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Wednesday, July 29, 2026

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कलकत्ता केवल एक शहर नहीं है…

कलकत्ता के हावड़ा पुल की तस्वीर।

Young Writer, साहित्य पटल। ललित निबंधकार डा. उमेश प्रसाद सिंह की कलम से

कलकत्ता केवल एक शहर नहीं है। वह शहर के अलावा भी बहुत कुछ है। वह जितना यथार्थ है, उससे बहुत अधिक मिथक है। यथार्थ के मिथक में बदलने की यात्रा बहुत गहन और विकट यात्रा है। यह यात्रा मनुष्य जाति के सामूहिक मन की अतल गहराइयों से होकर गुजरने वाली गोपन यात्रा भी है। यह यात्रा वर्तमान और इतिहास की मिल-जुल यात्रा है। इसमें इतिहास और वर्तमान अलग-अलग नहीं रह जाता है। यह यात्रा मनुष्य की आकांक्षा के असीम उल्लास की भी यात्रा है। यह यात्रा मनुष्य के विषाद की अतल यातना की भी यात्रा है। जहाँ उल्लास और यातना का सम्मिलन होता है जीवन की सच्चाइयों की अछोर उलझने आपस में मिलकर रहस्यों के जाल जैसी कहानियाँ बुनने लगती है। कहानियों में से कल्पना और तथ्य को अलगा पाना कभी भी मनुष्य के सामथ्र्य में संभव नहीं है। जीवन केवल तथ्यों पर आधारित नहीं है। कल्पना तथ्यों को हमेशा ही दीप्ति देती रहती है। मिथक मनुष्य जाति के जीवन के तथ्य और कल्पना की सबसे मनोरम संरचना है।
कलकत्ता जितना कलकत्ता में नहीं है, उससे अधिक कलकत्ता से बाहर समूचे देश में व्याप्त है। कलकत्ता जितना बंगाल में है उससे अधिक यू.पी. बिहार में है। वह जितना रोशनी में प्रकाशित है उससे अधिक गाँव के अन्धकार में है। असली कलकत्ता जमीन पर नहीं हमारी स्मृति में है। कलकत्ता हमारी जातीय स्मृति की विरासत है। जो लोग कलकत्ता में रहते हैं, वे उसके मर्म को उतना नहीं जानते। जो कलकत्ता कभी नहीं गए हैं मगर कलकत्ता के हजार-हजार रूप जिनके मन में अनायास बसे हुए हैं वे कलकत्ता का असली अर्थ जनम से जानते हैं।
मैं भी कलकत्ता कभी नहीं गया हूँ। मगर ऐसा कभी नहीं लगता कि मैं कलकत्ता को नहीं जानता। एक कलकत्ता बचपन से हमारे भीतर बसा हुआ है जिसका अंगुल-अंगुल हमेशा जाना-पहचाना लगता रहता है। जिसके सौ-सौ रूप और रंग अपने नए-नए अर्थ में बराबर खुलते रहते हैं। एक बहुत पुराना शहर हमारे लिए कभी पुराना नहीं पड़ता। पड़े भी कैसे, हमारी स्मृति में जो बसा हुआ है।

किसी भी चीज की वास्तविकता सत्ता केवल उसकी भौतिक सत्ता नहीं होती। वास्तविक सत्ता उसकी स्मृति सत्ता है।
भौतिक सत्ता के नष्ट-भ्रष्ट और विलुप्त हो जाने के बाद भी उसकी स्मृति सत्ता का जस का तस बने रहना इतिहास का एक आश्चर्यजनक इतिहास है। मनुष्य जाति का इतिहास केवल इतिहास की किताबों में कैद नहीं है। इतिहास की किताबों में अंकित और शिलालेखों में उत्कीर्ण बहुत-सी चीजें इतिहास के विद्यार्थियों के लिए याद करने के काम भी रह जाती हैं। मगर बहुत-सी चीजें हमारी स्मृति में तथ्यों की अवहेलना करके न जाने कबसे जीवन्त बनी हुई हैं। अयोध्या की सत्ता, द्वारिका की सत्ता, उज्जैयिनी की सत्ता, नालन्दा और तक्षशिला की सत्ता इतिहास पर अवलम्बित नहीं है। रामराज्य का अस्तित्व इतिहास के आधार पर खड़ा नहीं है। कृष्ण का अत्याचार के विरूद्ध जीवनव्यापी संघर्ष का इतिहास, इतिहास की सांसों के सहारे खड़ा हुआ नहीं है। राजा विक्रमादित्य का सिद्ध सिंहासन न्याय में अटल निष्ठा का प्रतीक बनकर लोकचित्त में अकारणा ही अधिष्ठित नहीं है। राजाभोज की प्रजावत्सलता वैसे ही व्यापक जन समूह की स्मृति में समाई हुई नहीं है। बुद्ध की करुणा और गांधी का मानवता के प्रति अपार प्रेम इतिहास के तथ्यों और साक्ष्यों की बैसाखियों पर खड़ी सत्ता नहीं है। यह सब अपने पाँवों पर खड़ी सप्ताएँ हैं, जो मनुष्य जाति की स्मृति का हिस्सा बनकर उसके जीवन में साथ-साथ चलती रहती है। इतिहास बनने की प्रक्रिया से मिथक बनने की प्रक्रिया बहुत अधिक सूक्ष्म है, जटिल है और लम्बी है। ‘लीजेण्ड’ बन जाना हर किसी इतिहास पुरूष के भााग्य में नहीं होता। यह संवेदना के विस्तार का विषय है। हर ‘लीजेण्ड’ इतिहास में अनिवार्य हस्तक्षेप की शक्ति रखता है।

