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Tuesday, July 14, 2026

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किंवदन्तियों में कीनाराम: मैं उन्हें कबसे जानता हूँ

Young Writer, साहित्य पटल। ललित निबंधकार डा. उमेश प्रसाद सिंह की कलम से

‘‘मैं उन्हें कबसे जानता हूँ?’’
हाँ, यही सवाल सबसे पहले मेरे दिमाग में उगा था। कोई भी सवाल जब दिमाग में उगता है तो परेशानी में डालता है। परेशानी पीछे पड़ती है तो बहुत दूर तक खींच ले जाती है। उथल-पुथल मचा डालती है। मन को मथने लगती है। किसिम-किसिम की स्मृतियों के भंवरजाल में बहुत समय तक डूबता-उतराता रहा। फिर एक सवाल और आया जिसने मेरी चेतना को झकझोर कर डंवाडोल कर डाला।
‘‘क्या मैं उन्हें जानता हूँ?’’
इस सवाल के सामने पड़ते ही मैं भीतर तक बिल्कुल सिहर उठा। नहीं, नहीं बिल्कुल नहीं। यह तो बड़ा विकट सवाल है।
इस सवाल के सामने तो मेरी भगई ही सरक गई। यह तो एकदम नंगा कर देने वाला सवाल है।
नंगा होने को कौन राजी होता है। कौन राजी हो सकता है। कोई नहीं…..। कोई नहीं….।
सन्त को जानने का क्या मतलब है?
सन्त को जानना सहज है? सरल है? संभव है?
कौन कह सकता है!
सन्त को बिना सन्त हुए जाना जा सकता है क्या?
किसी सन्त को जानना उसके जीवन से सम्बन्धित कुछ विवरणों और कुछ सूचनाओं से अवगत होना है क्या?
परिचय और पहचान तो अहं से सम्बन्धित है। अस्तित्व की तो कोई पहचान नहीं है। कोई परिचय नहीं है।
सन्त अहं में अवस्थित नहीं है। वह तो अहं का अतिक्रमण करके अस्तित्व में विलीन सत्ता का वाचक है।
वह अस्तित्व की उस सत्ता का वाचक है, जो हर कहीं है। हर किसी में है। सब कुछ वही है।
यानी ईश्वर। सन्त जगत में ईश्वर का प्रतिनिधि है। उसकी प्राकृत विभूति का प्रसारक।
चन्दन तरू हरि सन्त समीारा। (तुलसी दास)
जीवन में जो सुगन्धि का स्रोत है। जो आनन्द का अधिष्ठान है, सन्त उसका संवाहक है।

कस्तूरी कुण्डलि बसै मृग ढूढै वन माहि।
ऐसे घट-घट राम है दुनिया देखे नाहि।। (कबीर)

जो हर कहीं है मगर दुनिया नहीं देखती। दुनिया जिसे नहीं देख पाती सन्त उसे देखता है। सन्त उसे ही देखता है। दुनिया को नहीं सन्त की सत्ता बड़ी व्यापक सत्ता है। वह दुनिया जिसे नहीं देखती उसे भी देखता है। दुनिया जिसे देखती है उसे भी देखता है। वह दुनिया को भी देखता है। समूचे संसार के मूल में जो है वह हरि है। जो मूल में है वही मूल्यवान है। वही हीरा है हीरा को छोड़कर अन्य की आस करना दुख की तरफ जाना है। दुख पाना है।

हरि-सा हीरा छाँड़ि के करै आन की आस
ते नर नरके जाहिंगे सत भाखै रैदास (रैदास)

सारा संसार प्रभु में समाहित है। प्रभु को पकड़ने से सब पकड़ में आ जाता है। सब कुछ जिसमें समाहित है और जो सबमें व्याप्त है उसे जानकर जीना ही सन्त का जीना है। सन्त का जीवन है।

सो सब प्रभु महँ रमि रहयो जड़ चेतन निज ठौर।
ताते राम सँभरि गहु सबन नाम को मौर।। (कीनाराम विवेक सार पृ032)

संसार के सारे नाम जिस नाम में समाहित हैं वह नाम ही राम नाम है। सारे रूप जिस रूप में समाहित हैं वह रूप ही भगवान का रूप है। भगवान ही सारे रूपों के आश्रय है। स्वामी हैं। उस रूप का सेबक होना ही सन्त होना होता है।

सो अनन्य जाके असि मति न टरइ हनुमन्त।
मैं सेवक सचराचर रूप स्वामि भगवन्त।।

अहं अनित्य है। अस्तित्व नित्य है। अहं विनाशशील है। अस्तित्व अविनाशी है।
अस्तित्व का बोध ही सन्त की अस्मिता है। नित्य की उपासना ही सन्त की संज्ञा है। अविनाशी में समाहन ही सन्त की पहचान है।
कैसी विलक्षण है सन्त की अस्मिता। कितनी सूक्ष्म और व्यापक है सन्त की संज्ञा। कैसी अद्भुत है सन्त की पहचान।
संसार की दृष्टि से सन्त की पहचान संभव नहीं।
नहीं, मैं नहीं कह सकता कि मैं उन्हें जानता हूँ।

