Young Writer, सैयदराजा। कांग्रेस पर्यवेक्षक शंकर स्वरूप सोमवार को जनपद दौरे पर थे। इस दौरान कांग्रेसजनों ने आब्जर्वर का माल्यार्पण कर स्वागत किया। उन्होंने सैयदराजा विधानसभा इकाई के कामकाज की समीक्षा की। विधानसभा चुनाव को लेकर चल रही तैयारियों का जायजा लिया और उनकी कमियों व खामियों को पटल पर रखा। आह्वान किया कि जो भी कमियां संगठन में नजर आ रही है उसे दूर कर मजबूती के साथ चुनाव लड़े। साथ ही सैयदराजा नगर में ब्लॉक कांग्रेस कार्यालय का उद्घाटन भी किया।
उन्होंने संगठन के कामकाज की समीक्षा की बूथ व न्याय पंचायत स्तर पर की। कांग्रेसजनों से कहा कि अब समर का बिगुल बज गया है और इस लड़ाई को हम तभी जीत सकते हैं जब आपस में ताल-मेल बनाकर कांग्रेस के पक्ष में माहौल बनाएं। कहा कि आप अपना कीमती समय व श्रम चुनाव तक कांग्रेस को समर्पित करें। भरोसा दिया कि कांग्रेस अपने कार्यकर्ताओं की ताकत और तरकीब से निश्चित विजय हासिल करेगी। जिलाध्यक्ष धर्मेंद्र तिवारी ने कहा कि संगठन पार्टी की रीढ़ होता है और जब वह मजबूत होगा तो पार्टी मजबूत होगी, तब विजय निश्चित रूप से मिलेगी। डा.नारायण मूर्ति ओझा ने कहा कि अबकी बार कांग्रेस ने आधी आबादी पर फोकस किया है। यही वजह है कि प्रियंका गांधी ने चुनाव की घोषणा के पूर्व ही लड़की हूं, लड़ सकती हूं का नारा बुलंद कर आधी आबादी को उचित राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने का मजबूत भरोसा दिया और टिकट बंटवारे में महिलाओं को टिकट देकर उस भरोसे को और मजबूत करने का काम किया है। बैठक में रजनीकांत पांडेय, सतीश बिन्द, सिराजुद्दीन भुट्टो, गीता सिंह आदि उपस्थित रहे। अध्यक्षता सतेन्द्र उपाध्याय तथा संचालन रामानंद यादव ने किया।
कार्यकर्ताओं के ताकत व तरकीब से जीतेगी कांग्रेस
धान खरीद न होने पर किसानों का मंडी समिति में हंगामा
Young Writer, चंदौली। माधोपुर स्थित मंडी परिसर में मार्केटिंग का क्रय केंद्र बंद होने का आरोप लगाते हुए सोमवार को किसानों ने हंगामा किया। साथ ही आरोप लगाया कि बिचौलियों के माध्यम से धान की खरीदारी की जा रही है‚ जिससे किसानों का बड़ा नुकसान हो रहा है। अंत में किसानों ने का एक प्रतिनिधिमंडल जिलाधिकारी से मिलकर मांगो संबंधित ज्ञापन सौंपा और तत्काल धान खरीदारी कराने की मांग की।
चेतावनी दी कि अगर ऐसा नहीं किया गया तो किसान आंदोलन करने के लिए बात होगी जिसकी सारी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी। इस दौरान किसान गोपाल सिंह ने कहा कि धान बिक्री करने के लिए किसान क्रय केंद्र व पहुंच रहे हैं लेकिन उन्हें बार-बार यही कहकर लौटा दिया जाता है कि अभी आप का टोकन नहीं आया है अभी आपकी धान की खरीदारी नहीं होगी,लेकिन वही बिचौलियों के माध्यम से खरीदारी की जा रही है। यह किसानों के साथ धोखा है। राम नारायण सिंह मंटू ने कहा कि खरीदारी ना होने के कारण 15 दिन से मंडी परिषद के मार्केटिंग क्रय केंद्र पर दौड़ रहा हूं, लेकिन अभी तक धान की खरीदारी हुई उसके बाद भी खरीदारी नहीं की गई जबकि किसान की पूरी खरीदारी करने के बाद ही दूसरे की खरीदारी होनी चाहिए। अंत में किसानों ने जिलाधिकारी से मिलकर अपनी समस्याओं को अवगत कराया और मांग किया कि तत्काल किसानों की खरीदारी की जाए। इस दौरान राहुल सिंह, राम भजन, सारनाथ, कृष्ण कुमार, अनिल कुमार मौर्या, राम आशीष, राकेश, रामाज्ञा गंगा आदि उपस्थित रहे।
भागीदारी परिवर्तन मोर्चा को सशक्त बनाने का आह्वान
संयुक्त दलों की बैठक में चुनाव को लेकर हुआ चिंतन-मंथन