लोकतन्त्र की प्रतिष्ठा के उपरान्त मनुष्य जाति के लिए इतिहास से अधिक महत्वपूर्ण मिथक है। मनुष्य जाति की स्मृति में बसी हुई सचाई मनुष्य जीवन के लिए सबसे अधिक मूल्यवान है। कलकत्ता हमारे लिए वर्तमान नहीं है। इतिहास नहीं है। मिथक है। मिथक का वह चरित है, जिसमें सचाई और संभावना के अनगिनत अर्थ समाहित हैं।
एक शहर का मिथक बन जाना जितना कुतुहलवर्धक है, उससे अधिक आश्चर्यजनक भी है। वह अपने चरित्र की संश्लिष्टता से हमें विस्मित करता है। कलकत्ता आधुनिक सभ्यता की आकांक्षाओं के जटिल द्वन्द्व के साथ उसकी सारी विकृतियों और धिकृतियों का समन्वित वाचक है। अपने ही पंखों के पिजड़ा बन जाने की वेदना उसके चरित्र के केन्द्र में है। खोखले और सारहीन आकर्षण के जादू में आदमी के पशु-पक्षी बन जाने की नियति के दर्द का गान कलकत्ता के स्वरूप का प्राणतत्व है। आधुनिक सभ्यता के पाखण्ड के चकाचैंध की, छल के विस्तार की और मनुष्य के आंतरिक पतन की पीड़ा की जो कारुणिक पुकार है, वही कलकत्ता की अस्मिता में समाहित है। मनुष्य जाति के लिए एक पतनशील सभ्यता के वैभव का उत्कर्ष और उस उत्कर्ष के पीछे अछोर उजाड़ की उदासी की पहचान कलकत्ता की वास्तविक पहचान है। उसकी यही पहचान लोकचित्त में अनगिनत कहानियों आौर असंख्य गीतों में अंकित है।
गाँव-गाँव में, घर-घर में, आदमी-आदमी में एक कलकत्ता बसा हुआ है।
उसी कलकत्ता को ले जाने के लिए देश के हर हिस्से से बैरिन रेल चला करती है। हमारी व्यवस्था विकास की जो गाड़ी चला रही है, लोकचेतना में वह आज भी पलायन की, उजाड़ की दुर्भाग्यपूर्ण गाड़ी ही बनी हुई है। विकास जहाँ हुआ हो, वहांँ हुआ हो हमें नहीं मालूम। हमें यह मालूम है कि हमारे गाँव इस विकास में बुरी तरह से उजाड़ हुए हैं। विकास की बाढ़ में हमारे गाँव के पाँव उखड़ गए हैं।
हमारे गाँवों में जब आदमी गरीबी और असहायता की यातना से अफना उठता है तो वह गाँव के बाहर के रास्ते की तरफ देखता है। वह देखता है कि वह रास्ता चकााचैंध की राजधानी कलकत्ता की तरफ जाता है। वह चला जाता है। वह वैभव को पा लेने के दुर्दान्त आकर्षण में खिंचा चला जाता है। अपने उत्कर्ष के सपनों के पीछे-पीछे वह चला जाता है। वहाँ जाकर वह आदमी से बैल बन जाता है। घोड़ा बन जाता है। वह सपनों को ढोने वाली गाड़ी में जुट जाता है। फिर देखता है कि सपने गायब हैं। केवल गाड़ी बची है। वह गाड़ी खींचता रहता है।
असल में पिंजड़े केवल लोहे के ही नहीं होते हैं। बाजारवाद के बाजार समय ने आदमी के मन में आवारा आंकाक्षाओं के ऐसे पिंजरे रच दिये हैं कि उससे बाहर निकलने का कोई रास्ता ही नहीं रह गया है। बसे पहले ये पिंजरे कलकत्ते के बाजार में टँगे देखे गए थे। स्वच्छता, शालीनता और सुन्दरता को पा लेने का जादू सिर पर ऐसा सवार हो जाता है कि आदमी अपनी आदमियत को भूलकर तोता बन जाने को विवश हो जाता है। अपने रागबोध को गाँव में छोड़कर कलकत्ता गया हुआ आदमी आसानी से पिंजड़े में पाला हुआ तोता बन जाता है। आधुनिकता के छल का, पाखण्ड का जादू आसानी से उस पर चल जाता है। आदमी बड़प्पन को, वैभव को, विलास को पा लेने के लिए इतना हड़बड़ाया है, इतना अधीर है कि उस पर कोई भी जादू आसानी से चल जाता है। वह अपनी ही आकांक्षाओं के पिंजरे में कैद हो जाता है। वह किसी की सिखाई गई बानी को दुहराने वाला तोता बन जाता है ओफ! कितना दुर्भाग्यपूर्ण है।