फिर भी….।
फिर भी दुनिया के व्यवहार की भाषा में कह सकता हूँ कि मैं उनको जनता हूँ।
उनके बारे में बहुत कुछ सुना हूँ। सुनता आ रहा हूँ। उनकी महिमा की कहानियाँ मेरे जेहन में सुरक्षित हैं। उनके रंग आज भी वैसे ही टहक हैं। गरीबों असहायों के प्रति उनकी करूणा मन को उमांगित करती है। राजवंशों के अभिमान को ठोकर मारने को अभिनन्दनीय उत्साह उनके प्रति श्रद्धावनत करता है। अत्याचारी शासन के अनाचार के प्रति उनका उदग्र प्रतिरोध उनके जन संरक्षक व्यकित्व में आत्मीय अनुराग जाता है। उनका बहुवर्णी चरित बरबस अपनी तरफ खींच लेता है। लोक मानस में अंकित उनके बहुआयामी व्यक्तित्व की कहानियॉ मन में उनके प्रति कौमुहल, विस्मय,आदर और प्रशस्ति के भावों का अकवरल सृजन करती रहती हैं।
मैं बाबा कीनाराम के सन्दर्भ में सोचता हूँ तो स्मृतियां बचपन में खींच ले जाती हैं। अपनी स्मृति की पुस्तिका को पलटकर देखता हूँ तो उसके शुरूआती पन्नों पर ही कीनाराम जी का नाम अंकित पाता हूँ। जब मेरा मस्तिष्क किसी भी तरह की स्मृति को धारण के योग्य बन रहा था तभी उसमें बाबा कीनाराम की उज्ज्वल कीर्ति की कथाएं शामिल हो गई थीं।
हमारा बचपन जिस गांव में पल्लवित हुआ है, वह गांव पारंपरिक भारतीय जीवन शैली का जीवन्त गाँव था। शताब्दियों से चली आ रही जीवन व्यवहार की चीजे उस गाँव में जीवित हुआ करती थी। आज के गॉव की तरह तब हमारा गाँव आधुनिक सभ्यता की प्रताड़ना से विपन्न गाँव नही था। पारस्परिकता और सामूहिकता तब गाँव के प्राण तत्व हुआ करते थे। तब गॉवों में सूचनाओं के सामूहिक संप्रेषण के केन्द्र हुआ करते थे। जोड़े के दिनों में हर दरवाजे पर लगने वाले अलाव के चौगिर्द अड्डे पुराने कथा प्रसंगो के माध्यम से स्मृति को समृद्ध और समुन्नत बनाने के केन्द्र थे। आज की तरह तब अलाव बेघर नही हुए थे। हमने उन्ही अलावों के माध्यम से सबल सिंहं चौहान की महाभारत के कथा प्रसंगों से परिचय प्राप्त किया था। वहीं से जगनिक के आल्हा के कथानायकों से जान पहचान कायम की थी।

वहीं तुलसीदाम की रामायण के भक्ति रस का रसपान किया था। वहीं से बाबा कीनाराम ने हमरी स्मृति में प्रवेश किया था। बाबा कीनाराम से हमारा परिचय किंवदन्तियों के माध्यम से हैं। उनके साहित्य से परिचय तो बहुत बाद में हुआ है। हमारी पहली स्मृति में बाबा की छवि लोकनायक की छवि है। हाँ उनकी उपस्थित हमारी स्मृति में अपने समय के बुजुर्गो की कणी के माध्यम से लौकिक शक्तियों के स्वामी के रूप में लोगों के दुख को दूर करने वाले महानायक की तरह आई हुई है और आज भी उसी तरह से अविचल है। उस समय गॉव का जीवन पारस्परिकता और आपसदारी का अद्भुत केन्द्र था। किसी एक व्यक्ति की अनुभव सम्पदा वाणी से व्यक्त होकर अनेको के जीवन बोध में सम्मिलित हो जाया करती थी। तब घरो के दरवाजे हमेशा बन्द नहीं रहते थे। बेरोक-टोक घरों में आना-जाना सहज था। व्यक्तियों के साथ उनके सुख-दुख भी एक से दूसरे घरो में आया-जाया करते थें। गालियाँ माला के उस धागे की तरह थीं जिसमें गाँव के सारे घर फूल की तरह गुँथे हुए थे। गालियॉ केवल आने-जाने के काम के लिये नहीं थी। जिन्दगी के और भी बहुत से कीमती कामों की भागीदार थीं। गालियाँ कच्ची थीं जिनमें छोटे-बड़े सारे लोगों के पाँवों के निशान पड़ते थे और पहचाने जा सकते थे। एक घर में जिलाई गई आग कई-कई घरों के लिए चूल्हे जलाने के काम की होती थी। दरवाजों के सामने खुले हुए चबूतरे थे जहाँ जिन्दगी का सब कुछ दिखाई पड़ता था। सारा का सारा हास-हुलास और दुख संत्रास सब कुछ खुला था गोपन कुछ भी नहीं था। एक दूसरे की जिन्दगी में आना-जाना सहज था। बाबा कीनाराम की चर्चाएं वातावरण में व्याप्त थीं।

मेरे स्मृति पटल के पहले अध्याय में बाबा कीनाराम का चरित्र उसी तरह अंकित है जैसे रामायण की चौपाइयाँ। जैसे महाभारत के कथा प्रसंग। जैसे आल्हा के बोल। जैसे गाँधी की गाथा। जैसे बिरहा और लोरकी के आलाप जैसे ढेकी में धान कूटते और जॉता में जौ-गेहूँ पीसते गाये जाते माँ-चाचियों के गीत। पूजा त्योहार के दिनों में देवी से अरदास के गान। यह सब सामूहिक सम्पदा थी। इनका संप्रेषण भी सामूहिक था और संपोषण भी सामूहिक था। इन सब पर किसी व्यक्ति का कापीराइट नहीं था। लोक जीवन में श्रुति परम्परा का जो कुछ था सबका था। सबके लिए था। सार्वजानिक विरासत का ऐसा दुर्लभ स्वरूप आने वाले समय के लिए विस्मय के विषय के रूप में बचा रहेगा। कीनाराम की कीर्ति हमारे लिए उसी सार्वजनिक विरासत की अनमोल थाती है। उस पर किसी व्यक्ति का नहीं किसी संस्था का नही बल्कि सर्वजन का अधिकार है। आज भी मेरा विश्वास है श्रुति परम्परा में निहित शिक्षा का संस्कार शिक्षण का सर्वोत्तम स्वरूप है। स्मृति संस्कार ही शिक्षा का चरम फल है, वह श्रुति माध्यम से सहज सुलभ हो जाता है। भारतीय शिक्षा परंपरा की सहज प्रविधि आज भी सन्तों की भ्रमण संवाद योजना के अन्तर्गत हार्दिक सम्मिलन के रूप में प्रतिष्ठित और पूजित है।
एक सन्त जिसका अपना कुछ भी नही है, कैसे सबका बन जाता है, कैसे सबके दिलों में अपना निवास बना लेता है, बड़ा विस्मय जनक है। साधु चरित सुभ चरित कपासू सहज विसद गुनमय फल जासू।।
अपने लिये न रह जाना ही सबके लिये हो जाना होता है क्या?