Young Writer, चंदौली। मुगलसराय विधानसभा में भागीदारी परिवर्तन मोर्चा की बैठक सोमवार को एआईएमआईएम के पार्टी कार्यालय पर हुई, जिसमें भागीदारी परिवर्तन मोर्चा के सभी गठन दलों के सहयोगियों की संयुक्त बैठक में विधानसभा चुनाव को पूरी ताकत के साथ लड़ने और उसे जीत में तब्दील करने पर चिंतन-मंथन हुआ।
इस दौरान मंडल अध्यक्ष बाबूलाल लोहार की अध्यक्षता में जन अधिकार पार्टी के जिलाध्यक्ष सुनील कुमार मौर्य, एआईएमआईएम के जिलाध्यक्ष हाजी सेख इलियास, बीएमपी के जिलाध्यक्ष राजेंद्र यादव, भारतीय मानव समाज पार्टी के जिलाध्यक्ष निंब्बुल प्रसाद बिंद ने अपने-अपने विचारों को रखा और भागीदारी संकल्प मोर्चा को सशक्त बनाने का आह्वान किया। जिलाध्यक्ष सुनील कुमार मौर्य ने बताया कि भागीदारी परिवर्तन मोर्चा के बैनर तले किसी भी पार्टी का प्रत्याशी हो हम सभी को मिलकर उसे जीत दिलाने की दिशा में सार्थक प्रयास करना होगा। हम सभी को अपने शीर्ष नेताओं बाबू सिंह कुशवाहा, असदुद्दीन ओवैसी, वामन मेश्राम, केवट रामधनी बिंद को देखकर वोट के सपनों को साकार करना होगा। एआईएमआईएम के जिलाध्यक्ष हाजी से इलियास ने बताया कि मोर्चा चारों विधानसभाओं में बहुत ही मजबूत स्थिति में है और हम चारों विधानसभाओं को जीतेंगे बीएमपी के जिलाध्यक्ष राजेंद्र यादव ने बताया कि हम सभी लोगों को अच्छा सामंजस्य बनाकर मजबूती से लड़ना है भारतीय मानव समाज पार्टी के जिला अध्यक्ष निब्बुल प्रसाद बिंद ने बताया कि हम सभी लोगों को डोर-टू-डोर कैंपेन करके अपनी विचारधारा को लोगों तक पहुंचाने की जरूरत है। इस अवसर पर जिले के प्रमुख पदाधिकारी भोलानाथ विश्वकर्मा, अजय मौर्य, आबिद अली, जुनेद, अशरफ, मुमताज अहमद, रामबली सत्यार्थी, नामवर बागी, मोहन बिंद, चंद्रशेखर प्रधान, राम कुमार बिंद, मोहम्मद फारूक अंसारी, अवधेश मौर्य, रामललित मौर्य, सुजीत मौर्य एवं ओम प्रकाश मौर्य एवं प्रद्युम्न मौर्य आदि उपस्थित रह
ब्राह्मण समाज ने की संजीव बाल्यान के बर्खास्तगी की मांग
Young Writer, चंदौली। राष्ट्रीय परशुराम परिषद जिला इकाई का एक प्रतिनिधिमंडल ललित नारायण तिवारी के नेतृत्व में सोमवार को कलेक्ट्रेट पहुंचकर जिलाधिकारी संजीव सिंह को मांगो संबंधित ज्ञापन सौंपा। साथ ही राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन सौंपा। वहीं केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान को तत्काल मंत्रिमंडल से बर्खास्त करने की मांग की।
इस दौरान ललित नारायाण तिवारी ने कहा कि मोदी सरकार के केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान जिस प्रकार से ब्राह्मण समाज के ऊपर टिप्पणी की है वह अशोभनीय हैं। इसकी जितनी भी भर्त्सना की जाए कम है। बंसराज मिश्र ने कहा कि सनातन धर्म का ध्वज ब्राह्मण समाज रहा है ब्राह्मण राष्ट्र के विकास और सुरक्षा के मुद्दे पर भाजपा का समर्थन करता रहा किंतु मोदी सरकार के बड़बोले मंत्री मंच से ब्राह्मण समाज का अपमान कर रहे से किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अनिल मिश्रा ने कहा कि मेरठ में सार्वजनिक सभा में केंद्रीय मंत्री संजीव बाल्यान को ब्राह्मण समाज के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल करना दुर्भाग्यपूर्ण व निराशाजनक है। ऐसे व्यक्ति को तत्काल केंद्रीय मंत्रिमंडल से बर्खास्त कर देना चाहिए, जो ब्राह्मण समाज का सम्मान करना नहीं जानते। इस दौरान राजीव पांडेय राजू, कैलाश तिवारी, सुधांशु, मोहन ओझा, राजीव पांडेय, राम मनोहर तिवारी, सरोज पाठक आदि उपस्थित है।
बैंक लाकरधारियों का दावा, करोड़ों का माल हुआ पार!