लोहे के पिंजड़े में कैद होकर किसी के पाठ को दुहराने की अवश नियति असहाय जन की अभिशप्त नियति है। पहले इस नियति का केन्द्र केवल कलकत्ता था। आज कलकत्ता समूचे देश में फैल गया है। देश के सारे शहर कलकत्ता में बदल गए हैं। हर शहर में चकाचैंध के चारे चमक रहे हैं। गाँव-गाँव से लोग अपनी असहायता से अफनाये भागे चले आ रहे हैं। अपनी उद्दाम आकांक्षाओं के पिंजड़े में आकर कैद होते जा रहे हैं। तोता बनकर सिखाई हुई बानी को दुहरा रहे हैं। पिंजरे की कटोरी में दूध-भात का जूठन खाकर खुश हो रहे हैं। बाहर निकलने की असफल फड़फड़ाहट में आहत हो रहे हैं। अपने लहूलुहान पंखों की पीड़ा में आँसू बहा रहे हैं। अपने घर से, परिवार से विलग होकर विलख रहे हैं। आदमी की पद मर्यादा से भ्रष्ट होकर जानवर की तरह जी रहे हैं। पक्षी की तरह पल रहे हैं। कुत्ते-बिल्ली की तरह बढ़ रहे हैं। प्रलोभन केे पानी में नमक की तरह गल रहे हैं।
कलकत्ता के यथार्थ से मिथक बनने की यात्रा हमारे लोकतंत्र के विकास की विद्रूप यात्रा भी है। जादू बंगालिने नहीं जानतीं, जादू जानती है, हमारी अभिजात हो जाने की दुर्ललित लालसा। आभिजात्य की हम चाहे जितनी भत्र्सना कर लें मगर हमारे अन्तर में अपने को उच्च बनाने की, उच्च दिखने की, ऐसी अनिवार तृषा बैठी हुई है कि वह हमें आदमी से जानवर बनाने पर हमेशा आमादा रहती है। आदमी ऊँचा तो नहीं बन पाता मगर जानवर जरूर बन जाता है। कलकत्ता का सम्मोहन, बंगालिन का जादू आधुनिक सभ्यता के अमानवीय आकर्षण का सम्मोहन है, जादू है। इस सम्मोहन में समूचा देश एक अदृश्य पिंजरे में कैद होता जा रहा है। निजी स्वार्थ और उत्कर्ष के पीछे अन्धा होकर तोता बनता जा रहा है।

हमारे देश में लोकतंत्र की खूँटी में किसिम-किसिम के पिंजड़े टंगे है। धर्म निरपेक्षता का पिंजरा है। राष्ट्रवाद का पिंजरा। पिछड़े और दलित के उत्थान का पिंजरा है। समाजवाद का पिंजरा है। क्षेत्रवाद का पिंजरा है। जातिवाद का पिंजरा है। स्त्रीवाद का पिंजरा है। इसमें आदमी को तोता बनाकर बैठा देने की मुहिम जारी है। आदमी को आदमी बनाने का अभियान कहीं नहीं है। अब कलकत्ता केवल कलकत्ता में सिमटा नहीं है। वह समूचे देश में फैल गया है। शहर-शहर में प्रवासियों की भीड़ भर गई है। हर कहीं आदमी को पालतू बनाने का जादू पढ़ा जा रहा है। पहले होली के दिनों में एक फगुआ गाया जाता था-
’‘कलकत्ता कमाये जनि जइहा बलम
बंगालिन करैंली जादू।‘‘