हाँ!
जिसे अपने लिये कुछ नही चाहिए वही जगत के हित का साधक हो सकता है। जिसे अपने लिये कुछ भी पाना शेष है वह सांसारिक प्राणियोें के हित चिन्तन में प्रवृत्त नहीं हो सकता। सन्त की अस्मिता जगत के हित चिन्तन में निरत अस्मिता है।

तरूवर फल नहि खात है, नदी न संचै नीर।
परमारथ के कारने साधुन घरै सरीर।।

साधु पुरूषों के शरीर धारण का प्रमुख
उद्देश्य लोक कल्याण है। अपने समय के मनुष्य जीवन में ईश्वरीय आनुदेशों की स्थापना सन्त के जीवन का ध्यये होता है। भगवत्ता का प्रसार ही सन्त के माध्यम से प्रतिपादित होने वाला अलौलिक कर्म है, जिससे जन जीवन ईश्वर के प्रति उन्मुख होता है। ईश्वरीय विधान के प्रति उनके ह्रदय में आस्था का उदय होता है। ईश्वर के प्रति लोक मानस में आस्था के भावों को उप्रेरित करने के निमित्त ही सन्त अपने कर्म और वाणी का व्यवहार करते है।
अपने में सबको देखने और सबमें अपने को देखना ही सन्त का देखना होता है। समस्त संसार का संचालन प्रभु की प्ररेणा से हो रहा है। यही धारणा सन्त कली धारणा है। इस धारणा के जीवन में अधिष्ठित होने से दुर्मती का विनाश हो जाता है-

आपु मॉहि सब देखिया सब मों आपु समाय।
पालै एक प्रतीति कहॅ दुरमति दूर बहाय।। (विवेका सार-268)

बाबा कीनाराम की लोक कल्याण की कथाएँ और उनकी ईश्वरीय विभूति के प्रसार की प्रेरणाएँ मेरे बचपन की स्मृति की धरोहर है। हमारे बचपन में कीनाराम की किवदन्तियाँ जनमानस में सन्त रमैया से जुड़ी हुई प्रसरित थीं। रमैया के माध्यम से मैंने कीनाराम को पाया है। सन्त रमैया हमारी ही ग्राम पंचायत खखड़ा के अन्तर्गत कुशहॉ गाँव में आविर्भूत महान और अपने समय लोक में समादृत महिमामय महापुरूष थे। यहीं के मौजा उन्नीनीबी में उनका प्रशस्त और भव्य आश्रम था जो आज भी ऐतिहासिक अवशेष के रूप मौजूद है। सन्त रमैया अधोरेश्वर कीनाराम के समकालीन और समकक्ष महात्मा थे। उनका आपस में एक दूसरे के प्रति बड़ा ही स्नेह और सम्मान था दोनों का एक दूसरे के यहॉ खूब जाना-आना हुआ करता था। हँसी-मजाक, व्यंग्य विनोद का स्नेहिल दौर उनके बीच चला करता था।
लोग बताते थे कि एक दिन बाबा रमैया अपने आश्रम में थे। चैत-वैशाख का दिन था। सूरज ढल रहा था। पीपल के विशाल वृक्ष पर अपने नीड़ को लौटते पक्षियों के परिवार चहचहा रहे थे। भक्तों की भीड़ के सामने रमैया राम-सीता मन्दिर के सामने चबूतरे की चहारदीवारी पर बैड़े हुए पूरब की तरफ देख रहे थे। तभी उत्तर की तरफ से मुख्य मार्ग पर एक हाथी दिखाई पड़ा। बाबा बोल पड़े ऊ देखा हाथी।
लोगों ने देखा हाथी आ रहा था। उसी समय हाथी मुख्य मार्ग से दाहिने मुड़कर आश्रम की तरफ चल पड़ा। हाथी अभी मील भर दूर था। सारे लोग चौंक पडे़ जब बाबा ने घोषण की कि ऊ कीनाराम आ रहे।
मिटृी की दीवार पर बैठे रमैया तनिक अनमने हो उठो। देखा हो एतने बड़े सन्त कीनाराम पधार रहे हैं। उनकी आगवानी न हुई तो उनके सम्मान को बड़ी ठेस पहुचेगी।
फिर सन्त रमैया ने जिस दीवार पर बैठे थे उसी को ठोकर कहा देखा आज त हमार इज्जत तोहरे हाथ में है। तू चला त तनी कीनाराम क अगवानी होय जाय। उनकर सत्कार कयल हमार धरम है। हमरे धरम के रक्षा कै भार तोरे उप्पर।
बाबा के ऐसा कहते ही दीवार चार हाथ आगे से फट पड़ी और हवा में ऊपर उठकर चलने लगी।
बाबा कीनाराम के सामने पहुँचा कर बाबा रमैया ने झुककर जोहार किया हमार धन्य भाग है जो आप पधारे।
हम तो अवते रहे तू काहे कष्ट उठाये। बाबा कीनाराम ने धीमे मुसकाते हुए कहा।
हाथी रोककर कीनाराम जी उतर आये। रमैया दीवार से उतर आये दोनो सन्त साथ-साथ पैदल आश्रम की तरफ चलने लगे। हाथी और दीवार उनके पीछे-पीछे।
कैसा भव्य और दिव्य दृश्य रहा होगा।

आज भी कल्पना में देखकर तन सिहर-सिहर जाता है। मन पुलक-पुलक उठता है।
रमैया के कारण कीनाराम के आगमन से उनके पदस्पर्श से हमारे गाँव को भी तीर्थभूमि बनने का सौभाग्य सुलभ हो सका है। सोचकर हृदय-हृदय गदगद हो उठता है। सौभाग्य का यह रोमांच हमारे इतिहास की थाती है। अपने बचपन की इस थाती को जुगाये रखकर हम अपने को कृतार्थ अनुभव करते हैं।

किंवदन्तियों में कीनाराम‚ डा. उमेश प्रसाद सिंह

किंवदन्तियों में कीनाराम पुस्तक का प्रथम अध्याय

भारतीयों ने हर क्षेत्र में स्थापित किए नए कीर्तिमानः संजीव सिंह

76वें स्वतंत्रता दिवस पर ध्वजारोहण करते जिलाधिकारी चंदौली संजीव सिंह।
76वें स्वतंत्रता दिवस पर ध्वजारोहण करते जिलाधिकारी चंदौली संजीव सिंह।