पुलिस के रवैये से खफा दिखे इंडियन बैंक के लाकरधारी
Young Writer, चंदौली। इंडियन बैंक में चोरी की वारदात ने पुलिस के इकबाल पर सवाल खड़े कर दिए हैं। साथ ही सुरक्षा के लेकर पुलिस के बड़े-बड़े दावों को भी झूठा साबित करने का काम किया है। चोरी की सूचना के बाद चंदौली के लोग यह कहते हुए सुने गए कि एसपी चंदौली व जनपद पुलिस को यह बताना चाहिए कि आखिर जब उनके बंगले के बगल में बैंक में चोरी हो जारही है तो जनपद में आखिर ऐसी कौन-सी जगह है जो सुरक्षित है। आमजन का पुलिस से यह सवाल काफी हद तक जायज मालूम पड़ता है, क्योंकि इंडियन बैंक और पुलिस अधीक्षक आवास की दूरी बमुश्किल 50 मीटर होगी। जब चोर ऐसे सुरक्षित स्थान पर चोर सेंधमारी कर सकते हैं तो सुरक्षा के दावे पर सवाल लाजिमी है।
फिलहाल इस घटना से सबसे बड़ा नुकसान लाकरधारियों को हुआ है, जिनके दावे पर यकीन करें तो बैंक लाकरों में रखा करोड़ों का पार चोरों ने पार कर दिया है। इस मामले में पारदर्शिता की बजाय पर्दा डालने का काम किया जा रहा है। इंडियन बैंक लाकरधारी रेखा सिंह ने बताया कि बैंक में उनके लाकर में 20 से 22 लाख रुपये के आभूषण रखे गए थे। चोरी की सूचना के बाद जब यहां पहुंची तो अंदर जाने से पुलिसवालों ने रोक रखा है। अंदर लाकर की स्थिति क्या है? क्या चोरी हुआ और क्या बचा इसकी जानकारी नहीं है। चंदौली कोट निवासी लाकरधारी अश्वनी सिंह ने बताया कि उनके लाकर में पत्नी व माता के 20 से 25 लाख कीमत के आभूषण रखे गए। बताया कि मेरा लाकर 2011 से बैंक में है फिलहाल लाकर की क्या स्थिति है यह बता पाना मुश्किल है। पुलिस वाले बैंक शाखा में जाने रोक रहे हैं। लाकरधारी बृजेश चन्द्र श्रीवास्तव ने बताया कि मेरा व मेरी पुत्री बरखा रानी के नाम से संयुक्त लाकर ले रखा है। जिसमें 35 से 40 लाख रुपये के गहनों के साथ ही चांदी के बर्तन रखे गए थे। हम सभी लाकर की स्थिति जानने के लिए पिछले तीन घंटों से हलकान है, लेकिन कोई जानकारी नहीं दी जा रही है। पुलिस वालों का व्यवहार भी अनुचित रहा है। इनके व्यवहार से ऐसा लग रहा है मानो हम सभी ने लाकर लेकर बहुत बड़ा अपराध कर दिया है।
हौसला बुलंद चोरों ने इलाहाबाद बैंक में की सेंधमारी
चोरी का आंकलन करने में जुटे बैंक कर्मी व पुलिस महकमा
Young Writer, चंदौली। जिले में बदमाश बेखौफ और बेकाबू हैं। उनके दुस्साहस का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि रविवार की रात हौसला बुलंद चोरों ने पुलिस अधीक्षक आवास से इलाहाबाद बैंक (Indian Bank Chandauli) चंदौली को निशाना बनाया। बैंक शाखा भवन में सेंधमारी कर बड़ी चोरी की वारदात को अंजाम दिया है। बैंक के सूत्र इस चोरी की वारदात में बड़ी चोरी की आशंका जानकारी जाहिर कर रहे हैं‚ लेकिन पुलिस अभी कुछ भी कहने से बच रही है। घटना की जानकारी सोमवार को उस वक्त हुई जब बैंक कर्मी पहुंचे। जिसके बाद मौके से फरार हो गए। सूचना पर के बाद हरकती में आयी पुलिस टीमें जांच में जुटी है। जांच–पड़ताल और चोरों तक पहुंचने के लिए पुलिस महकमे की ओर से डाग स्क्वायड को भी मौके पर बुलाया गया। फिलहाल इस चोरी की घटना से जहां बैंक कर्मियों व बैंक के लाकर धारकों में हड़कंप की स्थिति है वहीं नगर क्षेत्र के व्यापारी व आम नागरिक डरे और सहमे हुए हैं।