अपनी प्रिया की लाख हिदायतों के बावजूद आदमी है कि कलकत्ता चला ही जाता है। जाना ही पड़ता है। वह निरन्तर चला ही जा रहा है। हमारे गाँवों की सारी सड़कें, रेल की सारी पटरियाँ गाँव की बैरिन ही बनी हुई है। वे आज भी गाँव में जो भी कुछ बचा-खुचा है, उसे गाँव से बाजार की तरफ ले ही जा रही है। गाँव में कुछ ले आने का कोई रास्ता ही नहीं बना है। अभी तक तो बिल्कुल ही नहीं बना है।

नवोदय विद्यालय नामांकन में धानापुर ब्लाक अव्वल

Young Writer, धानापुर। खण्ड शिक्षा अधिकारी विजय प्रकाश यादव ने बताया कि जनपद में जवाहर नवोदय विद्यालय विद्यालय बैराठ में नामांकन हेतु जनपद से कुल 4517 आवेदन फार्म भरे गए, जिसमें धानापुर विकास खण्ड सर्वाधिक 707 बच्चों का आवेदन फार्म भरकर जिले में प्रथम स्थान हासिल किया। 659 आवेदन फार्म भरकर चहनियां द्वितीय, सकलडीहा 647 फार्म भरकर तीसरे, सदर ब्लाक 637 फार्म भरकर चौथे, 489 फार्म भरकर नियामताबाद पांचवें, 464 फार्म भरकर बरहनी छठे, चकिया 380, शहाबगंज 341 फार्म, नौगढ़ विकास खण्ड द्वारा 193 फार्म भरा गया।
बीइओ विजय प्रकाश यादव ने कहा कि इस कार्य के लिए मुख्य रूप से शुभेंदु भट्टाचार्य प्रवक्ता अंग्रेजी व आनंद तिवारी टीजीटी अंग्रेजी द्वारा विशेष प्रयास किया गया। राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के जिला महामंत्री इम्तियाज खान ने कहा कि नवोदय विद्यालय नामांकन में आज धानापुर ब्लाक जिले में प्रथम स्थान प्राप्त किया इसके लिए सबसे पहले बेसिक परिवार ब्लाक के मुखिया खण्ड शिक्षा अधिकारी धानापुर विजय प्रकाश बधाई के पात्र हैं जिनके नेतृत्व में ब्लॉक जिला स्तरीय खेलकूद प्रतियोगिता में प्रथम आया था और आज जवाहर नवोदय विद्यालय नामांकन में प्रथम स्थान प्राप्त किया इनके साथ साथ विकास खण्ड के सभी परिषदीय विद्यालयों व सहायता प्राप्त (मान्यता प्राप्त) विद्यालयों के प्रधानाध्यापक व शिक्षक बधाई के पात्र हैं जिनके परिश्रम से विकास खण्ड जिले में प्रथम स्थान प्राप्त कर सका।

सिल्ट सफाई को लेकर किसानों ने धनावल में किया प्रदर्शन

Young Writer, चकिया। क्षेत्र के धनावल गांव में लेफ्ट कर्मनाशा नहर से निकली धनावल रजवाहा सहित भरेहटा माइनर की सिल्ट सफाई मानक के अनुरूप नहीं होने पर गुरुवार को लामबंद किसानों ने नहर के किनारे प्रदर्शन किया। आरोप लगाया कि अधिकारी और ठेकेदारों की मनमानी के चलते कूड़े करकट से पटी नहरो की सिल्ट सफाई में अनियमितता बरती जा रही है।
प्रदर्शन कर रहे किसानों ने कहा कि लेफ्ट कर्मनाशा नहर से जुड़ी धनावल रजवाहा की सिल्ट सफाई शासन की मंशा के विपरीत की जा रही है। पिछले दस वर्षों से रजवाहा से टेल तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है, जिसके चलते धनावल, कर्मा, विठवल, गौड़िहार, नरहरपुर, पकड़ी भावपुर, कुर्थियां आदि गांव के हजारों हेक्टेयर भूमि की सिंचाई बाधित है। प्रदर्शन की सूचना मिलते ही सहायक अभियंता अपराजिता सिंह मौके पर पहुंची और आक्रोशित किसानों को समझा-बुझाकर शांत कराया। प्रदर्शन में भाकियू तहसील अध्यक्ष वीरेंद्र पाल, मोतीलाल मौर्य, जगदीश, रवि प्रकाश, आलोक कुशवाहा, व्यासजी, टिंकू आदि किसान मौजूद थे।