चंदौली जनपद में हर्षोल्लास के साथ मना 76वां स्वतंत्रता दिवस  

Young Writer, चंदौली। जिलाधिकारी संजीव सिंह ने 76वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर कलेक्ट्रेट भवन एवं जिलाधिकारी आवास पर ध्वजारोहण किया गया। जिलाधिकारी द्वारा सर्वप्रथम ध्वजारोहण कर स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के परिजनों को पुष्पगुच्छ एवं अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया एवं उनके बेहतर स्वास्थ्य की कामना की। कहा कि आजादी के 76वे वर्ष के इतिहास में भारत देश विभिन्न क्षेत्रों में विशेष उपलब्धियां हासिल की है। भारतीयों ने हर क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं।

चंदौली जनपद में हर्षोल्लास के साथ स्वतंत्रता दिवस मनाते स्कूली बच्चे।

उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों द्वारा जो प्राणों की आहुति दी है उसका पूरा देश कर्जदार है। अभी भी देश को आगे ले जाने के लिए जो भी दिक्कत आएगी उसका सामना सभी लोग मिलकर निस्वार्थ भाव से करेंगे। स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के आदर्शों, सिद्धांतों व दिखाए गए रास्ते पर पूरा देश चल रहा है। देश की एकता अखंडता को बनाये रखने के लिए सभी नागरिक एकजुट है। भारत निरंतर नई ऊंचाइयों पर जाएं इसके लिए प्रत्येक भारतवासी संकल्पित है। इस दिशा में बेहतर प्रयास किया जा रहा है। हर क्षेत्र में जनपद चंदौली आगे बढ़े, प्रदेश व देश आगे बढ़े इस दिशा में लोगों द्वारा बेहतर प्रयास किया जा रहा है। कहा कि केंद्र एवं प्रदेश सरकार द्वारा संचालित प्रमुख योजनाओ की अधिकारी व कर्मचारी पात्र व्यक्तियों को लाभ दिलाने में पूर्ण योगदान दे। उत्तर प्रदेश सरकार अपने राज्य के विकास के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। कहा जनहित में विभिन्न कल्याणकारी कार्यक्रम महिला कल्याण, युवा कल्याण, कृषि कल्याण आदि चलाए जा रहे हैं। कहा कि प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत पात्र परिवारों को सालाना 5 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा मिल रहा है। प्रदेश सरकार द्वारा कन्या सुमंगला योजना, राज्य के बच्चोें, महिलाओं, श्रमिकों, किसानों, आर्थिक रूप से गरीब लोगों के लिए विभिन्न प्रकार की योजनाओं का सफलतापूर्वक क्रियान्वयन किया जा रहा है। कहा कि शहीद स्थलों का विकास एवं शहीदों का सम्मान, कृषकों के आय को दुगना करने के लिए केन्द्र व प्रदेश सरकार द्वारा बेहतर प्रयास किया जा रहा है। अंत में जिलाधिकारी ने संबोधन के दौरान स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों एवं जनपदवासियों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दी। 

चंदौली ही नहीं पूरे देश के अनमोल रत्न हैं मेजर जनरल (रिटायर्ड) कमल सिंह

डिस्ट्रिक्ट डेमोक्रेटिक बार एसोसिएशन में अधिवक्ताओं को संबोधित करते मेजर जनरल रिटायर्ड कमल सिंह।
डिस्ट्रिक्ट डेमोक्रेटिक बार एसोसिएशन में अधिवक्ताओं को संबोधित करते मेजर जनरल रिटायर्ड कमल सिंह।

Young Writer, चंदौली। मेजर जनरल रिटायर्ड कमल सिंह 76वीं स्वतंत्रता दिवस पर डिस्ट्रिक्ट डेमोक्रेटिक बार एसोसिएशन में आयोजित समारोह में अपनों का सम्मान पाकर अभिभूत नजर आए। इस दौरान उन्होंने कहा कि जब अपनों द्वारा सम्मानित किया जाता है तो उसकी अनुभूति को शब्दों से बयां नहीं किया जा सकता है। उन्होंने सेना को समर्पित अपने 38 वर्ष की सेवा व समर्पण के कुछ अनछुए पहलुओं को अधिवक्ताओं संग साझा किया। साथ ही अधिवक्ताओं की भूमिका पर भी रौशनी डाली। उन्होंने कहा कि कानून का प्रभाव व उसके संचालन की जिम्मेदारी अधिवक्ताओं पर है। इसलिए अधिवक्ता सुरक्षित रहेगा, तभी देश सुरक्षित होगा। जिस देश की कानून व्यवस्था मजबूत होती है, वह देश अपने आप में सशक्त और सुरक्षित माना गया है। श्री सिंह सोमवार को डिस्ट्रिक्ट डेमोक्रेटिक बार एसोसिएशन सभागार में आयोजित स्वतंत्रता दिवस एवं सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे।
इस दौरान उन्होंने कहा कि वह इंजीयरिंग के विद्यार्थी थे और पढ़ाई पूरी करके सेना से जुड़ने का अवसर उन्हें मिला। इस दरम्यान आसाम से लगायत पाकिस्तान बार्डर समेत कई अलग-अलग हिस्सों में पोस्टिंग के दौरान विषम हालात में सेना के लिए बंकर, पुल व रास्तों के निर्माण समेत अन्य जटिल अभियंत्रण कार्यों को सम्पन्न कराना बेहद चुनौतिपूर्ण रहा। इसके बाद डीआरडीओ से जुड़कर मिसाइल मैन डा. एपीजे अब्दुल कलाम के विभिन्न कार्यों व प्रोजेक्ट में उनके सानिध्य में कार्य करने को अपना सौभाग्य बताया। कहा कि कलाम साहब बेहतर अनुशासित व्यक्तित्व थे जिन्होंने अपना पूरा जीवन देश को समर्पित कर दिया। वह हमेशा प्रतिभा को सम्मान देने का काम किए। मिसाइल प्रोग्राम में उनकी योगदान को जितना सराहा जाए, वह कम है। कहा कि भारतीय सेना प्रतिकूल मौसम और हालात में खुद को स्थापित करने के साथ ही सीमाओं की सुरक्षा करती है यह बेहद जिम्मेदारी, अनुशासनात्मक एवं चुनौतिपूर्ण कार्य है। कहा कि गांव के लोगों के पास बड़े-बड़े अवसर आते हैं। ऐसी स्थिति में अपने बौद्धिक क्षमता का परिचय देते हुए ऐसे अवसरों को अर्जित करने की जरूरत है। क्योंकि यही वजह आपकी और देश की तस्वीर और तकदीर बदल देते हैं। बताया कि जब शुरुआती दिनों में उन्हें अभियंत्रण के क्षेत्र में कुछ करने का अवसर मिला तो उन्होंने अपनी मातृभूमि वाराणसी को अपनी कर्मभूमि के रूप में चुना। डेढ़ माह तक बनारस के एक-एक सीवरेज व कूड़ा निस्तारण प्रणाली को देखा और परखा। साथ ही बनारस को पहला सीवरेज का डिजाइन भी समर्पित किया, जो आज भी शहर की गंदगी को साफ करने में क्रियाशील है। इसके पूर्व बार अध्यक्ष संतोष कुमार सिंह समेत तमाम अधिवक्ताओं ने माल्यार्पण करने के साथ ही स्मृति चिह्न भेंट कर चंदौली जनपद के महुअर के माटी के लाल कमल सिंह को सम्मानित किया और उन्हें चंदौली ही नहीं, बल्कि देश का अनमोल रत्न करार दिया। इस अवसर पर पूर्व अध्यक्ष अनिल कुमार सिंह, महामंत्री शमशुद्दीन, पूर्व महामंत्री झन्मेजय सिंह, मोहम्मद अकरम, धनंजय सिंह, विद्याचरण सिंह, हवलदार सिंह, फिरोज, योगेश सिंह लड्डू आदि उपस्थित रहे। संचालन सुल्तान अहमद ने किया।
इसके बाद उन्होंने विज्डम एजुकेयर में आयोजित समारोह में शरीक हुए और इंजीनियरिंग व प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे बच्चों का अपने अभिभाषण के जरिए मार्गदर्शन किया। कहा कि लक्ष्य को निर्धारित कर उसे पाने के लिए कड़ी मेहनत व एकाग्रता की जरूरत होगी। अनावश्यक वस्तुओं का बहिष्कार कर शिक्षकों के मार्गदर्शन में उचित ज्ञान को अर्जित कर सफलता को शत-प्रतिशत पाया जा सकता है। मेहनत व लगन होती तो सफलता निश्चित ही कदम चुमेगी। 