दरअसल पूरा मामला सदर कोतवाली क्षेत्र अंतर्गत नगर के कप्तान आवास से सटे इलाहाबाद इंडेन का है। रविवार की रात हौसला बुलंद चोरों ने बैंक के पीछे की दीवार काटकर दाखिल हुए चोरी की घटना को अंजाम देकर फरार हो गए। घटना को जानकरी सुबह तब हुई जब बैंककर्मी सुबह पहुंचे। मौके का नजारा देख उनके होश उड़ हो गए। बैंक मैनजर के तत्काल घटना की जानकारी पुलिस को दी. बैंक में हुई बडी चोरी की वारदात से पुलिस महकमें में हड़कम्प मच गया. एसपी चन्दौली अंकुर अग्रवाल के निर्देश पर लोकल पुलिस के अलावा क्राइम ब्रांच और फोरेंसिक टीम पहुँचकर जांच में जुटी है। वहीं सीओ सदर और एडिशनल एसपी व बैंक के आलाधिकारी भी मौके पर पहुँचकर जांच में जुटे है। बताया जा रहा है इस घटना में चोरों ने पहले कैश लॉकर को तोड़ने का प्रयास किया लेकिन असफल रहे.जिसमें 44 लाख रुपये नकदी रखे गए थे. जिसके बाद चोरों ने ज्वेलरी के 39 लॉकर को तोड़कर गहने उड़ा दिए। बैंक स्थित ये सभी लॉकर प्राइवेट लोगों को एलाट थे। फिलहाल पुलिस व बैंक अधिकारी चोरी के आकलन में जुटे है। जानकारों की माने यह चोरी काफी बड़ी मानी जा रही की है।

विदित हो कि इसके पूर्व भी चोरों ने पुलिस अधीक्षक आवास से सटे बैंक आफ इंडिया बैंक के छत को काटकर अंदर घुसे थे। चोरी के इस प्रयास में कुछ नहीं मिला तो चोर बैंक शाखा में बोरियों में भरकर रखे गए सिक्कों को ही चुरा ले गए थे। फिलहाल उक्त बैंक से कितनी चोरी हुई उस वक्त भी न तो बैंक कर्मियों ने कुछ जानकारी दी और ना ही पुलिस महकमे की ओर से चोरी के बाबत कोई स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक की गयी है। फिलहाल इसे लोग पुलिस की नाकामी के रूप में देख रहे हैं।
बेटियों को न पढ़ा सकी और ना ही बचा सकी सरकारः मनोज डब्लू
Young Writer, सैयदराजा। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव व सैयदराजा के पूर्व विधायक मनोज सिंह डब्लू सोमवार को सैयदराजा स्थित महिला डिग्री कालेज के निरीक्षण पर रहे। इस दौरान उन्होंने भाजपा सरकार पर बड़ा आरोप लगाया। कहा कि भाजपा सरकार न तो बेटी बचा पाई और ना ही बेटी पढ़ा पाई। यह सरकार केवल पत्थर लगाने वाली सरकार है जो अपने नाम का पत्थर लगाने में महारथी है। कहा कि यदि सरकार बेटियों को पढ़ाने को लेकर फिक्रमंद होती तो सैयदराजा में बनकर तैयार महिला डिग्री कालेज को हैण्डओवर कर उसका संचालन कराती, लेकिन पांच साल में सरकार व भाजपा के विधायक महिला महाविद्यालय का संचालन कराने में नाकाम रहे।


उन्होंने कहा कि परिसर पूरी तरह से शैक्षणिक गतिविधियों के लिए तैयार है, लेकिन सरकार उसका संचालन करा पाने में नाकाम रही है। यहां विद्युत आपूर्ति के लिए ट्रांसफार्मर स्थापित है, लेकिन भाजपा विधायक सुशील सिंह पांच सालों में ट्रांसफार्मर से विद्युत तार का कनेक्शन नहीं करा पाए। यहां लगाए गए शिलापट्ट में बकायदा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का नाम अंकित, बतौर सांसद केंद्रीय मंत्री डा.महेंद्रनाथ पांडेय समेत क्षेत्रीय विधायक का नाम लिखा गया है। भाजपा सरकार ने इस महाविद्यालय को बनाने का श्रेय तो ले लिया, लेकिन आज भी यह महाविद्यालय आमजन को समर्पित नहीं हो पाया है। यही इनकी व उनके सरकार की उपलब्धि है। यही वजह है कि यह अपनी उपलब्धियों को गिनाने की बजाय इधर-उधर की बाते करते हैं। समाज को भ्रमिक करने का षड्यंत्र करते हैं। अंत में उन्होंने कहा कि मैंने अपनी बेटी को पढ़ाने के साथ-साथ उसे संरक्षित करने का दायित्व पूरी जिम्मेदारी के साथ निभाया है और जन समर्थन से सैयदराजा विधानसभा की बेटियों को पढ़ाने व उनके संरक्षण की जिम्मेदारी बखूबी निभाउंगा।