पुलिस ने आपरेशन मजनू चलाकर मनचलों को दी हिदायत

Young Writer, चहनियां। बलुआ पुलिस ने क्षेत्र के विभिन्न स्थानों पर आपरेशन मजनू का अभियान चलाया। कई मजनुओं को पकड़कर हिदायत देकर छोड़ दिया। पुलिस के इस अभियान से हड़कंप मच गया। बलुआ पुलिस द्वारा क्षेत्र के विभिन्न विद्यालयो के इर्द-गिर्द, कस्बा व बाजारों में ऑपरेशन मजनू का अभियान चलाया। इस दौरान बिना मतलब के खड़े संख्या में युवाआंे को पकड़कर थाने ले आए। कुछ देर बाद बलुआ थानाध्यक्ष मिथिलेश तिवारी ने हिदायत देकर छोड़ दिया। बलुआ पुलिस के इस अभियान से हड़कंप मच गया। बलुआ थानाध्यक्ष मिथिलेश तिवारी ने कहा कि बिना मतलब के विद्यालयो के पास या फिर छुट्टी होने पर घूमते फटकते नजर आये तो खैर नहीं। यह अभियान लगातार चलता रहेगा। सादे ड्रेस में हमारे कर्मी नजर रखेंगे।

टीआर दिनकर ने जनसम्पर्क कर कांग्रेस की उपलब्धियों को गिनाया

जनसम्पर्क कर ग्रामीणों में प्रतिज्ञा पत्र वितरित करते टीआर दिनकर।

Young Writer, चंदौली। कांग्रेस कमेटी अनुसूचित प्रकोष्ठ के प्रदेश महासचिव टीआर दिनकर ने गुरुवार को क्षेत्र के भगवानपुर व प्रतापपुर गांव में जनपसम्पर्क किया। इस दौरान उन्होंने ग्रामीणों से संवाद स्थापित किया। साथ ही कांग्रेस का प्रतिज्ञा-पत्र बांटा। वहीं कुछ लोगों को कांग्रेस की सदस्यता भी दिलाई। उन्होंने कांग्रेस सरकार द्वारा किए गए कार्यों व उपलब्धियों को गिनाया।

साथ ही आह्वान किया कि आगामी विधानसभा चुनाव 2022 में कांग्रेस के हाथ को मजबूत करें। कांग्रेस से जुड़े और दूसरों को भी जोड़ने के लिए प्रेरित करें, ताकि चुनाव के बाद कांग्रेस सूबे की सत्ता में लौट सके। बताया कि कांग्रेस सत्ता में आयी तो महिलाओं को नौकरी व अन्य क्षेत्रों में उचित भागीदारी व प्रतिनिधित्व दिया जाएगा। साथ ही 40 प्रतिशत सीटों पर कांग्रेस का नेतृत्व महिला प्रत्याशियों को करने का अवसर मिलेगा। साथ ही महिलाओं के रसोई के बजट को संतुलित रखने के लिए तीन सिलेंडर कांग्रेस मुफ्त देगी।

सांसद के शिलान्यास के बाद भी सकलडीहा में नहीं बनी सड़क

सीएचसी मार्ग की जर्जर मार्ग पर उड़ती धूल से आते लोग

एक जुलाई को सांसद ने सीएचसी मार्ग पर सीसी रोड के लिये किया था शिलान्यास

Young Writer, सकलडीहा। कस्बा स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तक जाने वाले रास्ते के निर्माण के लिए सांसद द्वारा शिलान्यास के बाद भी निर्माण कार्य ठप पड़ा है। इसके बाद भी विभागीय अधिकारी निर्माण कार्य शुरू कराने का दावा कर रहे है, जबकि तत्कालीन बीडीओ राम्या आर ने निर्माण कार्य मानक को पूरा नहीं करने पर श्रमदान घोषित कर दिया था, जो वर्तमान में विकास का दावा कार्य शुरू नही होने पर मुंह चिढ़ा रहा है।