चंदौली जिला पंचायत अध्यक्ष दीनानाथ शर्मा ने किया ध्वजारोहण

Young Writer, चंदौली। मुख्यालय स्थित जिला पंचायत कार्यालय पर सोमवार को जनपद के प्रथम नागरिक जिला पंचायत अध्यक्ष दीनानाथ शर्मा ने स्वतंत्रता दिवस पर ध्वजारोहण कर तिरंगे को सलामी दी। इस दौरान पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष छत्रबलि सिंह व सरिता सिंह मुख्य अधिकारी अशोक कुमार मद्धेशिया प्रशासनिक अधिकारी आनंद कुमार सिंह अभियंता पुष्कर कुमार कार्य अधिकारी शुमामा हुसैन ने राष्ट्रीयगान के बाद अच्छे कार्य करने वाले अधिकारि अवर अभियंता जसवंत चौहान राजस्व निरीक्षक ज्ञानेंद्र प्रताप व श्यामधर इंटर प्राइजेज को स्मृति चिह् व प्रसुस्ति पत्र देकर सम्मानित किया।

वही सभागार में मौजूद लोगो को मिष्ठान वितरण कर मुंह मीठा कराया। और देश के आजादी के वीर सपूतों को नमन करते हुए उनके याद में गोष्ठी की। उन्होंने कहा कि देश की खातिर अपना सब कुछ न्योछावर करने वाले महान क्रांतिकारियों , देश के जवानों व स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को नमन कर उन्हें याद कर हर घर तिरंगा लगाने का कार्य हम लोग कर रहें हैं साथ ही पार्टी की नीतियों को जन जन तक पहुंचा रहे हैं । उन्होंने जनपदवासियों को स्वतंत्रता दिवस की बधाई देते हुए सभी से अपने अपने घरों पर तिरंगा लगाने की अपील की ।

अमृत महोत्सवः बेहतर पुलिसिंग के लिए सम्मानित हुए चंदौली कोतवाल

चंदौली पुलिस लाइन में चंदौली कोतवाल संतोष कुमार सिंह को प्रशस्ति पत्र प्रदान करते एसपी अंकुर अग्रवाल।
चंदौली पुलिस लाइन में चंदौली कोतवाल संतोष कुमार सिंह को प्रशस्ति पत्र प्रदान करते एसपी अंकुर अग्रवाल।

बलुआ थाना प्रभारी को प्रशस्ति पत्र मिलने से पुलिस कर्मियों में खुशी

Young Writer, चंदौली। आजादी के 75वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में मनाए जा रहे आजादी का अमृत महोत्सव कार्यक्रम के अंतर्गत पुलिस महकमे में उम्दा कार्य करने वाले 75 पुलिस कर्मियों को एसपी अंकुर अग्रवाल ने सम्मानित किया। इस दौरान पुलिस लाइन चंदौली परिसर में पुलिस अधीक्षक अंकुर अग्रवाल ने चंदौली कोतवाल संतोष कुमार सिंह को उनके बेहतर कार्य व बेहतर पुलिसिंग के लिए सम्मानित किया। प्रशस्ति पत्र देते हुए एसपी ने कोतवाल संतोष कुमार सिंह को ऐसे ही पूरी निष्ठा व समर्पण के साथ महकमे की सेवा करने के लिए प्रेरित किया। 

इसके अलावा एसपी ने क्षेत्र में कानून ब्यवस्था शान्ति बनाये रखने, कई अपराध का खुलासा करने आदि को लेकर एसपी ने बलुआ थाना प्रभारी राजीव कुमार सिंह को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। इन्हें कर्तव्यों का निष्ठा पूर्वक निर्वहन व अपराध को नियंत्रण करने को लेकर एसपी ने प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया । इसे लेकर बलुआ थाने में पुलिस कर्मियों ने हर्ष ब्याप्त किया । हर्ष ब्याप्त करने वालो में एसआई अविनव गुप्ता,मोहरगंज चौकी इंचार्ज शिवमणि त्रिपाठी,मारूफपुर चौकी इंचार्ज दीपक पाल,एसआई अनिल यादव,कांस्टेबल बिनोद सिंह, मोहित शर्मा,अभिषेक पाल आदि थे ।

चंदौली पुलिस लाइन में बलुआ थाना प्रभारी को प्रशस्ति पत्र प्रदान करते एसपी अंकुर अग्रवाल।
चंदौली पुलिस लाइन में बलुआ थाना प्रभारी को प्रशस्ति पत्र प्रदान करते एसपी अंकुर अग्रवाल।