प्रभाकर कुमार की ‘कुँवर सर‘ पुस्तक लोकार्पित
सीनियर डीपीओ ने किया ‘कुँवर सर’ पुस्तक का लोकार्पण
Young Writer, मुगलसराय। राष्ट्रीय चेतना प्रकाशन द्वारा प्रकाशित प्रभाकर कुमार की पुस्तक ‘कुँवर सर: संस्मरण व एक अध्ययन‘ का लोकार्पण रविवार को पूर्व मध्य रेलवे इंटर कॉलेज में आयोजित एक समारोह में वरीय मंडल कार्मिक अधिकारी अजीत कुमार ने किया।
इस मौके पर उन्होंने कहा कि अपने पूर्वजों के उत्कृष्ट कृतियों को पुस्तक का रूप देना उन्हें जीवंत करना और अमरता प्रदान करने जैसा है। प्रभाकर कुमार ने इस काम को बेहतर ढंग से अंजाम दिया है। मुख्य वक्ता के रूप में आए काशी हिंदू विश्वविद्यालय पत्रकारिता विभाग के प्रोफेसर धीरेंद्र कुमार ने कहा कि कुँवर सर जैसा गुरु हर व्यक्ति के जीवन में होता है जिनसे प्रेरित होकर हम सब जीवन में आगे बढ़ते हैं; हम सबको थोड़ा अपने दिमाग पर जोर देकर अपने अपने जीवन के कुंवर सर को खोज निकालने की जरूरत है।
अध्यक्षता करते हुए डा. अनिल कुमार सिंह ने कहा कि छोटी सी उम्र में प्रभाकर ने एक नया इतिहास लिखा है। कुंवर सर का विशाल व्यक्तित्व था जिन्हें पुस्तक का रूप देकर उन्होंने अमरता प्रदान की है। पूर्व प्राचार्य डा. अनिल यादव ने कहा कि प्रभाकर कुमार की यह कृति दूसरों के लिए भी प्रेरणा बनेगी और दूसरे लोग भी अपने मन की स्मृतियों को शब्दों में उतारेंगे। केंद्रीय विद्यालय के प्राचार्य केके कुमार ने कहा कि कुँवर सर के व्यक्तित्व को उनके उत्तराधिकारी मेजर अमरेंद्र सिंह व प्रभाकर को देख कर लगाया जा सकता है।
राष्ट्रीय चेतना प्रकाशन के प्रकाशक डा. विनय कुमार वर्मा ने कहा कि किसी की भी स्मृतियों को पुस्तक का रूप देने के लिए सहर्ष तैयार है। उन्होंने कहा कि उन्हें खुशी होगी जब पर्दे के पीछे से कोई एक महान किरदार का जीवन वृत्त पुस्तक के रूप में सार्वजनिक होगा। इस मौके पर भारी संख्या में लोग उपस्थित थे। अतिथियों का स्वागत प्रो. सत्येंद्र कुमार सिंह, धन्यवाद ज्ञापन पूर्व मध्य रेलवे इंटर कॉलेज के प्राचार्य मेजर अमरेंद्र सिंह और संचालन पुस्तक के लेखक प्रभाकर कुमार ने किया।
हाथरस की बेटी को चंदौली के सपाइयों ने किया याद
Young Writer, चंदौली। सपा प्रमुख अखिलेश यादव के आह्वान पर 30 जनवरी यानी रविवार को जनपद के सपाइयों ने हाथरस की बेटी की स्मृति में दीप व मोमबत्ती जलाए। स्मृति दिवस पर हाथरस की दुर्भाग्यपूर्ण घटना में मृत बेटी को सपाइयों ने श्रद्धांजलि दी। साथ ही भाजपा सरकार को महिला व दलित विरोधी करार दिया। इस दरम्यान जनपद के तमाम दिग्गज नेताओं ने अपने आवास, प्रतिष्ठान व कार्यालयों पर दीप जलाया।
इसी कड़ी में समाजवादी युवजन सभा के जिला महासचिव दिलीप पासवान ने अपने आवास पर दलित समुदाय के युवाओं के साथ दीप जलाया और हाथरस की बेटी को श्रद्धांजलि दी। कहा कि भाजपा सरकार में दलितोें व महिलाओं के खिलाफ अपराध व अत्याचार बढ़ा है। हाथरस की घटना इतिहास के पन्नों में काली स्मृतियों के रूप में दर्ज हो गयी है, जो इस सरकार के जुल्म, जोर व ज्यादती की याद दिलाती रहेगी। हाथरस में दुराचार के बाद बेटी की हत्या कर दी गयी, लेकिन इसके बाद पुलिस-प्रशासनिक बर्बरता ने परिवार पर उत्पीड़न व अत्याचार किया। परिवार वालों को अपनी बेटी के अंतिम संस्कार से वंचित रखा गया है, जिसकी पीड़ा आज भी परिवार के अंदर कायम है। कहा कि ऐसी जुल्म व ज्यादती करने वाली सरकार को यूपी जनता करारा जवाब देने का काम करेगी। सपा के सरकार में आने के बाद पीड़ित परिवारों सम्मान व गौरव लौटाने का काम समाजवादी सरकार करेगी। इस अवसर पर सुमित कुमार, शिवा पासवान, अन्नू पासवान, अरविंद पासवान, रूप्पू, पंकज कुमार आदि उपस्थित रहे।