विदित हो कि केन्द्रीय मंत्री व सांसद डा.महेंद्रनाथ पांडेय ने सकलडीहा सीएचसी को गोंद लिया है। एक जुलाई को जिलाधिकारी सहित जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में संासद ने सीएचसी की जर्जर मार्ग पर सीसी निर्माण कार्य के लिये शिलान्यास करते हुए लाखों की विकास योजना शुरू कराने का दावा किया था। इस क्रम में अधिकारियों के मौखिक निर्देश पर सीसी मार्ग निर्माण कार्य शुरू हुआ, लेकिन तत्कालीन बीडीओ राम्या आर ने कार्य गुणवत्तापूर्ण नहीं होने पर श्रमदान घोषित कर दिया। जिसके कारण पिछले पांच माह से निर्माण कार्य ठप पड़ा हुआ है। जर्जर सड़क के कारण प्रसव पीड़ित और आपरेशन कराकर जाने वाली महिलाओं और एम्बुलेंस कर्मियों को काफी दिक्कत होती है। इसके बाद भी निर्माण कार्य को शुरू कराने को लेकर अधिकारी सुध नही ले रहे है। जिसे लेकर लोगों के बीच विकास का दावा मुंह चिढ़ा रहा है। इस बाबत बीडीओ राजेश नायक ने बताया कि शीघ्र ही निर्माण कार्य प्रारंभ कराया जायेगा।

निजी स्कूल में फिर हुई मासूम संग दरिंदगी‚ हड़कंप

Young Writer, चंदौली। वाराणसी के सनबीम स्कूल में मासूम संग रेप का मामला अभी ठंडा भी नहीं पड़ा था कि मुगलसराय में भी स्कूल में मासूम की रेप का मामला सामने आया है। सूत्रों के मुताबिक सात साल की मासूम संग रेप की घटना प्रकाश में आयी है। इससे पुलिस महकमें में हड़कंप की स्थिति है। फिलहाल परिजनों की तहरीर पर पुलिस मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई में जुटी है।
दरअसल पूरा मामला जलीलपुर पड़ाव क्षेत्र के उदित नारायण कलेज का है. जहां बुधवार को पढ़ने गई मासूम संग कुकृत्य किया गया। परिजनों को इस मामले की जानकारी तब हुई जब आज बच्ची स्कूल जाने से मना करने लगी। परिजनों के पूछने पर बच्ची ने बताया कि स्कूल के ही एक छात्र ने उसके साथ दुष्कर्म किया है। जिसके बाद परिजन स्कूल गए और प्रबंधन को पूरे मामले से अवगत कराया। स्कूल के छात्रों के बीच आरोपी की पहचान का भी प्रयास किया गया, लेकिन वह आज नहीं पहुंचा था। जिसके बाद परिजन मुगलसराय कोतवाली पहुँचे और घटना से अवगत कराया। स्कूल में बच्ची संग रेप की घटना से पुलिस महकमें में हड़कंप मच गया। पीड़ित के तहरीर के आधार मुकदमा दर्ज कर मेडिकल परीक्षण के लिए भेज दिया। इस बाबत सीओ सदर अनिल राय ने बताया कि मामला संज्ञान में है। मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की जा रही है। तहरीर के बाद मुगलसराय कोतवाली पुलिस बच्ची को लेकर जिला अस्पताल पहुंचे और उसका मेडिकल मुआयना कराया।