अमृत महोत्सवः व्यापारियों ने तिरंगा यात्रा निकाल‚ वीर क्रांतिकारियों को किया नमन

चंदौली नगर में लक्ष्मीकांत अग्रहरि के नेतृत्व तिरंगा यात्रा निकालते व्यापारी।
चंदौली नगर में लक्ष्मीकांत अग्रहरि के नेतृत्व तिरंगा यात्रा निकालते व्यापारी।


Young Writer, चंदौली। व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष लक्ष्मीकांत अग्रहरि के नेतृत्व में रविवार को चंदौली नगर के व्यापारियों ने तिरंगा यात्रा निकाला और पूरे नगर का भ्रमण किया। इस दौरान यात्रा के साथ डीजे पर बज रहे देशभक्ति गीतों से पूरे नगर में देशभक्ति की लहर दौड़ पड़ी। इस दौरान उन्होंने आजादी के गौरवशाली इतिहास के बारे में नगरवासियों को जानकारी दी। बताया कि भारत माता के कई वीर क्रांतिकारियों ने अपने प्राणों की आहुति देकर अंग्रेजों से आजादी छिनने का काम किया था। तिरंगा यात्रा पुनः निर्धारित स्थल पर पहुंचकर समाप्त हुआ। इस मौके पर व्यापारियों ने देश को आजादी दिलाने के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीर क्रांतिकारियों को याद कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।

खुटहा में धूमधाम से निकला तिरंगा यात्रा
पड़ाव। क्षेत्र के साहूपुरी क्षेत्र में खुटहा प्रधान सर्वजीत पटेल और मनजीत सिंह पटेल के नेतृत्व में तिरंगा यात्रा बड़ी धूमधाम से डीजे के साथ निकाली गई, जो खुटहां से शुरू होकर मन्नापुर, फतेहपुर, व्यासपुर व चांदीतारा गांव से होते हुए व्यासजी और साहूपुरी जाकर समाप्त हुई। जिसमें स्कूल के बच्चों सहित 11 बटालियन एनडीआरएफ के जवान और ग्रामीण भारी संख्या में उपस्थित रहे। इस मौके पर योगेंद्र कुमार पटेल, जयप्रकाश सिंह, संजय सिंह, उदय पटेल, गौरी शंकर, संतोष गुप्ता, मोनू सैनी, सूरज कुमार आदि रहे।

खुटहा में आयोजित तिरंगा यात्रा में शामिल ग्रामीण।
खुटहा में आयोजित तिरंगा यात्रा में शामिल ग्रामीण।

शहाबगंज क्षेत्र में धूमधाम से मना आजादी का अमृत महोत्सव
शहाबगंज। आजादी के अमृत महोत्सव के अवसर पर क्षेत्र में ग्रामीणों व स्कूल के छात्र छात्राओं में तिरंगा यात्रा को लेकर काफी उत्साह है। इसी के तहत प्राथमिक विद्यालय कलानी के बच्चों, अध्यापकों व ग्रामीणों ने शनिवार को आजादी के 75 वर्ष पूरे होने पर आजादी के अमृत महोत्सव के मद्देनजर प्रधान मुन्ना भास्कर के नेतृत्व में तिरंगा यात्रा निकाली। जो प्राथमिक विद्यालय से प्रारंभ होकर गांव की गलियों में फेरी लगा कर वापस विद्यालय प्रांगण में आकर समाप्त हुई। इस दौरान बच्चों व ग्रामीणों ने भारत माता की जय, बंदे मातरम, महात्मा गांधी अमर रहे। सरदार भगत सिंह अमर रहें के नारे लगाते चल रहे थे। इस बीच विजई विश्व तिरंगा प्यारा, झण्डा ऊंचा रहे हमारा के तराने बजते रहे। इस दौरान प्रधानाध्यापक अखिलेश यादव, सहायक अध्यापक चन्द्रजीत यादव, अशोक, मंजू मौजूद रहे। वहीं क्षेत्र के योगेश्वर नाथ स्नातकोत्तर महाविद्यालय शिवपुर में तिरंगा यात्रा निकाली गई जो ब्लॉक मुख्यालय होते हुए पेट्रोल पंप से वापस विद्यालय पहुंची। प्रबंधक विभा गिरी ने आजादी के इस पावन पर्व पर शामिल होकर 15 अगस्त को हर घर तिरंगा फहराने की अपील किया। साथ ही दी बनारस पब्लिक स्कूल, सेंट जॉर्ज स्कूल के साथ ग्राम पंचायत अमरसीपुर में ग्राम प्रधान सिरताज अंसारी की देखरेख में तिरंगा यात्रा निकाली गई।वहीं भटरौल गांव स्थित लालमनी बाबूलाल मौर्य उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने तिरंगा यात्रा निकाला। वहीं तिरंगा यात्रा में प्रबंधक चंद्रशेखर सिंह, प्रधानाचार्य संतोष कुमार मौर्य, अजीत पांडेय, रामप्रसाद चौहान, चंद्रभान सिंह,संजीव, विवेक सुगम मौर्य, विंध्यवासिनी छात्र-छात्राएं शामिल थे।

शहाबगंज क्षेत्र में तिरंगा यात्रा निकालते ग्रामीण।
शहाबगंज क्षेत्र में तिरंगा यात्रा निकालते ग्रामीण।

हर घर तिरंगा फहराने के लिए कर रहे जागरूक
चकिया।
आजादी का अमृत महोत्सव कार्यक्रम के तहत वार्ड नंबर 9 के सभासद व वार्डवासियों इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए घर-घर पहुंचकर लोगों को जागरूक करने के लिए रविवार को नगर में बाइक से तिरंगा यात्रा निकालने का निर्णय लिया। सभासद वैभव मिश्रा ने वार्ड व नगर के लोगों से अपील की कि 13 से 17 अगस्त तक हर घर पर तिरंगा झंडा फहराये और आजादी के अमृत महोत्सव और 75 साल की सालगिरह को यादगार बना दे। इस दौरान जाहिद हुसैन, मोहम्मद आजाद, राजेश यादव, रमाकांत गौड़, अंकुर राय, मनीष सिंह, दरोगा पांडेय, अब्दुल रहीम, शमीम खान मौजूद रहे।