मूल्यों को मुखौटा बनाने का अपराध
Young Writer, चुनाव डेस्क। ललित निबंधकार डा. उमेश प्रसाद सिंह की कलम से
मूल्यों को मुखौटा बनाने का अपराध
लोकतंत्र केवल एक शासन प्रणाली नहीं है। यह केवल सामाजिक व्यवस्था का ढाँचा भर भी नहीं है। इसका प्राण तत्व तो वह उदात्त मानवीय मूल्य है, जो किसी भी तरह के शोषण और हर तरह की प्रवंचना से मनुष्यजाति को मुक्ति दिलाने के संकल्प से संबलित हट्टी-कट्टी दिखती हो मगर उसके प्राण में स्पन्दन की ध्वनि सुनाई नहीं पड़ती।
लोकतंत्र की महिमा के आख्यान किताबों में जितने आकर्षक मालूम पड़ते हैं, व्यावहारिक जीवन में वह कहीं दिखाई नहीं देता। जो चेहरा हमें अपनी आँखों से देखने को मिलता है, वह बड़ा ही विद्रूप कुत्सित और विक्षोभ पैदा करने वाला है। मैं बार-बार सोचता हूँ ऐसा क्यों है? ऐसा होना नहीं चाहिए मगर ऐसा है। जैसा नहीं होना चाहिए वैसा होना समय का कितना कठोर अभिशाप है।
हमारा लोकतंत्र प्रपंच और पाखण्ड को भेंट चढ़ गया है। वह इनमें डूब गया है। डूबी हुई चीज को ढूढ पाना बड़ा मुश्किल भरा काम होता है। हमारे समय में हमारी समाज व्यवस्था में लोकतंत्र के मौलिक स्वरूप की खोज बहुत ही जटिल है।
प्रपंच क्या है? असल में प्रपंच सत्य की छाया में असत्य को सत्य जैसा प्रतिभासित कराने के प्रबल उद्योग का संजाल है। वैसे मूलतः प्रपंच दर्शन का शब्द है मगर इसका अर्थ व्यवहार इतना व्यापक है कि इससे कोई भी अपरिचित नहीं है। हमारे मौजूदा तंत्र का लोक से आन्तरिक लगाव बिल्कुल नहीं रह गया है। उसके सुख-दुख से उसका नाता, उसमें उसकी भागीदारी नगण्य हो चुकी है। फिर भी तंत्र हमेशा जनता के सामने उसकी दुहाई देता रहता है। हमारे तन्त्र के लिए हमारा लोक केवल उसके स्वार्थ साधन का माध्यम भर रह गया है। लोक से चाहे जैसे भी हो बहुमत हासिल करके सत्ता पा लेना हमारे तंत्र यानी सारे राजनीतिक दलों का एकमात्र मकसद बन गया है।
जो नहीं है उसके होने के अनुभव कराने के उद्योग को पाखण्ड कहा जाता है। हमारी समूची राजनीति जो नहीं है, उसी का ढ़िढोरा पीटकर लोक को छलने के उद्योग में लिप्त है। प्रपंच का ऐसा विस्तार और पाखण्ड का ऐसा पुरजोर प्रदर्शन लोकतंत्र के व्यावहारिक स्वरूप का एक ऐसा कलंक बन गया है, जिससे लोकतंत्र की आत्मा कलुषित हो उठी है।
जब आत्मा कलुषित होगी तो काया भी कुंठित हो ही जायेगी। कलुषित आत्मा और कुंठित काया का हमारा लोकतंत्र हमारे समय में व्यापक लोक जीवन के अभ्युदय का निमित्त बन पाने में अयोग्य और असमर्थ साबित हो रहा है। यह भयानक दुर्भाग्य है, लोक का भी और तन्त्र का भी।
आजादी के बाद जब देश में लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था स्थापित हुई तो बहुत-बहुत उम्मीदों की सुगन्धि यहाँ की हवा में तैर रही थी। बहुत से सपने आँखों से बाहर निकल कर गिरते-उठते चलने का हौसला बाँध रहे थे। मगर क्या हुआ? आज क्या स्थिति है। जो है, सबके सामने। हाथ कंगन को आरसी क्या!