बैंकों की हड़ताल से चंदौली में 100 करोड़ का लेन-देन प्रभावित

कमालपुर कस्बे में हड़ताल के कारण बंद पड़ा यूबीआई की शाखा व एटीएम केंद्र।

Young Writer, चंदौली। संसद के शीतकालीन सत्र में पेश होने जा रहे बैंकों के निजीकरण के खिलाफ जनपद के सभी बैंक अधिकारी व कर्मचारी दो दिवसीय हड़ताल पर रहे। इस कारण जनपद की 169 बैंक शाखाएं पूरी तरह से बंद रही, जिससे करीब 100 करोड़ का लेन-देन प्रभावित हुआ। इसका बोझ सीधे विभिन्न बैंकों के एटीएम केंद्रों पर पड़ा तो वहां नकदी निकासी के लिए सुबह के वक्त लम्बी कतारें लग गयी। ऐसे में दोपहर होते-होते सभी बैंकों के एटीएम भी जवाब दे गए। जिस कारण आम लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। वहीं कुछ लोग हड़ताल की जानकारी न होने के कारण सुबह काफी देर बैंकों शाखाओं के बाहर इंतजार करते दिखे।
दो दिवसीय हड़ताल के बाबत आल इंडिया यूनियन बैंक आफिसर्स फेडरेशन के अध्यक्ष एवं एआईबीओसी के उपाध्यक्ष गिरधार गोपाल ने बताया कि बैंक अधिकारियों व कर्मचारियों की हड़ताल निजीकरण के खिलाफ है जिससे चंदौली में 100 करोड़ और बनारस जैसे बड़े शहर में 500 से 600 करोड़ का लेन-देन प्रभावित हुआ है। बताया कि संसद के शीतकालीन सत्र में निजीकरण बिल लिस्टेड है हम अपनी हड़ताल के जरिए सरकार तक यह संदेश पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं कि देश व जनहित में बैंकों के निजीकरण का बिल पास न किया जाय। बताया कि अभी बैंकों के राष्ट्रीय का उद्देश्य पूरा नहीं हुआ है ऐसे में बैंकों के निजीकरण से उस उद्देश्य को गहरा आघात पहुंचेगा। निजीकरण देश के आम नागरिकों के हित में नहीं है क्योंकि इससे बैंकिंग सेवाएं गरीब व मध्यम वर्गीय परिवार के लिए महंगी हो जाएगी। बताया कि जन-धन समेत सामाजिक कल्याण की जो भी योजनाएं हैं उसे पात्र लोगों तक पहुंचाने में सरकारी बैंक ही अग्रणी भूमिका निभाते आ रहे हैं। बावजूद इसके सरकार नया विधेयक लाकर बैंकों के निजीकरण करने की दिशा में कदम आगे बढ़ा रही है, जिस हम सभी बैंक अधिकारी व कर्मचारी पुरजोर विरोध करते हैं। एलडीएम शंकर चन्द्र सामन्त ने बताया कि हड़ताल के कारण चंदौली जनपद के बैंकिंग सेवा पर पूर्णतः प्रभावित रहीं, जिसका कारण किसी भी बैंक की कोई भी शाखा नहीं खुली। साथ ही जनपद के करीब 122 एटीएम केंद्रों में अधिकांश में नकदी खत्म हो गया।

धान की उपज के साथ मनोज डब्लू ने डीएम दफ्तर को घेरा

कलेक्ट्रेट में जिला प्रशासन को चेतावनी देते मनोज सिंह डब्लू।

बंद क्रय केंद्रों को खोलने की मांग को लेकर आक्रोशित दिखे सपा नेता मनोज कुमार सिंह डब्लू

Young Writer, सैयदराजा। अबकी बार सैयदराजा विधानसभा के किसानों के लिए धान को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर बेचना लोहे के चने चबाने जैसा होगा। जी हां! यह हवाहवाई बात नहीं, बल्कि वर्तमान में क्षेत्र में लगातार बंद हो रहे क्रय केंद्रों की स्थिति को देखकर किसानों द्वारा कही जा रही है। जिला प्रशासन ने खरीद के लिए खोले गए रनिया, ककरही, सुढ़ना में स्थापित क्रय केंद्रों का संचालन बुधवार से बंद कर दिया। वहीं जमुड़ा में स्थापित क्रय केंद्र को घोसवां में सिफ्ट करने की कार्यवाही प्रशासन की ओर से की गयी। ऐसे में इन क्रय केंद्रों पर टोकन लेकर नंबर लगाने वाले किसान अब अपनी उपज बेचने के लिए ना भटके इसके लिए सपा के राष्ट्रीय सचिव मनोज कुमार सिंह डब्लू (Manoj Kumar Singh W) धान की उपज को ट्रैक्टर-ट्राली पर लादकर कलेक्ट्रेट पहुंचे और जिलाधिकारी कार्यालय को घेरने का काम किया। अफसरों से बातचीत में बंद क्रय केंद्रों बहाल करने की मांग की। हालांकि जिला प्रशासन ने क्रय केंद्रों को पुनः खोलने में असमर्थता जाहिर की और बंद क्रय केंद्र पर नंबर लगाने वाले किसानों की समस्या के समाधान के लिए चौबीस घंटे का वक्त मांगा। उनके इस आंदोलन से जिला प्रशासन के हाफ-पांव फूल गए और जिलाधिकारी ने पूर्व विधायक मनोज सिंह डब्लू व डिप्टी आरएमओ को बुलाकर बातचीत की।