चकिया में हर घर तिरंगा यात्रा कार्यक्रम के तहत वार्ड भ्रमण करते लोग।

खुशी के उड़ान ने रक्त समर्पित कर मनाया आजादी का अमृत महोत्सव 

रक्तदान कैम्प में खुशी की उड़ान संस्था के सदस्य व रक्तदाता।
रक्तदान कैम्प में खुशी की उड़ान संस्था के सदस्य व रक्तदाता।

आजादी की 75वीं वर्षगांठ पर 75 रक्तवीरों ने किया रक्तदान

Young Writer, डीडीयू नगर। जरूरतमंदों को रक्त की कमी न हो इसीलिए हमेशा जनसेवा को समर्पित संस्था खुशी की उड़ान ने जेएन ग्लोबल एकेडमी के सहयोग से इसका बीड़ा उठाया है। आजादी के अमृत महोत्सव के उपलक्ष्य में पंडित दीनदयाल नगर चंदौली में काशी हिंदू विश्वविद्यालय के सहयोग से  ब्लड डोनेशन कैम्प आयोजित कर आजादी की 75वीं वर्षगाँठ पर 75 रक्तवीरों के सहायता से रक्तदान कर जीवन को संरक्षित करने का कार्य किया। रक्तवीरो एवं वीरांगनाओं ने रक्तदान करते समय तिरंगा झण्डा हाथ मे लेकर स्वतंत्रता दिवस के पूर्व शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। रक्तवीरो ने कहा कि तुम मुझे खून दो मैं तुम्हे आजादी दूंगा यह कहने वाले और आजादी मांगने के लिए नेताजी तो नही है पर उनके इसी संकल्प को आत्मसात कर हम दूसरों के जीवन को आजादी से रखने का अवसर खुशी की उड़ान प्रदान करा रही है।

इस मौके पर संस्था की अध्यक्षा सारिका दुबे ने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार भारत में सालाना एक करोड़ यूनिट रक्त की जरूरत होती है। लेकिन करीब 75 प्रतिशत रक्त ही उपलब्ध हो पाता है, जिसके कारण लगभग 25 लाख यूनिट खून के अभाव में हर साल सैकड़ों मरीज़ों की जान चली जाती है। सवा अरब आबादी वाले भारत देश में रक्तदाताओं का आंकड़ा कुल आबादी का एक प्रतिशत भी नहीं है, जिसका एक बड़ा कारण है रक्तदान से जुड़ी जागरुकता का ना होना। 

इस अवसर पर सर सुंदरलाल अस्तपाल (BHU) के ब्लड बैंक प्रभारी प्रोफेसर संदीप कुमार ने लोगो को जागरूक करते हुए  कहा कि दुर्भाग्य का विषय यह है कि रक्तदान को लेकर बड़ी भ्रांतियां फैली हुई है, जैसे रक्तदान के वजह से कमजोरी होना,या शरीर का खून निकल पूरा निकल जाना जबकि सत्यता यह है कि रक्तदाता से एक बार में 350 मिली रक्त लिया जाता है जो शरीर में उपलब्ध रक्त का लगभग 15वां भाग होता है।  शरीर में रक्तदान के तत्काल बाद दान किये गये रक्त की प्रतिपूर्ति करने की प्रक्रिया प्रारंभ हो जाती है तथा लगभग 24 घंटे में दान किये गये रक्त की प्रतिपूर्ति हो जाती है। 

रक्तदान कैम्प में खुशी की उड़ान संस्था के सदस्य व रक्तदाता।
रक्तदान कैम्प में खुशी की उड़ान संस्था के सदस्य व रक्तदाता।

वही संस्था के पदाधिकारियों अपील करते हुए सामुहिक रूप से अपील करते हुए कहा कि रक्तदान में सिर्फ पहली बार तक ही यह भ्रांतियां होती है, उसके साथ सारी भ्रांतिया ऐसे टूटती है जैसे कि कोई शीशा पत्थर पर गिरने से टूटता है शीशा तभी तक मजबूत है जब तक वह पत्थर से नही मिला रहता है ठीक उसी तरह रक्तदान करते समय हर एक बून्द हर क्षण भ्रांतियो को समाप्त करता है। इस अवसर पर चंद्रेश्वर जायसवाल‚ उपाध्यक्ष जनार्दन शर्मा, महासचिव देव जायसवाल, रितिक कुमार, अमित सिंह, डॉ आराधना सिंह,सुकन्या दुबे, सुदीक्षा दुबे, रितु खरवार, सुजीत सिंह, अमित गोस्वामी, साक्षी साहनी, संध्या गुप्ता, अनिल गुप्ता, चितेश्वर, विकास, आहिल उपस्थित रहे।

विभाजन विभीषिका दिवस भाजपा ने निकाला मौन जुलूस

धानापुर में मौन जुलूस निकालते भाजपा जिला महामंत्री सुजीत जायसवाल व अन्य।
धानापुर में मौन जुलूस निकालते भाजपा जिला महामंत्री सुजीत जायसवाल व अन्य।

Young Writer, धानापुर। पड़ोसी मूल्क पाकिस्तान में जहां आज का दिन स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाता है वहीं भारत इस दिन को ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ के रूप में मना रहा है। इसी क्रम में रविवार को शहीद स्मारक पार्क से भाजपाइयों ने मौन जुलूस निकाला। मौन जुलूस का नेतृत्व कर रहे भाजपा के जिला महामंत्री सुजीत जायसवाल ने जुलूस के बाद कहा कि 14 अगस्त 1947 का दिन भुलाया नहीं जा सकता। इस दिन जहां 200 साल की ब्रिटिश गुलामी के बाद भारत आजाद हो रहा था तो वहीं इस देश के दो टुकड़े भी होने जा रहे थे। भारत के लिए यह दिन किसी विभीषिका से कम नहीं रहा। भारत इस दिन को ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस‘ के रूप में मनाता है। इस दौरान सत्यवान मौर्या, अरविंद मिश्रा, प्रदीप सिंह, सुरेश मौर्या, रमेश द्विवेदी, विपिन प्रताप रस्तोगी, शैलेश चंद यादव, मनोज गुप्ता, बृजेश यादव, संतोष सिंह, राजू सिंह, श्यामलाल बर्मन, गुड्डू गिरी फौजी आदि लोग मौजूद रहे।