स्वतन्त्रता सबको मिलनी थी, नहीं मिली। हमारे महान लोकतंत्र में जनता के पास मतदान करने को छोड़कर और कौन-सी उल्लेखनीय स्वतन्त्रता हासिल है। स्वतन्त्रता पर असली स्वामित्व तो सचमुच में राजनीतिक दलों को मिला है। स्वतन्त्रता का असली स्वाद तो वे ही जानते हैं। राई को पर्वत और पर्वत को राई बनाने की सामर्थ्य उनके ही पास है। सुख और समृद्धि और प्रभुत्व के सारे सपने उनके ही आँगन के चाकर हैं। कहा जाता है कि जनता सरकार बनाने की शक्ति रखती है। उसे मतदान का अ सीम अधिकार मिला है। झूठ है, झूठ है, झूठ है। आज हमारे समय में जनता मतदान नहीं करती। कत्तई नहीं करती है। जनता से मत खरीद लिए जाते हैं। बड़ी ही मामूली कीमत पर खरीद लिए जाते हैं। भावनाओं को भड़काकर, उन्माद को फैलाकर, आश्वासनों के प्रलोभन से, जाति की सौगन्ध से, क्षेत्रीयता के सगेपन से जनता से मत हथिया लिए जाते हैं। अब तो मत लूटने की चीज बन गई है। लोकतन्त्र का जो भी लाभ है, राजनीतिक दलों को लाभ है। कभी किसी दल को, कभी किसी दल को। कभी किसी दल की कुण्डली में राजयोग चमक उठता है। कभी किसी दल की कुण्डली में। मगर राजयोग तो उन्हीं दलों की कुण्डलियों में चमकने को विवश है। हमारे लोकतंत्र की मूल संकल्पना में जो लोकशाही है, वह कभी व्यावहारिक धरातल पर जड़ पकड़ी ही नहीं। उसकी जड़ फूटने भी नहीं पाई कि दल-दल में बैठे सत्ता के सौदागरों ने उसकी जड़ खोदकर उसमें मट्ठा डाल दिया।
जिस बन्धुत्व के विकास के लिए, जिस समता के विस्तार के लिए, जिस समान अवसर की उपलब्धता के आयोजन के लिए हमारा लोकतंत्र अधिष्ठित हुआ था, वह कुछ भी नहीं हो सका। आज भाई-चारा हमारे समाज में कहीं नहीं है। हमारा समूचा समाज विखण्डित होकर बिखर गया है। जातियों में, सम्प्रदायों में, धर्मों में, स्त्री-पुरूष में बँटकर हमारी पारंपरिक सामाजिक संस्था बिल्कुल चरमरा कर भहरा उठी है। समान शिक्षा का सपना सिर्फ धूल-धूसरित ही नहीं हुआ बल्कि असमान शिक्षा का आदर्श ताल ठोंककर ललकार रहा है। शिक्षा और चिकित्सा आम आदमी के लिए नहीं रह गई है। फिर भी हम संविधान की दुहाई देते नहीं थकते हैं। संविधान की मूल प्रस्तावना की हत्या करके हमारी राजनीति संविधान की हिफाजत के लिए मर-मिटने का मिथ्या दंभ भरकर बिना पानी के बादल की तरह रोज-रोज गरजती है। सौहार्द्र कहीं नहीं है। वैमनस्य और विद्वेष हर कहीं है। लगाव, पारस्परिकता दिखाई नहीं दे रही है। बहुत-सी महत्तम चीजें जब लोकतंत्र नहीं था, तब भी हमें सहज सुलभ थीं। हमारे बीच थीं। हमारे जीवन में हँसते-गाते मौजूद थीं। अब लोकतंत्र है मगर मनुष्य जीवन की महत्तम चीजें नहीं है। अब वे स्मृति के संग्रहालय में संरक्षण के लिए गुहार लगाती अपनी अस्तित्व रक्षा के लिए आँसू बहा रही हैं। अगर हमारे बीच लोकतंत्र है, तो ऐसा क्यों है?
