्मा, सुषमा गिरी‚ जितेंद्र पांडेय आदि उपस्थित रहे।

खेल में मिली हार भी दे जाती है बेहतर करने की सीखः मनोज डब्लू

Young Writer, धानापुर। कस्बा स्थित धानापुर अमर वीर इंटर कालेज के मैदान पर आयोजित 51वां अंतरप्रांतीय जमील खान जिद्दी मेमोरियल फुटबाल प्रतियोगिता शनिवार को सम्पन्न हुआ। समापन समारोह में सपा के राष्ट्रीय सचिव मनोज सिंह डब्लू बतौर मुख्य अतिथि शरीक हुए। इस दौरान उन्होंने अपने राजनीतिक गुरु जमील खान जिद्दी को श्रद्धांजलि दी और उन्हें याद किया। इसके बाद फाइनल मुकाबल जीतने वाले गाजीपुर के रेवतीपुर के टीम को शील्ड प्रदान कर उनका हौसला बढ़ाया।
इस दौरान उन्होंने फुटबाल प्रतियोगिता का फाइनल मुकाबल खेल रहे दोनों टीम के खिलाड़ियों के खेल को उम्दा बताया। कहा कि आज जिस तरह से खिलाड़ियों ने खेल भावना के साथ उम्दा प्रदर्शन किया है वह काबिले तारीफ है। ग्रामीण क्षेत्र में एक से बढ़कर एक खेल प्रतिभाएं है, जो ऐसे अवसरों पर अपने हुनर से अपना परिचय समाज को कराती है। कहा कि खेलकूद जीवन का एक अभिन्न अंग है जो जीवन में उल्लास, उमंग व ऊर्जा का संचार करने काम करता है। इसलिए खेलों से जुड़कर अपने तन-मन को चुस्त-दुरूस्त बनाए रखें। खेल में मिली हार व जीत दोनों की सीख दे जाती है। जीत हमें और बेहतर करने का जज्बा देती है। वहीं हार गलतियों को सुधारने व उसका मूल्यांकन कर आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है, लिहाजा हार-जीत से बेपरवाह होकर उम्दा खेल के प्रदर्शन पर खिलाड़ी अपना ध्यान केंद्रित करें और आपसी भाईचारा-सद्भाव को सशक्त बनाएं। इसके पूर्व फाइनल मुकाबला गाजीपुर जनपद के रेवतीपुर व पखनपुरा की टीम के बीच खेला गया, जिसमें शानदान खेल का प्रदर्शन करते हुए रेवतीपुर ने पखनपुरा को 2-0 से शिकस्त देकर मैच व प्रतियोगिता दोनों अपने नाम कर लिया। इस अवसर पर राजेश यादव, महंगू राम, बाबू, गनी खान, गणेश गुप्ता, इकराम खान, हाजी मोहन, इसरार खान, सेराज खान, रामधनी यादव, छोटेलाल यादव, कमला यादव, सीताराम प्रजापति आदि उपस्थित रहे।

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