चंदौली स्कूली बच्चों ने निकाली रैली, गाँव के पगडंडियों पर गूंजी भारत माता की जय

शहाबगंज। आजादी के अमृत महोत्सव के अवसर पर क्षेत्र में ग्रामीणों व स्कूल के छात्र छात्राओं में तिरंगा यात्रा को लेकर काफी उत्साह है।इसी के तहत प्राथमिक विद्यालय कलानी के बच्चों,अध्यापकों व ग्रामीणों ने शनिवार को आजादी के 75 वर्ष पूरे होने पर आजादी के अमृत महोत्सव के मद्देनजर ग्रामप्रधान मुन्ना भास्कर के नेतृत्व में तिरंगा यात्रा निकाली।जो प्राथमिक विद्यालय से प्रारंभ होकर गांव की गलियों में फेरी लगा कर वापस विद्यालय प्रांगण में आ कर समाप्त हुई।

इस दौरान बच्चों व ग्रामीणों ने भारत माता की जय,बंदे मातरम, महात्मा गांधी अमर रहें, सरदार भगत सिंह अमर रहें के नारे लगाते चल रहे थे। इस बीच विजई विश्व तिरंगा प्यारा, झण्डा ऊंचा रहे हमारा के तराने बजते रहे।इस दौरान प्रधानाध्यापक अखिलेश यादव, सहायक अध्यापक चन्द्रजीत यादव, अशोक ,मंजू, सहित सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।

वहीं क्षेत्र के योगेश्वर नाथ स्नातकोत्तर महाविद्यालय शिवपुर में तिरंगा यात्रा निकाली गई जो ब्लॉक मुख्यालय होते हुए पेट्रोल पंप से वापस विद्यालय पहुंची। प्रबंधक विभा गिरी ने आजादी के इस पावन पर्व पर शामिल होकर 15 अगस्त को हर घर तिरंगा फहराने की अपील किया। साथ ही दी बनारस पब्लिक स्कूल में प्रबंधक उपेन्द्र मिश्र, सेंट जॉर्ज स्कूल में प्रबंधक पंकज यादव के नेतृत्व में तिरंगा यात्रा निकाली गई। वहीं ग्राम पंचायत अमरसीपुर में ग्राम प्रधान सिरताज अंसारी की देखरेख में तिरंगा यात्रा निकाली गई।वहीं भटरौल गांव स्थित लालमनी बाबूलाल मौर्य उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने तिरंगा यात्रा निकाला।

वहीं तिरंगा यात्रा में प्रबंधक चंद्रशेखर सिंह, प्रधानाचार्य संतोष कुमार मौर्य,अजीत पांडेय, रामप्रसाद चौहान, चंद्रभान सिंह,संजीव, विवेक सुगम मौर्य, विंध्यवासिनी,प्रिति गुप्ता,जानकी मनीषा, मनोरमा सहित छात्र -छात्राएं शामिल थे।

अमृत महोत्सवः गुरुकुल विद्यालय के बच्चों ने निकाली तिरंगा यात्रा

नेगुरा गांव में तिरंगा यात्रा निकालते गुरुकुल विद्यालय के बच्चे व शिक्षक।
नेगुरा गांव में तिरंगा यात्रा निकालते गुरुकुल विद्यालय के बच्चे व शिक्षक।

Young Writer, चंदौली। आजादी के अमृत महोत्सव कार्यक्रम के तहत गुरुकुल विद्यालय की ओर से रविवार को तिरंगा यात्रा निकाली गई। उक्त यात्रा को ग्राम प्रधान प्रतिनिधि रामजियावन चौहान उर्फ घासी ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया और यात्रा का नेतृत्व करते हुए पूरे गांव का भ्रमण किया। इस दौरान हाथों में तिरंगा लिए स्कूली बच्चे नारे लगाते हुए ग्रामीणों में देशभक्ति का भाव जागृत किया। इस दौरान प्रधान प्रतिनिधि ने आजादी के गौरवशाली इतिहास के बारे में बच्चों को जानकारी दी। भारत माता के कई वीर क्रांतिकारियों ने अपने प्राणों की आहुति देकर अंग्रेजों से आजादी छिनने का काम किया था। उधर, विद्यालय पहुंचकर स्कूली बच्चे 15 अगस्त पर आयोजित होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों की तैयारी में जुट गए। इस अवसर पर प्रबंधक इसरार अहमद खान, कृष्णकांत मौर्या, मधु श्रीवास्तव, प्रियांशी जायसवाल, अंजली गुप्ता, किरन सिंह, रौशन मौर्या आदि उपस्थित रहे।

खुटहा गांव में तिरंगा यात्रा निकालते अखंड ज्योति स्कूल के बच्चे।
गांव में तिरंगा यात्रा निकालते अखंड ज्योति स्कूल के बच्चे।

अखंड ज्योति स्कूल के बच्चों ने निकाली तिरंगा यात्रा
डीडीयू नगर।
मुगलसराय थाना क्षेत्र के ज्ञानपुर के अखंड ज्योति स्कूल के बच्चों द्वारा तिरंगा यात्रा निकाला गया, जोकि विद्यालय परिसर से खजूरगांव सहित आसपास के कई गांव में भ्रमण किया। साथ ही भारत माता के जयकारे भी लगा रहे थे। गांव वालों को झंडा लगाने के लिए प्रेषित भी कर रहे थे। इस पूरे कार्यक्रम में विद्यालय के प्रबंधक शिव शंकर पाल प्रधानाचार्य नवनीत प्रिय पाठक, उपप्रधानाचार्य रीमा पाल के साथ आकांक्षा गुप्ता खुशबू गुप्ता, रिया यादव, लक्की गुप्ता, सोनाली यादव, किरण यादव, रूपा गुप्ता, आलोक पटेल, स्वाति गुप्ता, आंचल यादव, शशांक मौर्य, शशांक पाल सहित विद्यालय के बहुत से बच्चों बच्चों ने इस कड़ी धूप में मेहनत करो लोगों को हर घर तिरंगा के बारे में समझाया। इस अवसर पर रूपा गुप्ता, आलोक पटेल, स्वाति गुप्ता, आंचल यादव, विशाल मौर्या, कृपाशंकर चौहान, धर्मेंद्र यादव, अमन गुप्ता, रंजीत, प्रीति चौहान, आंचल यादव आदि उपस्थित रहे।

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