इधर हमारी प्रतिनिधि राजनीति इतिहास को ठीक कर रही है। वह अपनी सारी ऊर्जा को इतिहास को सुधारने में झोक रही है। वह इतिहास में संशोधन करके भारतीयता को गौरव प्रदान करने का दावा कर रही है। इतिहास ठीक करने की चीज है क्या है? अतीत में कुछ भी संशोधन, कुछ भी सुधार किया जा सकता है क्या? अतीत में कुछ भी जोड़ना, कुछ भी घटाना मानवीय क्षमता के बाहर की बात है। जो व्यतीत है, वह आदमी की पकड़ में नहीं है। जो पकड़ में ही नहीं है, उसके साथ कुछ भी किया जाना कैसे संभव है। जहाँ कुछ भी नहीं किया जा सकता, वहाँ बहुत कुछ करने का मंसूबा रखना असल में कुछ न करने जैसा ही परिणाम प्रदान करने वाला होता है।
वास्तव में मूल्यों को मुखौटा बनाने का अपराध बड़ा गंभीर अपराध है। इससे वर्तमान के बन्ध्या और भविष्य के अन्धा हो जाने का खतरा पैदा होता है। हमारी समूची राजनीति सारे लोकतांत्रिक मूल्यों को मुखौटा बनाकर सत्ता हथियाने का खेल पूरी तन्मयता से खेलती आ रही है। बहुमत पाकर सत्ता पर स्वामित्व जमाने के लिए मुस्लिम वोट बैंक, हिन्दू वोट बैंक, पिछड़ा वोट बैंक, दलित वोट बैंक, महिला वोट बैंक और भी कई तर के वोट बैंकों की कुत्सित परियोजनाओं का प्रवर्तन करके सामाजिक समरसता को विनष्ट कर सोशल इंजीनियरिंग जैसी कुशलता की निन्दनीय प्रतिष्ठा की गई। धार्मिक उन्माद को भड़काकर राष्ट्र में विद्वेषपूर्ण विभाजन की नींव रखी गई। राष्ट्रवाद के यशगान का डंका बजाकर राष्ट्र की थाती का निजीकरण किया जा रहा है। सारे पद, सारी प्रतिष्ठाएँ, सारे सम्मान खरीदने-बेचने की चीज बनाए जा रहे हैं। क्या यही हमारे लोकतंत्र की उपलब्धि है? यही लोकतन्त्र का गौरव है?
अगर हाँ, तो लज्जाजनक है। अगर नहीं तो अपराधपूर्ण है। यह अपराध किसका है? आने वाला समय पूछ रहा है। अँखुए फोड़कर सूख गई सपनों की फसल पूछ रही है, बोलो न! इस सबका उत्तरदायी कौन है। लोक है? इस लज्जा का भार किसके कन्धे पर रखा जाएगा?
धर्मनिरपेक्षता हमारे लोकतंत्र का मूल्य था। उसे मुखौटा बनाकर बहुमत हासिल करने के लिए एक सम्प्रदाय के तुष्टिकरण का जाल बुना गया। राष्ट्रवाद स्वाधीनता आन्दोलन के दौरान उन्मेषित एक महनीय लोकतन्त्र का महत मूल्य था। उसे मुखौटा बनाकर धर्म-निरपेक्षता के विलोम के रूप में प्रचारित किया गया। राष्ट्र हमारे लिए किसी काल्पनिक अवधारणा का विषय नहीं है। वह जीवित सत्ता है, जो समूचे राष्ट्र के निवासियों के फेफड़ों से साँस लेती है।
नहीं, मूल्यों को मुखौटा बनाने का अपराध आज चाहे भले राजनीतिक कौशल के नाम पर भुला दिया जाय मगर भविष्य जरूर इस अपराध के लिए मानवता के न्यायालय में अभियोग दाखिल करके जबाब माँगेगा। तब उसे बरगलाने की गुंजाइश नहीं बचेगी।