इसी सिलसिले में सपा के राष्ट्रीय सचिव मनोज कुमार सिंह डब्लू ने कहा कि 19 दिनों से जिम्मेदार अफसर आखिर किस नशे में क्रय केंद्रों का संचालन कर रहे थे और किस बुनियाद पर इन क्रय केंद्रों पर बंद करने की कार्यवाही हुई। जिला प्रशासन के इस कृत्य से संबंधित इलाके के सैकड़ों किसानों की मुश्किलें बढ़ गयी है इसके लिए कौन जिम्मेदार है और उसके विरूद्ध कौन सी कार्यवाही की जा रही है। ऐसे में डिप्टी आरएमओ ने क्रय केंद्रों को बंद करने ऊपर से आदेश होने की दलील दी तो सपा नेता मनोज सिंह आक्रोशित उठे और उन्हें क्रय केंद्रों के बंद होने संबंधित लिखित आदेश तलब किया कि तो डिप्टी आरएमओ समेत जिलाधिकारी निरुत्तर हो गए और उन्होंने किसानों की समस्या के समाधान के लिए 24 घंटे का वक्त मांगा। कहा कि बंद किए गए क्रय केंद्रों पर जिन किसानों की खरीद होना शेष है उनके उपज की बिक्री सुनिश्चित हो इसका पूरा प्रबंध किया जाएगा। डीएम से वार्ता करे लौटे मनोज सिंह डब्लू ने बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि सैयदराजा के किसानों को राजनीतिक षड्यंत्र का शिकार बनाया जा रहा हैं। जिला प्रशासन ने एक ही दिन में तीन क्रय केंद्रों को बंद करके किसानों की मुश्किलें बढ़ाने का काम किया है। कहा कि इस वक्त गेहूं की बोआई की सीजन अपने पीक पर है। ऐसे में यदि किसान धान की फसल को बेचने में उलझ गए तो उनकी गेहूं की खेती पिछड़ जाएगी। कहा कि किसानों का नुकसान हुआ तो जिला प्रशासन बड़े नुकसान को तैयार रहे। किसानों के हक पर किसी भी प्रकार का कुठाराघा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

भीषण हादसा: एक ही परिवार के तीन भाइयों समेत चार की मौत


Young Writer, चंदौली। बबुरी थाना क्षेत्र के भुड़कुड़ा के पास बुधवार की रात साढ़े 9 बजे के करीब पेड़ से टकराकर अनियंत्रित कार पास स्थित नहर में गिर गई। घटना में कार में सवार एक ही परिवार के तीन भाइयों के साथ चार लोगों की मौत हो गई। इसकी जानकारी होते ही एसपी समेत अन्य पुलिस अधिकारी जिला अस्पताल पहुंच गए। अधिकारियों ने घटना के संबंध में जानकारी हासिल की। पुलिस ने सभी शवों को सभी शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।


मिर्जापुर जिले के शेरवां जमालपुर निवासी सुक्खू यादव, बलिराम प्रजापति, गंगा सागर और विद्यासागर प्रजापति कार से बबुरी से चकिया की ओर जा रहे थे। तभी बबुरी थाना क्षेत्र के भुड़कुड़ा गांव के पास तेज रफ्तार कार सड़क किनारे पेड़ से टकराने के बाद नहर में पलट गई। आसपास के ग्रामीणों ने तत्काल ही घटना से बबुरी पुलिस को अवगत कराया। मौके पर पहुंची पुलिस ने सभी को नगर में गिरी कार से बाहर निकालकर जिला अस्पताल ले आयी। लेकिन चिकित्सकों ने चारों को मृत घोषित कर दिया। उधर घटना की जानकारी के बाद पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया। एसपी अंकुर अग्रवाल, एएसपी चिरंजीवी मुखर्जी, एएसपी नक्सल समेत अन्य अधिकारी भी जिला अस्पताल पहुंच गए। अधिकारियों ने घटना के बाबत जानकारी प्राप्त की। साथ ही मृतक के परिजनों को घटना के संबंध में जानकारी देते हुए आगे की कार्रवाई में जुट गई। इस संबंध में एडीशनल एसपी नक्सल सुखराम भारती ने बताया कि कार अनियंत्रित होने से भुगड़कुडा के पास नहर में चली गई। इससे मिर्जापुर जनपद के शेरवां जमालपुर निवासी चार युवकों की मौत हो गई है। परिजनों को सूचना देने के साथ कार्रवाई की जा रही है।

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